इंदौर में सर्वश्रेष्ठ संरचित वित्त वकील

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Chandrawat & Partners Law Firm
इंदौर, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 16 लोग
English
चंद्रावत एवं पार्टनर्स भारत में एक प्रमुख पूर्ण सेवा विधिक फर्म है। यह फर्म तेजी से विकसित हो रही है और घरेलू तथा...
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1. इंदौर, भारत में संरचित वित्त कानून का संक्षिप्त अवलोकन

संरचित वित्त के तहत ऋणों, परिसंपत्तियों और ऋण-समर्थित सिक्योरिटीज का एक संरचित फॉर्मिंग ढांचा बनता है। यह संरचना विशेषकर SPV, ट्रस्ट और ट्रस्ट-टैगित परिसंपत्तियों के माध्यम से आयोजित होती है। इंदौर के बैंकों और वित्तीय संस्थाओं ने MSME और उपभोक्ता ऋण जैसी परिसंपत्तियों को securitisation के जरिए निवेशकों को पुर्नवित्त पोषण करने के लिए प्रयुक्त किया है।

सार बिंदु: संरचित वित्त में परिसंपत्ति-स्तर पर जोखिम हेक्सा-फ्लोर किया जाता है और निवेशकों को एक वैकल्पिक आय स्रोत प्रदान किया जाता है। यह प्रक्रिया वास्तविक बिक्री (true sale) और सुरक्षा-हस्तांतरण पर निर्भर होती है।

“This is to ensure that the securitisation is treated as true sale and the risks and rewards are transferred to investors.”

स्रोत: RBI Master Directions on Securitisation of Standard Assets, RBI वेबसाइट - https://www.rbi.org.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

इंदौर में संरचित वित्त से जुड़े मामलों में कानूनी सलाह आवश्यक रहती है ताकि लेन-देन की वैधता, वित्तीय समानता और निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। नीचे दिए गए 4-6 वास्तविक परिस्थिति उदाहरण हैं जो स्थानीय बाजार पर लागू होते हैं।

  • इंदौर के MSME पार्कों में receivables securitisation किया जा रहा हो और ट्रस्ट-आधारित संरचना के लिए सत्य बिक्री के प्रमाण चाहिए हों।
  • बैंकिंग संस्थान एकाधिक CSP और SPV में परिसंपत्तियों का ट्रांसफर कर रहे हों, जहां ट्रस्ट के नियम और रेटिंग आवश्यक हों।
  • निवेशक-आधारित PTCs या securitised debt instruments Indore में सूचीबद्ध होना चाहते हों, तो SEBI नियमों का अनुपालन जरूरी है।
  • कर्ज लेने वाले छोटे कारोबारों के लिए collateral free securitisation के अनुबंधों में जोखिम-हस्तांतरण स्पष्ट हो।
  • कंपनी अधिग्रहण या स्टार्ट-अप के लिए structured finance से प्राप्त फंडिंग में कर-शुल्क और ट्रस्ट-लॉजिक स्पष्ट चाहिए।
  • उत्पादन क्षेत्र के सप्लाई चेन में true sale और asset transfer के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जाँच करनी हो।

महत्वपूर्ण सलाह: इंदौर निवासी होने के कारण आप स्थानीय अदालतों और जिला कलेक्टर कार्यालय के अनुरूप प्रक्रियाओं से अवगत रहें; कानूनी सलाह से देय फीस और समयरेखा स्पष्ट होगी।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

इंदौर में संरचित वित्त को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों के नाम और भूमिका नीचे दी जा रही है।

  • SARFAESI एक्ट 2002 - बैंकों को डिफॉल्ट पर संपत्ति possession और sale के अधिकार देता है। यह स्थानीय क्रेडिट-रिकवरी प्रक्रियाओं का आधार है।
  • RBI Master Directions on Securitisation of Standard Assets - संरचित वित्त परिसंपत्तियों के प्रावधान, ट्रस्ट-आधारित संरचना और सत्य बिक्री के मानक बनाते हैं।
  • SEBI (Securitisation) Regulations और SEBI निर्देश - securitised debt instruments की जारीयत, सूचीबद्धता और ट्रस्टीय नीति को नियंत्रित करते हैं।

“Securitised debt instruments shall be listed on a recognised stock exchange and rated by a registered credit rating agency.”

स्रोत: SEBI Regulations और MD SSA, SEBI वेबसाइट - https://www.sebi.gov.in

“The transfer of financial assets to a securitisation trust shall be a true sale under applicable law.”

स्रोत: RBI Master Directions on Securitisation of Standard Assets, RBI वेबसाइट - https://www.rbi.org.in

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संरचित वित्त क्या है?

संरचित वित्त एक वित्तीय संरचना है जिसमें ऋण-प्राप्त परिसंपत्तियां एक ट्रस्ट या SPV में ट्रांसफर होती हैं और वहां से सिक्योरिटीज जारी होती हैं। यह निवेशकों को विविध जोखिम-प्रोफाइल देता है।

इंदौर में संरचित वित्त के लिए किन कानूनों की प्रमुख भूमिका है?

