दार्जीलिंग में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
दार्जीलिंग, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

ऋण
दिवाला एवं ऋण
वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

प्रत्‍यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...

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1 उत्तर
सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
दिवाला एवं ऋण
सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...

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1. दार्जीलिंग, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में: दार्जीलिंग, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दिवाला एवं ऋण कानून भारत में एक व्यवस्थित, समय-सीमित समाधान पेश करता है. यह IBC के अंतर्गत संगठित तरीके से ऋण-समस्या वाले मामलों की निपटान को तेज बनाता है. दार्जीलिंग के निवासी अक्सर बैंकों से प्राप्त ऋणों की समस्याओं का सामना करते हैं, खासकर पर्यटन और चाय उद्योग से जुड़ी इकाइयों में.

IBC के अंतर्गत दिवाला प्रक्रिया कॉरपोरेट और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के ऋण-धारकों पर लागू होती है. पश्चिम बंगाल के लिए सामान्यतः NCLT, कोलकाता बेंच इस प्रकार के मामलों की सुनवाई करता है. इसलिए दार्जीलिंग के व्यवसायी और व्यक्ति को राज्य-विशिष्ट अदालत व्यवस्था के अनुसार कदम उठाने होते हैं.

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”
“The Code provides for time-bound insolvency resolution and liquidation processes to balance creditor rights and debtor rehabilitation.”

महत्वपूर्ण तथ्य - IBC 2016 के बाद कई संशोधन हुए, ताकि प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बने. Darjeeling निवासी किसी भी ऋण-समस्या के लिए सही पथ चुनें, ताकि राजस्व और कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहें.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवाला एवं ऋण कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

दार्जीलिंग से जुड़े व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए नीचे दिए गए परिदृश्यों में कानूनी सहायता महत्वपूर्ण होती है. प्रत्येक परिदृश्य के लिए योग्य advokata के साथ परामर्श जरूरी होता है.

  • कंपनी-स्तर CIRP के अंतर्गत ऋण-default की स्थिति आ जाए; भागीदारी-स्तर में पुनर्गठन बनाम liquidation का निर्णय लेना है. (उदाहरण: एक चाय-गार्डन के आर्थिक संकट के बाद ऋण-रिसॉल्यूशन की जरूरत।)
  • 12A प्रविधि के जरिये CIRP स्थगन के बाद ऋण-मुक्ति याwithdrawal का विकल्प चुनना हो.
  • MSME के लिए प्री-पैक insolvency प्रोसीजर के बारे में जानना और उसका आवेदन करना.
  • व्यक्ति-स्तर पर व्यक्तिगत दिवालिया घोषित करना या संपत्ति-सम्पदा का त्वरित निबटान करना हो. (उदाहरण: पर्यटन-एजेंसी के मालिक द्वारा व्यक्तिगत ऋणों का समाधान)
  • कोरपोरेट-क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) के साथ समझौता, विलय या पुनर्गठन के लिए कानूनी सलाह चाहिए.
  • डिफॉल्ट के कारण सुरक्षा-ऋणों के निष्कासन, सिक्योरिटीज-इंटरेस्ट के मुद्दे पर SARFAESI-आदेशों से बचाव.

Darjeeling के व्यावसायिक संदर्भ में खास बात यह है कि स्थानीय बैंकों के साथ ऋण-समस्या अक्सर पर्यटन, होटल-उद्योग या चाय-गॉर्डन से जुड़ी होती है. विशेषज्ञ advokata सही प्रक्रिया और समय-सीमा तय करते हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: दार्जीलिंग, भारत में दिवाला एवं ऋण को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

निम्न कानून दार्जीलिंग और पश्चिम बंगाल के लिए मुख्य ढांचे बनाते हैं.

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - यह ऋण-धारकों, डिफॉल्टर और क्रेडिटर्स के बीच समयबद्ध निपटान को प्राथमिकता देता है. कॉरपोरेशन, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों पर यह लागू होता है.
  • SARFAESI Act, 2002 - बैंक-ऋणों के लिए सिक्योरिटीज-सेक्शन और रिकवरी के कानूनी उपाय देता है. IBC के साथ मिलकर क्रेडिटर्स के अधिकार सुरक्षित रहते हैं.
  • MSME Development Act, 2006 - माइक्रो, स्मॉल और मिडियम इकाइयों के लिए ऋण समाधान और सहायता के प्रावधान देता है. MSMEs में IBC के साथ इंटरफेस महत्त्वपूर्ण होता है.

