गया में सर्वश्रेष्ठ सतत वित्त वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. गया, भारत में सतत वित्त कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में सतत वित्त का उद्देश्य पर्यावरण, सामाजिक तथा शासन (ESG) मुद्दों को वित्तीय निर्णयों में समाहित करना है। इसका लक्ष्य पूंजी को ऐसी गतिविधियों की तरफ मोड़ना है जो सतत विकास से जुड़ी जोखिमों को कम करें।

मुख्य तौर पर यह क्षेत्र तीन आयामों पर केंद्रित है: पारदर्शी ESG disclosure, हरित वित्त (ग्रीन फाइनांस) के साधन, और जोखिम-आधारित फाइनेंशियल ढांचे का मजबूत बनना। भारत में हाल के वर्षों में इन चारों आयामों पर पुख्ता नियम बने हैं ताकि निवेशक सुरक्षित निर्णय ले सकें।

“BRSR is a mandatory reporting requirement for the top 1000 listed entities by market capitalization.”
Source: SEBI के आधिकारिक संचार का सारांश (विस्तार के लिए SEBI साइट देखें)
“Climate risk is a material financial risk.”
Source: RBI Financial Stability Report

सबसे प्रमुख परिवर्तन में SEBI का BRSR (Business Responsibility and Sustainability Report) का अनिवार्य होना शामिल है, ताकि ESG जोखिम स्पष्ट रूप से दिखें। RBI ने भी जलवायु-आधारित जोखिम की वित्तीय स्थिरता पर गहरी नज़र बनाई है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

यहाँ 4-6 वास्तविक परिदृश्य दिए जा रहे हैं जिनमें सतत वित्त कानूनी सहायता जरूरी हो सकती है। भारत के संदर्भ में मामलों को सरल भाषा में दर्शाया गया है।

  • कंपनी द्वारा ग्रीन बॉन्ड या सोशल बॉन्ड जारी करना- नियामक सूची, प्रकाशन और धन के उपयोग के दायरे स्पष्ट करने के लिए कानून की सहायता चाहिए। उदाहरण के तौर पर बड़े कॉरपोरेशन हरित ऋण जुटाते हैं ताकि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को वित्त दिया जा सके।
  • BRSR disclosure के पूर्ण अनुपालन की तैयारी- SEBI की नई अनिवार्यता के अनुसार ESG जोखिमों की रिपोर्टिंग स्पष्ट तरीके से करनी होती है; गलत पाए जाने पर दंड हो सकता है।
  • बैंकों और वित्त कंपनियों के लिए क्लाइमेट रिक्स मैनेजमेंट (CRM) ढांचे का निर्माण- RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार जोखिम-आधारित मॉडल बनाने पड़ते हैं।
  • ESG आधारित फंडिंग और फंड वर्गीकरण- यूनिट-इन्वेस्टमेंट और सेबी नियंत्रण के अंतर्गत ESG फंड्स की निगरानी और वर्गीकरण जरूरी है।
  • ESG-शर्तों वाले ऋण और क्रेडिट अनुबंध बनना- ऋण अनुबंधों में ESG covenants जोड़ना, आडिट-आवश्यकताएं स्पष्ट करना पड़ता है।
  • कंपनी-स्तर पर ESG due diligence और अधिग्रहण- विलय-सम्बन्धी अनुबंधों में ESG जोखिम और अवसरों का मूल्यांकन करना पड़ता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

भारत में सतत वित्त को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानून और नियम नीचे दिए गए हैं। ये संस्थागत अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।

  • SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015- ESG डिस्क्लोजर और BRSR से जुड़ी आवश्यकताएं इन नियमों के अंतर्गत आती हैं।
  • SEBI (Issue of Green Bonds) Guidelines- हरित बॉन्ड जारी करने के मानक और संपत्ति-उपयोग के नियम इन गाइडलाइनों के अनुसार होते हैं।
  • Reserve Bank of India (RBI) क्लाइमेट रिस्क-मैनेजमेंट गाइडलाइंस- बैंकों और वित्त संस्थाओं के लिए क्लाइमेट जोखिम-आधारित फ्रेमवर्क की व्यवस्था।
  • Companies Act, 2013- दस-बारह दायित्वों के साथ CSR गतिविधियों, गवर्नेंस और रिपोर्टिंग के मानक।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सतत वित्त क्या है?

सतत वित्त ESGye मुद्दों को पूंजी निर्णयों में शामिल करके दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता बढ़ाने की पहल है। यह निवेश, ऋण, एवं पूंजी बाजारों में पर्यावरणीय और सामाजिक परिणामों को मानक बनाता है।

BRSR क्या है और कौन लिखने के लिए बाध्य है?

