लुधियाना में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील

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Oberoi Law Chambers
लुधियाना, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

ऋण
दिवाला एवं ऋण
वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

प्रत्‍यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...

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1 उत्तर
सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
दिवाला एवं ऋण
सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...

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1. लुधियाना, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में: लुधियाना, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

लुधियाना में दिवाला एवं ऋण कानून का प्रमुख आधार Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है। यह कानून corporate संस्थाओं, साझेदारी फर्मों और व्यक्तिगत नागरिकों के ऋण संकट के समाधान के तौर-तरीके निश्चित करता है।

IBC के अनुसार CIRP (Corporate Insolvency Resolution Process) एक समय-सीमित समाधान प्रक्रिया है ताकि पुनर्गठन या परिसमापन तेज गति से हो सके। इस प्रक्रिया के लिए प्रमुख प्राधिकरण NCLT (National Company Law Tribunal) है और IBBI, Insolvency Professionals, Information Utilities आदि को नियंत्रित करता है।

"To regulate insolvency professionals, information utilities and insolvency professional agencies." (Official IBBI mandate)

लुधियाना में व्यवसायों के लिए यह जरूरी है कि वे बैक-अप ऋण, क्रेडिटर्स के दबाव और अधिकारी-अधिवक्ताओं के बीच सही मार्ग चुनें। CIRP में समय-सीमा का प्रावधान है ताकि देर न हो और creditors के हित संरक्षित रहें।

"An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals." (IBC 2016 - Preamble)

हाल के परिवर्तनों ने व्यक्तिगत दिवालियापन, कॉरपोरेट रीसॉल्यूशन प्रोसेस और क्रॉस-बॉर्डर insolvency जैसे विषयों पर अधिक स्पष्टता दी है। लुधियाना निवासियों के लिए यह समझना जरूरी है कि किस चरण पर कौन-सी अदालत या प्राधिकरण कदम उठाते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवाला एवं ऋण कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • एक लुधियाना-आधारित Textiles Unit ने बैंक से ऋण लिया था और ऋण चुकाने में देरी हो रही है। बैंक CIRP दाखिल करने से पहले दावा-याचिका, क्रेडिटर कमिटी (CoC) और वैकल्पिक पुनर्गठन के विकल्पों को समझना चाहेंगे। विशेषज्ञ वकील प्रक्रिया के हर चरण में मार्गदर्शन दे सकते हैं।

  • कंपनी को संकट-स्थिति में restructuring की आवश्यकता है और CoC के साथ व्यवहार करते समय वैकल्पिक समाधानों पर सलाह चाहिए। अनुभवी अधिवक्ता CIRP की रणनीति, समय-सीमा और कीमत-चक्र के बारे में स्पष्ट जानकारी दे सकते हैं।

  • व्यक्ति- insolvency (Personal Insolvency) के केस में भारी ऋण-भार है, जैसे क्रेडिट-कार्ड, पर्सनल लोन आदि। व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए सही दस्तावेज, स्पीसीफिक प्रोसीजर और समाधान के विकल्पों पर कानूनी सलाह आवश्यक होती है।

  • Punjab एवं Ludhiana के क्षेत्रीय न्यायालयों या NCLT से जुड़े आपत्तिजनक/प्रतिवादी मामलों में वकील की जरूरत होती है ताकि मान्य समय-सीमा और प्रक्रिया का पालन हो सके। कानूनों के अनुसार स्थानीय प्रक्रियाओं के अनुसार कदम उठाना होता है।

  • क्रॉस-बॉर्डर insolvency, क्रेडिटर-क्रियान्वयन, या Information Utilities (IU) के साथ दस्तावेज़ीकरण में सहायता चाहिए। ऐसे मामलों में एक अनुभवी कानूनी सलाहकार सही-उन्वेषण और रिकॉर्ड-प्रबंधन में मदद करता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: लुधियाना, भारत में दिवाला एवं ऋण को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC)

IBC भारत में दिवाला-निपटाने का मुख्य कानून है। यह कॉरपोरेट, व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के लिए CIRP, liquidation, और resolution frameworks देता है।

Insolvency and Bankruptcy Board of India Act, 2016 (IBBI Act)

IBBI कानून संस्थागत ढांचा बनाती है। यह insolvency professionals, information utilities और agencies के पंजीकरण, मानक और निगरानी निर्धारित करता है।

Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act)

यह बैंक-क्रेडिटर्स को सिक्योरिटी-आधारित ऋणों के त्वरित पुनर्गठन, संपत्ति-अपने अधिकार और परिसंपत्तियों के नियंत्रण हेतु औपचारिक उपाय देता है।

Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI Act)

यह बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं के लिए ऋण-प्राप्ति के लिए Debt Recovery Tribunals (DRTs) के माध्यम से त्वरित निपटान की व्यवस्था बनाती है, IBC के साथ-साथ कानूनी विकल्प प्रदान करती है।

Companies Act, 2013 (कुछ मामलों में नयापन और समन्वय के लिए)

IBC के अलावा कुछ कॉरपोरेट मामलों में सन्निकर्ष के लिए Companies Act के प्रावधान लागू रहते हैं, विशेषकर फेर-होल्डिंग और प्रस्तावित समायोजन के लिए।

4. सामान्य प्रश्न-उत्तर (FAQ)

कौन सी ऋण-निपटान प्रक्रिया सबसे पहले देखी जा सकती है?

