लुधियाना में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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Oberoi Law Chambers
लुधियाना, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. लुधियाना, भारत में दिवालियापन कानून के बारे में: [ लुधियाना, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन ]

दिवालियापन कानून भारत में Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के तहत नियंत्रित है। यह वित्तीय संकट में फँसे व्यक्तियों-उद्योगों के लिए त्वरित समाधान ढूंढने की कोशिश करता है। केन्द्रीय स्तर पर IBC को लागू कराने के लिए IBBI, NCLT और CoC जैसी संस्थाएं सक्रिय हैं।

लुधियाना जैसे नगरों में निजी व्यवसायों के लिए यह कानून क्रमबद्ध ऋण समाधान, पुनर्संगठन और परिसमापन की प्रक्रिया देता है। यह क्षेत्र सरकार तथा बैंकों के साथ-साथ देनदारों और अन्य हितधारकों के अधिकार संतुलित करने का प्रयास करता है।

उद्धरण:

Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.
(संदर्भ: IBC 2016 का पREAMBLE) official source

उद्धरण:

IBBI is the regulator for the insolvency resolution profession, information utilities and insolvency professional agencies.
(संदर्भ: IBBI आधिकारिक पन्ना) official source

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। लुधियाना, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

  • परिदृश्य 1: लुधियाना की एक सूक्ष्म, हस्तशिल्प-आधारित इकाई फैक्ट्री ऋण पर डिफॉल्ट हो जाती है। बैंक CIRP प्रारम्भ करने की मांग कर सकता है, पेशेवर मार्गदर्शन जरूरी होता है।
  • परिदृश्य 2: एक निजी व्यवसायी के मालिक पर व्यक्तिगत और व्यवसायिक ऋण का बोझ है। Personal Insolvency या IBC के व्यक्तिगत समाधान विकल्प समझने व लागू कराने के लिए वकील चाहिए।
  • परिदृश्य 3: MSME के लिए working capital ऋण में default के कारण ऋण-संकट आया हो। CoC के साथ समाधान प्लान बनवाने में अधिवक्ता मदद करें।
  • परिदृश्य 4: Ludhiana क्षेत्र के NBFC/बैंक से NPA दर्ज हो गया हो और बैक-अप विकल्प (RDDBFI/SARFAESI) के साथ IBC का विकल्प सामने हो। कानूनी रणनीति चाहिए।
  • परिदृश्य 5: एक साथ कई हितधारक, सप्लायर्स और बैंक एक साथ समाधान चाहते हैं। क्रॉस-हिटिंग कानूनों के बीच संतुलन में एक अनुभवी वकील जरूरी है।
  • परिदृश्य 6: यदि आप Ludhiana में एक अस्थायी व्यवसाय चलाते हैं और दिवाला-निवारण के बाद पुनर्निर्माण की योजना बनाते हैं, तो IBC के PPIRP/PPIRP-like विकल्पों के बारे में विशेषज्ञ सलाह चाहिए।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ लुधियाना, भारत में दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC)-केंद्रीय कानून जो कंपनियों, पार्टनरशिप और व्यक्तियों के लिए ऋण समाधान, पुनर्गठन और परिसमापन की प्रक्रिया संचालित करता है।
  • Recovery of Debts due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI)-बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के बकाए की वसूली हेतु दायर मामलों के लिए एक प्रमुख वैकल्पिक ढांचा।
  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Securities Interest Act, 2002 (SARFAESI)-बैंकों के सिक्योरिटीज-आधारित ऋण वसूली के क्षेत्र में शक्तिशाली उपाय।

कानून के दायरे में Ludhiana के व्यवसायी और नागरिक IBC के अंतर्गत समाधान चुनते हैं, पर UDIBI के नियम और RDDBFI/SARFAESI जैसे प्रावधान भी प्रचलित हैं। स्थानीय न्याय-प्रशासन के लिए NCLT क्षेत्राधिकार में फाइलिंग निर्भर करती है, जो पंजीकृत कार्यालय पर आधारित होती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [10-12 प्रश्न-उत्तर]

IBCs का उद्देश्य क्या है?

IBC का उद्देश्य ऋणदाता-देयता के बीच त्वरित, निष्पक्ष समाधान देना है। यह परिसमापन, पुनर्गठन और ऋण इक्विटी के संतुलन पर केंद्रित है।

IBC के तहत CIRP क्या है?

