नया दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ वसीयत और वसीयतपत्र वकील

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KG Law Offices
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
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केजी लॉ ऑफ़िसेज़ (KGLO), जिसका नेतृत्व अधिवक्ता कुणाल गोसाईं करते हैं, नई दिल्ली, भारत में स्थित एक प्रतिष्ठित बुटीक...
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भारत वसीयत और वसीयतपत्र वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 1 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें वसीयत और वसीयतपत्र के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

संपत्ति का विभाजन
वसीयत और वसीयतपत्र परिवार वसीयत अनुमोदन
कक्षा 2 के वारिस (पिता) को प्रॉपर्टी की बिक्री अनुबंध में परिवार के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है क्योंकि पहले पंजीकरण के समय वह उपस्थित नहीं थे। विभाजन के दौरान, क्या वह कक्षा 1 - पत्नी (स्वर्गीय), 3 पुत्रों के संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति में अपना...
वकील का उत्तर Remedium Reel Attorneys द्वारा

यदि वसीयत नहीं है, तो उत्तराधिकारी को ट्रांसप्रोवे रजिस्ट्री में प्रशासन पत्र प्राप्त करने के लिए 2 या 3 व्यक्तियों को नियुक्त करना होता है जो उन्हें अन्य उत्तराधिकारियों की इच्छाओं के अनुरूप संपत्ति का प्रशासन करने का अधिकार देता...

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1 उत्तर

1. नया दिल्ली, भारत में वसीयत और वसीयतपत्र कानून का संक्षिप्त अवलोकन

वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें व्यक्ति अपने निधन के बाद अपनी संपत्ति किसे दे रहा है, यह निर्धारित करता है। दिल्ली में वसीयत और वसीयतपत्र कानून मुख्यतः भारतीय व स्मृत कानून के ढांचे में चलता है। स्थानीय प्रक्रिया के अनुसार वसीयत की वैधता और संपत्ति के हस्तांतरण के लिए अदालत द्वारा प्रोबेट की आवश्यकता हो सकती है।

The Indian Succession Act, 1925 राज्य-विशिष्ट कानूनों के साथ एक सामान्य ढांचा देता है और वसीयत की वैधता के लिए स्पष्ट फॉर्मालिटीज बताता है-“A will shall be in writing, signed by the testator, and attested by at least two witnesses.”

दिल्ली में वसीयत के पूर्ण प्रभावी होने के लिए testamentary instrument का सही तरीका और प्रामाणिकता आवश्यक है। वसीयत कॉपी, लेखा और संपत्ति के सही विवरण से प्रकाशित होनी चाहिए ताकि संपत्ति का विभाजन स्पष्ट रहेगा। साथ ही, वसीयत में बदलाव के लिए एक कॉडिसिल या नया वसीयत भी बनाया जा सकता है।

Probate of a Will is the judicial process by which the court validates the will and orders the assets to be transferred to the executors.

दिल्ली के निवासियों के लिए व्यावहारिक सुझाव यह है कि किसी भी बड़े संपत्ति-निर्देशन से पहले वसीयत तैयार करवाएं, ताकि निधन के बाद रोक-टोक कम हो और परिवार के बीच विवाद न उठे। वसीयत को रिकॉर्ड-लॉक करने के लिए पंजीकरण कराना वांछित हो सकता है, जबकि यह अनिवार्य नहीं है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य हैं जिन्हें देखते हुए कानूनी सहायता जरूरी हो सकती है; दिल्ली-आधारित उदाहरण शामिल हैं।

