राजकोट में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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राजकोट, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1- राजकोट, भारत में दिवालियपन कानून के बारे में: राजकोट, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
राजकोट गुजरात का प्रमुख व्यावसायिक शहर है जहाँ दिवालियपन कानून लागू होते हैं. भारत का Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) सभी व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और कंपनियों के लिए समय-सीमित समाधान देता है. मुख्य निर्णय-उपयुक्त संस्था राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) है और नियामक इकाई Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) है.
राजकोट के व्यवसायी और कर्जदार NCLT Ahmedabad Bench में आवेदन कर सकते हैं और वहाँ सुनवाई होती है. IBC का उद्देश्य परिसंपत्तियों के मूल्य को अधिकतम करना और पुनर्गठन के माध्यम से आर्थिक-वापसी सुनिश्चित करना है. यह कानून समय-सीमा के भीतर समाधान निष्पादन का लक्ष्य रखता है.
"The object of the Code is to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals."
- Source: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (official text) - IBBI
"IBBI regulates insolvency professionals, insolvency professional entities and information utilities."
- Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) official site - IBBI
राजकोट के लिए संक्षिप्त स्थानीय प्रवाह
गुजरात में कुछ मामलों की सुनवाई NCLT Ahmedabad Bench में होती है, जिसमें राजकोट-आधारित कंपनियाँ या व्यक्तियाँ फाइल कर सकते हैं. अदालत के निर्णयों के साथ साथ रीसॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) और इन्फॉर्मेशन यूनिट्स की भूमिका स्पष्ट है.
आवश्यक पंक्ति-किनारों
यदि आप राजकोट में कर्ज में डूबे हैं तो сначала स्थानीय कानून सलाहकार से मिलना लाभदायक है. वे IBC के तहत उपयुक्त प्रक्रिया-CIRP, उन्तीस-धारा के क्रिया-कलाप, और क्रेडिटर-समझौते-के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन देंगे.
2- आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य
दर्शनीय परिदृश्य 1: राजकोट की एक SME जिसे बैंक ऋणों का पुनर्गठन या समाधान चाहिए
एक स्थानीय 제조-उद्योग/SME ने ऋण चुकाने में कठिनाई का सामना किया है. बैंक धनराशी मांग रहा है और कॉर्पोरेट दिवालियापन प्रक्रिया (CIRP) या ऋण पुनर्गठन के विकल्प चाहिए. एक वकील आपके लिए उपयुक्त STRATEGY बनाकर दाखिलियाँ, खाद्य-चक्र और क्रेडिटर-समझौते की तैयारी कर सकता है.
दर्शनीय परिदृश्य 2: राजकोट में एक व्यक्तिगत व्यापारी व्यक्तिगत दिवालिया (individual insolvency) के लिए प्रयास कर रहा है
व्यक्ति-स्तर पर ऋण बढ़ गया है और ऋण चुकाने में असमर्थता दिखती है. IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया के माध्यम से समाधान संभव हो सकता है. कानूनी सलाहकार वित्तीय-संगठन के साथ आवेदन, संपत्ति वितरण और आर्थिक पुनर्वास के कदम समझा सकता है.
दर्शनीय परिदर्श 3: राजकोट स्थित साझेदारी फर्म दीर्घकालिक संकट का सामना कर रही है
साझेदारी फर्म के अमाउंट-डिफ़ॉल्ट, भागीदारी-सम्बन्धी विवाद और देनदारी की विभाजन की चुनौती है. पार्टनरशिप-ड्राइव्हन IBC के अनुरूप समाधान, या अवशोषण-समापन की तैयारी में एक वकील मार्गदर्शन देगा.
दर्शनीय परिदृश्य 4: राजकोट-आधारित वस्तु सप्लाई के क्षेत्र में देनदार कंपनी से चुकौती नहीं मिल रही
विक्रेता के रूप में ऋण चुकौती न मिल पाने पर क्रेडिटर प्रक्रिया (Section 7 या 9 के तहत) शुरू हो सकती है. वकील इस प्रक्रिया की समयसीमा, क्रेडिटर-प्रकृति, और वितरण-विधान की दिशा-निर्देश देंगे.
