कोलकाता में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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कोलकाता, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. कोलकाता, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का केंद्रीय ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 है. यह कानून दिवाला प्रस्तुत करने, ऋण पुनर्गठन और समय-सीमा के भीतर समाधान पर केंद्रित है.
IBC corporate persons, partnership firms और individuals के लिए insolvency resolution के लिए एक सुव्यवस्थित फ्रेमवर्क देता है. Adjudicating authorities में National Company Law Tribunal (NCLT), National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) और Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) शामिल हैं.
कोलकाता में सामान्यतः मामले NCLT के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हैं. प्रक्रिया में moratorium, Interim Resolution Professional (IRP) या Resolution Professional (RP) नियुक्ति, Committee of Creditors (CoC) की संस्तुति और संभवतः liquidation शामिल हो सकता है.
“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time bound manner.”
उद्धरण स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - Preamble. Ministry of Corporate Affairs | IBBI
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
Scenario 1: कोलकाता आधारित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) ने बैंक ऋणों के कुछ किस्तें चुकानी बंद कर दीं. बैंकिंग क्रेडिटर्स के साथ CIRP शुरू करने या DRT के जरिए संरक्षण लेने के लिए कानूनी मार्ग चाहिए.
Scenario 2: एक बड़ी कोलकाता कॉर्पोरेट कंपनी को कई बैंकों से ऋण मिला है और क्रेडिटर्स की कई माँगें एक साथ हैं. ऐसे में CoC-निर्णय के साथ CIRP या समाधान योजना की तैयारी के लिए वकील जरूरी होगा.
Scenario 3: एक व्यक्तिगत गारंटर कोलकाता में है और उसने किसी कंपनी के ऋण के लिए गारंटर के रूप में दायित्व स्वीकार कर लिया है. गलती से स्थिति कोर्ट या NCLT में जाने की हो सकती है, जिससे कानूनी सलाह जरूरी हो जाती है.
Scenario 4: MSME या कॉर्पोरेट डेब्टर के लिए Pre-Packaged Insolvency Resolution Process पर विचार करना हो. ऐसे मामलों में वकील की रणनीति और कानूनी विकल्पों का चुनाव महत्वपूर्ण है.
Scenario 5: एक नागरिक के पास unsecured debt और क्रेडिट कार्ड देनदारियाँ हैं और वह व्यक्तिगत दिवालिया (personal insolvency) के दायरे में आना चाहते हैं. सही प्रक्रियाओं के चयन के लिए कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है.
इन सभी स्थितियों में कोलकाता के निवासी एक अनुभवी दिवाला एवं ऋण वकील की सहायता से सही अधिकारिक कदम उठा सकते हैं.
3. स्थानीय कानून अवलोकन
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) पूर्ण तंत्र प्रदान करता है जो कॉर्पोरेट डेब्टर्स, व्यक्तिगत डेब्टर्स और पार्टनरशिप फर्म्स के लिए insolvency और पुनर्गठन के प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर संचालित करता है. IBC के अनुसार CIRP, moratorium, CoC, RP आदि प्रमुख तत्व हैं.
SARFAESI Act, 2002 सिक्योर्ड ऋणों की रिकवरी के लिए बैंकिंग संस्थाओं को गिरवी परिसंपत्तियों पर तेज़ नियंत्रण देता है. यह एक वैकल्पिक मार्ग है जो बैंकिंग क्षेत्र में बुक्ड ऋणों के त्वरित निपटान के लिए महत्वपूर्ण है.
Debt Recovery Tribunal Act, 1993 डेब्ट रिकवरी ट्रिबunal (DRT) के माध्यम से बैंकों की ऋण वसूली yogyata की सुगम प्रक्रिया स्थापित करता है. यह IBC से अलग एक विशेष अदालत-स्तरीय मार्ग है.
हाल के परिवर्तन: IBC में 2019-2021 के संशोधन तेज़ ढांचे और छोटे ऋण संग्रह के लिए प्री-पूर्व- पैकेज प्रक्रियाओं के विकल्प लेकर आये. 2023 के संशोधनों ने व्यक्तिगत एवं कॉरपोरेट समूह के लिए कुछ ढांचे स्पष्ट किये हैं. इन संशोधनों के विवरण के लिए आधिकारिक स्रोत देखें.
कोलकाता निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह: यदि आप डेब्टर हैं तो जल्दी निष्क्रिय न बने; क्रेडिटर्स के साथ संलग्न योजना बनाएं. यदि आप क्रेडिटर हैं तो तथ्य-आधारित आवेदन और उचित आह्वान के साथ प्रक्रिया शुरू करें. स्थानीय अदालतों और अधिकारी निकायों के साथ संपर्क बनाए रखें.
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC भारत का केंद्रीय क़ानून है जो ऋण-सम्बन्धी संकट की समय-सीमा के भीतर पुनर्गठन और समाधान प्रदान करता है. यह Corporate, Partnership, और Individuals तीनों प्रकार के डेफ्टर्स पर लागू होता है.