  • दिल्ली के बड़े आस्तियों के साथ संयुक्त मालिकाना: एक व्यक्ति के पास दिल्ली-आधारित भू-सम्पत्ति या व्यवसाय है और वह तय करना चाहता है कि संपत्ति कैसे बंटी जाएगी; कानूनी सलाह से निष्पादन स्पष्ट किया जा सकता है।
  • वधू-या पति-विराम के बाद संपत्ति का उचित वितरण: दंपति के बीच द्वितीयक शेयरिंग और वर्तमान कानून के अनुरूप हक तय करने के लिए वकील की आवश्यकता होती है।
  • नाबालिग बच्चे या अन्य निर्भर लोग हैं: संरक्षित नाबालिग लाभार्थियों के लिए ट्रस्ट-आधारित योजना या संरक्षित वारिस सुनिश्चित करना जरूरी होता है।
  • NRIs या दिल्ली में स्थित विदेशी संपत्ति: विदेशी संपत्ति के लिए स्थानीय और विदेशी कानूनों का समन्वय कर वैध वसीयत बनाना आवश्यक है।
  • वसीयत-विवाद या प्रतिवादी दावों के सामने आना: उत्तराधिकार के दावों, प्रताड़ना-या धमकी के आरोपों के कारण वकील की तत्काल सहायता चाहिए।
  • प्रोबेट और एसेट-एडमिन्स्ट्रेशन की प्रक्रिया: दिल्ली में प्रोबेट प्राप्त करने के लिए उचित दाखिले, नोटिस और अदालत-आदेशों की तैयारी जरूरी है।

नोट करें कि दिल्ली में कॉम्प्लेक्स संपत्ति संरचना, बहु-क्रय-युक्त संपत्ति, या संपत्ति के विभिन्न परिसरों के मामले में विशेषज्ञ वकील की सहायता से ही सही लिखित-वसीयत बनना बेहतर रहता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

नीचे 2-3 विशिष्ट कानूनों के नाम और उनका Delhi-परिसीप्शन में योगदान दिया गया है:

  • The Indian Succession Act, 1925 - वसीयत, कॉडिसिल, विरासत-निर्णय और प्रोबेट के लिए मुख्य केंद्रीय कानून है; दिल्ली न्यायालय इसAct के तहत मामलों की सुनवाई करता है।
  • The Hindu Succession Act, 1956 - हिन्दू समुदाय के भीतर उत्तराधिकार के नियमों में सुधार और संरक्षण देता है, खासकर भावी कॉपार्सेन्स के अधिकारों के संदर्भ में; वसीयत के साथ-साथ intestate-योजना में असर डालता है।
  • Registration Act, 1908 - वसीयत की पंजीकरणवा अंश को वैधानिकता एवं साक्ष्यों के लिए आवश्यक हो सकता है; पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर विवाद की स्थिति में सहायक हो सकता है।

इन कानूनों के अलावा दिल्ली उच्च न्यायालय और जिला-शासन-स्तर पर प्रोबेट/एडमिनिस्ट्रेशन के व्यवहारिक नियम अलग हो सकते हैं; दिल्ली में प्रोबेट के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष दायरगी आवश्यक हो सकती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वसीयत भारत में मान्य है?

हाँ, यदि वह The Indian Succession Act 1925 के अनुक्रियात्मक फॉर्मालिटीज के अनुसार लिखित, हस्ताक्षरित और दो गवाहों द्वारा सत्यापित है तो मान्य होती है।

वसीयत बनाने के लिए कौन-सी उम्र और मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है?

Testator को कानूनी रूप से स्वस्थ दिमाग वाला माना जाना चाहिए; मानसिक अस्वस्थता या दबाव के बिना बनना चाहिए।

क्या वसीयत पंजीकृत कराई जा सकती है?

हाँ; पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर पंजीकृत वसीयत अधिक सुरक्षित प्रमाण माना जाता है और विवादों में मजबूत स्थिति देता है।

दिल्ली में वसीयत के लिए प्रोबेट कैसे मिलती है?

वसीयत के सत्यापन के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय या संबंधित जिला न्यायालय के समक्ष प्रोबेट का आवेदन देना पड़ सकता है; अदालत Will की वैधता की पुष्टि कर संपत्ति के हस्तांतरण के आदेश जारी करती है।

क्या कॉडिसिल से पहले की सारी बातें बदली जा सकती हैं?

हाँ, कॉडिसिल के जरिए मूल Will में परिवर्तन किया जा सकता है; पर कॉडिसिल भी Will के समान फॉर्मालिटीज के साथ होना चाहिए।

अगर मैं बहु-स्तरित संपत्ति रखता हूँ तो क्या योजना बनानी चाहिए?

