रायपुर में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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Advocate Richa Agrawal

Advocate Richa Agrawal

15 minutes मुफ़्त परामर्श
रायपुर, भारत

2024 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
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रिचा अग्रवाल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सभी जिला अदालतों की अधिवक्ता हैं। अधिवक्ता अग्रवाल सभी फ़ौजदारी मामलों,...
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1. रायपुर, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

रायपुर में दिवालियापन कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 पर आधारित है. यह समय-सीमित insolvency resolution को प्राथमिकता देता है ताकि कंपनी या व्यक्ति के मूल्यांकन में अधिकतम मूल्य प्राप्त हो सके. कॉर्पोरेट पर्सन, पार्टनरशिप फर्म और व्यक्तिगत आवेदक सभी IBC के दायरे में आते हैं. रायपुर के व्यवसायी, विक्रेता और नागरिक इन नियमों के अनुसार प्रक्रियाओं का पालन करते हैं.

यह प्रक्रिया National Company Law Tribunal, NCLAT और उच्च न्यायालय के सहयोग से आगे बढ़ती है. स्थानीय तौर पर रायपुर-आधारित ऋणदाता, कर्जदार और सक्षम वकील इन प्रक्रियाओं के सही मार्गदर्शन के लिए सलाह लेते हैं. IBC के उद्देश्य समय-सीमित और पारदर्शी समाधान प्रदान करना है ताकि क्रेडिटर्स के हित संरक्षित रहें.

पreamble: The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.
IBBI बयान: The Code provides for time-bound resolution of insolvency and maximization of asset value for creditors and stakeholders.

अधिक जानकारी के लिए देखें: IBBI और India Code.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • रायपुर-आधारित व्यवसाय संकट एक रायपुर-आधारित निर्माण फर्म दिवालिया होने के जोखिम पर है. एक अधिवक्ता सही प्रविष्टि और तैयारी कर सकता है ताकि CIRP प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके.
  • व्यक्तिगत दिवालियापन से जुड़ी जटिलताएं एक व्यापारी की व्यक्तिगत उधारी दुविधा में है. कानूनी सलाह से PIRP के विकल्प और मार्गदर्शन मिल सकता है.
  • सेक्शन-आधारित आवेदन वित्तीय क्रेडिटर या ऑपरेशनल क्रेडिटर के आवेदन की तयारी और विश्वसनीयता के लिए वकील आवश्यक है.
  • पुनर्गठन योजना बनाम liquidation कौन सा मार्ग बेहतर है, यह तय करने के लिए कानूनी सलाह जरूरी है.
  • पंजीकरण और अपील प्रक्रियाएं NCLT-NCLAT के पास के गलतियों से बचने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपयोगी है.
  • रायपुर के स्थानीय अदालतों की प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं बिलासपुर हाई कोर्ट या नील dépend स्थित न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार कदम उठाने पड़ सकते हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) कॉर्पोरेट पर्सन, पार्टनरशिप फर्म और व्यक्तियों के insolvency resolution के लिए केंद्रीय कानून है. यह समय-सीमित प्रक्रियाओं का आधार है. IBBI का नियंत्रण व निगरानी भी मौजूद है.
  • Insolvency and Bankruptcy Board of India Act, 2016 IBBI के गठन और उसके अधिकार-कर्तव्य निर्धारित करते हैं. यह सेटअप सक्षम फ्रेमवर्क बनाता है ताकि संहिता एक nadie के साथ लागू हो सके.
  • IBC में संशोधन अधिनियम 2020 और 2021 व्यक्तिगत insolvency और तेज़ समाधान के लिए प्रावधान जोड़े गए. रायपुर में घरेलू और छोटे व्यवसायी इन संशोधनों के अनुरूप मार्गदर्शन लेते हैं.

प्राथमिक स्रोतों के लिए देखें: IBBI और Ministry of Law and Justice.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक समय-सीमित insolvency resolution प्रणाली है. इसका उद्देश्य क्रेडिटर्स के हितों की सुरक्षा और मूल्यांकन में सुधार है. यह कॉर्पोरेट पर्सन, पार्टनरशिप फर्म और व्यक्तियों पर लागू हो सकता है.

कौन आवेदन कर सकता है?

