कोच्चि में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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कोच्चि, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
कोच्चि, भारत में दिवालियापन कानून के बारे में
भारत में दिवालियापन कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है. यह समय-सीमित समाधान ढूंढने के लिए debtors और creditors के बीच स्पष्ट प्रक्रियाएं निर्धारित करता है. Kochi-स्थानीय लोगों के लिए IBC राष्ट्रीय स्तर पर लागू होता है और NCLT-/NCLAT के माध्यम से सुनवाई होती है.
IBC का उद्देश्य व्यवसायिक संस्थाओं, साझेदारी-फर्मों और व्यक्तियों के लिए तेजी से ऋण-सुलझाव देना है ताकि क्रेडिटर्स को मान-मान नुकसान कम हो और असफलता के बावजूद वैल्यू बेहतर संरक्षित रहे. केरल के निवासी भी इसी फ्रेमवर्क के अंतर्गत अपने मामलों की दायराकरण करते हैं. NCLT (National Company Law Tribunal) और NCLAT (National Company Law Appellate Tribunal) इन मामलों के निर्णायक अधिकारी हैं.
IBC provides for a time-bound resolution of insolvency and bankruptcy to promote entrepreneurship and enhance value realization for creditors. Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)
National Company Law Tribunal (NCLT) is the adjudicating authority for corporate insolvency resolution under the IBC. Source: NCLT Official Portal
क Kochi-वासियों के लिए कानूनी प्रक्रिया व्यावहारिक है पर स्थानीय दिल्ली-चेन्नई-मुंबई जैसे-बेंचों में सुनवाई की व्यवस्था रहती है. दस्तावेज़, समयबद्ध दस्तावेज़ीकरण और creditors-claims पर सावधानी आवश्यक है. यह गाइड आपको रोज़मर्रा की स्थिति में स्पष्ट कदम दिखाएगा.
आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
डायवालीकरण की प्रक्रिया जटिल है; विशेषज्ञ guidance आवश्यक है. Kochi-आधारित व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए कानून-सहायता जरूरी हो सकती है.
- कॉरपोरेट डेब्टर का केस: एक Kochi-स्थित कंपनी बकाया ऋण के कारण CIRP के लिए जा रहा हो सकता है; सहीpetition और claim-फाइलिंग जरूरी है.
- MSME-ऋणDefault: MSME के लिए वित्तीय पुनर्निर्माण और ऋण-समाधान के लिए IBC व्यवस्था उपयुक्त हो सकती है.
- व्यक्तिगत दिवालियापन: Kochi-निवासी अत्यधिक व्यक्तिगत देनदारियों के लिए व्यक्तिगत insolvency resolution ढूंढ सकता है.
- क्रेडिटर्स-फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन: बैंक या FIs case में moratorium, asset-valuation और claim-फाइलिंग में कानून-बद्ध सहायता आवश्यक होती है.
- क्रिप्टिक/स्पष्ट विवाद: संपत्ति-हक़ की सुरक्षा, संपत्ति के रीकवरी-पथ और liquidation-निर्णय के लिए advicer की जरूरत होती है.
- Cross-region disputes: Kochi-आधारित मामलों में NCLT/NCLAT के सही bench-स्थापना और venue-निर्धारण में वकील मार्गदर्शन दें.
स्थानीय कानून अवलोकन
कोच्चि-केरल के लिए दिवालियापन से संबंधित प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं. इनका अनुप्रयोग राष्ट्रीय फ्रेमवर्क के भीतर होता है.
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉरपोरेट, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के insolvency-प्रक्रिया का मुख्य कानून. NCLT/NCLAT इन मामलों के adjudicating-autorities हैं.
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) - बैंक-क्रेडिटर्स के लिए secured assets पर तेज़ कब्ज़े और रिकवरी के उपाय संचालित करता है.
- Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI) - बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के ऋण-देयकों की वसूली के लिए त्वरित न्याय-प्रक्रिया देता है.
- Companies Act, 2013 - कॉरपोरेट डेब्टर्स के लिए CSR, क्लेम-फाइलिंग और संरचना-सम्बंधी प्रावधानों के साथ IBC के साथ क्रॉस-फंक्शनिंग को मजबूत करता है.
