नया दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ अधिग्रहण / उत्तोलन वित्त वकील

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Oberoi Law Chambers
नया दिल्ली, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
INDUSLAW Bengaluru
नया दिल्ली, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
हमारे बारे मेंINDUSLAW एक भारतीय लॉ फर्म है जो ग्राहकों को उनके लेनदेन संबंधी लक्ष्यों, व्यावसायिक रणनीतियों और...
HSA Advocates - Law Firm
नया दिल्ली, भारत

2003 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
अवलोकनहम एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म हैं जो परिणाम-उन्मुख समाधान तैयार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए ज्ञान, अनुभव...
DSK Legal
नया दिल्ली, भारत

2001 में स्थापित
उनकी टीम में 500 लोग
Hindi
English
प्रोफाइलDSK लीगल की स्थापना 2001 में हुई थी और तब से इसने अपनी ईमानदारी और मूल्य-आधारित सक्रिय, व्यावहारिक और...
S&A Law Offices
नया दिल्ली, भारत

2002 में स्थापित
English
एस एंड ए लॉ ऑफिसेज भारत में एक पूर्ण-सेवा लॉ फर्म है, जो विविध अभ्यास क्षेत्रों और उद्योगों में व्यापक कानूनी...
Bharucha & Partners
नया दिल्ली, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
2008 में पेशेवर नैतिकता और उत्कृष्टता के अपरिवर्तनीय सिद्धांतों पर स्थापित, भरूचा एंड पार्टनर्स एक पूर्ण-सेवा...
Corporate Legal Partners
नया दिल्ली, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
के बारे मेंहम भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों की आवश्यकताओं के प्रति लचीले, ग्रहणशील और संवेदनशील हैं। हमारे...
Shardul Amarchand Mangaldas & Co
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
उनकी टीम में 1,000 लोग
Hindi
English
हम कौन हैंShardul Amarchand Mangaldas & Co, भारत की प्रमुख विधिक फर्मों में से एक, एक सदियों के उत्कृष्टता के निर्माण पर आधारित...
Siddharth Jain & Co
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
English
सिद्धार्थ जैन एंड को, भारत स्थित एक विशिष्ट विधिक फ़र्म, व्यापक अभ्यास क्षेत्रों में समग्र विधिक सेवाएँ प्रदान...
जैसा कि देखा गया

1. नया दिल्ली, भारत में अधिग्रहण / उत्तोलन वित्त कानून के बारे में

दिल्ली में अधिग्रहण और उत्तोलन वित्त का ढांचा प्रधानमंत्री मुद्रा से जुड़े नियमों के साथ संचालित होता है। सार्वजनिक कंपनियों के लिए सेबी के कानून एवं नियम अनिवार्य होते हैं, जबकि निजी इकाइयों के लिए फ्रेमवर्क संस्थागत बंधनों पर निर्भर रहता है। लोन-आधारित संरचनाओं में बैंकों, एनबीएफसी और निजी इकाई फंडों द्वारा दी जाने वाली देनदारियाँ प्रमुख होती हैं।

उत्तोलन-वित्त संरचना में सामान्य तौर पर SPV बनता है,Shares-pledge, security interests और covenants के साथ lenders से debt जुटाई जाती है। दिल्ली-आधारित वकीलों का यह क्लियर काम है कि वे उचित due diligence, regulators की मंजूरी और टेक्निकल structuring सुनिश्चित करें।

नवीन परिवर्तन जनवरी 2023 के बाद SEBI, RBI और IBC नियमों में संशोधनों ने open offer के नियंत्रण, end-use restrictions और क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन के अनुपालन को और सख्त किया है।

SEBI के अनुसार सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों की सुरक्षा open offer से सुनिश्चित होती है.
RBI की ECB दिशानिर्देश देनदारी‑आधारित संरचना के लिए end-use नियंत्रण का समर्थन करते हैं.