BRSR एक ऐसी रिपोर्ट है जो ESG जोखिम और अवसरों की जानकारी देती है। यह Top 1000 listed entities द्वारा प्रकाशित होना चाहिए, जो बाजार पूंजीकरण के आधार पर चुने जाते हैं।

कौन-से संस्थान BRSR के लिए बाध्य हैं?

मुख्यतः SEBI के अंतर्गत लिस्टेड कंपनियां जो शीर्ष 1000 में आती हैं, उन्हें BRSR फाइल करनी होती है। कई शीर्ष कंपनियाँ अपने ESG जोखिमों को सार्वजनिक करती हैं।

ग्रीन बॉन्ड क्या होता है और इसका उद्देश्य क्या है?

ग्रीन बॉन्ड उन ऋण प्रतिभूतियों को कहते हैं जिन्हें केवल हरित परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य अक्षय ऊर्जा और किफायती ऊर्जा परियोजनाओं को वित्त देना है।

ESG जोखिम प्रबंधन कैसे किया जाता है?

ESG जोखिम प्रबंधन के लिए जोखिम-आधारित प्रक्रियाएं, डेटा अधिग्रहण, आंतरिक नियंत्रणों और बाहरी सहयोगी ऑडिट की जरूरत होती है।

भारत में सतत वित्त से जुड़े नियम कब बदले या बदले जा रहे हैं?

SEBI ने 2021-22 में BRSR को अनिवार्य किया, जिससे कंपनियों को ESG disclosures की दिशा में सुधार करना पड़ा। RBI ने CRM से जुड़ी दिशा-निर्देश जारी किए।

अनुपालन न करने पर क्या दंड हो सकता है?

अनुपालन में कमी पर SEBI और RBI के मानक अनुसार दंड, फाइनिंग और सार्वजनिक घोषणा जैसी कार्रवाइयाँ हो सकती हैं।

ESG फंडिंग कैसे शुरू करें?

ESG फंड शुरू करने के लिए SEBI के ESG फंड वर्गीकरण मानकों और disclosures का पालन आवश्यक है।

किस प्रकार के ऋण अनुबंध ESG covenants के साथ बनते हैं?

ESG covenants में नमूद किया जाता है कि ऋणधारक ESG नीति के अनुसार प्रदर्शन करे और रिपोर्टिंग दे।

क्या External Assurance ज़रूरी है?

कुछ मामलों में external assurance निश्चित रूप से लाभदायक रहता है ताकि रिपोर्टिंग पर विश्वास बना रहे।

भारत में sovereign green bonds के बारे में क्या जानकारी है?

भारत ने हरित ऋण के माध्यम से सरकारी परियोजनाओं को निधि देने के लिए sovereign green bonds जारी किए हैं।

कानूनी सलाहकार को कब और किस प्रकार जोड़ा जाए?

जिन मामलों में जटिल ब्रीफिंग, नियमों की गहराई, तथा फाइनेंशियल डाक्यूमेंटेशन हो, वहां सतत वित्त कानून के वकील की सहायता लें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • SEBI - सतत वित्त और BRSR से जुड़ी आधिकारिक जानकारी। https://www.sebi.gov.in
  • RBI - क्लाइमेट रिस्क और वित्तीय स्थिरता पर मार्गदर्शन। https://www.rbi.org.in
  • NITI Aayog - सतत वित्त रोडमैप और नीति सुझाव। https://niti.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय के लिए लागू सतत वित्त के कानून-पत्र का आकलन करें।
  2. एक अनुभवी सतत वित्त वकील या कानूनी सलाहकार टीम चुनें।
  3. ESG gap analysis कर दें ताकि अनुपालन-लक्ष्यों की स्पष्ट सूची बने।
  4. BRSR और अन्य disclosures के लिए एक्शन प्लान बनाएं।
  5. ग्रीन बॉन्ड, ग्रीन लेनिंग आदि के संभावित विकल्पों का मूल्यांकन करें।
  6. कंपनी गवर्नेंस और डेटा संग्रह प्रणाली को मजबूत करें।
  7. बाहरी एश्योरेंस के विकल्पों पर विचार करें और regulators के साथ समन्वय रखें।

नोट: नीचे दिए गए लिंक आधिकारिक स्रोत हैं। नियमों में परिवर्तन के लिए SEBI, RBI और GOI की आधिकारिक घोषणाओं को चेक करें।

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