चंडीगढ़ में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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चंडीगढ़, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. चंडीगढ़, भारत में दिवालियापन कानून के बारे में
चंडीगढ़ में दिवालियापन कानून का मुख्य ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के अधीन चलता है। यह केन्द्र-निर्मित कानून समय-सीमा के भीतर पुनर्गठन और ऋण समाधान पर केंद्रित है। चंडीगढ़ के लिए NCLT के Chandigarh बेंच इन मामलों की सुनवाई करता है और IP के मार्गदर्शन में प्रक्रियाओं को संचालित करता है।
“The primary objective of this Code is to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”
IBC के अंतर्गत कॉरपोरेट डिब्टर, साझेदारी फर्म और व्यक्तिगत ऋणी शामिल होते हैं। कॉरपोरेट डिब्टर के लिए CIRP और व्यक्तिगत ऋणी के लिए IRP का समय-सीमा निर्धारण होता है, जिसे आम तौर पर 180 दिन की अवधि में पूरा किया जाना चाहिए और आवश्यक हो तो अतिरिक्त 90 दिन तक बढ़ाने की अनुमति मिलती है।
“The Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) is the regulator for the insolvency professionals, information utilities and credit information companies.”
चंडीगढ़ निवासियों के लिए कठिनाई वाले ऋण मामलों में NCLT Chandigarh bench, क्रेडिटर्स और देनदार के बीच संतुलन बनाकर निर्णय देता है। साथ ही Insolvency Professionals (IP) और Information Utilities के रोल को भी साफ करता है।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
IBC प्रक्रियाएं विशिष्ट नियमों और समय-सीमाओं के साथ आती हैं। एक अनुभवी advokate या कानूनी सलाहकार से मार्गदर्शन निर्णय प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बना सकता है। चंडीगढ़ के स्थानीय क्षेत्र में विशेषज्ञ की मदद केस की नियोजन और प्रस्तुति में फायदेमंद रहती है।
- उदाहरण 1: चंडीगढ़-आधारित उत्पादन इकाई के साथ बैंक ऋण डिफॉल्ट हुआ है; बैंक CIRP दाखिल कर सकता है; सलाहकार केस-रणनीति और दस्तावेज़ीकरण में सहायक होगा।
- उदाहरण 2: एक Chandigarh SMB को ऋण चुकाने में समस्या है; क्रेडिटर्स कमेटी के सुझावों के अनुरूप समाधान पाने में अनुभवी अधिवक्ता मदद कर सकता है।
- उदाहरण 3: एक Chandigarh निवासी के व्यक्तिगत ऋणों पर दबाव है; IRP/व्यक्तिगत दिवालियापन की प्रक्रियाओं के लिए कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक होता है।
- उदाहरण 4: SARFAESI या RDDBFI के तहत संपत्ति संरक्षण व ऋण वसूली के कदम उठाने होते हैं; एक कानून-गाइडेड वकील सही दायरा तय करेगा।
- उदाहरण 5: Cross-border insolvency के मामले जिसमें Chandigarh आधारित इकाई विदेशी ऋण के साथ जकड़ गई हो; अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार सलाह जरूरी है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
चंडीगढ़ में दिवालियापन से जुड़ी प्रमुख प्रविधियाँ केंद्रीय कानून इकाई IBC के अधीन आती हैं। IBC के अनुसार समय-सीमा, क्रेडिटर-क्रेडिटोरिया के अधिकार, और रिकॉर्डिंग प्रक्रियाओं का स्पष्ट ढांचा है।
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉरपोरेट, साझेदारी फर्म और 개인 ऋणों के पुनर्गठन और समाधान के लिए एक केंद्रीय कानून है।
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) - बैंकों के ऋणों के दायित्वों के भीतर अधिकार-प्रयोग और सुरक्षा हितों के प्रवर्तन के लिए प्रावधान देता है।
- Recovery of Debts due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI Act) - बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के बकायों की वसूली के लिए तात्कालिक तंत्र स्थापित करता है।
इन कानूनों की स्थानीय क्रियान्वयन-परिस्थितियाँ Chandigarh के NCLT बेंच द्वारा नियंत्रित होती हैं। साथ ही IBBI द्वारा Insolvency Professional और Information Utilities के लिए मानक स्थापित होते हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक केंद्रीय कानून है जो समय-सीमा के भीतर पुनर्गठन और insolvency resolution को सक्षम बनाता है। यह कॉरपोरेट, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों पर लागू होता है।
चंडीगढ़ में दिवालियापन दाखिल कैसे करें?
अधिकार प्राप्त पक्षों को NCLT Chandigarh में आवेदन दायर करना होता है। प्रक्रिया के लिए एक रजिस्टर IP या एडवोकेट की मदद लेना सुविधाजनक होता है।
क CIRP और IRP में क्या फर्क है?
