चेन्नई में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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चेन्नई, भारत

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Absolute Legal भारत में एक प्रतिष्ठित बहु-विशेषज्ञता वाला लॉ फर्म है, जिसे विभिन्न प्रकार के कानूनी मामलों को संभालने का 25...
Samvad Partners
चेन्नई, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 150 लोग
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Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
RAJENDRA Law Office LLP

RAJENDRA Law Office LLP

15 minutes मुफ़्त परामर्श
चेन्नई, भारत

2010 में स्थापित
उनकी टीम में 25 लोग
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"राजेंद्र लॉ ऑफिस एलएलपी" एक कानूनी फर्म है जो व्यापक और प्रभावी कानूनी समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।...
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1. चेन्नई, भारत में दिवालियापन कानून के बारे में: चेन्नई, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दिवालियापन कानून का मुख्य लक्ष्य कर्जदारों के साथ संगठित पुनर्गठन को सुनिश्चित करना है। यह कानून कंपनियों, भागीदारी फर्म्स और व्यक्तियों के लिए समय-bound समाधान का प्रावधान देता है। चेन्नई में इस प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (NCLT) चेन्नई बेंच और उससे जुड़े अधिकारी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

IBC के तहत सभी प्रमुख प्रक्रियाएं एक सुरक्षित ढांचे में चलती हैं ताकि क्रेडिटर्स के हित सुरक्षित रहें और रोजगार को संरक्षण मिले। चेन्नई निवासियों के लिए यह जरूरी है कि वे समय पर कानूनी मार्गदर्शन लें ताकिAssets के मूल्य का संरक्षण संभव हो सके।

“The objective of the Insolvency and Bankruptcy Code is to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - What is IBC

“During the moratorium period, no action may be initiated or continued against a corporate debtor without the permission of the Adjudicating Authority.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Code, Section 14 - Moratorium provisions

नोट:

चेन्नई निवासी के लिए NCLT चेन्नई बेंच का स्थान और क्षेत्राधिकार अन्य राज्यों से अलग हो सकता है। आधिकारिक मार्गदर्शन के लिए IBBI और NCLT वेबसाइट देखें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवालियपन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची

नीचे दिए परिदृश्यों में चेन्नई, तमिलनाडु के व्यवसाय और व्यक्तियाँ शामिल हैं। इन स्थितियों में एक अनुभवी advokat या कानूनी सलाहकार जरूरी हो सकता है।

  • चेन्नई स्थित एक कपड़ा उद्योग इकाई पर क्रेडिटर द्वारा IBC सेक्शन 7 के अंतर्गत डिफॉल्ट petition दाखिल किया गया है। विराम समय में संरक्षण, स्टेकहोल्डर हितों का संतुलन और समाधान योजना आवश्यक होती है।
  • एक व्यक्तिगत उधारकर्ता ने चेन्नई के निवासी के रूप में PIRP के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवालियापन का आवेदन किया है। उचित आय-खर्च योजना और ऋण समन्वय पथ तय करना जरूरी है।
  • चेन्नई-आधारित स्टार्टअप के विरुद्ध NCLT चेन्नई द्वारा liquidation orders जारी होने का खतरा है। ऐसे में मूल्य सुरक्षा और परिसंपत्ति विक्रय की योजना बनानी होती है।
  • सरकारी या निजी क्रेडिटर्स के साथ एक बड़े डिफॉल्ट मामले में moratorium और CoC (Committee of Creditors) के फैसलों के अनुरूप व्यवहार आवश्यक रहता है।
  • एक MSME डिफॉल्टर के पक्ष में क्रेडिटर्स और RP के बीच संचार, डीलाइवल और पुनर्गठन उपाय पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन चाहिए।

इन सभी परिस्थितियों में चेन्नई में स्थानीय अदालतों, आर्थिक क्षेत्र और बैंकिंग फ्रेमवर्क के अनुसार सही वकील चुनना लाभदायक रहता है।

सूचना:

चेन्नई-आधारित मामलों के लिए NCLT चेन्नई बेंच के precedents और IBBI के निर्देश अहम होते हैं। आधिकारिक मार्गदर्शन के लिए नीचे दिए संसाधन देखें:

3. स्थानीय कानून अवलोकन: चेन्नई, भारत में दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

इन कानूनों के साथ-साथ चेन्नई में स्थानीय न्यायिक प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉरपोरेट पर्सन, पार्टनरशिप firms और व्यक्तियों के लिए समय-बद्ध पुनर्गठन और दिवालिया प्रक्रियाएं स्थापित करता है।
  • Companies Act, 2013 - कंपनियों के winding up, liquidation और बोर्ड के निर्णयों के वैध तंत्र का मार्गदर्शन करता है; IBC से बाहर कुछ मामलों में लागू रहता है।
  • Insolvency and Bankruptcy Regulations, 2016 (IBBI Regulations) - insolvency professionals, agencies और प्रक्रियाओं के मानक नियम तय करते हैं।

“The IBC seeks to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”

Source: IBBI - About IBC

नोट:

चेन्नई में NCLT चेन्नई बेंच और IBBI का नियंत्रण स्थानीय व्यवसायों के लिए मार्गदर्शक नियमों के केंद्र हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवालियापन क्या है?

