कोच्चि में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील

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Advocate Neeraj T Narendran, N and N Law Firm

Advocate Neeraj T Narendran, N and N Law Firm

15 minutes मुफ़्त परामर्श
कोच्चि, भारत

2021 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
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गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, एर्नाकुलम से लॉ में स्नातक। पेशेवर रूप से साइबर अपराध, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आपराधिक,...
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

ऋण
दिवाला एवं ऋण
वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

प्रत्‍यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...

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1 उत्तर
सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
दिवाला एवं ऋण
सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...

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1. कोच्चि, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में: [ कोच्चि, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन ]

कोच्चि में दिवाला और ऋण कानून का आधार Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 है. यह कानून सभी प्रकार के ऋण-सम्बन्धी विवादों के समाधान के लिए एक समय-सीमित ढांचा देता है. यह कॉरपोरेट, व्यक्तिगत ऋण धारक और साझेदारी फर्मों को एक समान प्रक्रिया में लाता है.

घोषणा के बाद CIRP शुरू होता है और प्रक्रिया के दौरान एक ऋण-संरक्षण अधिकारी (IRP/Resolution Professional) नियुक्त हो सकता है. कोच्चि में रिट्रीवे-संरक्षक उपाय और अदालत-समन्वय राष्ट्रीय कंपनी कानून तल (NCLT) या Debt Recovery Tribunal (DRT) के माध्यम से होते हैं. यह व्यवस्था कॉरपोरेट दिवालिया അവस्थाओं के लिए समय-सीमित समाधान सुनिश्चित करती है.

उल्लेख-योग्य तथ्यों के बाद भी स्थानीय प्रक्रियाओं के लिए Kerala के अदालती पथ और बैंकों के साथ तालमेल जरूरी होते हैं. हालिया परिवर्तन MSMEs के लिए पूर्व-नियोजित समाधान प्रक्रियाओं को सक्षम बनाते हैं ताकि छोटे व्यवसाय तेज़ समाधान तक पहुँच सकें.

“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides for a time-bound resolution of insolvency proceedings.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI). https://www.ibbi.gov.in

“The SARFAESI Act enables banks and financial institutions to recover non-performing assets by enforcing security interests.”

Source: Reserve Bank of India (RBI). https://www.rbi.org.in

निवासियों के लिए व्यावहारिक संकेत- कोच्चि में ऋण दायित्वों के मामले में समय की कसौटी और अदालत-प्रक्रिया के कारण जल्दी निर्णय लेना अहम रहता है. इस क्षेत्र में स्थानीय वकील के साथ सही विशेषज्ञता मिलना लाभकारी है. NCLT या DRT से जुड़ी अधिकारिक प्रक्रियाओं की जानकारी रखना ज़रूरी है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [दिवाला एवं ऋण कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। कोच्चि, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

  • कोच्चि-आधारित SME पर बैंक का ऋण डिफॉल्ट है। बैंक ने IBC के तहत CIRP शुरू कर दिया है। एक अनुभवी अभिभाषक की सहायता से केस संरचना, क्रेडिटर्स-प्रोफाइल और CIRP चरण स्पष्ट होते हैं।
  • कर्जदार के नाम पर योग्यता-उद्धृत निजी गारंटर पर ऋण बंधन है। गारंटर के पक्ष में जोखिम-आकलन और उत्तरदायित्व विभाजन आवश्यक होता है।
  • हाउस लोन या बड़ी संपत्ति से जुड़ा Security Interest SARFAESI के अंतर्गत लागू हो रहा है। यह मामले में सुरक्षा-हस्तांतरण और संपत्ति बिक्री के कदमों की सलाह चाहिए।
  • कोच्चि में MSME के नकदी प्रवाह में कमी आई हो और CIRP से पूर्व-समाधान की जरूरत हो। पूर्व-पैक्ड समाधान प्रक्रिया पर कानूनी मार्गदर्शन लाभदायक रहता है।
  • व्यवसाय पुनर्गठन के लिए कॉर्पोरेट ऋण-निपटान योजना बनानी हो। ऐसे में सही Insolvency Professional का चयन और उनके शुल्क-ढांचे की स्पष्ट जानकारी चाहिए।
  • यदि अवैयक्तिक देनदारी के बारे में प्रश्न हैं, जैसे व्यक्तिगत देनदार के ऋण पर मुकदमा या केस-राजस्व, तो एक विशेषज्ञ वकील से स्क्रीनिंग और क्लाइंट-केस मैनेजमेंट की जरूरत होती है।