आवेदन सामान्यतः वित्तीय क्रेडिटर, ऑपरेशनल क्रेडिटर और कभी-कभी कॉर्पोरेट डिटर द्वारा किया जा सकता है. रायपुर में इन मामलों की दायरियाँ NCLT में होती हैं.

क CIRP कितने समय में पूरा होता है?

आमतौर पर CIRP 180 दिनों तक चलता है, जिसे अवसर मिलते ही बढ़ाया जा सकता है. वास्तविक समय स्थितियों पर निर्भर है.

रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल क्या करता है?

Resolution Professional CIRP के संचालन का प्रबंधन करता है. वह परिसमापन योजनाओं की तैयारी और क्रेडिटर्स के साथ बातचीत संचालित करता है.

व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?

IBC के संशोधनों से व्यक्तिगत insolvency की परिसंरचना स्पष्ट की गई है. स्थानीय प्रशासनिक नियमों के अनुसार PIRP की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.

moratorium क्या होता है?

Moratorium में नया ऋण मांगना रोक दिया जाता है और कानूनी कार्रवाई ठहर जाती है. इससे विक्रेता और क्रेडिटर्स को लाभ मिलता है.

क्या क्रेडिटर्स को भुगतान मिलेगा?

निर्णय के अनुसार परिसम्पत्तियों की बिक्री या पुनर्गठन योजना से क्रेडिटर्स के दावे प्रभावित होते हैं. क्रेडिटर्स के हित संरक्षित रखना प्राथमिक उद्देश्य है.

नCLT और NCLAT की भूमिका क्या है?

NCLT मामले की सुनवाई करता है और CIRP अनुमोदन देता है. NCLAT अपीलीय मंच है जो NCLT के निर्णयों को संभालता है.

रायपुर में मुकदमे कहाँ दायर होते हैं?

कई insolvency मामलों में प्रयुक्त जूरी NCLT की रेकॉर्डिंग होता है. अपीलीय निर्णय NCLAT पर जाते हैं, और आवश्यकता हो तो Supreme Court तक जा सकता है.

मरम्मत योजना और liquidation में क्या अंतर है?

मरम्मत योजना में ऋणसूत्रों के हितों के अनुसार व्यवसाय दोबारा चल सकता है. liquidation में परिसंपत्तियाँ बेची जाती हैं और ऋण चुकता किया जाता है.

कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?

आवेदन के साथ debt agreement, balance sheets, creditor statements, और अन्य वित्तीय दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं. सही दस्तावेज निर्णय को तेज बनाते हैं.

रायपुर में कानूनी सहायता कहाँ मिल सकती है?

स्थानीय वकील, कानूनी सहायता संस्थान और उद्योग संस्थान से संपर्क करें. वे IBC के अनुरूप प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगे.

आखिरकार क्या कदम उठाने चाहिए?

प्रारम्भ में स्थिति स्पष्ट करें, अनुभवहीन कदम से बचें. प्रमाण-आधार दस्तावेज तैयार रखें और स्थानीय अदालतों के नियम समझें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) नियामक निकाय, जो IBC की सफलता के लिए निरीक्षण करता है. IBBI आधिकारिक वेबसाइट.
  • National Company Law Tribunal (NCLT) दिवालियापन मामलों की निर्णायक अदालत. अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय न्यायिक पोर्टल देखें. NCLT वेबसाइट.
  • National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) NCLT के निर्णयों के विरुद्ध अपीलों का मंच. NCLAT वेबसाइट.

6. अगले कदम

  1. अपनी वर्तमान स्थिति समझें और मामला किस प्रकार का है इसकी एक पंक्ति में समीक्षा करें.
  2. रायपुर में स्थान-विशिष्टJurisdiction की पुष्टि करें कि मामला NCLT/ NCLAT के अंतर्गत आता है.
  3. एक अनुभवी दिवालियापन वकील से प्रारम्भिक परामर्श लें, वे दस्तावेज की चेकलिस्ट देंगे.
  4. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाएं और उनके फोटोकॉपी बनाएं.
  5. कौन सा मार्ग बेहतर है, CIRP, PIRP या liquidation, इस पर कानूनी सलाह से निर्णय लें.
  6. यदि आप क्रेडिटर हैं तो debt-collection strategy बनाएं और समन्वय रखें.
  7. स्थानीय कानून के अनुसार किसी भी इंटरिम राहत या रोक-टोक का अनुरोध करें, अगर आवश्यक हो.

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