हैदराबाद में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
हैदराबाद, भारत

2019 में स्थापित
उनकी टीम में 25 लोग
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मिथ्री लीगल हैदराबाद, तेलंगाना में एक विश्वसनीय कानून फर्म है जो आपराधिक रक्षा, जमानत, परीक्षण, सिविल विवाद,...
Absolute Law Firm
हैदराबाद, भारत

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एब्सोल्यूट लॉ फर्म, जो भारत में आधारित है, विभिन्न कानूनी क्षेत्रों में अपनी व्यापक सेवाओं के साथ कानूनी...
Law Offices of Sameer & Associates
हैदराबाद, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 12 लोग
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हैदराबाद और दिल्ली स्थित समीर हुसैन एंड एसोसिएट्स का कार्यालय फैमिली कोर्ट, सिविल कोर्ट, क्रिमिनल कोर्ट, फोरम,...
Adavikolanu Law Chambers
हैदराबाद, भारत

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अदविकोलानु लॉ चैंबर्स भारत का एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है, जो बैंकिंग और वित्त कानून में अपने व्यापक विशेषज्ञता...
Samvad Partners
हैदराबाद, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 150 लोग
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Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
M/S KVSB Advocates
हैदराबाद, भारत

2003 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Telugu
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हम M/s.KVSB Advocates न केवल सेवाओं की गुणवत्ता के प्रति संवेदनशील हैं, बल्कि हम अपने दृष्टिकोण, मूल्य, प्रतिबद्धता और...
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

ऋण
दिवाला एवं ऋण
वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

प्रत्‍यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...

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1 उत्तर
सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
दिवाला एवं ऋण
सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...

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1 उत्तर

1. हैदराबाद, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में: हैदराबाद, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हैदराबाद में दिवाला एवं ऋण कानून का संचालन राष्ट्रीय स्तर पर परिसम्पत्तियों की पुनर्गठन और दिवाला समाधान के आधार पर होता है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) हैदराबाद सहित पूरे भारत में लागू है।

IBC के अंतर्गत कॉर्पोरेट डेब्टर, साझेदारी फर्म, और व्यक्तियों के लिए समय-सीमित दिवाला समाधान प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। हैदराबाद में स्थायी न्यायिक संस्था National Company Law Tribunal (NCLT) की हैदराबाद बेंच इन मामलों की सुनवाई करता है।

“The primary objective of the Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 is to consolidate and amend laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”

“The Code provides for a time-bound insolvency resolution process.”

हैदराबाद निवासियों के लिए उपयुक्त मार्गदर्शी प्रमाणपत्रों के साथ यह प्रक्रिया creditors के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है। IBBI के अनुसार यह कोड सभी हितधारकों के संतुलन के साथ क्रेडिट उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित है।

स्थानीय दृष्टिकोण से, Hyderabad Bench of NCLT Telangana और Andhra Pradesh के संबंध में मामलों के निपटान के लिए जिम्मेदार है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवाला एवं ऋण कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची

  • स्थानीय बैंक या वित्तीय संस्थानों के साथ मेन्टेनेंस-ऑफ-क्रेडिट मामलों में जबरदस्त देबिट्स के लिए CIRP या क़ानूनी सलाह चाहिए।
  • कंपनी दिवालिया (CIRP) या व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए Hyderabad Bench में न्यायिक प्रक्रियाओं की शुरुआत करनी हो।
  • यदि आप एक व्यक्तिगत गारंटर या सह-धारक हैं तो IBC के अंतर्गत उत्तरदायित्व स्पष्ट करना हो।
  • डिफॉल्ट-सम्बन्धी आपातकालीन प्रस्ताव के मूल्यांकन और त्वरित समाधान के लिए कानूनी मार्गदर्शन चाहिए।
  • डिफॉल्ट से बचाव या पुनर्गठन के लिए क्रेडिटर्स के साथ प्रस्तुति और प्रस्ताव तैयार करने की जरूरत हो।
  • DRT/RDDBFI आदि अन्य ऋण-सम्बन्धी कार्रवाइयों (उदा. जमा-करण, बंध-चलन) से जुड़ी स्पष्टता चाहिए।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: हैदराबाद, भारत में दिवाला एवं ऋण को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के दिवाला-संबंधी समाधान के लिए केंद्रीय कानून है; हैदराबाद में NCLT बेंच के माध्यम से सुनवाई होती है।
  • Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI) - बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा बकायों की वसूली हेतु Debt Recovery Tribunals (DRTs) की स्थापना और प्रक्रिया निर्धारित करता है।
  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) - सिक्योर्ड-ऋण डेबटर्स के विरुद्ध संपत्ति से सुरक्षा-आधारित वसूली के लिए सक्षम है, विशेषकर बैंकों के लिए निष्पादन-प्रक्रिया तेज करने हेतु।

Hyderabad में इन कानूनों के अंतर्गत मामलों की सुनवाई NCLT Hyderabad Bench के साथ DRTs और अन्य संस्थागत तंत्र के माध्यम से होती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाला क्या है?

दिवाला एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें असफल ऋण चुकाने वाले व्यक्ति या संस्था के ऋण चुकाने की क्षमता एक समय-सीमा के भीतर पुनर्गठित या समाप्त की जाती है।

IBC के अंतर्गत कौन-सी संस्थाएँ शामिल होती हैं?

