पटना में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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Advocate Radha Raman Roy

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
पटना, भारत

1987 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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वकील राधा रमण रॉय, पटना के सर्वश्रेष्ठ वकील, आपराधिक, तलाक, संपत्ति, वैवाहिक, पारिवारिक और नागरिक कानून में 35 से...
Advocate Ankit Kumar Singh
पटना, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
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एडवोकेट अंकित कुमार सिंह की विशेषज्ञता में आपका स्वागत है – प्रतिष्ठित पटना हाई कोर्ट में आपके विश्वसनीय कानूनी...
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1. पटना, भारत में दिवालियापन कानून के बारे में: पटना, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में दिवालियापन कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के अंतर्गत संचालित होता है. पटना में व्यावसायिक देनदारों के मामले आम तौर पर राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिबunal (NCLT) के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हैं. IBC का उद्देश्य समय-सीमित समाधान और पुनःवित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है.

पटना निवासी व्यवसायी और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के लिए IBC के अनुसार प्रक्रिया वितरित होती है, जिसमें moratorium और ऋणदाताओं की समिति (CoC) शामिल होती है. IBC के लागू होने से देनदारों के लिए एक निष्पक्ष, स्पष्ट और तेज़ समाधान की राह खुली है. नीचे के अनुभाग में स्थानीय संदर्भ भी बताए गए हैं।

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency.” - Insolvency and Bankruptcy Code, 2016
“IBC provides for a time-bound resolution process for corporate debtors.” - IBBI प्रामाणिक विवरण

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। पटना, भारत से संबन्धित वास्तविक उदाहरण दें

  • पटना के एक छोटे व्यवसायी की बैंक ऋणों पर लागू संकट हो रहा है। ऋणदाता देनदार ऋण समाधान के लिए IBC के अंतर्गत सहायता मांगते हैं।
  • एक पटना-आधारित फर्म के साथ कॉरपोरेट insolvency की स्थिति बन गई है। लेनदारों के साथ विभाजित समाधान के लिए IRP नियुक्त होना संभव है।
  • MSME प्रतिष्ठानों के साथ विपणन-आधार ऋण का तनाव है। ऋण पुनर्गठन, स्क्रिप्ट-आधारित समाधान या IBC प्रक्रिया से निपटना पड़ेगा।
  • व्यक्तिगत दिवालियापन की स्थिति में पटना निवासी एक व्यक्ति भारी कर्ज से जूझ रहा है और व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया की मांग कर सकता है।
  • साझेदारी फर्म में विवाद तथा देनदार-क्रेडिटर संघर्ष के समाधान हेतु एक कानूनी सलाहकार की जरूरत है।
  • किसी बड़े लेनदार की नयी देनदारी से बचने के लिए त्वरित और निष्पक्ष समाधान ढूंढना आवश्यक हो।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: पटना, भारत में दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - दिवालियापन और पुनर्गठन के लिए मुख्य अधिनियम; कॉरपोरेट देनदारों के लिए समयबद्ध समाधान का ढांचा देता है.
  • Companies Act, 2013 - कॉरपोरेट देनदारों के लिए IBC से जुड़ी प्रक्रियाओं का समन्वय और winding up से जुड़ी कुछ प्रविधियाँ शामिल करता है.
  • SARFAESI Act, 2002 - बैंकों केsecured debt recovery में सहायक कानून; दिवालियापन के साथ-साथ दूसरे दायित्वों के त्वरित समाधान के अवसर देता है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवालियापन क्या है?

दिवालियापन एक ऐसी स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति या कंपनी अपनी देनदारियाँ पूरी तरह चुकाने में असमर्थ हो जाए। यह IBC के अंतर्गत एक नियत प्रक्रिया से निपटता है।

पटना में दिवालियापन केस कैसे शुरू होता है?

IBC के तहत देनदार या ऋणदाता NCLT में आवेदन दायर कर सकता है। IRP/Resolution Professional की नियुक्ति से प्रक्रिया शुरू होती है।

कौन दाखिल कर सकता है: corporate, individual या both?

