चेन्नई में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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चेन्नई, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. चेन्नई, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में दिवाला और ऋण कानून का मूल ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है। यह कॉर्पोरेट व्यक्तियों, व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के लिए पुनर्गठन और insolvency resolution प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है। चेन्नई सहित तमिलनाडु में इन मामलों का निपटान NCLT चेन्नई बेंच द्वारा किया जाता है। CIRP की सामान्य समय-सीमा लगभग 180 दिन है, जिसे आवश्यक हो तो 270 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।
“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 consolidates and amends the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, individuals and partnership firms.”
Source: https://legislative.gov.in/
“The Code provides for a time bound insolvency resolution process.”
Source: https://www.ibbi.gov.in/
“NCLT has jurisdiction to entertain and decide disputes under the Code.”
Source: https://nclt.gov.in/
व्यावहारिक संकेत चेन्नई में Insolvency and Bankruptcy Code के अंतर्गत मामले NCLT चेन्नई बेंच के माध्यम से सुने जाते हैं। शहर में ऋण समाधान प्रक्रियाओं के लिए CoC (Committee of Creditors) और RP (Resolution Professional) जैसी संस्थाओं की भूमिका अहम रहती है।
उद्धृत आधिकारिक स्रोत: IBBI बनाम IBC के नोटिस और NCLT के आधिकारिक पन्ने। IBBI | NCLT | IBC टेक्स्ट
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवाला एवं ऋण कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची
- परिदृश्य एक: चेन्नई-आधारित निर्माण कंपनी बैंक ऋण डिफॉल्ट पर CIRP शुरू करना चाहती है। वकील CoC, RP और NCLT प्रक्रिया को सही ढंग से संचालित कर सकता है।
- परिदृश्य दो: किसी फाइनेंशियल क्रेडिटर या वेंडर का केस NCLT के सामने दाखिल करना हो। उपयुक्त दस्तावेज, नोटिसिंग और दावा पंजीकरण की जरूरत होगी।
- परिदृश्य तीन: व्यक्तिगत दिवालिया (PIRP) या MSME के लिए PPIRP जैसे वैकल्पिक उपाय पर विचार किया जाए। advoki ko सही मार्गदर्शन चाहिए होगा।
- परिदृश्य चार: ऋण पुनर्गठन, रीकंस्ट्रक्शन या डील-मेंटोरियम के लिए बातचीत करानी हो। स्थानीय अदालतों में रणनीति बनानी पड़ेगी।
- परिदृश्य पाँच: चेन्नई के किसी उद्योगपति पर आंशिक या पूर्ण liquidation का खतरा हो। कानूनी सलाहकार से वैकल्पिक ऑफर और वैधानिक चरण स्पष्ट हों।
- परिदृश्य Six: डिफॉल्ट के कारण शेयरहोल्डर या निवेशक समूह के हित खराब हों; वैधानिक विकल्प, छूट और संधियों की समझ आवश्यक है।
इन सभी मामलों में स्थानीय अनुभव और क्षेत्रीय प्रथाओं से परिचित अधिवक्ता आपको बेहतर मार्गदर्शन देंगे। साथ ही वे CoC के निर्णय-निर्माण, RP के कार्य-भार और अदालत के अनुरोधों में सहायता करते हैं।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: चेन्नई, भारत में दिवाला एवं ऋण को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून
मुख्य कानून: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) सभी प्रकार के दिवाला मामलों की केंद्रीय धुरी है।
कार्यकारी निकाय और न्यायिक मंच: National Company Law Tribunal Act, 2013 और NCLT चेन्नई बेंच इन मामलों का अपीलीय और न्यायिक संचालन संचालित करते हैं।
secured asset enforcement: Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) वित्तीय संस्थाओं के द्वारा सुरक्षा हित के अधिग्रहण and asset recovery के लिए लागू है।
चेन्नई निवासियों के लिए practical tip: IBC के अंतर्गत कॉर्पोरेट देनदारियों की प्रक्रियाएं मुख्य रूप से कॉरपोरेट-केन्द्रित हैं, पर व्यक्तिगत insolvency के कुछ प्रावधान भी लागू होते हैं। NCLT चेन्नई बेंच के निर्णय Tamil Nadu के व्यवसायों को सीधे प्रभावित करते हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
IBC एक समेकित कानून है जो पुनर्गठन, ऋण समाधान और दिवाला प्रक्रियाओं को एक जगह लाता है। यह सभी पक्षों के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध रास्ता स्थापित करता है।
IBC के अंतर्गत कौन पहल कर सकता है?