उद्धरण स्रोत SEBI: https://www.sebi.gov.in/legal/regulations.html#takeover-regulations और RBI: https://www.rbi.org.in/emergency-directions.html; MCA: https://www.mca.gov.in/; IBBI: https://www.ibbi.gov.in/

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए जा रहे हैं जिनमें दिल्ली-आधारित कानून‑सल्लाह आवश्यक होता है। इन परिदृश्यों में वास्तविक घटनाओं से प्रेरित कारण और कानूनी आवश्यकताएँ सम्मिलित हैं।

  • पूर्व-खरीद due diligence - दिल्ली-स्थित target कंपनी की वित्तीय स्थिति, देनदारी, सेबी disclosure और open offer आयाम की जाँच के लिए अनुभवी corporate वकील आवश्यक होगा।
  • open offer और सेबी अनुमोदन - 25% या उससे अधिक के अधिग्रहण पर सार्वजनिक शेयरधारकों को ऑफर देना अनिवार्य है; वर्ष 2011 के SEBI नियमों के अनुसार इसे सही ढंग से समझना आवश्यक है।
  • क्रॉस-बॉर्डर/FDI संबंधित मामलों - विदेश निवेश, FEMA नियम, विदेशी स्वामित्व के अनुपालन के लिए केंद्रीय कानून‑विशेषज्ञता जरूरी है; दिल्ली में RBI और सेबी की संयुक्त निगरानी है।
  • विकल्प संरचना और सुरक्षा अधिकार - SPV संरचना, शेयर pledge, covenants और security package के drafting में अनुभवी advokats की जरूरत रहती है ताकि lenders के हित सुरक्षित हों।
  • IBC/नियामक विवाद‑प्रक्रिया - दिल्ली‑आधारित target पर ऋण-संकट हो तो IBC और NCLT Delhi के भीतर insolvency proceedings, liquidation या debt resolution प्रक्रियाओं का प्रबंधन एक अनुभवी वकील से ही बेहतर होगा।
  • तैयारी और दस्तावेज - शेयर खरीद समझौते, रोजगार‑समझौते, स्टाम्प‑ड्यूटी और कर‑अनुरूप agreements की तैयारी में सक्षम वकील की भूमिका अनिवार्य है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

नए दिल्ली-भारत में अधिग्रहण और उत्तोलन वित्त को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं:

  • SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011 - सार्वजनिक कंपनियों के acquisition, open offer और शेयरधारकों के अधिकार की सुरक्षा के लिए मुख्य ढांचा।
  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - देनदार के देनदारी समाधान, ऋण पुनर्गठन और कंपनी दिवाला मामलों के लिए केंद्रीय ढांचा।
  • Foreign Exchange Management Act, 1999 - क्रॉस-बॉर्डर निवेश, विदेशी निवेश के नियंत्रण, end-use और repatriation के नियम।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न?

क्या अधिग्रहण/उत्तोलन वित्त क्या है?

यह ऐसी वित्तीय संरचना है जिसमें खरीदार अधिग्रहण के लिए debt का बड़े हिस्से का उपयोग करता है, ताकि इकाई की नियंत्रण क्षमता प्राप्त हो सके और खुद की पूंजी कम रखी जा सके.

प्रश्न?

दिल्ली में इसके लिए किन कानूनों का अनुपालन आवश्यक है?

SEBI SAST Regulations, IBC, FEMA के साथ-साथ Companies Act 2013 के आरेख और RBI की ECB दिशानिर्देशों का अनुपालन जरूरी है।

प्रश्न?

open offer कब अनिवार्य हो जाता है?

जब किसी acquirer द्वारा target के शेयरों की हिस्सेदारी 25% या अधिक खरीद ली जाती है, तब open offer अनिवार्य होता है।

प्रश्न?

ECB से जुड़ी सीमाओं के बारे में क्या जानना चाहिए?

ECB से प्राप्त धन का end-use प्रतिबन्धित हो सकता है और RBI के master directions के अनुसार नियंत्रित किया जाता है।

प्रश्न?

दिल्ली‑आधारित target के लिए IBC प्रक्रिया कब उपयोगी होती है?

