राजकोट में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील

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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

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ऋण
दिवाला एवं ऋण
वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

प्रत्‍यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...

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सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
दिवाला एवं ऋण
सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...

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1. राजकोट, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में

राजकोट में दिवाला एवं ऋण कानून राष्ट्रीय ढांचे का हिस्सा है। यह विषय निराश्रित ऋण, ऋण-वसूली और पुनर्गठन के लिए मुख्य कानूनों पर आधारित है।

IBC 2016 कम्पनीज, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के लिए समयबद्ध समाधान देता है। कारोबारिक और व्यक्तिगत देनदारियाँ इन प्रावधानों के अधीन आती हैं।

न्यायिक प्रक्रियाएं सामान्यतः National Company Law Tribunal, NCLT के अधीन शुरू होती हैं और ऋण-वसूली के लिए Debt Recovery Tribunal, DRT के प्रावधान लागू होते हैं।

"This Act may be called the Insolvency and Bankruptcy Code, 2016." (Source: Legislation.gov.in - Insolvency and Bankruptcy Code, 2016)
"to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time bound manner." (Source: Legislation.gov.in - Preamble of Insolvency and Bankruptcy Code, 2016)

राजकोट निवासियों के लिए व्यावहारिक रूप से, बिजनेस डिफॉल्ट, कर्ज-बचाव और व्यक्तिगत ऋण मामले एक ही कानूनी ढांचे में आते हैं। परिणामस्वरूप वकील एक्शन-आउट निर्णयों में सहायता कर सकते हैं।

हाल के परिवर्तन के तहत IBC में संशोधनों ने छोटे उद्यमों, MSMEs और समय-सीमा आधारित प्रक्रिया को मजबूत किया है। इससे ऋण विवादों का त्वरित निपटारा संभव हुआ है और वैकल्पिक समाधान को प्राथमिकता दी गयी है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

राजकोट में दिवाला एवं ऋण मामलों में कानूनी सहायता लेने के चार से छह विशिष्ट परिदृश्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक परिदृश्य में आपके हितों की रक्षा जरूरी है।

  • बैंक डिफॉल्ट-समझौता या पुनर्गठन प्रयास राजकोट की एक दीर्घकालिक ट्रेडिंग कंपनी ने बैंक के साथ पुनर्गठन हेतु चर्चा शुरू की है। वकील नियमों और समय-सीमाओं को स्पष्ट कर सकता है।
  • एमएसएमई दिवाला संरक्षण के लिए आवेदन एक राजकोट स्थित छोटे उद्योग ने ऋण चुकौती की असमर्थता दर्ज की है। Insolvency प्रोफेशनल की सहायता आवश्यक होगी।
  • कस्टमर क्रेडिटर बनाम ऑपरेशनल क्रेडिटर विवाद कर्ज लेकर चल रहे व्यवसाय में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कानूनी मार्गदर्शन से अधिकार स्पष्ट होते हैं।
  • डिफॉल्ट के कारण संपत्ति की सुरक्षा परिकल्पना प्रतिरक्षा देनदार द्वारा परिसमापन से पहले संपत्ति के मूल्यांकन और संरक्षण की जरूरत होती है। वकील प्रक्रिया समझाते हैं।
  • डिफॉल्ट से जुड़े डिपार्टमेंटल और कोर्ट प्रक्रियाएं Rajkot जिले के मामले NCLT और DRT के क्षेत्राधिकार में आ सकते हैं। वरिष्ठ advosate आपकी केस-स्कैनिंग करेंगे।
  • घरेलू/पारिवारिक ऋण विवाद व्यक्तिगत दिवाला या समाधान प्रक्रियाओं के लिए कानूनी सलाह आवश्यक हो Puede हो सकती है।

राजकोट में स्थानीय वकील चयन करते समय ध्यान दें कि वे IBC, SARFAESI और RDDBFI के साथ-साथ स्थानीय अदालतों के precedents से परिचित हों।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

राजकोट, गुजरात क्षेत्र के अंतर्गत दिवाला एवं ऋण से जुड़े कुछ प्रमुख कानून निम्न हैं:

  • दिवाला एवं ऋण संहिता, 2016 (IBC 2016) - कॉरपोरेट, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के लिए लैंगिक, समय-सीमा और संरचना प्रदान करता है।
  • ऋण वसूली कानून - SARFAESI Act, 2002 - बैंकों और वित्त संस्थाओं को सिक्योरिटीज पर सेक्शन-13(4) के अंतर्गत त्वरित अवरोध और संपत्ति वैधानिक नियंत्रण देता है।
  • ऋण वसूली से संबंधित RDDBFI Act, 1993 - बैंकों और वित्त संस्थाओं के डेब्ट-ड्यू पर अदालत-आधारित वसूली के उपाय निर्धारित करता है।

राजकोट के लिए इन कानूनों के क्रियान्वयन के लिए NCLT और DRT-आधारित प्रविधियाँ लागू होती हैं। स्थानीय वकील इन प्रक्रियाओं के त्वरित मार्गदर्शन दे सकते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

IBC एक एकीकृत कानून है जो insolvency और bankruptcy मामलों को समय पर हल करने के लिए बना है। यह विभिन्न प्रकार के देनदारों को एक साथ लाता है ताकि मूल्य अधिकतम हो सके।

IBC के तहत किस प्रकार के मामले NCLT में जाते हैं?

