बेंगलुरु में सर्वश्रेष्ठ सहभागी विधि वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड


2012 में स्थापित
उनकी टीम में 16 लोग
English
सोन्‍या एंड पार्टनर्स बेंगलुरु में एक विशिष्ट विधिक फर्म के रूप में उभरती है, जो तलाक, आपराधिक कानून, पारिवारिक...
Legal Access
बेंगलुरु, भारत

English
लीगल एक्सेस भारत में एक बहुआयामी विधिक फर्म के रूप में विशिष्टता रखती है, जो कई विधिक क्षेत्रों में व्यापक...
Ditya law firm, Advocate
बेंगलुरु, भारत

2007 में स्थापित
English
बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित दित्य लॉ फर्म अपने ग्राहकों की विविध आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए कानूनी सेवाओं की...
Metro Law Firm
बेंगलुरु, भारत

2011 में स्थापित
English
2011 में स्थापित, मेट्रो लॉ फर्म को दक्षिण भारत के प्रमुख विधिक प्रथाओं में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है। फर्म...
बेंगलुरु, भारत

2010 में स्थापित
English
एएनआरए एसोसिएट्स बेंगलुरु आधारित एक विधिक फर्म है जिसकी स्थापना 2010 में हुई थी और जो प्रमुख अभ्यास क्षेत्रों में...
Kapil Dixit LLP
बेंगलुरु, भारत

2005 में स्थापित
English
कपिल दीक्षित एलएलपी, जिसे प्रख्यात कानूनी प्रदाता कपिल दीक्षित ने 2005 में स्थापित किया था, बेंगलुरु, भारत स्थित एक...
SARVE PERMITS AND LEGAL ADVISORY  PVT. LTD.
बेंगलुरु, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Bengali
Panjabi
Bihari
Gujarati
Sanskrit (Saṁskṛta)
क्या आप कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जो आपको रातों को जगाती हैं? हमारे व्यापक लॉ फर्म की ओर देखें जो सभी...

2009 में स्थापित
English
Prime Legal बेंगलुरु में व्यापक कानूनी विशेषज्ञता का प्रतीक है, जो आपराधिक रक्षा, तलाक की कार्यवाही और नागरिक मुकदमों...
SS LAW (Adv. Dr. Sudhindra Bhat)
बेंगलुरु, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 22 लोग
English
Hindi
Kannada
Tamil
एसएस लॉ मुकदमों, कानूनी परामर्श और मध्यस्थताओं पर केंद्रित है - आपराधिक कानून, सिविल कानून, कॉर्पोरेट कानून,...
बेंगलुरु, भारत

English
हेमंत एंड एसोसिएट्स, 2002 में स्थापित, बैंगलोर, भारत में स्थित एक पूर्ण-सेवा कानून फर्म है। यह फर्म नागरिक कानून,...
जैसा कि देखा गया

1. बेंगलुरु, भारत में सहभागी विधि कानून के बारे में: [ बेंगलुरु, भारत में सहभागी विधि कानून का संक्षिप्त अवलोकन ]

सहभागी विधि दो या अधिक व्यक्तियों के बीच लाभ और हानि साझा करने के लिए बनाई गई संरचना है. यह छोटे व्यवसायों में लोकप्रिय है क्योंकि प्रारम्भिक निवेश कम होता है. Bengaluru में सेवा क्षेत्र, स्टार्टअप और स्थानीय व्यापारों में यह संरचना प्रचलित है.

कानूनी दस्तावेज और स्पष्ट भागीदारी के नियम महत्वपूर्ण हैं ताकि विवाद की स्थिति में न्यायिक सहायता सरल से मिल सके. पार्टनरशिप में संपत्ति, आय और देयताओं की भागीदारी सूक्ष्म रूप से निर्धारित होनी चाहिए. Bengaluru निवासियों के लिए यह स्पष्ट हो कि किन परिस्थितियों में पंजीकरण और कर संबंधी अनुपालन आवश्यक होते हैं.

Partnership is the relation between persons who have agreed to share the profits of a business carried on by all or any of them acting for themselves.