कॉरपोरेट देनदारों के लिए IBC मौजूद है, वहीं संशोधन के बाद व्यक्तिगत और साझेदारी फर्मों के लिए भी insolvency resolution संभव है।

Moratorium क्या है और यह कैसे काम करता है?

Moratorium से ऋणदाताओं द्वारा उधार-नोटिस लेने और संपत्तियाँ बेचने पर रोक लगती है। यह योजना के दौरान क्रियान्वित रहती है।

कौन अदालत सुनवाई करेगी?

IBC मामले NCLT के समक्ष जाते हैं। पटना के क्षेत्रीय मामलों के लिए संबंधित बेंच का निर्धारण होता है।

IBC के समय-सीमित समय-सीमा क्या है?

कॉरपोरेट देनदारों के लिए सामान्यतः 180 दिन की समयसीमा होती है, जिसे CoC के साथ बढ़ाया जा सकता है।

क्या व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?

हाँ, IBC संशोधनों के अंतर्गत Individuals and sole proprietors के लिए insolvency resolution संभव है।

प्रकिया में खरीदारों के प्रस्ताव कैसे मान्य होते हैं?

CoC को प्रस्तावित समाधान योजनाओं पर मतदान करना होता है। समर्थक योजना स्वीकार्य होने पर IRP द्वारा लागू की जाती है।

नुकसान पहुँचाने वाले कदम उठाने के लिए क्या विकल्प हैं?

देनदार के साथ समझौता, ऋण पुनर्गठन, या SARFAESI जैसे वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद रहते हैं।

मुझे कानूनी मदद कब लेनी चाहिए?

जब debt restructuring, insolvency filing या CoC के साथ संवाद शुरू करना हो, तब वकील से परामर्श करें ताकि हित सुरक्षित रहें।

Patna में कानूनी सहायता कहाँ से लें?

स्थानीय दिवालियापन विशेषज्ञ, कॉरपोरेट लॉ फर्म और पटना High Court से जुड़े अधिवक्ताओं से संपर्क करें।

कानून में हाल के परिवर्तन क्या हैं?

IBC संशोधनों ने व्यक्तिगत insolvency और MSME मामलों में राहत की संभावनाएं बढ़ाईं।

क्या रकम बढ़ने पर प्रक्रिया रोकना संभव है?

Moratorium के दौरान दायित्वों के पुनर्गठन या लेनदारों के साथ समझौते की गुंजाइश बनी रहती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - official regulator: https://www.ibbi.gov.in/
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - hearing of insolvency matters: https://nclt.gov.in/
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - IBC and related notifications: https://www.mca.gov.in/

6. अगले कदम: दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने क्षेत्र के अनुभवी IBC अधिवक्ता/कानूनी सलाहकार की सूची बनाएं।
  2. पटना के नजदीकी कोर्ट-फार्मेशन और IBC मामलों के रिकॉर्ड देखें।
  3. पहले किसी ऐसे वकील से मिलें जिनके पास क्लाइंट-केस रिकॉर्ड स्पष्ट हो।
  4. फीस-फ्रेम और प्रारंभिक आकलन पर स्पष्ट लिखित समझौता करें।
  5. IBC प्रक्रिया के लिए जरूरी दस्तावेज एकत्रित करें-ऋण विवरण, देनदार नियंत्रण, CoC के सदस्य आदि।
  6. कानूनी जोखिम और समभाव के अनुसार योजना बनाएं-वकील मार्गदर्शित करेगा।
  7. स्थानीय नीतियों और कोर्ट-आचरण नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

प्रमुख उद्धरण और आधिकारिक स्रोत:

IBBI का उद्देश्य और IBC का मूल उद्देश्य स्पष्ट करता है: “An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency.”

IBC की समय-सीमा और समय-सीमित प्रक्रिया पर सामान्य समझ: “IBC provides for a time-bound resolution process for corporate debtors.”

आधिकारिक जानकारी: व्यक्तिगत insolvency और partnership firms के लिए संशोधनों के संदर्भ में IBC amendments उपलब्ध हैं।

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