बांकुरा में सर्वश्रेष्ठ ट्रस्ट वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
बांकुरा, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. बांकुरा, भारत में ट्रस्ट कानून के बारे में: [बांकुरा, भारत में ट्रस्ट कानून का संक्षिप्त अवलोकन]

बांकुरा जिले में ट्रस्ट कानून का प्रमुख आधार भारतीय ट्रस्ट कानून, 1882 है। यह निजी ट्रस्ट, धर्मिक ट्रस्ट और दान-आधारित ट्रस्टों पर लागू होता है। साथ ही विभागीय नियमों के अनुसार आयकर से लाभ पाने वाले ट्रस्ट भी अलग से अधिकारिक नियंत्रण में रहते हैं।

ट्रस्ट बनाने से पहले उद्देश्य, ट्रस्टी-अपॉइंटमेंट और संपत्ति के प्रबंधन की स्पष्ट योजना जरूरी है। राज्य-स्तर पर रजिस्ट्रेशन और आयकर-आधारित छूटें दोनों महत्त्वपूर्ण कारक हैं। Bankura निवासियों के लिए यह आवश्यक है कि वे 12A/12AA पंजीकरण, और यदि विदेशी चंदा आता है तो FCRA नियम भी समझें।

“The Indian Trusts Act, 1882 defines a trust as a fiduciary obligation binding the trustee to deal with property for the benefit of the beneficiary.”

Source: The Indian Trusts Act, 1882 (official text via Indian Code portals)

“Income from property held under a trust for charitable or religious purposes is exempt from tax under section 11 of the Income Tax Act, subject to compliance with conditions.”

Source: Income Tax Department, Charitable Trusts guidelines

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [ट्रस्ट कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। बांकुरा, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

  • उदाहरण-1: Bankura में एक वृद्धाश्रम ट्रस्ट ने 12A-12AA पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। उसे सही दस्तावेज, मौजूदा ट्रस्ट-डायरेक्टर्स और खाद्य-समितियों के नियम चाहिए। एक अधिवक्ता इन प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन देता है।
  • उदाहरण-2: एक पारिवारिक ट्रस्ट संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए ट्रस्ट-डायरेक्शन और ट्रस्टी-रिपोर्टिंग की जरूरत है। सही दस्तावेज और रिकॉर्ड-keeping आवश्यक होते हैं।
  • उदाहरण-3: Bankura के धार्मिक ट्रस्ट को दान स्वीकार करने और 80G-योग्यता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट नियमावली बनानी होती है। वकील से external audit और आईटी-आर्थिक अनुपालन की सलाह पर्याप्त होती है।
  • उदाहरण-4: विदेशी चंदा मिलने पर FCRA अनुपालन, बैंक-अकाउंट संरचना और वार्षिक रिपोर्टिंग जरूरी हो जाती है। स्थानीय ट्रस्टों में यह आम सवाल है।
  • उदाहरण-5: ट्रस्ट के मामलों में ट्रस्टी नियुक्ति, हटाने या पुनः-निर्वाचन के लिए नियम/संहिताएं स्पष्ट करनी होती हैं।
  • उदाहरण-6: Trustees के बीच विवाद में न्यायिक निस्तारण और संधि-निर्णय के लिए कानूनी सलाह आवश्यक होती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [बैंकुरा, भारत में ट्रस्ट को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

  • भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 - ट्रस्ट की परिभाषा, अधिकार-कर्तव्य और मर्यादित संपत्ति-व्यवस्था की केंद्रीय धारणाएं।
  • आयकर अधिनियम, 1961 - ट्रस्ट के आय-उत्पादन पर धारा 11-12-13 के तहत छूट और पंजीकरण की शर्तें।
  • FCRA अधिनियम, 2010 - विदेशी योगदान स्वीकारने वाले ट्रस्टों के लिए वित्तीय और रिकॉर्ड-कीपिंग नियम।

Source: Income Tax Department - Charitable Trusts; The Indian Trusts Act - official text; FCRA portal

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

ट्रस्ट क्या है?