यह परिभाषा भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के सेक्शन 4 में दी गई है. यह कानून देशभर के साझेदारी फर्मों पर लागू होता है, Bengaluru सहित सभी शहरों में स्पष्ट दिशा देता है.

A partnership is formed by agreement between two or more persons to share profits of a business carried on by all or any of them acting for themselves.

यह परिभाषा और विचार Bengaluru क्षेत्र के विशिष्ट अनुपालनों के साथ सामान्य अनुपालन के लिए भी मानक है. आधिकारिक स्रोतों से यह स्पष्ट होता है कि साझेदारी कानून के अंतर्गत भागीदारी की पुष्टि और देयताएं तय की जाती हैं.

संक्षेप में, Bengaluru में सहभागी विधि व्यवसाय के लिए एक सरल ढांचा हो सकता है, परन्तु असंगत समझौतों से विवाद बढ़ सकते हैं. सही दस्तावेज, पंजीकरण और कर अनुपालन के साथ यह संरचना स्थिर और सुरक्षित रहती है.

आवश्यक उद्धरण

Partnership is the relation between persons who have agreed to share the profits of a business carried on by all or any of them acting for themselves.

यह मौलिक परिभाषा The Indian Partnership Act, 1932 के सेक्शन 4 में दी गई है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [सहभागी विधि कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। Bengaluru, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

  1. नया पार्टनरशिप फर्म बनाते समय दस्तावेज तैयार करना और अनुबंध तय करना आवश्यक है. Bengaluru के स्टार्टअप्स और सेवा व्यवसायों में यह भूमिका एक अनुभवी वकील से बेहतर तरीके से पूरी होती है.

    डीड तैयार करते समय हिस्सेदारी, लाभ साझेदारी, प्रबंधन अधिकार और जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख जरूरी होता है.

  2. पार्टनर एडमिशन या retirement के समय डीड में संशोधन करना हो. Bengaluru के व्यवसायों में पार्टनर बदलना और नए शेयरिंग मॉडल तय करना आम स्थिति है.

    ऐसी स्थितियों में कानूनी सलाह से भागीदारी तंत्र सुरक्षित रहता है और कर-देयताओं का सही हिसाब बंधता है.

  3. भागीदारों के बीच लाभ-हानि के हिस्से, प्रबंधन अधिकार या व्यवसाय-निर्देशन पर विवाद हो. Bengaluru के क्लियर-फ्लो निर्णय के लिए वैधानिक समाधान आवश्यक हो सकता है.

    कानूनी सलाह से विवाद निपटाने की प्रक्रिया और संभव वैकल्पिक समाधान तय होते हैं.

  4. पार्टनरशिप फर्म के दायित्वों के अनुसार कर-आय और GST जैसे अनुपालन का सामना करना हो. Bengaluru-आधार पर स्थानीय टैक्स और पंजीकरण आवश्यक हो सकता है.

    कानूनी मार्गदर्शन से टैक्स प्लानिंग और अनुपालन सही तरीके से किया जा सकता है.

  5. पार्टनशिप फर्म को LLP या कंपनी में बदलना हो. Bengaluru में ऐसा परिवर्तन व्यावसायिक आवश्यकता के अनुसार अधिक सुरक्षा देता है.

    यह निर्णय लेते समय विश्लेषण, लागत-फल-विश्लेषण और पंजीकरण प्रक्रिया का पूर्ण आकलन जरूरी है.

  6. फर्म के विरुद्ध कानूनी शिकायत, ऋण-वसूली या दिवालियापन जैसी स्थितियाँ आये तो उचित मार्गदर्शन चाहिए. Bengaluru न्याय क्षेत्र के अनुसार चरणों का पालन करना होता है.

    एडवाइजर से उचित जोखिम आकलन और समाधान मार्ग सुझवाया जा सकता है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ बेंगलुरु, भारत में सहभागी विधि को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें ]

नीचे पक्षियों-स्तर पर Bengaluru में प्रभावी 2-3 प्रमुख कानूनों का संक्षिप्त परिचय है. ये कानून पार्टनरशिप से जुड़ी प्रमुख घटनाओं के लिए मानक प्रावधान देते हैं.

