हैदराबाद में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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हैदराबाद, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. हैदराबाद, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
दिवालियापन कानून पर मौजूदा ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) पर आधारित है।
“An Act to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency of corporate persons, partnership firms and individuals.”यह लंबा शीर्षक कानून का मूल उद्देश्य स्पष्ट करता है।
हैदराबाद में दिवालियापन मामलों की सुनवाई प्रमुख रूप से Национल Company Law Tribunal (NCLT) के क्षेत्रीय बेंच के अंतर्गत होती है, और अपीलीय स्तर पर NCLAT देखता है।
IBC के अनुसार कंपनियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिए समय-सीमा के भीतर समाधान ढूंढना अपेक्षित है; व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए PIRP भी प्रावधानित किया गया है।
“IBBI is a regulatory body established under the Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 for the regulation and development of the insolvency profession, insolvency processes and information utilities.”यह IBBI का आधिकारिक सार है जो पथ-निर्देशन देता है।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
- हैदराबाद आधारित कंपनी के डिफॉल्ट मामले - यदि किसी तेलंगाणा-आधारित उद्यम पर CIRP शुरू होना है, तो सही फाइलिंग, क्लेमिंग और पारी-प्रक्रिया तय करने के लिए अधिवक्ता की जरूरत होती है। यह क्षेत्रीय NCLT बेंच पर जाता है।
- व्यक्तिगत दिवालिएपन ( PIRP ) का चयन - यदि आप या आपका पारिवारिक सदस्य भारी व्यक्तिगत कर्ज में डूबे हुए हैं, PIRP प्रक्रिया के लिए कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक है।
- कंपनी के liquidation/ winding up के रास्ते - हैदराबाद स्थित कंपनी अगर परिसंपत्तियों के बराबर देनदारियाँ नहीं चुकाती तो Liquidation का विकल्प और अनुरोध सही तरीके से बनाना जरूरी है।
- बैंकिंग या secured debt के साथ जटिल दायित्व - SBI, ICICI जैसे बैंकों की सिक्योर debt के साथ IBC और SARFAESI के अंतःक्रिया समझना जरूरी है ताकि विवाद गुमनामी से बाहर आए।
- क्रॉस-बॉर्डर या बहु क्रेडिटर प्रक्रियाएं - यदि फाइनेंसर विदेशी Creditor हो या बहुपक्षीय दावा आता है, तब सही न्यायिक मार्गदर्शन अनिवार्य है।
- कानूनी समय-सीमा और लागत की स्पष्ट योजना - प्रक्रियाओं में समय-सीमा, शुल्क, प्रोफेशनल फीस आदि स्पष्ट करने के लिए अनुभवी अधिवक्ता सहायक होते हैं।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
- इंसोलवेंसी ऐंड बैंक्रप्सी कोड, 2016 (IBC) - यह मुख्य कानून है जो कॉर्पोरेट, साझेदारी और व्यक्तियों के दिवालिएपन को संसाधित करता है।
- कंपनी ऐक्ट, 2013 - कॉर्पोरेट दिवालियापन के कुछ मामलों में CIRP और winding up से जुड़ी प्रावधानों के लिए उपयोगी है, खासकर हैदराबाद के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में।
- SARFAESI ऐक्ट, 2002 -secured debt के त्वरित recovery के उपाय देता है; IBC के अलावा बैंकों के साथ क्रेडिटर-क्रेडेसी संबंधों में प्रचलित विकल्प है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक एकीकृत कानून है जो insolvency प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रयास करता है।
IBC के अंतर्गत CIRP कैसे शुरू होता है?
कर्जदाता या कंपनी के द्वारा आवेदन दायर किया जाता है और NCLT हैदराबाद में उसे मान्यता देता है; इसके बाद एक एक्सपर्ट IP नियुक्त होता है।
PIRP क्या होता है और इसमें क्या लाभ हैं?
PIRP व्यक्तिगत दिवालियापन की प्रक्रिया है जिसमें एक insolvency professional क्रमबद्ध समाधान देता है और कुछ देनदारियाँ समाप्त हो सकती हैं।
क्या दिवालिया होने पर ऋण मुक्त हो सकते हैं?
उचित PIRP या CIRP के बाद discharge संभव है, पर यह हर मामले में नहीं मिलता; अदालत निर्णय पर निर्भर है।
IP की भूमिका क्या होती है?
Insolvency professional प्रक्रियाओं के निष्पादन, दावा पात्रता की जाँच और समाधान योजना को प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होता है।
हैदराबाद में फाइल कहाँ करानी है?
अधिकांश मामलों में NCLT हैदराबाद बेंच में फाइलिंग होती है; appellate मुद्दों के लिए NCLAT जाएगा।
डिफॉल्ट के समय नीचे कौन सा वर्ग पहले मिलता है?
IBC में क्रेडिटर्स की प्रायोरिटी निर्धारित होती है; secured creditors को सामान्यतः प्राथमिकता मिलती है, फिर unsecured क्रेडिटर्स।
क्या व्यक्तिगत ऋण भी IBC के अंतर्गत आता है?
हाँ, PIRP के माध्यम से व्यक्तिगत ऋण भी insolvency process में आ सकता है; घरेलू खर्च और क्रेडिट कार्ड debt भी शामिल हो सकता है।
क्या वैकल्पिक निकास मार्ग उपलब्ध हैं?
हाँ, SARFAESI या DRT प्रक्रियाएं भी उपलब्ध हैं ताकि secured debt को त्वरित तरीके से निपटा जा सके।
मैं कैसे अनुभव करूँ कि मुझे किस मार्ग की जरूरत है?
कंपनी, क्रेडिटर संरचना और debt type के अनुसार उचित मार्ग तय होता है; एक सक्षम वकील आपकी स्थिति का आकलन कर सही विकल्प बताएगा।
IBC प्रक्रिया में कितना खर्च आयेगा?
फाइलिंग शुल्क, IP फीस और कानूनी शुल्क स्थिति पर निर्भर करते हैं; Hyderabad में स्थानीय क्षेत्रीय tarieven के अनुसार अनुमानित लागत अलग हो सकती है।
कानूनन कौन-सी जगह सबसे पहले मदद मांगनी चाहिए?
किसी भी insolvency केस में सबसे पहले licensed insolvency professional या अनुभवी दिवालियापन वकील से संपर्क करें; वे प्रक्रिया का मार्गदर्शन देंगे।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक वेबसाइट: https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - आधिकारिक वेबसाइट: https://nclt.gov.in/
- Ministry of Corporate Affairs (MCA) - दिवालियापन से जुड़ी गाइडेंस और संसाधन: https://www.mca.gov.in/
6. अगले कदम
- अपने कर्ज की पूरी सूची बनाएं और हालिया देनदारियाँ संकलित करें।
- अपनी स्थिति के अनुसार CIRP, PIRP या अन्य विकल्प का मूल्यांकन करें।
- हैदराबाद के licensee insolvency professionals या अनुभवी दिवालियापन अधिवक्ता से मिलें।
- IBBI पर IP के लाइसेंस और रिकॉर्ड की जाँच करें ताकि वे वैध हों।
- जरूरी दस्तावेज जुटाकर NCLT Hyderabad में उचित फॉर्मिंग करें।
- अन्य क्रेडिटर्स के साथ बातचीत और विवाद समाधान के कदम निर्धारित करें।
- स्थानीय कानून, समय-सीमा और लागत पर स्पष्ट योजना बनाएं ताकि डर-समझौते के बजाय समाधान पर ध्यान केंद्रित करें।
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