CIRP कॉरपोरेट डिब्टर के लिए है, जिसमें क्रेडिटर्स के साथ मिलकर समाधान ढूंढा जाता है। IRP व्यक्तिगत दिवालियेपन के लिए है, जिसमें discharge और समाधान की प्रक्रिया संचालित होती है।
क्या मैं IP (Insolvency Professional) रख सकता हूँ?
हाँ, आप एक IBBI-मान्यता प्राप्त Insolvency Professional रख सकते हैं। IP केस-मैनेजमेंट और क्रेडिटर्स की समिति की निगरानी करता है।
डिस्चार्ज कब मिलता है?
डिस्चार्ज की अनुमति CIRP IRP के अंत में क्रेडिटर्स के साथ तय योजना के अनुसार मिलती है। कुछ स्थितियों में डिस्चार्ज पूरी तरह नहीं भी हो सकता।
IBC में कुल लागत कितनी होती है?
खर्च कानून-निर्भर है, पर IP फीस, कोर्ट फीस, और पेशेवर सेवाओं के शुल्क शामिल रहते हैं। Chandigarh में स्थानीय दरें थोड़ा भिन्न हो सकती हैं।
यह प्रक्रियाएं कितने समय तक चलती हैं?
कॉरपोरेट CIRP सामान्यतः 180 दिनों के भीतर शुरू होती है, जिसे आवश्यकता पर 90 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। व्यक्तिगत मामलों में समयसीमा भिन्न हो सकती है।
Chandigarh bench पर NCLT की भूमिका क्या है?
NCLT ChandigarhBench केस की सुनवाई, दायरियाँ और निर्णय देता है। न्यायिक मार्गदर्शन में क्रेडिटर्स और देनदार दोनों की भूमिका रहती है।
क्या मैं संपत्ति संरक्षित रख सकता हूँ?
कुछ स्थितियों में सुरक्षा-हितों के कारण संपत्ति का हस्तांतरण रोका जा सकता है। IP के मार्गदर्शन में स्टेप्स तय होते हैं।
Cross-border insolvency Chandigarh में कैसे काम करता है?
Cross-border मामलों में IBC के साथ विदेशी न्यायालयों और क्रेडिटर-क्रेडिटोरिया सुरक्षा नियमों का संतुलन आवश्यक होता है।
क्या IBC व्यक्तिगत ऋणों पर भी लागू है?
हाँ, IBC व्यक्तिगत ऋणों और एक-लायबिलिटी फर्मों के लिए भी कार्य करता है, बशर्ते कानून-निर्देशन पूरा हो।
यदि मेरा दावा अनुचित हो तो क्या करू?
आप को-विधिक/अधिवक्ता के साथ असहमति-निर्णय की अपील कर सकते हैं या समाधान योजना पर पुनर्विचार के लिए अनुरोध कर सकते हैं।
5. अतिरिक्त संसाधन
नीचे Chandigarh क्षेत्र में दिवालियापन से जुड़ी प्रमुख संस्थाओं के आधिकारिक स्रोत दिए गए हैं।
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - विक्रेता-प्रोफेशनल्स, सूचना उपयोगिता आदि पर नियमन केंद्र।
- National Company Law Tribunal (NCLT) - दिवालियापन, कंपनी कानून आदि के मामलों की सुनवाई।
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - NCLT के फैसलों के विरुद्ध अपीलें देखता है।
- Ministry of Corporate Affairs (MCA) - IBC तथा कंपनियों के पंजीकरण-नीतियाँ साथ-साथ कानून-सम्बन्धी सूचनाओं के स्रोत।
6. अगले कदम
- अपनी स्थिति स्पष्ट करें-कॉरपोरेट डिब्टर, व्यक्तिगत ऋण या MSME इत्यादि कौन सा वर्ग है।
- कौन से दस्तावेज़ चाहिए होंगे, उनका एक रफ-चेकलिस्ट बनाएं और एकत्र करें।
- चंडीगढ़-आधारित वकील या Insolvency Professional (IP) से शुरुआती परामर्श लें।
- स्थानीय NCLT Chandigarh बेंच के साथ आवश्यकताओं और समय-सीमाओं को समझें।
- IP की नियुक्ति करें और पहली बैठक में सभी पक्षों के दावों के रिकॉर्ड बनवाएं।
- दस्तावेज़-तैयारी, प्रतिक्रिया-लेखन और प्रस्तुतिकरण के लिए एक ठोस रणनीति बनाएं।
उद्धरण और आधिकारिक स्रोत वैश्विक मानक के अनुरूप हैं।
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