ट्रस्ट एक ऐसी कानूनी व्यवस्था है जिसमें संपत्ति एक ट्रस्टी के हाथ में जाती है ताकि वह उसे लाभार्थी के लिए व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करे। यह संबंध fiduciary दायित्व पर आधारित होता है।

बैंकुरा में ट्रस्ट कैसे पंजीकृत करें?

सबसे पहले ट्रस्ट-डायरेक्टर्स, उद्देश्य, दस्तावेज इकट्ठे करें। फिर 12A-12AA पंजीकरण के लिए आयकर विभाग के फॉर्म-10A के साथ आवेदन दें।

ट्रस्ट को टैक्स में कौन-सी छूट मिलती है?

धार्मिक और दान-प्रधान ट्रस्ट धारा 11-12 के अंतर्गत आयकर से छूट के योग्य हो सकते हैं, जब उनके लाभ उन उद्देश्यों पर खर्च होते हैं।

12A-12AA पंजीकरण क्यों जरूरी है?

यह पंजीकरण ट्रस्ट को आयकर की छूट पाने की अनुमति देता है और दानदाताओं के लिए भी विश्वसनीयता बनाता है।

ट्रस्ट के लिए कौन-कौन से Trustees हो सकते हैं?

ट्रस्ट के संस्थापक द्वारा निर्धारित/जेनेरिक ट्रस्ट-डायरेक्टर होना संभव है। सामाजिक, पारिवारिक और पेशेवर योग्यता considerations देखी जाती हैं।

ट्रस्ट कैसे स्थापित किया जाए? क्या-क्या चाहिए?

उद्देश्य, प्राप्त संपत्ति, ट्रस्ट-डेरेशन, ट्रस्टी-नामावली, बही-खाता और लेखा-जोखा की तैयारी जरूरी है। एक वकील दस्तावेजDrafting में सहायता करेगा।

ट्रस्ट को खत्म कैसे किया जा सकता है?

ट्रस्ट की समाप्ति के नियम Trust deed में बताए जाते हैं। सामान्य तौर पर सभी लाभार्थियों की सहमति और अदालत की अनुमति आवश्यक हो सकती है।

ट्रस्ट के अनुपालनीय दायित्व क्या हैं?

ट्रस्टी को संपत्ति का प्रबंधन, उचित रिकॉर्डिंग और लाभार्थियों के हित की सुरक्षा करनी चाहिए। लेन-देन पारदर्शी होना चाहिए।

क्या ट्रस्ट विदेश से चंदा ले सकता है?

फॉरेन चंदे के लिए FCRA पंजीकरण अनिवार्य है और अनुपालन नियमों का कड़ाई से पालन करना पड़ता है।

ट्रस्ट के लिए लेखा-जोखा कैसे बनाना चाहिए?

ट्रस्ट-खाते में आय, व्यय, दान और अनुदान का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना होता है। वार्षिक आडिट और आयकर-रिटर्न दाखिल करना ज़रूरी है।

क्या ट्रस्ट charity status बनवाये बिना भी कर सकता है?

हां, पर आयकर छूट का लाभ नहीं मिलेगा। अच्छी योजना के लिए 12A/12AA पंजीकरण आवश्यक होता है।

ट्रस्ट के दायित्वों में सरकार के साथ फाइलिंग शामिल है?

हाँ, आयकर विभाग को वार्षिक स्थिति-रिपोर्ट, ट्रस्ट-फॉर्म और रिटर्न दाखिल करने होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन:

6. अगले कदम:

  1. अपना ट्रस्ट-उद्देश्य स्पष्ट लिखें और दस्तावेज संकलित करें।
  2. Bankura-के स्थानीय रिकॉर्ड और संपत्ति का सत्यापन करें।
  3. ट्रस्ट-डायरेक्टर के पंजीकरण, पहचान और पते के प्रमाण जुटाएं।
  4. एक अनुभवी ट्रस्ट-वकील से प्रारम्भिक कानूनी सलाह लें।
  5. 12A-12AA और 80G जैसी आयकर-छूट के लिए आवेदन तैयार करें।
  6. FCRA के तहत विदेशी चंदा यदि चाहिए, तो आवश्यक पंजीकरण और बैंक-प्रत्यायन जांचें।
  7. अपने ट्रस्ट के लिए लेखा-जोखा प्रणाली सेट करें और पहली आडिट पूरी करें।

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