जब debt‑service की अक्षमता हो या तेज debt resolution की आवश्यकता हो, तब IBC के तहत insolvency resolution proceedings चल सकती हैं।

प्रश्न?

कौन सी दस्तावेजी तैयारी सबसे महत्त्वपूर्ण हैं?

Share Purchase Agreement, Shareholder Agreement, term sheets, debt facilities agreements, security documents और stamping से जुड़ी सामग्री प्रमुख हैं।

प्रश्न?

दिल्ली में regulatory approvals कैसे प्राप्त करें?

SEBI के open offer और listing‑related approvals, MCA‑ROC compliance, RBI‑ECB / FEMA approvals की व्यवस्था बनाने की जरूरत होगी।

प्रश्न?

कानूनी तैयारी के समय कितना समय लग सकता है?

कानूनी due diligence, regulator approvals और lender negotiations के आधार पर सामान्यतः 3‑9 महीनों का समय लग सकता है।

प्रश्न?

नوشिस्के कानून परिवर्तन कब तक लागू होते हैं?

भारत में नियम परिवर्तन साल‑दर‑साल होते हैं; SEBI, RBI और IBBI की नई गाइडलाइंस घटनाक्रम पर निर्भर करती हैं।

प्रश्न?

दिल्ली निवासी दल के लिए व्यावहारिक कदम कौन‑से हैं?

स्थानीय सलाहकार के साथ regulatory mapping बनाएँ, open offer की तैयारी करें, end-use‑restricted ECB के लिए lender‑consent सुनिश्चित करें।

प्रश्न?

कानूनी शुल्क कितने होते हैं?

घनत्व, जटिलता और डील के आकार के अनुसार 0.5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक legal fees हो सकती हैं, stamping और registration शुल्क भी लग सकता है।

प्रश्न?

दिल्ली‑आधारित कंपनियों के लिए कौन सी जोखिम‑घटक प्रमुख हैं?

Regulatory non‑compliance, valuation disputes, lender consent और minority shareholders के अधिकारों से जुड़ी घटनाएँ प्रमुख जोखिम होंगी।

प्रश्न?

परिवर्तनों के साथ सबसे उपयोगी अभ्यास क्या हैं?

विस्तृत due diligence, robust open offer plan, comprehensive financing framework और cross‑border compliance चैकलिस्ट बनाकर चलना चाहिए।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न के उत्तर

ऊपर दिए गए प्रश्नों के उत्तर यह हैं कि दिल्ली में अधिग्रहण/उत्तोलन वित्त के लिए कौन‑सी प्रक्रिया अपनानी चाहिए, किन कानूनों का पालन करना पड़ता है, और किन जोखिमों से सावधान रहना चाहिए।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • SEBI - Securities and Exchange Board of India. Regulators for takeovers and open offers. https://www.sebi.gov.in/
  • RBI - Reserve Bank of India. ECB and cross‑border financing guidelines. https://www.rbi.org.in/
  • IBBI - Insolvency and Bankruptcy Board of India. Framework for IBC processes. https://www.ibbi.gov.in/

5. अगले कदम

  1. आपका उद्देश्य स्पष्ट करें: target कौन है, डील का आकार कितना है और फाइनेंसिंग प्लान क्या है।
  2. दिल्ली‑आधारित corporate कानून फर्म या बटालियन देखें जिनके पास LBO और IBC‑अनुभव हो।
  3. कायदे से credentials जाँचें: past deals, client testimonials, और regulatory track‑record।
  4. पहले‑से consultation शेड्यूल करें ताकि scope, fees and timelines स्पष्ट हों।
  5. एक компакт shortlist बनाकर RFP भेजें और draft engagement letter प्राप्त करें।
  6. प्रत्येक फर्म के साथ एक‑दो घनिष्ठ कसौटियाँ तय करें: regulatory strategy, tax advisory, और dispute management।
  7. final engagement के बाद comprehensive due diligence और deal structuring शुरू करें।

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