दर्शनीय परिदृश्य 5: एक स्थानीय स्टार्ट-अप को अचानक निदेशक-स्तर पर संकट और पूंजी बचाने की जरूरत
स्टार्ट-अप में नकदी धोखाधड़ी या देनदारियों के कारण पुनर्गठन की जरूरत हो सकती है. कोर्ट-उन्मुख समाधान के बजाय प्री-पैक या पुनर्गठन प्रक्रियाओं पर कानूनी सलाह से व्यावहारिक योजना बनती है।
दर्शनीय परिदृश्य 6: स्थानीय ऋण-देता बैंक या वित्तीय संस्थान के विरुद्ध क्रेडिट-डिफॉल्ट केस
बैंक एक वित्तीय क्रेडिटर के रूप में CIRP शुरू कर सकता है. इस स्थिति में सही दस्तावेज़, क्रेडिटर-लिस्टिंग और RP चयन अहम होते हैं. अनुभवी advokaat इस पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर सकते हैं.
3- स्थानीय कानून अवलोकन: राजकोट, भारत में दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC)
IBC केंद्र-स्तर पर दिवालियापन से जुड़ी प्रक्रियाओं को एक साथ लाता है. यह कॉरपोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी फर्मों के लिए समय-सीमित समाधान का प्रावधान देता है. राजकोट के मामलों में NCLT Ahmedabad Bench इस कानून के तहत सुनवाई करता है.
The Insolvency and Bankruptcy Board of India Act, 2016 (IBBI Act)
IBBI बोर्ड Insolvency Professionals, Entities और Information Utilities को नियंत्रित करता है. यह तंत्र पारदर्शिता और प्रक्रियाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है. IBBI के नियम और 청ंाव-गाइडेंस यहाँ से मिलते हैं.
Companies Act, 2013 (रेगुलेशन और winding up से जुड़ा भाग)
कॉर्पोरेशन मामलों में कंपनियाँ जब दिवालिया हो जाएं तो NCLT के समक्ष winding up की प्रक्रिया शुरू होती है. IBC के साथ यह कानून कंपनियों के पुनर्गठन और liquidation के विकल्पों को स्पष्ट करता है.
4- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवालियापन क्या है?
दिवालियापन वह कानूनी प्रक्रिया है जिसमें अतः-ऋण-कर्ताओं के अधिक ऋण के कारण देनदार की संपत्ति का मूल्य पुनर्गठित होकर ऋण चुकाने के रूप में बाँटा जाता है. यह प्रक्रिया IBC द्वारा समय-सीमित बनाई गई है.
राजकोट में दिवालियापन मामले कहाँ दायर होते हैं?
कॉर्पोरेट मामलों के लिए NCLT Ahmedabad Bench मुख्य मंच है. व्यक्तिगत insolvency या साझेदारी-फर्म के मामलों में प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है. स्थानीय वकील मार्गदर्शन से सही मंच तय किया जाता है.
IRP/RP क्या है और उनकी भूमिका क्या है?
इन्फॉर्मेशन यूनिट के नेतृत्व में RP (Resolution Professional) दिवालियापन प्रक्रिया को संचालित करता है. RP परिसंपत्तियों के मूल्यांकन, क्रेडिटर-एग्रीमेंट और पुनर्गठन प्रस्ताव को निष्पादन करता है.
IBC के तहत कितना समय लगता है?
कॉरपोरेट मामलों में सामान्यतः CIRP 180 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य होता है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है. व्यक्तिगत insolvency में भी तेज-समयबद्ध प्रक्रियाएं लागू होती हैं.
कौन सी फीस/खर्च संबंधित पक्ष से लिए जाते हैं?
RP और अन्य प्रतिभागियों की फीस, कोर्ट-आदेश के अनुसार क्रेडिटर्स के हिसाब से बँटी जाती है. यह लागत IBBI नियमों के अंतर्गत तय की जाती है.
