नागपुर में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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नागपुर, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. नागपुर, भारत में दिवालियापन कानून के बारे में: नागपुर, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
नागपुर सहित पूरे भारत में दिवालियापन कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है। यह एक समग्र कानून है जो कॉरपोरेट व्यक्तियों, व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों की पुनर्गठन और Insolvency समाधान प्रक्रिया को समन्वयित करता है।
IBC के तहत मामलों को सामान्यतः राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (NCLT) के अदालती अधिकार क्षेत्र में सुना जाता है। नागपुर के निवासियों के लिए यह प्रक्रिया मुख्यतः महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए मुंबई या पूणे स्थित NCLT बेंचों के माध्यम से आगे बढ़ती है।
IBC का उद्देश्य सभी हितधारकों के हितों का संतुलन रखते हुए ऋण चुकता न हो पाने की स्थिति में त्वरित और व्यावहारिक समाधान देना है। नीचे दिए गए उद्धरण इसे स्पष्ट करते हैं:
“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, individuals and partnership firms.”
“The time bound resolution process under the Code is designed to secure the interests of creditors while ensuring fairness to debtors.”
नागपुर में रहने वाले लोग अक्सर बैंक ऋण, बीमा, कॉर्पोरेट भुगतान और व्यवसायिक घाटों के कारण निराशा में आ जाते हैं। IBC की प्रक्रियाओं के साथ मल्टी-स्टेकहोल्डर दृष्टिकोण से समाधान संभव होता है और आवेदन-प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञ सहायता आवश्यक होती है।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची नागपुर, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें
- पर्याप्त ऋण के गिरावट के कारण खुद की दायित्व-स्वीकृति का प्रश्न सामने आए। नागपुर में एक छोटे उद्योग के मालिक के लिए IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत Insolvency Resolution Process मददगार साबित हो सकता है।
- कंपनी ने CIRP के अंतर्गत ऋण भुगतान न कर पाने की स्थिति में कोर्स-के-फेयर निर्णय के लिए स्थानीय अधिवक्ता की सहायता जरूरी हो जाती है। नागपुर-आधारित SME या पोर्टफोलियो धारक कंपनियाँ यह कदम उठाती हैं।
- एक व्यक्ति पर भारी बैंक ऋण है और वह Debt Resolution Plan या पुनर्गठन चाह रहा है। नागपुर निवासी हेतु IBC के IIRP चयन और ड्राफ्टिंग में वकील की भूमिका आवश्यकीय है।
- कानूनी सलाह के साथ एक नागपुर-आधारित फाइनेंशियल क्रेडिटर (बैंक/फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन) CIRP केस दाखिल करना चाहते हैं।
- एक साझेदारी फर्म या LLP पर ऋण-अपघटन हो रहा है और LLP insolvency अथवा cross-border insolvency के परिदृश्यों में कानूनी सहायता आवश्यक है।
- व्यक्ति-स्व-रोजगार या स्टार्टअप के लिए MSME PPIRP या MSME प्रावधानों के अनुसार पूर्व-नियोजन आवश्यक हो सकती है, तो विशेषज्ञ मार्गदर्शन लाभकारी रहता है।
नागपुर के लिए वास्तविक उदाहरणों का उद्देश्य स्थिति स्पष्ट करना है, न कि किसी विशेष व्यक्ति के निजी विवरण खोलना। आप अपने केस-स्थिति के अनुसार एक अनुभव-संपन्न अधिवक्ता से मिलकर IBC के सही रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: नागपुर, भारत में दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - व्यक्तिगत Insolvency और कॉरपोरेट कॉरपोरेट्स दोनों के लिए मुख्य कानून है।
- Companies Act, 2013 - कॉर्पोरेट डेब्टर्स के insolvency-प्रक्रिया और निदेशक-उत्तरदायित्व से सम्बद्ध प्रावधानों के नींव प्रदान करता है।
- SARFAESI Act, 2002 - सिक्योरिटीज के दायित्व के विरुद्ध बैंकों द्वारा ऋण वसूली के लिए प्रयुक्त प्रावधान देता है; कुछ मामलों में IBC के साथ क्रॉस-रेफरेंस भी संभव है।
- RDDBFI Act, 1993 - बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण-उधारी हेतु देय ऋणों की Recovery के लिए प्रयुक्त रहा है, पर IBC के साथ एकीकृत प्रवर्तन भी घटित होता है।
- The Maharashtra Insolvency and Bankruptcy Guidelines (स्थानीय अनुपालन संदर्भ) - नागपुर-स्थानीय अदालतों और बेंचों के निर्णयों के समय-सीमा तथा स्थानीय प्रक्रियाओं के समन्वय में सहायक होते हैं।
नगरीय क्षेत्र के अनुसार नागपुर में NCLT के बेंच और डिपार्टमेंट्स के साथ स्थानीय नियम भी लागू होते हैं। साथ ही IBBI के मानक नियम और आचार संहिता स्थानीय व्यवहार पर प्रभाव डालते हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर
क्या दिवालिया होना सही है?
नहीं, दिवालिया होना अंतिम उपाय है। IBC के तहत पहले ऋण-समस्या को हल करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाता है।
IBC के अंतर्गत कौन दाखिला कर सकता है?