इसके अलावा कॉर्पोरेट मामलों के कानूनों का अनुकरण भी होता है ताकि कंपनी-स्तर के मामलों में सही/सही प्रक्रिया अपनाई जा सके. Darjeeling के लिए Kolkata NCLT bench सामान्यतः West Bengal के मामलों की सुनवाई करता है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC भारत का संविधिय ढांचा है जो insolvency, bankruptcy और liquidation के मामलों को समय-बद्ध तरीके से हल करने के लिए बनाया गया है. यह corporate, partnership और individual सभी पर लागू होता है.

कौन दाखिला कर सकता है?

कंपनी, साझेदारी फर्म, या व्यक्तिगत डिफॉल्टर CIRP या liquidation के लिए NCLT के समक्ष दाखिला कर सकता है. Darjeeling-आधारित बिजनेस या व्यक्ति भी पात्र हो सकता है.

Moratorium क्या है?

Moratorium वह अवधि है जिसमें ऋण-धारी के खिलाफ नई कार्रवाई रोक दी जाती है. यह प्रक्रिया के आरम्भिक चरण में लागू होता है और NCLT की अनुमति से सीमित किया जा सकता है.

CIRP कितना समय लेता है?

IBC के अनुसार CIRP आम तौर पर 180 दिन में पूरा करने की aiming होती है, कुछ परिस्थितियों में इसे 270 दिन तक बढ़ा जा सकता है.

12A के तहत withdrawal कैसे संभव है?

CoC और NCLT की मंजूरी से CIRP को withdraw किया जा सकता है, यदि creditors के पक्ष में settlements बन जाएं और debtors के लाभ में हो.

NCLT में कैसे फाइल करें?

आपके वकील द्वारा एक petition, accompanied by financial statements, proof of default और other required documents, NCLT को प्रस्तुत किया जाता है. Darjeeling से Kolkata bench सामान्यतः देखे जाते हैं.

Liquidation और Resolution में क्या फर्क है?

Resolution का मकसद viable business को बचाकर value maximize करना है. Liquidation में assets बेचकर creditors को payment किया जाता है.

Pre-Pack Insolvency क्या है?

मुख्यतः corporate debtors के लिए एक तेज, pre-packaged प्रक्रिया है, जिसमें plan पहले से तैयार रहता है और जल्द निपटान संभव होता है. MSMEs के लिए विशेष प्रावधानों के साथ देखा जाता है.

CoC क्या भूमिका निभाता है?

CoC creditors का समूह है जो insolvency resolution plan पर निर्णय लेता है. यह सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय-निर्माता मंच है.

कानूनी सलाह कब लें?

कानूनी सलाह तब लें जब: आप CIRP-सम्बन्धी नोटिस पाएँ, या नये ऋण-डिफॉल्ट के चिन्ह दिखें, या 12A/Pre-pack विकल्प पर विचार करना हो.

Darjeeling में वकील कैसे खोजें?

Darjeeling में IBC-NCLT केस के लिए विशेषistr Advocates मिलेंगे. अनुभव, फीस और पूर्व केस-परिणाम देखें, फिर initial consultation लें.

क्या खर्च होगा?

फीस संरचना केस-केस अलग होती है. स्टार्ट-अप केस में retainer और success-fees का मिश्रण संभव है. स्पष्ट शुल्क-चर्या पहले से तय कर लें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - IBC के निगरानी-केंद्र और मार्गदर्शन. https://www.ibbi.gov.in/
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - Insolvency मामलों की मौजूदा निर्णय-प्रक्रिया. https://nclt.gov.in/
  • National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - NCLT के निर्णयों के विरुद्ध अपील-पत्र. https://nclat.nic.in/

6. अगले कदम: दिवाला एवं ऋण वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने केस की प्रकृति स्पष्ट करें: CIRP, 12A, liquidation आदि कौन-सा रास्ता है?
  2. दार्जीलिंग या कोलकाता-आधारित विशेषज्ञ वकील खोजें जो NCLT-IBC में अनुभव रखते हों.
  3. पात्र-तालिका बनाएं: बार-कोडिंग, LIC/advocate registration, specialization आदि देखें.
  4. पूर्व-फीस-परामर्श का प्रस्ताव लें; क्लॉज-Fees, retainer-amount तय करें.
  5. पूर्व क्लायंट-रेफरेंसेस और केस-आउटकम चेक करें.
  6. नीतिगत समय-रेखा और(expected case duration) स्पष्ट करें.
  7. घोषणा करें: अगर आवश्यक हो, पहले प्रस्तावित plan और settlement-options पर फिर से चर्चा करें.

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