कौन से दस्तावेज़ जरूरी होते हैं?
चालू ऋण विवरण, क्रेडिटर-लिस्ट, संविदाओं के प्रमाण, परिसंपत्ति दस्तावेज और आय-व्यय के रिकॉर्ड आवश्यक होते हैं. शुरुआती क्लियरिंग के लिए एक संरचित डाक्यूमेंटेशन जरूरी है.
क्या व्यक्तिगत दिवालिया नियम अलग होते हैं?
हाँ, व्यक्तिगत insolvency के लिए व्यक्तिगत-स्तर की प्रक्रियाएं हैं और संयुक्त मामलों में भी अलग नियम लागू होते हैं. एक अनुभवी advokaat मार्गदर्शन देगा।
राजकोट में दैनन्दिन Insolvency से जुड़े उपाय क्या हैं?
केंद्रीय कानून लागू होते हैं; स्थानीय अदालतें और NCLT-आदेशों के अनुसार क्रियान्वयन होता है. कर-चुकौती, संपत्ति-वितरण और फीस-निर्धारण जैसे निर्णय समय-सीमित होते हैं.
क्या IBC MSMEs के लिए कुछ देता है?
हाँ, MSMEs के लिए कुछ प्रक्रियात्मक प्रावधान और आसान रास्ते सुझाए गए हैं ताकि ऋण-संकट को जल्दी हल किया जा सके. क्षेत्रीय ऋण-सम्बंधी सलाह भी आवश्यक है.
क्या दिवालियापन प्रक्रिया से व्यवसाय वापस आ सकता है?
खत्म नहीं, बल्कि पुनर्गठन और पुनःउद्धार के अवसर मिलते हैं. सफल मामले परिसंपत्ति-व्यवस्थापन, DIP financing और पुनर्घोषणा से संभव होते हैं.
क्या दिवालियापन के बाद क्रेडिटर-प्रयोग होते हैं?
हाँ, परिसंपत्तियों के विन्यास, क्रेडिटर-रिपे-आडेशन और वितरण के नियम क्रम से लागू होते हैं. यह सभी IBC और RP के निर्देशन में होता है.
क्या पुरानी RDDBFI जैसे कानून अभी भी प्रभावी हैं?
RDDBFI जैसे कानून पुराने स्थिति में थे; लेकिन वर्तमान मानक IBC है और कई पुराने नियमों को IBC के भीतर समाहित किया गया है. नवीनतम कानून-परिवर्तनों के अनुसार प्रक्रिया बदली है.
5- अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक मंच और नियमावली के लिए। https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - Ahmedabad Bench - कॉर्पोरेट दिवालियापन मामलों का अदालती मंच। https://nclt.gov.in/
- Ministry of Corporate Affairs (MCA) - कंपनी कानूनों और IBC से जुड़े मार्गदर्शक दस्तावेज। https://www.mca.gov.in/
6- अगले कदम
- आपकी स्थिति का आकलन करें और निर्णय करें कि CIRP, व्यक्तिगत insolvency या पुनर्गठन ठीक रहेगा।
- आवश्यक दस्तावेज़ एकत्र करें-ऋण-सूची, आय-व्यय, संविदाएं, संपत्ति-प्रमाण आदि।
- राजकोट में IBC में अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार खोजें जो आपकी प्रकृति के केस में अनुभवी हों।
- प्रारम्भिक परामर्श में केस-आधार, समय-सीमा, फीस और रणनीति स्पष्ट करें।
- धारणा देने के लिए 2-3 वकीलों के साथ संक्षिप्त परामर्श लें और निर्णय करें।
- रेटिनर समझौता पर हस्ताक्षर करें ताकि आगे के कदम स्पष्ट हों।
- कानूनी प्रक्रिया शुरू करें और आवश्यकता के अनुसार डॉक्यूमेंटेशन तथा प्रस्तुति तैयार रखें।
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