बाहरी संपत्तियाँ, दिल्ली-आधारित संपत्ति, और कंपनी शेरों के वितरण के लिए स्पष्ट, विशेष निर्देश जरूरी होते हैं; एक वकील इन सभी को एक साथ देख कर वैध Will बनवाने में मदद करेगा।

क्या वसीयत में दिक्कत आए तो कैसे बचा जा सकता है?

वसीयत में स्पष्ट चयनित उत्तराधिकारी, संपत्ति का सूचीबद्ध विवरण और वास्तविक गवाहों के साथ उचित निष्कर्ष दस्तावेज बना कर विवाद कम किया जा सकता है।

क्या बच्चों के लिए सुरक्षित योजना जरूरी है?

हां; नाबालिगों के लिए ट्रस्ट-आधारित योजना या संरक्षित अभिकल्पना बनाना व्यवहारिक रहता है ताकि बच्चा के माता-पिता के बाद भी सही वितरण हो सके।

क्या हिन्दू समाज में बेटी के अधिकार प्रभाव डालते हैं?

2005 के Hindu Succession Amendment Act के कारण बेटी के कॉपार्सेन्स अधिकार बराबर हो गए हैं, जिससे वसीयत बनाते समय उनका पक्ष सुरक्षित रहता है।

क्या विदेश संपत्ति दिल्ली में भी शामिल होती है?

हाँ; दिल्ली-आधारित वसीयत के साथ विदेशी संपत्ति की योजना भी आवश्यक हो सकती है; ऐसी स्थिति में स्थानीय और विदेशी कानून का समन्वय जरूरी है।

वसीयत बनवाने में कितने समय लगते हैं?

आमतौर पर 3-9 महीने से कई साल तक लग सकता है, मामलों की जटिलता पर निर्भर है, विशेषकर प्रोबेट के लिए दाखिले की प्रक्रिया में समय लगता है।

क्या डिजिटल या ई-वसीयत मान्य मानी जाएगी?

भारत में ई-वसीयत की मान्यता सीमित है; अधिकृत प्रमाण और फॉर्मालिटीज के साथ लिखित वसीयत ही सामान्यतः भरोसेमंद मानी जाती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन: https://nalsa.gov.in
  • Bar Council of India - वकील खोजने और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी: https://barcouncilofindia.nic.in
  • Delhi High Court - प्रोबेट और वसीयत से संबंधित आधिकारिक मार्गदर्शन: https://delhihighcourt.nic.in

6. अगले कदम

  1. आपके उद्देश्य की स्पष्ट पहचान करें-वसीयत, ट्रस्ट या 혼합 योजना।
  2. दिल्ली में सभी संपत्ति के दस्तावेज़ एकत्र करें-मकान, जमीन, बैंक खाता, साझा-सम्पत्ति, व्यवसाय आदि।
  3. कानूनी सहायता के लिए एक अनुभवी सॉलिसिटर/एड्वोकेट चुनें-वसीयत, कॉडिसिल, प्रोबेट के अनुभव की जाँच करें।
  4. उचित Executor और Alternate Executor तय करें; उनके लिए स्पष्ट निर्देश दें।
  5. Will को स्पष्ट भाषा में लिखवाएं और कम से कम दो गवाहों की उपस्थिति में हस्ताक्षर करवाएं।
  6. यदि चाहें तो Will का पंजीकरण कराएं ताकि विवाद कम हों और प्रमाणिकता बढ़े।
  7. छोटे या जटिल मामलों के लिए प्रोबेट-प्रक्रिया के लिए आवेदन की तैयारी करें और अदालत से निर्देश लें।

सूचनात्मक उद्धरण स्रोत: The Indian Succession Act, 1925 और The Hindu Succession Act, 1956 के आधिकारिक अंश नीचे दिए गए पते पर देखें।

The Indian Succession Act, 1925 - “A will shall be in writing, signed by the testator, and attested by at least two witnesses.”
The Hindu Succession Act, 1956 - “Daughters shall have equal rights in the coparcenary property.”

आर्काइव और नियम के लिए आधिकारिक साइटें: https://legislative.gov.in/acts, https://nalsa.gov.in, https://barcouncilofindia.nic.in, https://delhihighcourt.nic.in.

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अस्वीकरण:

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