नोट: ऊपर दिए गए उदाहरण कोच्चि-स्थित परिसरों के सामान्य स्थितियों पर आधारित हैं. यदि आप चाहें तो मैं Kochi-के अदालतों से प्रकाशित वास्तविक मामलों के आधार पर अप-टू-डेट सूची बना सकता/सकती हूँ. कृपया बताएं यदि आप वृहत केस-स्टडी चाहते हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ कोच्चि, भारत में दिवाला एवं ऋण को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें ]

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - यह मुख्य कानून है जो कॉरपोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी फर्म के दिवाला मामलों को एक क्रमबद्ध प्रक्रिया में संचालित करता है.
  • SARFAESI Act, 2002 - यह कानून बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को सिक्योर्ड इंटरेस्ट लागू कर गैर-निपटान संपत्ति से वसूली में सक्षम बनाता है.
  • Recovery of Debts due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI) - बैंकों और वित्त संस्थाओं के डेब्ट-ड्यू के मामलों में अदालतों के बजाय डेब्ट-रिकवरी ट्रिब्यूनल्स के माध्यम से वसूली का तंत्र प्रदान करता है.

इन के अलावा Companies Act, 2013 और Cross-Border Insolvency प्रावधान भी IBC के अंतर्गत आते हैं। कोच्चि में इन कानूनों के प्रावधान स्थानीय DRT और NCLT के माध्यम से लागू होते हैं. Kerala High Court इन मामलों पर अंतिम गणना और प्रमाणीकरण के लिए उत्तरदायी है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े तैयार करें]

प्रश्न?

भारत में दिवाला और ऋण कानून का आधार क्या है?

उत्तर: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 भारत का प्रमुख कानून है जो दिवालिया प्रक्रियाओं को एक समय-सीमित ढांचे में लाता है. IBBI के दिशानिर्देश भी इन प्रक्रियाओं को संचालित करते हैं. IBBI साइट पर विवरण है.

प्रश्न?

IBC से क्या कोच्चि में व्यक्तिगत दिवालिया भी संबोधित होता है?

उत्तर: हाँ, IBC व्यक्तिगत या साझेदारी ऋण धारकों के मामलों को भी शामिल करता है. व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रियाएं CIRP के समान चरणों में होती हैं, परन्तु हल-उन्मुख प्रक्रियाएं भिन्न हो सकतीं हैं.

प्रश्न?

मुझे कानूनी सलाह कब चाहिए होती है?

उत्तर: जब रिणदाता-ग्रोथ से जुडे केस, CIRP, या SARFAESI-कार्यवाही शुरू हो, तब एक अनुभवी अधिवक्ता की जरूरत होती है ताकि अधिकार-क्षेत्र, प्रक्रियाएं और दायित्व स्पष्ट हों.

प्रश्न?

ड्यू-डिस्प्यूट फोरम किस तरह काम करते हैं?

उत्तर: DRT बैंकों से जुड़ी ऋण-सम्बन्धी समस्याओं को हल करता है। वे निपटान-प्रक्रिया, सुरक्षा-हस्तांतरण, और वसूली के आदेश दे सकते हैं।

प्रश्न?

DRT vs NCLT में क्या फर्क है?

उत्तर: DRT बैंक-ऋण विवादों पर केंद्रित है; NCLT कॉरपोरेट दिवाला केसों पर निर्णय करता है और CIRP का प्रमुख मंच है.