सबसे पहले Banks या Financial Creditor के साथ amicable settlement प्रयास करें। अगर समाधान नहीं होता है, CIRP के लिए NCLT के समक्ष आवेदन किया जा सकता है।

IBC के अंतर्गत CIRP कितने दिन में पूरा किया जाना चाहिए?

केंद्रीय नियम के अनुसार CIRP का लक्ष्य 180 दिनों के भीतर समाप्त करना है, जिसे CoC की सहमति से 90 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।

कौन आवेदन कर सकता है?

कॉरपोरेट डेब्टर के लिए ऑडिटेड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, सरकारी बैंकों, या समिति के सदस्य (CoC) के अनुरोध से आवेदन संभव है। व्यक्तियों के लिए भी व्यक्तिगत insolvency आवेदन संभव है।

मैं Ludhiana में एक वकील कैसे चुनूं?

IBC के अनुभव, Ludhiana-परिसर के NCLT/NCLC-सम्बन्धित केस, और पूर्व-प्रलेखन-स्तर देख करttar के बारे में पूछताछ करें। स्थानीय अदालतों के साथ परिचित अधिवक्ता-प्रोफाइल लाभदायक रहता है।

कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे?

कर्ज-राशि का रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, कंपनी-चार्टर, क्रेडिटर कमिटी के नोटिस, और CIRP-एप्लिकेशन फॉर्म आदि जरूरी होते हैं।

मेरा दावा गलत-अप्रमाणित होने पर क्या करूँ?

अपील या आपत्ति दाखिल करें, और अपने दावे के उचित प्रमाण दें। कानूनी प्रतिनिधि आपके पक्ष में कोटेशन, सम्झौते और तथ्यों को मजबूत करेगा।

व्यक्तिगत Insolvency के केस में क्या प्रक्रिया है?

व्यक्ति के आय-खर्च और Hybrid debt के आधार पर CIRP-प्रक्रिया हो सकती है। सूचित और प्रमाण-प्रमाणित दस्तावेज के साथ आवेदन किया जाना चाहिए।

स्थानीय अदालतों की क्या भूमिका है?

NCLT-लुधियाना क्षेत्र में insolvency-याचिका सुनवाई और निर्णय देता है। अदालत जैसी प्रक्रियाओं में समय-सीमा और क्रियान्वयन स्पष्ट किए जाते हैं।

टाइम-मैनेजमेंट और लागत कितनी होती है?

IBC-आधारित प्रक्रियाओं में लागत-निर्धारण: वकील शुल्क, पेशेवर फीस और कोर्ट-फीस शामिल हो सकते हैं। प्रारंभिक चरण में एक अनुमानित बजट बनाएं और खर्चों को ट्रैक रखें।

कानूनी सहायता के लिए Ludhiana कौन-सी सेवाएं देती हैं?

Ludhiana के कानून-फर्म्स IBC, NCLT और RBI-नीतियों के अनुसार सेवाएं देते हैं, जिसमें मामूली-मामलों से लेकर जटिल CIRP केस सम्मिलित हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन: दिवाला एवं ऋण से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों

6. अगले कदम: दिवाला एवं ऋण वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने क्षेत्र Ludhiana के अनुभवी Insolvency Lawyers/Advocates की सूची बनाएं।
  2. IBC केस-वर्क-एनालिसिस के लिए उनकी prior केस-क्रॉस-चेकिंग करें-कितने CIRP/LC केस देखे हैं?
  3. फीस-रचना, क्लाइंट-फीडबैक और सफलता-रेट की तुलना करें।
  4. पहला क्लायंट-इंटर्व्यू अवकाश में आकर केस-स्कोप स्पष्ट करें-दस्तावेज़-संरचना और समय-सीमा का परामर्श लें।
  5. स्थानीय अदालतों में उनकी उपस्थिति-प्रमाण पन्ने देखें और कॉनफिडेन्स-स्तर समझें।
  6. विश्वसनीय रेफरल से मिलकर प्रारम्भिक प्रस्ताव (Engagement Letter) मांगें।
  7. ठोस निष्कर्ष के बाद, औपचारिक रूप से प्रतिनिधित्व-समझौता करें और जरूरी दस्तावेज़ प्रदान करें।

लुधियाना निवासियों के लिए व्यावहारिक सल्ला: IBC प्रक्रिया के समय-सीमा और जवाबदेही को समझना आवश्यक है ताकि creditors के साथ त्वरित, पारदर्शी और न्याय-संगत समाधान मिल सके। स्थानीय वकील आपकी उपलब्ध-डॉक्यूमेंटेशन, समय-सीमा और अदालत-प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन दे सकते हैं।

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