IBC में कॉर्पोरेट डेब्टर, पार्टनरशिप ड Debtor और व्यक्तियों के लिए CIRP या personal insolvency proceedings हो सकती हैं।

Hyderabad में दिवाला-सम्बन्धी मुकदमे कैसे शुरू होते हैं?

सबसे पहले creditors के पास ऋण-बकाया का दावा प्रस्तुत होता है, फिर NCLT Hyderabad Bench CIRP/ILO के लिए प्रक्रिया शुरू कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज मांगे जाते हैं।

डिफॉल्ट होने पर मुझे क्या कदम उठाने चाहिए?

कानूनी सलाह लेकरअपनी देनदारियों का पूर्ण मूल्यांकन करें, क्रेडिटर्स के साथ संवाद के रास्ते ढूंढें, और वैकल्पिक पुनर्गठन या दिवाला-समाधान के विकल्प पर विचार करें।

क्या व्यक्तिगत दिवालियापन अब संभव है?

हाँ, हाल के आईसीबी संशोधनों के साथ व्यक्तिगत दिवालियापन प्रणाली को व्यवहारिक बनाया गया है, ताकि व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों के लिए insolvency resolution संभव हो सके।

क्रेडिटर्स के अधिकार क्या होते हैं?

क्रेडिटर्स को CIRP के दौरान अपना दायित्व-उद्धार, मूल्यांकन और समाधान-प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार होता है; वे समिति बनाते हैं और निर्णयों पर प्रभाव डालते हैं।

Gaurantors की भूमिका कैसे तय होती है?

यदि आप गारंटर हैं तो आपके द्वारा किए गए ऋण के लिए आपका दायित्व भी तय हो सकता है; IBC के भीतर Personal Guarantor की स्थिति स्पष्ट की जाती है।

कौन-सी चीजें रिकॉर्ड पर रखें?

कर्ज दस्तावेज, Promissory Notes, ऋण-सम्बन्धी संचार, ऋण-समितियाँ, और EMI रिकॉर्ड्स को व्यवस्थित रखें ताकि कानूनी प्रक्रिया में तेजी हो।

क्या IBC सरल और तेज है?

IBC की मूल अवधारणा एक समय-सीमा-आधारित प्रक्रिया है ताकि मूल्य-उत्पादन और समाधान जल्दी संभव हो सके,परन्तु परिस्थिति के अनुसार समय-सीमा बढ़ भी सकती है।

क्या हैदराबाद में व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए प्रक्रिया अलग है?

नहीं, पर हैदराबाद की प्रक्रिया स्थानीय बेंचों, कोर्ट-फाइलिंग और NCLT के निर्देशों पर निर्भर करती है; स्थान-विशिष्ट अदालतों का समन्वय जरूरी है।

क्या IBBI से सहायता मिलती है?

हाँ, IBBI दिवाला कानून का नियामक है और प्रक्रियाओं के मानक, सूचनाओं के अनुरक्षण और नीतिगत दिशानिर्देश जारी करता है।

व्यावहारिक सलाह: Hyderabad निवासी कैसे शुरुआत करें?

अपने ऋण विवरण इकट्ठा करें, एक अनुभवी दिवाला-अधिवक्ता से परामर्श लें, और Hyderabad Bench की प्रक्रियाओं से अवगत रहें ताकि सही कदम उठ सके।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक नियामक और सूचना स्रोत. https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - Hyderabad Bench - दिवाला मामलों की सुनवाई. https://nclt.gov.in
  • Debt Recovery Tribunal (DRT) - Hyderabad - बैंकों के ऋण-सम्बन्धी मामलों की वसूली प्रक्रिया. https://drt.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने ऋण-स्थिति का स्पष्ट आकलन करें और दस्तावेज एकत्र करें।
  2. Hyderabad में किसी अनुभवी दिवाला वकील या कानूनी सलाहकार से प्रारम्भिक परामर्श लें।
  3. यदि आवश्यक हो, NCLT Hyderabad Bench में filing के संभावित विकल्प पर चर्चा करें।
  4. कानूनी शुल्क और फॉर्मेटीफिकेशन समझें; शिकायत-प्रक्रिया के लिए अग्रिम योजना बनाएं।
  5. क्रेडिटर्स के साथ संवाद-योजना बनाएं और समन्वय समिति के गठन के बारे में जानें।
  6. आईबीबीआई के दिशानिर्देशों के अनुरूप सभी रिकॉर्ड्स और वक्तव्य तैयार रखें।
  7. प्रক্রिया के दौरान समय-समय पर कानूनी सलाह लेते रहें और आवश्यक संशोधनों के अनुरूप कदम उठाएं।

Lawzana आपको योग्य कानूनी पेशेवरों की चयनित और पूर्व-जाँच की गई सूची के माध्यम से हैदराबाद में में सर्वश्रेष्ठ वकील और कानूनी फर्म खोजने में मदद करता है। हमारा प्लेटफ़ॉर्म अभ्यास क्षेत्रों, दिवाला एवं ऋण सहित, अनुभव और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर तुलना करने की अनुमति देने वाली रैंकिंग और वकीलों व कानूनी फर्मों की विस्तृत प्रोफ़ाइल प्रदान करता है।

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