किसी भी कॉर्पोरेट डेब्टर, व्यक्तिगत डेडीटर्स और साझेदारी फर्म IBC के अंतर्गत दाखिला कर सकते हैं, पर अध्ययन-परिस्थिति के अनुसार पात्रता तय होती है।
मैं Nagpur से कैसे FIRR-फॉर्म दाखिल करूं?
IBC के अंतर्गत आवेदन सामान्यतः NCLT के समक्ष दायर होते हैं। नागपुर के लिए Mumbai या Pune बेंच से संपर्क किया जा सकता है; उचित फॉर्म और दस्तावेज संबंधित बेंच के नोटिस के अनुसार जमा करें।
मोराटोरियम क्या है और कब लागू होता है?
मोराटोरियम ऋणदाता के अधिकारों को संरक्षित करता है जब insolvency proceedings शुरू होते हैं। यह ऋण-दार के पास परिसंपत्तियों पर नियंत्रण रखता है; अवधि केस के प्रकार पर निर्भर होती है।
Resolution Professional की भूमिका क्या है?
Resolution Professional CIRP में नियुक्त होता है। उसका काम आर्ह पहचान, परिसंपत्तियों का नियंत्रण, कोर्स-के-फेयर योजना बनाकर अदालत से मंजूरी लेना है।
कहां से IBBI की जानकारी मिल सकती है?
IBBI की वेबसाइट पर अधिनियम, नियम, और पंजीकृत Insolvency Professionals की सूची उपलब्ध है।
क्या IBC हर ऋण को हल कर सकता है?
IBC सभी प्रकार के ऋणों को एक साथ हल नहीं कर सकता। क्रेडिटर्स की कोर-समिति और कोर्ट-निर्णय अनुसार क्रम और प्राथमिकताएं निर्धारित होती हैं।
व्यक्तिगत दिवालिया बनना कब तक संभव है?
व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया IIRP के माध्यम से संभव है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ ऋणों पर discharge मिलता है, पर सभी दायित्व समाप्त नहीं होते।
MSME के लिए PPIRP क्या है?
MSME के लिए Pre-Packaged Insolvency Resolution Process (PPIRP) प्रस्तावित किया गया था ताकि छोटे व्यवसायों के लिए त्वरित समाधान संभव हो। यह IBC के संशोधनों के अनुरूप चलता है।
कौन सा दस्तावेज जरूरी होते हैं?
आवेदन, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, ऋण दस्तावेज, खाते-पीते रिकॉर्ड, ऋणदाता विवरण आदि आमतौर पर आवश्यक होते हैं। अदालत द्वारा अलग दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
क्यों Nagpur के लोग विशेष रूप से परेशान रहते हैं?
Nagpur जैसे शहरों में बैंकिंग बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालय और NCLT बेंचों तक पहुंच में समय लगता है। स्थानीय कानून विशेषज्ञ मददगार होते हैं।
कानूनी सहायता फ्री मिले तो किस प्रकार?
महाराष्ट्र राज्य के कानूनी सहायता प्रोग्राम और जिला-स्तरीय विधिक सहायता संस्थाएं गरीब आवेदकों को मुफ्त सलाह देती हैं।
कितना समय लगता है एक सामान्य CIRP?
औसतन CIRP 180 दिन में पूरा करने का लक्ष्य होता है, कुछ मामलों में 90 दिन तक का extension संभव है।
5. अतिरिक्त संसाधन: दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - IBC के अनुपालन, नियमावली और Insolvency Professionals की सूची उपलब्ध है। https://www.ibbi.gov.in
- National Company Law Tribunal (NCLT) - insolvency मामलों की न्याय-प्रक्रिया और आदेश। नागपुर के लिए मुंबई या पूणे बेंच से संपर्क संभव है। https://nclt.gov.in
- Maharashtra State Legal Services Authority (MSLSA) - नागपुर निवासियों के लिए नि:शुल्क कानूनी सहायता के मार्ग। https://msslsa.gov.in
6. अगले कदम: दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपने केस प्रकार को साफ-साफ पहचानें - व्यक्तिगत insolvency, कॉरपोरेट CIRP या MSME PPIRP आदि।
- नागपुर-क्षेत्र के IBC विशेषज्ञों के बारे में ऑनलाइन शोध करें और केस-फील्ड देखें।
- IBBI के पंजीकृत Insolvency Professionals (IPs) की सूची चेक करें और उनकी प्रोफाइल देखें।
- पहली मुफ्त या कम शुल्क परामर्श की कोशिश करें ताकि आप सही मार्ग चुन सकें।
- कौन सा कानून-फॉर्म और दस्तावेज चाहिए, इसकी सूची बनाएं और प्रत्युत्तर पाएं।
- कानून-वितरण, फीस संरचना औरसेवाएं स्पष्ट-समझौते में लिखित रखें।
- आगामी कदमों की अगली बैठक से पहले आपसी बातचीत के लिए नोट्स व प्रश्न बनाएं।
नोट: नागपुर, महाराष्ट्र में दिवालियापन मामलों के लिए अदालती प्रक्रियाएं क्रमशः IBC संरचना और NCLT-स्थानीय बेंचों के निर्णयों पर निर्भर करती हैं। स्थानीय विशेषज्ञ के साथ करने से स्थिति सुचारु तरीके से आगे बढ़ती है।
सम्पूर्ण जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत देखें:
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