CIRP एक समय-सीमित प्रक्रिया है जिसमें ऋणदाता, कर्जदार और CoC मिलकर समाधान ढूंढते हैं। उदाहरण के तौर पर 180 दिन के भीतर प्रस्तावित योजना बनती है।

कौन दायर कर सकता है?

कॉरपोरेट डेब्टर, व्यक्तिगत डेब्टर और LLP आदि IBC के अंतर्गत आ सकते हैं। दायर करने के लिए पंजीकृत कार्यालय और.default की स्थिति देखी जाती है।

केंद्रीय अदालत किसके क्षेत्राधिकार में है?

NCLT Insolvency और Bankruptcy Code के अनुसार निर्णायक अधिकार है। क्षेत्राधिकार पंजीकृत कार्यालय पर निर्भर है।

क्या मैं CIRP के दौरान अपने व्यवसाय चलाकर चला सकता हूँ?

सीआरपी के दौरान व्यवसाय का संचालन सामान्य तौर पर जारी रहता है परितोषिक-पालन और the CoC के दिशानिर्देशों के अनुसार।

Section 12A क्या है?

Section 12A से CIRP के दौरान दायर योजना का withdrawal संभव हो सकता है, बशर्ते कोर्ट से अनुमति मिले और कर्जदाता मानी हो।

मैं Ludhiana से कैसे फाइल करूं?

प्री-फाइलिंग से पहले पंजीकरण, दस्तावेज़ की छानबीन और क्षेत्राधिकार के अनुसार NCLT/डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से निर्देश प्राप्त करें।

कानूनी शुल्क कितना होगा?

कानूनी शुल्क मामले के आकार, जटिलता और चयनित अधिवक्ता पर निर्भर став सकता है। पहले कॉन्सल्टेशन में स्पष्ट करें।

क्या निजी व्यक्ति भी दिवालिया हो सकता है?

हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत डेब्टर भी समाधान ढूंढ सकता है, खासकर नौकरी/व्यवसाय से जुड़ी देनदारियों के साथ।

वकील के साथ किस प्रकार की जानकारी साझा करनी चाहिए?

आधिकारिक दस्तावेज़: ऋण समझौते, ऋण बकाया, मौजूदा अदालत/eco-डॉक्यूमेंट्स, correspondence आदि साथ रखें।

आप वकील कैसे चुनें?

IBC अनुभव, Ludhiana-आधारित सफलता, CoC/समझौते के साथ काम करने की क्षमता देखते हुए चयन करें।

क्या IBC के अलावा अन्य रास्ते उपलब्ध हैं?

RDDBFI, SARFAESI और कोर्ट-कम-सरकारी उपाय भी उपलब्ध हैं। विकल्पों को एक साथ देखने के लिए अधिवक्ता से सलाह लें।

5. अतिरिक्त संसाधन: [दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं]

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)-IBC प्रोफेशनल्स, इंफो-यूटिलिज और संस्थाओं का नियामक।
  • National Company Law Tribunal (NCLT)-IBC के अंतर्गत दिवालियापन-सम्बंधी विवादों की अदालत।
  • Punjab State Legal Services Authority (PSLSA)-ग़रीब एवं जरूरतमंदों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता सेवाएं उपलब्ध कराती है।

इन संस्थाओं की आधिकारिक साइटें उपयोगी मार्गदर्शन, फॉर्म्स और नवीनतम निर्देश प्रदान करती हैं।

IBBI आधिकारिक साइट | NCLT आधिकारिक साइट | MCA (IBC संबंधी जानकारी) आधिकारिक साइट | PSLSA आधिकारिक साइट

6. अगले कदम: [दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने केस का प्रकार स्पष्ट करें: व्यक्तिगत, कॉरपोरेट, MSME आदि।
  2. लुधियाना-आधारित अधिवक्ताओं की सूची बनाएं जिनके पास IBC अनुभव हो।
  3. स्पष्ट फीस संरचना और अनुमानित खर्च पूछें।
  4. पूर्व मामलों का परिणाम, क्लाइंट-रेफरेंस और केस-काउंसेलिंग पर्सन देखें।
  5. पहली परामर्श में पूरे डाक्यूमेंट्स के साथ जाएँ-ऋण समझौते, बकाया राशि, ड्यू-डॉक्यूमेंट्स।
  6. उचित क्षेत्राधिकार का स्पष्ट निर्णय लें (पंजीकृत कार्यालय के अनुसार NCLT/डिस्ट्रिक्ट कोर्ट)।
  7. एक लिखित योजना, मार्गदर्शिका और टाइम-लाइन का समझौता करें ताकि透明ता बनी रहे।

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