SARFAESI Act 2002, RBI Master Directions on Securitisation, और SEBI securitisation regulations प्रमुख हैं। ये सभी ट्रांजैक्शन की वैधता और निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

क्या संरचित वित्त में true sale अनिवार्य है?

हां, वास्तविक बिक्री की स्थिति से परिसंपत्तियाँ ट्रस्ट के अधिकार के भीतर आनी चाहिए ताकि सेरो के लिए बैंक के बकाया से परिसंपत्ति-आधारित जोखिम हट सके।

कौन-सी संस्थाएं संरचित वित्त में योगदान करती हैं?

ऑरिजिनेटर (कर्जदाता), SPV या securitisation trust, ट्रस्ट-टाइटलर, मॉर्टेजीयर, और रेटिंग एजेंसी प्रमुख भागीदार होते हैं।

इंदौर में SPV बनाने की प्रक्रिया कैसी होती है?

SPV के लिए शर्तें तय करना, ट्रस्ट में परिसंपत्ति ट्रांसफर का सत्यापन, और RBI SEBI मानकों के अनुरूप अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।

क्या securitisation के लिए रेटिंग अनिवार्य है?

हाँ, आम तौर पर संरचित वित्त परिसंपत्तियों के लिए क्रेडिट रेटिंग आवश्यक होती है ताकि निवेशकों को जोखिम पता चले।

क्या securitisation के बाद कर्जदाता का नियंत्रण घटेगा?

हाँ, परिसंपत्तियों का स्वामित्व और जोखिम अब ट्रस्ट के पास होता है, लेकिन originator के कुछ नियंत्रक अधिकार अनुबंध में हो सकते हैं।

Indore में कौन से दस्तावेज मुख्य होते हैं?

बाइ-लेगल एग्रीमेंट, ट्रांसफर डॉक्यूमेंट, ट्रस्ट डीड, रेटिंग रिपोर्ट और सिक्योरिटीज टेक-डाउन शामिल होते हैं।

क्या संरचित वित्त में कर-प्रभाव अलग हो सकता है?

हाँ, true sale से बैलेंस शीट से परिसंपत्तियाँ हट सकती हैं और GST/टैक्स-स्टेटस में बदलाव आ सकता है; विशेषज्ञ से पुष्टि करें।

क्या SECURITISATION से NPAs कम होते हैं?

यह नये फंडिंग सोर्स देता है और NPAs की समस्या के समाधान में सहायता कर सकता है, पर नियंत्रण और ट्रस्ट संरचना पर निर्भर है।

कौन से जोखिम आम तौर पर जुड़ते हैं?

रिस्क-हैंडलिंग, रेटिंग-ड्रिवन बाजार जोखिम, टर्मिनेशन और पेनल्टी क्लॉज प्रमुख जोखिम होते हैं।

क्या स्थानीय अदालतें संरचित वित्त से जुड़ी शिकायतें सुनती हैं?

हाँ, SARFAESI और IBC जैसे प्रावधानों के अंतर्गत प्रदेशीय अदालतें मामले निपटाती हैं और लागू प्रक्रिया तय करती हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

संरचित वित्त से संबंधित प्रमुख national स्तर के संसाधन नीचे दिए गए हैं।

  • Reserve Bank of India (RBI) - संरचित वित्त के नियम और MD SSA की आधिकारिक जानकारी।
  • SEBI - securitised debt instruments, listing और investor protection के नियम।
  • IndiaCode - SARFAESI Act 2002 और अन्य प्रावधानों की आधिकारिक कॉपी।

उद्धरण स्रोत लिंक: RBI - https://www.rbi.org.in, SEBI - https://www.sebi.gov.in, IndiaCode - https://www.indiacode.nic.in

6. अगले कदम

  1. अपने जरूरत के अनुसार एक अनुभवी संरचित वित्त वकील की पहचान करें।
  2. इंदौर-आधारित कानून फ़र्मों से पहले से पूछताछ करें कि उनकी संरचित वित्त विशेषज्ञता कितनी है।
  3. समस्या-स्थिति के अनुसार अनुमोदन-आर्गनाइज़ेशन (SPV) के बारे में स्पष्ट दस्तावेज तैयार करें।
  4. Tariff, फीस संरचना और समयरेखा स्पष्ट लिखित समझौते में लें।
  5. स्ट्रीक्चरिंग डाक्यूमेंट्स, ट्रस्ट-डीड और सुरक्षा-हस्तांतरण के प्रावधानों को जाँचें।
  6. रेफरेंस चेक से रेटिंग एजेंसी और निवेशकों की पृष्ठभूमि जाँच लें।
  7. स्थानीय अदालतों और RBI SEBI के भरोसेमंद मार्गदर्शन के अनुसार कदम उठाएं।

नोट: उपरोक्त जानकारी इंदौर, मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय संदर्भ को ध्यान में रखकर दी गई है। अधिकृत और अद्यतन कानूनी सलाह के लिए स्थानीय अधिवक्ता से संपर्क करें।

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