कॉर्पोरेट डिपॉर्टर, व्यक्तिगत दायित्वधारक और साझेदारी फर्में IBC के अंतर्गत कार्रवाई कर सकते हैं। क्रेडिटर्स और डिफॉल्ट करने वाले भी իրավ रूप से दावा कर सकते हैं।
moratorium क्या है और यह कब लगता है?
Moratorium वह रोक है जो CIRP के दौरान debtors पर लागू होती है। इसमें नया संरक्षण मिलता है, जिससे विरुद्ध कदम बाधित रहते हैं।
Committee of Creditors (CoC) कौन बनाता है और क्या करता है?
CoC ऋणदाताओं का समूह है जो CIRP के दौरान समाधान योजना पर निर्णय लेता है। वे RP द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर वोट करते हैं।
Resolution Professional (RP) कौन होता है और उसका कर्तव्य क्या है?
RP CIRP के प्रबंधन के लिए नियुक्त व्यक्ति है। वह कंपनी के संचालन, दायित्वों और CoC के निर्देशों को लागू करता है।
CIRP कितनी देर चलता है?
आमतौर पर CIRP 180 दिन का होता है। आवश्यकता पर 90 दिन और बढ़ाए जा सकते हैं, कुल 270 दिन तक संभव है।
क्या CIRP और liquidation में अंतर है?
CIRP के अंत में विकल्प योजना बनती है। अगर योजना सफल न हो तो liquidation प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
क्या व्यक्तिगत दिवालिया हो सकती है?
हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवालिया के प्रावधान हैं। यह व्यक्तिगत ऋणों के समाधान के लिए एक मार्ग है, पर शर्तें सख्त होती हैं।
MSME के लिए कौन सा विशिष्ट मार्ग उपलब्ध है?
MSME के लिए प्री-पैक्ड insolvency resolution process जैसी गतिविधियाँ विचाराधीन हो सकती हैं। यह प्रक्रिया कॉर्पोरेट के स्तर पर भी उपयुक्त हो सकती है।
चेन्नई निवासी के लिए अदालत में मुकदमा कैसे शुरू करें?
सबसे पहले कानूनी नोटिस या शिकायत दाखिल करना होगा, फिर NCLT चेन्नई के समक्ष CIRP या अन्य विकल्पों की प्रक्रिया शुरू होती है।
कौन सा दस्तावेज़ तैयार रखने चाहिए?
बिलिंग रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, ऋण समझौते, आपूर्तिकर्ता ड्रम, कर्मचारी और पूंजीकृत दस्तावेज पर्याप्त होते हैं।
न्यायालय-अनुमोदन के लिए वकील कैसे चुनें?
ऐसे वकील चुनें जो IBC, CIRP और NCLT मामलों में अनुभव रखते हों। स्थानीय Chennai-आधारित अनुभवी अधिवक्ता मदद करेंगे।
कानूनी सलाह कब और कैसे लें?
तुरंत कारण बताकर रणनीति बनाएं। पहले काउंसिल से मामले की लागत, समयरेखा और संभावित परिणाम स्पष्ट करें।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक regulator. https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - न्यायिक मंच. https://nclt.gov.in/
- Ministry of Corporate Affairs (MCA) - नीति-निर्माण और कानून-निगरानी. https://www.mca.gov.in/
6. अगले कदम: दिवाला एवं ऋण वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपने केस का प्रकार स्पष्ट करें (कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत, MSME आदि) और Chennai क्षेत्र की जरूरत समझें.
- IBC, CIRP, RP और CoC के बारे में स्थानीय अनुभवी अधिवक्ता की पहचान करें।
- IBBI, NCLT और MCA के लिंक से संभावित वकीलों के पूर्व अनुभव और प्रोफाइल देखेँ।
- पहला फोन-या बैठक में केस-विशिष्ट प्रश्न पूछें (अनुभव, सफलता-रेट, घाटे-आकलन, फीस संरचना).
- दस्तावेज़ सूची तैयार रखें (बैंक स्टेटमेंट, ऋण समझौते, ड्यू-डायरेक्टर्स आदि) ताकि मिलने पर szybko तैयारी हो।
- फीस-चालान, घड़ीगत समयरेखा और संभावित परिणाम के बारे में स्पष्ट लिखित समझौता करें।
- स्थानीय कोर्ट-लॉजिस्टिक के अनुसार Chennai के लिए उपयुक्त वकील से अनुबंधFinalize करें।
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