IBC के अनुसार कॉरपोरेट डिप्टर्स, व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के insolvency proceedings NCLT के क्षेत्राधिकार में आते हैं। निर्णय उच्च न्यायालय के समकक्ष समीक्षा के साथ होते हैं।

राजकोट में दिवाला प्रक्रिया कितनी तेजी से हो सकती है?

IBC के अनुसार CIRP सामान्यतः 180 दिन में पूरा करने की कोशिश की जाती है, जिसमें अधिकतम 90 दिन का विस्तार संभव है।

मैं एक व्यक्तिगत दिवालिया होने के लिए कैसे आवेदन कर सकता हूँ?

व्यक्ति के तौर पर insolvency process के लिए योग्य insolvency professional के साथ आवेदन किया जाना चाहिए। अदालत-स्तरीय मार्गदर्शन सफल ہوتا है।

कौनसा कानून गृह ऋण के मामलों के लिए प्रबल है?

गृह ऋण के कुछ मामलों में SARFAESI Act और RBI के निर्देश प्रभावी रहते हैं, विशेषकर बैंक ऋणों की सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाइयों में।

क्रेडिटर बनाम डिफॉल्टर के मामले में क्या प्रक्रिया होगी?

क्रेडिटर समूह समिति ऑफ़ क्रेडिटर्स (CoC) बनाता है, फिर समाधान योजना पर फैसला होता है। कोर्ट और ट्रिब्यूनल जरूरी निगरानी रखते हैं।

क्या MSMEs के लिए विशेष प्रावधान हैं?

MSMEs के लिए Pre-Pack insolvency और त्वरित प्रक्रियाओं को कानून में शामिल किया गया है ताकि डिफॉल्ट जल्द नियंत्रित हो सके।

डिस्प्यूट्स के आर्किटेक्चर के बारे में क्या जानकारी आवश्यक है?

डिसप्यूट्स के लिए ऋण दस्तावेज, बैंकों के रिकॉर्ड, देय तिथि और क्रेडिटर के दस्तावेज तैयार रखें ताकि प्रक्रिया सरल हो।

राजकोट में कौन-कौन से कोर्ट NCLT के साथ जुड़े हैं?

राजकोट के केस सामान्यतः गुजरात के NCLT-क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आ सकते हैं। मामलों के अनुसार Ahmedabad/Mumbai बेंचों के निर्णय प्रभावी होते हैं।

मैं अपने ऋण विवाद के लिए किस प्रकार के डॉक्यूमेंट तैयार रखूं?

ID प्रूफ, पैन-आधार, वर्तमान ऋण खाते का विवरण, बकायदा की विस्तृत सूची, बैंक के संलग्न आदेश और पिछला संधि-पत्र तैयार रखें।

क्या दिवाला के बाद भी संपत्ति मिल सकती है?

हां, अंतिम समाधान के अनुसार संपत्ति का मूल्यांकन होते हुए creditors के लिए भुगतान किया जा सकता है या परिसमापन हो सकता है।

क्या राजकोट में यह प्रक्रिया लागत में कितनी आती है?

कानूनी शुल्क केस की जटिलता पर निर्भर करता है। शुरुआती कॉन्सल्टेशन आम तौर पर न्यूनतम होती है और केस बढ़ने पर बढ़ सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

दिवाला एवं ऋण से जुड़ी जानकारी के लिए निम्न तीन संस्थागत स्रोत उपयोगी हैं:

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक साइट: www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - आधिकारिक साइट: www.nclt.gov.in
  • Reserve Bank of India (RBI) - ऋण-सम्बन्धी निर्देश और मॉनीटरिंग साइट: www.rbi.org.in

6. अगले कदम

  1. अपने केस का प्रकार निर्धारित करें-व्यक्तिगत दिवाला, MSME, या कॉरपोरेट डिफॉल्ट।
  2. संबंधित दस्तावेज एकत्र करें-पहचान, आय-प्रमाण, ऋण विवरण, बकाया ब्याज आदि।
  3. राजकोट-आधारित अनुभवी दिवाला वकील खोजें और पहले परामर्श तय करें।
  4. पहला कानूनी मूल्यांकन कर खरीद-फरोख्त योजना बनाएं और खर्च का अनुमान लें।
  5. कानूनी सलाह के साथ केस-स्टेटमेंट और फाइलिंग ड्राफ्ट करें।
  6. क्रेडिटर CoC के साथ संवाद और निष्कर्ष के लिए समय-सीमा निर्धारित करें।
  7. आवश्यकता अनुसार स्थानीय अदालतों में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें और प्रतिपादन करें।

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