  • The Indian Partnership Act, 1932 - Partnership की परिभाषा, भागीदारी और सामान्य правила यहां निर्धारित हैं. यह पूरे भारत में लागू है, Bengaluru सहित सभी राज्यों में समान ढांचा प्रदान करता है.
  • The Limited Liability Partnership Act, 2008 - LLP को एक अलग कानूनी इकाई बनाता है और साझेदारों की सीमित दायित्व सुनिश्चित करता है. यह आधुनिक व्यवसाय संरचना के लिए Bengaluru में भी पंक्ति-रेखा विकल्प है.
  • The Companies Act, 2013 - कंपनियों के गठन, दायित्वों, शेयर-निर्धारण और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियम देता है. पार्टनरशिप से कंपनी में ट्रांसफर या कॉर्पोरेट निर्णयों के लिए उपयोगी है.
“A limited liability partnership is a body corporate formed and incorporated under this Act.”

यह वाक्य LLP Act, 2008 के आधिकारिक शब्दों का सार है और Bengaluru-राज्य-स्तर पर भी लागू होता है. LLP संरचना में दायित्व-सीमित भागीदारी का लाभ मिलता है.

“Partnership is the relation between persons who have agreed to share the profits of a business carried on by all or any of them acting for themselves.”

यह अधिकारिक परिभाषा Partnership Act, 1932 से ली गई है और Bengaluru जैसे नगरों में साझेदारी के लिए मानक मानक है. समझौते में स्पष्टता और वैधानिक अनुपालन आवश्यक है.

इन कानूनों के अलावा Bengaluru में पंजीकरण, आय-कर, GST और स्थानीय अनुपालनों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पार्टनरशिप फर्म का चयन और संरचना व्यवसाय के प्रकार पर निर्भर है. सही कानून की जांच के साथ निर्णय लेने से भविष्य के विवादों से बचाव होता है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े]

पार्टनरशिप क्या है?

पार्टनरशिप दो या अधिक व्यक्तियों का लाभ-हानि साझा करने के उद्देश्य से गठित व्यवसाय है. यह एक वैधानिक relation है जिसे Partnership Act 1932 के तहत परिभाषित किया गया है.

क्या पार्टनरशिप फर्म पंजीकृत करानी अनिवार्य है Bengaluru में?

पंजीकरण अनिवार्य नहीं है परन्तु पंजीकरण करने से दीर्घकालिक अधिकार, कर लाभ और ऋण-उद्धार में आसानी मिलती है. Bengaluru में पंजीकरण के लिए Registrar of Firms कार्यालय से संपर्क करना होता है.

पार्टनरशिप डीड क्या है और क्यों जरूरी है?

यह एक कानूनी दस्तावेज है जो लाभ-हानि, निवेश, प्रबंधन अधिकार, प्रवेश-निकास और विवाद निपटान के नियमों को स्पष्ट करता है. Bengaluru में यह दस्तावेज सभी पार्टनरों के लिए बाध्यकारी होता है.

पार्टनरशिप में कौन-सी देयताएँ साझा होती हैं?

आमतौर पर लाभ, हानि, प्रबंधन दायित्व और पूंजी योगदान के हिसाब से भागीदारी तय होती है. डीड में यह निर्धारित किया जाता है.

लाभ-हानि का वितरण कैसे किया जाता है?

डीड के अनुसार या न्याय-स्वरूप जोखिमों और खरीद-फरोख्त के अनुसार हिस्सेदारी निर्धारित होती है. Bengaluru में आयकर विभाग इसे कर-आय में साझा लाभ के रूप में मानता है.

पार्टनर खरीद-निकास (admission or retirement) कैसे होता है?

नए पार्टनर के प्रवेश या पुराने पार्टनर के विदाई पर डीड में संशोधन आवश्यक है. यह प्रक्रिया Bengaluru के स्थानीय रिकॉर्ड्स में भी दर्ज करनी चाहिए.

क्या पार्टनरशिप फर्म को LLP या कंपनी में बदला जा सकता है?

हाँ, फर्म को LLP या कंपनी में ट्रांज़िशन संभव है. यह निर्णय लाभ, देयताएँ और दीर्घकालिक रणनीति पर निर्भर है.