IBC is the overarching framework for corporate insolvency resolution, while SARFAESI and RDDBFI handle secured-asset and bank-debt recovery. Source: IBBI, MCA
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक time-bound insolvency-प्रक्रिया का कानून है. इसका उद्देश्य debtors और creditors के बीच तेज़ समाधान और बेहतर asset-value recovery है.
कौन दायर कर सकता है?
कॉन्ट्रैक्ट-स्तर पर corporate debtors, individuals और partnership-firms IBC के दायरे में आते हैं. ऋण-धारक और ऋण-देयक दोनों सदस्य प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं.
NCLT कैसे काम करता है?
NCLT insolvency petitions की सुनवाई करता है और CIRP या liquidation के लिए निर्णय देता है. इसके निर्णय appellate के लिए NCLAT में जा सकते हैं.
Moratorium क्या है?
Moratorium अवधि में नया debt-claims पंजीकृत नहीं होते. यह assets के संरक्षण और orderly-कोर्स में मदद करता है.
CIRP क्या है और इसमें क्या होता है?
CIRP corporate debtor के लिए एक time-bound योजना बनाकर debt-recovery का रास्ता देता है. इसमें resolution-professional का प्रबंधन होता है और creditors की claims तय होती हैं.
व्यक्ति के insolvency के लिए क्या प्रावधान है?
IBC के अंतर्गत individuals के लिए personal insolvency-resolutions भी संभव हैं. यह सामान्यतः debt-counseling और एक structured repayment-plan के साथ होता है.
Kochi में किस तरह counsel लें?
IBC-registered legal-practitioners या insolvency professionals से मिलें. स्थानीय-kochi-advocates के पास NCLT-journeys के अनुभव चाहिए.
हमारे केस में documents क्या चाहिए?
Identity proofs, debt-details, asset-holdings, financial statements, creditor-claims और agreement-terms जैसी चीजें जरूरी रहती हैं.
कितना खर्च आएगा?
कानूनी-फीस केस-टाइप और केस-बेंच पर निर्भर करेगा. अदालत फीस और professional-fee का अनुमान पहले दिल्ली/मुम्बई-आधारित bench से लें.
क्या IBC के तहत asset कब तक सुरक्षित रहते हैं?
Moratorium के दौरान assets का अप्रत्याशित विक्रय रोक दिया जाता है; प्रयास से valuation और orderly-disposal सुनिश्चित होता है.
क्या Kochi residents के लिए विशेष नियम हैं?
IBC एक केंद्रीय कानून है; Kerala-उपयुक्त bench के साथ local-venue पर hearing कन्फर्म होता है. Kochi निवासियों के लिए local-advocate और documentation महत्वपूर्ण रहते हैं.
क्या कोई विदेशी debt भी क्रेडिट-रेसोल्यूशन के दायरे में आता है?
IBC में cross-border insolvency के कुछ प्रावधान हैं; अंतरराष्ट्रीय ऋण मामलों के लिए IBBI-ICICI नोटिस और cross-border-criteria मायने रखते हैं.
अगला कदम उठाने से पहले क्या चेक करें?
अपनी देनदारियों, आरोपों और asset-claims को संकलित करें. Kochi-आधारित वकील से initial consultation लेकर eligibility देखें.
अतिरिक्त संसाधन
दिवालियापन से जुड़ी जानकारी और सहायता के लिए निम्न आधिकारिक संस्थाएं मदद देंगी:
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)
- National Company Law Tribunal (NCLT)
- Ministry of Corporate Affairs (MCA)
अगले कदम
- अपनी देनदारियों का संकलन तुरंत करें और debt-portfolio बनाएं.
- IBBI-registered वकील या insolvency-practitioner से initial consultation लें.
- निकटतम NCLT bench के लिए venue और jurisdiction स्पष्ट करें.
- आवेदिका तैयार करें: petition, creditors-claims, asset-details आदि संलग्न करें.
- court-fee और lawyer-fee का अनुमान प्राप्त करें और बजट बनाएं.
- महत्वपूर्ण deadlines और moratorium-काल की जानकारी रखें.
- सतर्क रहें: document-verification और evidence-collection को मजबूत करें.
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