IBC के तहत केस कौन फाइल कर सकता है?
क्रेडिटर, डेब्टर-प्रतिनिधि, और व्यक्तिगत डेब्टर कुछ स्थितियों में आवेदन कर सकते हैं. कॉरपोरेट डेब्टर्स के लिए CIRP शुरू किया जा सकता है. व्यक्तिगत दिवालिया के लिए स्वतंत्र प्रक्रिया उपलब्ध है.
Moratorium क्या है और यह कब लागू होता है?
Moratorium creditors को अदालतों के बाहर asset seize या судеб कार्रवाई से रोकता है. CIRP शुरू होने पर moratorium automatic रूप से लागू होता है.
CIRP क्या होता है?
CIRP एक समय-सीमा-आधारित पुनर्गठन प्रक्रिया है जिसमें IRP RP नियुक्त होता है. CoC के अनुमोदय से योजना बनती है और अदालत इसे मान्य करती है.
IBC की समय-सीमा कितनी होती है?
आधिकारिक नियम के अनुसार CIRP की प्रारम्भिक अवधि 180 दिन है. आवश्यक हो तो यह अवधि 90 दिन तक और बढ़ सकती है, पर CoC की मंजूरी आवश्यक है.
Interim Resolution Professional (IRP) और Resolution Professional (RP) कौन होते हैं?
IRP CIRP के शुरू होने पर पहले नियुक्त होता है. उसके बाद RP की नियुक्ति CoC द्वारा होती है. वे परिसंपत्तियों के प्रबंधन और योजना क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होते हैं.
क्या व्यक्तिगत दिवाला संभव है?
हाँ, व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया (personal insolvency) उपलब्ध है. Fresh Start और debt relief जैसे प्रावधानों के साथ व्यक्तिगत ऋणों पर राहत मिल सकती है.
कॉल्टर में वकील किस प्रकार खोजें?
IBC मामलों में कानून-सम्भव अनुभव, NCLT/NCLAT ज्ञान, और स्थानीय कोर्ट-सम्बन्धी समझ मायने रखती है. Kolkata-based advocates से initial consultation लें.
कानूनी फीस कैसे तय होती है?
फीस संरचना अनुभवीता, केस की जटिलता और घंटे के हिसाब से होती है. कुछ वकील पूर्व-निर्धारित फिक्स फीज भी लेते हैं.
IBC और SARFAESI के बीच अंतर क्या है?
IBC एक समग्र Insolvency Code है, जबकि SARFAESI विशेष रूप से secured asset recovery के लिए है. IBC में पुनर्गठन और संकल्प शामिल हैं, SARFAESI में परिसंपत्तियों के कब्जे और निपटान की प्रक्रिया है.
कानूनी सहायता के लिए कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
एडवोकेट, कानूनी सलाहकार और स्थानीय बार काउंसिल से संपर्क करें. कुछ मामलों में मुफ्त या कम दर पर कानूनी सहायता उपलब्ध हो सकती है.
अगर मामला Kolkata से जुड़ा हो तो क्या कुछ अलग होगा?
स्थानीय अदालतों, NCLT Kolkata बेंच, और स्थानीय बैंकों की नीतियाँ स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं. क्षेत्रीय ज्ञान लाभदायक रहता है.
क्या IBC में ऑनलाइन फाइलिंग संभव है?
हाँ, अधिकांश फॉर्म और प्रक्रियाएं ऑनलाइन हैं. IBC नेटवर्क के अंतर्गत फाइलिंग और नेविगेशन में सहायता मिलती है.
कहाँ से शुरू करें अगर आप unsure हैं?
सबसे पहले एक अनुभवी वकील से परामर्श लें. आपके केस के अनुसार सही कानून-मार्ग में कदम उठाने में विशेषज्ञ मार्गदर्शन जरूरी है.
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक साइट: https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - आधिकारिक साइट: https://nclt.gov.in/
- Ministry of Corporate Affairs (MCA) - IBC पेज - आधिकारिक साइट: https://www.mca.gov.in/
6. अगले कदम
- वर्तमान ऋण स्थिति साफ-साफ लिखें और सभी दस्तावेज एकत्र करें.
- IBC की कौन सी प्रक्रिया आपकी स्थिति पर सबसे उपयुक्त है यह तय करें.
- कोलकाता में experienced दिवाला एवं ऋण वकील से प्रारम्भिक परामर्श लें.
- कानूनी विकल्पों, लागत और संभावित परिणामों पर स्पष्ट सवाल पूछें.
- वकील की सहायता से दस्तावेजीकरण और आवेदन-प्रक्रिया तैयार करें.
- CoC, NCLT/NCLAT की समय-सीमाओं का ध्यान रखें और मार्गदर्शित निर्णय लें.
- आवश्यक होने पर प्राथमिकता के साथ अन्य विशेषज्ञों जैसे forensic, वित्तीय सलाहकार से भी परामर्श लें.
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