पार्टनरशिप पर आयकर कैसे लागू होता है?

पार्टनरशिप फर्म स्वयं आयकर नहीं लगाती; लाभ भागीदारों के आवेदनों पर व्यक्तिगत आयकर के तौर पर भाग लिया जाता है.

क्या पार्टनरशिप फर्म को GST पंजीकरण चाहिए?

यदि व्यवसाय के टर्नओवर सीमा पर पहुंचता है तो GST पंजीकरण आवश्यक हो सकता है. Bengaluru में GST नियम भी लागू होते हैं.

क्या पार्टनरशिप के लिए लेखा-जोखा जरूरी है?

हाँ, बिजनेस-लेखा और आय-कर के लिए साफ-सुथरे खातों का निर्वाह करना चाहिए. पंजीकरण और ट्रांज़ेशन रिकॉर्ड्स इसे आसान बनाते हैं.

पार्टनरशिप में विवाद कैसे सुलझते हैं?

डीड में निर्धारित आपसी समाधान, फिर mediation या arbitration और अंतिम विकल्प के तौर पर कोर्ट इन क्लेम को संभालता है.

पार्टनरशिप फर्म का dissolution कैसे होता है?

डीड के अनुसार या कोर्ट आदेश से फर्म का dissolved किया जा सकता है. Bengaluru में registrar filings भी आवश्यक होते हैं.

क्या कानूनी सहायता लेने के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा है?

आमतौर पर अनुशासन के नियम और तिथि-चक्र समय-समय पर लागू होते हैं. तुरंत कानूनी सलाह लेने से विवादों से बचना आसान होता है.

5. अतिरिक्त संसाधन: [सहभागी विधि से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं]

  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - mca.gov.in; LLP, Partnership और Companies पर आधिकारिक निर्देश और फॉर्म्स.
  • Bar Council of Karnataka - barcouncilkarnataka.org; Bengaluru क्षेत्र में वकीलों के पंजीकरण और स्थानीय दिशानिर्देश.
  • Federation of Karnataka Chambers of Commerce and Industry (FKCCI) - fkcci.org; Bengaluru-चैंबर की व्यावसायिक दिशा-निर्देश और सहयोग.

उद्धरण:

“A company means a company formed and registered under this Act.”

यह Companies Act 2013 के प्रमुख परिभाषात्मक वाक्यों में से एक है, जो कॉरपोरेट संरचना के लिए मानक है.

“Partnership is the relation between persons who have agreed to share the profits of a business carried on by all or any of them acting for themselves.”

यह Partnership Act 1932 के सेक्शन 4 से लिया गया उद्धरण है और Bengaluru-हितकारी व्यवहार के लिए आधार बनता है.

6. अगले कदम: [सहभागी विधि वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने व्यवसाय के अनुसार सबसे उपयुक्त संरचना तय करें (पार्टनरशिप, LLP या कंपनी).
  2. डीड और आवश्यक दस्तावेज एक-कथन में तैयार करें ताकि कानूनी सलाह सरल हो.
  3. बेंगलुरु के Registrar of Firms कार्यालय में पंजीकरण आवश्यक है या नहीं, यह जाँच लें.
  4. स्थानीय बार काउंसिल से अनुभवी साझेदारी-विधि वकील खोजें (IT और टेक-स्टार्टअप अनुभव वाले प्रोफेशनल को प्राथमिकता दें).
  5. प्रथम परामर्श में डीड के चयनों, दायित्वों और कर-उपायों पर स्पष्ट योजना बनाएं.
  6. डीड में आवश्यक संशोधन, प्रवेश-निकास के नियम, लाभ-हानि भागीदारी आदि को स्पष्ट करें.
  7. आवश्यक हो तो LLP या कंपनी में ट्रांसफर की योजना बनाकर MCA/ROC के फॉर्म्स तैयार रखें.

नोट: इस गाइड के सभी तथ्यों का उद्देश्य सामान्य मार्गदर्शन प्रदान करना है. किसी भी कदम से पहले कृपया आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि करें और स्थानीय वकील से परामर्श लें.

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