दिवालियापन वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति या कंपनी अपने ऋण चुकाने में असमर्थ हो जाती है। IBC यह तय करता है कि ऐसी स्थिति में पुनर्गठन या liquidation कैसे होगा।

IBC कब लागू हुआ और इसका उद्देश्य क्या है?

IBC 2016 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य समय-बद्ध पुनर्गठन, भुगतान सुरक्षित करना और रोजगार संरक्षित रखना है।

चेन्नई में दिवालियापन केस कौन सी अदालत देखती है?

चेन्नई में NCLT चेन्नई बेंच दिवालियापन मामलों की प्रमुख अदालत है। इसके appellate अधिकार NCLAT द्वारा नियंत्रित होते हैं।

IBC के कौन-कौन से चरण होते हैं?

मुख्य चरण: आवेदन, moratorium, resolution plan, CoC निर्णय और यदि आवश्यक हो तो liquidation।

Moratorium से क्या बचत मिलती है?

Moratorium के दौरान नए कानूनी कदम रोक दिए जाते हैं ताकि परिसंपत्तियाँ सुरक्षित रहें और पुनर्गठन पर ध्यान दें।

Resolution Professional (RP) कौन होता है?

RP एक व्यक्ति या संस्थान है जिसे IBBI ने लाइसेंस दिया है ताकि insolvency प्रक्रिया का संचलन कर सके।

CoC क्या होता है?

CoC यानी Committee of Creditors, क्रेडिटर्स का एक समूह है jo पुनर्गठन योजना का निर्णय लेता है।

व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?

हाँ, व्यक्तिगत दिवालियापन PIRP के माध्यम से संभव है, जिसमें आय-खर्च योजना और ऋण निपटान शामिल होते हैं।

कौन से आवेदन फाइल होते हैं?

IBC के अंतर्गत Section 7, Section 9 और Section 10 के तहत क्रेडिटर, व्यक्ति या कंपनियाँ आवेदन कर सकती हैं।

डिफॉल्ट का क्या प्रभाव होता है?

डेब्टोर के खिलाफ वसूली प्रक्रियाएं रोकती हैं और पुनर्गठन के लिए संरचना बनती है।

समय-सीमा कितनी होती है?

आमतौर पर 180 दिन की उत्तर-निर्धारण अवधि, जो आवश्यक हो तो बढ़ाई जा सकती है।

मैं एक वकील कैसे चुनूँ?

IBC मामलों में अनुभव, चेन्नई क्षेत्र में नेटवर्क, केस प्रकार और फीस को देखें।

क्या assets बेचकर समाधान हो सकता है?

हाँ, यदि पुनर्गठन संभव न हो, तब परिसंपत्तियों की बिक्री से भुगतान किया जाता है।

चेन्नई के लिए कौन सा मार्ग सबसे उपयुक्त है?

यह डिफॉल्ट के प्रकार, ऋण संरचना और डिफ़ॉल्टर के प्रकृति पर निर्भर करता है। विशेषज्ञ मार्गदर्शन जरूरी है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - अधिकृत नियामक और मार्गदर्शक साइट।
  2. National Company Law Tribunal (NCLT) - Chennai Bench - दिवालियापन केस की सुनवाई और आदेश।
  3. Reserve Bank of India (RBI) - ऋण पुनर्गठन और बैंकिंग से जुड़ी पॉलिसीयें।

6. आगे के कदम: दिवालियपन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने केस प्रकार स्पष्ट करें: कॉरपोरेट, व्यक्तिगत या MSME।
  2. चेन्नई-आधारित IBC एक्सपर्ट वकीलों की सूची बनाएं।
  3. प्रत्येक वकील के IBC अनुभव, NCLT चेन्नई बेंच के साथ रिकॉर्ड देखें।
  4. फीस संरचना, पूर्व केस निष्कर्ष और उपलब्धता पूछें।
  5. पहली परामर्श के लिए नियुक्ति करें और 2-3 प्रश्न पूछें।
  6. पूर्व-केस समाधान योजना और रणनीति पर लेखन प्रस्ताव मांगें।
  7. एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले सभी शर्तें स्पष्ट करें।

महत्वपूर्ण संकेत: दिवालियापन कानून एक विस्तृत क्षेत्र है और चेन्नई में स्थानीय अदालतों के निर्णय प्रभाव डालते हैं। आधिकारिक स्रोतों को पढ़ना और स्थानीय विशेषज्ञ से मिलना लाभकारी रहता है।

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