प्रश्न?

कौन से दस्तावेज़ जरूरी होते हैं?

उत्तर: ऋण दस्तावेज, चेक-रसीद, बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति विवरण, ऋण-प्रकार आदि-ये सभी केस-प्रकार पर निर्भर होते हैं.

प्रश्न?

कोच्चि में वकील कैसे चुनें?

उत्तर: IBBI-प्रमाणित सेवार्थ अधिवक्ता ढूंढें, केस-पूर्व अनुभव देखें, फीस-ढांचा स्पष्ट करें, और प्रारंभिक परामर्श में स्पष्ट मार्गदर्शन लें.

प्रश्न?

पूर्व-समझौते (pre-pack) क्या होते हैं?

उत्तर: MSMEs के लिए pre-packaged insolvency resolution process (P-PIRP) एक तेज़, अनुबंध-आधारित समाधान है जिसमें ऋणधारक और क्रेडिटर्स के बीच पूर्व-निर्धारित व्यवस्था होती है.

प्रश्न?

मुझे कब CIRP शुरू करना चाहिए?

उत्तर: जब ऋणदाता के पास पर्याप्त डिफाल्ट-आधार उपलब्ध हो और CIRP लागत/फायदे आपकी स्थिति के अनुरूप हो, तब CIRP शुरु किया जा सकता है.

प्रश्न?

कौन से समय-सीमा लागू हैं?

उत्तर: IBC में समय-सीमा निर्धारित हैं किन्तु केस-केस भिन्न हो सकते हैं; CIRP की सामान्य अवधि 180 दिनों से अधिक नहीं, पर कुछ परिस्थितियों में बढ़ सकती है.

प्रश्न?

क्या मैं कोर्ट-आदेश के बिना ऋण चुका सकता/सकती हूँ?

उत्तर: कुछ मामलों में ADR और मॉडरेशन के साथ समाधान संभव है, पर अदालत के आदेश के बिना सुरक्षा-हस्तांतरण या asset-sale हकीकत में संभव नहीं होता.

प्रश्न?

क्या देयता किसी अन्य जिला में स्थानांतरित हो सकती है?

उत्तर: हाँ, cross-border और cross-jurisdiction मामले IBC के प्रावधानों के अनुसार संचालित होते हैं; विशेष परिस्थितियों में एक जिला से दूसरे जिले के माध्यम से प्रक्रिया चल सकती है.

5. अतिरिक्त संसाधन: [दिवाला एवं ऋण से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं]

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - नीति-निर्माण और निर्देश
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - कॉरपोरेट दिवाला मामलों की सुनवाई
  • Reserve Bank of India (RBI) - SARFAESI और बैंक-ऋण से जुड़े आदेश

6. अगले कदम: [दिवाला एवं ऋण वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपनी जरूरत स्पष्ट करें: कॉरपोरेट दिवाला, व्यक्तिगत दिवालिया, या क्रेडिट-रेलेवेंट मामला।
  2. स्थानीय BAR-परामर्श देखें: केरल बार काउंसिल वेबसाइट पर वकील खोजें और विशेषज्ञता देखें।
  3. IBBI/NCLT साइट से प्रमाणित वकील ढूंढें: विशेषज्ञता और अनुभव देखें।
  4. परामर्श अपॉइंट करें: 2-3 वकीलों से पहली मुलाकात करें और फीस संरचना पूछें।
  5. पूर्व केस-स्टडी देखें: समान प्रकार के केस में उनका सफलता-रेट समझें।
  6. फीस-चयन नोट करें: घटी-फीस बनाम संभव लागत का तुलनात्मक आकलन करें।
  7. फाइनल चयन करें: अनुभव, संचार-क्षमता और स्थानीय अदालतों के साथ तालमेल के आधार पर वकील चुनें.

उद्धृत स्रोताएँ:

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - https://nclt.gov.in
  • Reserve Bank of India (RBI) - https://www.rbi.org.in

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