हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट शासन वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में कॉर्पोरेट शासन कानून के बारे में

हरियाणा में कॉर्पोरेट शासन नियम केंद्रीय कानूनों के आधार पर चलते हैं। रजिस्ट्रेशन और दाखिले का नियंत्रण MCA के रोचक-घोषित नियमों द्वारा होता है; हरियाणा में कंपनियाँ RoC (Registrar of Companies) दिल्ली-हरियाणा बेंच के अंतर्गत दाखिल होती हैं।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मोड बोर्ड-डायरेक्शन, स्वतंत्र निदेशकों, ऑडिट कमिटी और सुरक्षा पूर्वक क्रियान्वयन से बनता है। सूचीबद्ध कंपनियों के लिए विशेषता परिषद SEBI LODR नियमों से, और अनसूचीबद्ध कंपनियों के लिए Companies Act 2013 के प्रावधानों से बाध्य रहती हैं।

उद्धरण - “The Companies Act, 2013 provides for governance of companies through board of directors, independent directors and audit committees.” The Companies Act, 2013 - Ministry of Corporate Affairs
उद्धरण - “Listed entities shall ensure compliance with corporate governance norms including formation of Audit Committee, Nomination and Remuneration Committee and Stakeholders Relationship Committee.” SEBI Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015

हरियाणा निवासियों के लिए फायदे مند यह है कि समयानुसार दाखिले, रिपोर्टिंग और CSR जैसे क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ी है। छोटे एवं मझौले व्यवसायों के लिए भी बोर्ड संरचना के मानक स्पष्ट रहते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे हरियाणा-स्थित वास्तविक परिदृश्यों में कानूनी सलाहकार की जरूरत स्पष्ट होती है। प्रत्येक अनुभाग 2-4 वाक्यों के छोटे पैराग्राफ में है।

  • परिचालन-निर्णय में असहमति और बोर्ड-गठन - Gurgaon या Faridabad स्थित कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका स्पष्ट नहीं है या लाभ-हानि विभाजन के नियम अस्पष्ट हों। एक कानूनी सलाहकार यह सुनिश्चित कर सकता है कि निदेशक चयन, बैठकें और रिकॉर्डिंग सही हों।
  • LODR और सूचीबद्ध कंपनी अनुपालन - पंजाब-राज्य की सीमा से बाहर के निवेशकों के लिए हथियार साफ-साफ चाहिए। SEBI LODR नियमों के अनुसार अगर आप सूचीबद्ध हैं, तो संस्थागत खुलासे और गवर्नेंस कमिटियों के गठन आवश्यक होते हैं।
  • CSR नीति और खर्चों का अनुपालन - CSR के thresholds (नेट वर्थ, turnover, लाभ) होने पर 2 प्रतिशत औसत नेट profit की CSR खर्च आवश्यक हो सकती है; एक अधिवक्ता यह सुनिश्चित करेगा कि नीति सही लागू हो और रिपोर्टिंग क्लीयर हो।
  • कॉर्पोरेट संरचना में सुधार - M&A, स्केल-अप, या शेयरधारकों के साथ विवाद में कानूनी मार्गदर्शन जरूरी होता है ताकि गोपनीयता, रिकॉर्डिंग और शेयरधारक अधिकार सुरक्षित रहें।
  • NCB/जोखिम-प्रबंधन और आंतरिक नियंत्रण - बड़े बोर्ड-समूहों में आंतरिक नियंत्रण, जोखिम-प्रबंधन और ऑडिट के लिए सुधार की जरूरत हो तो अनुभवी सलाहकार आवश्यक होते हैं।
  • NCLT/विवाद समाधान - यदि कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े विवाद NCLT/कस्टोडियल कोर्ट तक पहुँचते हैं, तो अनुभवी adv ante योजना बनाना उपयुक्त रहता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में कॉर्पोरेट शासन के लिए जो मुख्य कानून प्रभावी हैं, वे राष्ट्रीय स्तर के हैं लेकिन हरियाणा-स्थित कंपनियों पर लागू होते हैं। नीचे 2-3 प्रमुख कानूनों के नाम दिए गए हैं।

  • The Companies Act, 2013 - बोर्ड-निर्माण, स्वतंत्र निदेशक, ऑडिट कमिटी, CSR आदि के नियम देता है।
  • SEBI Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015 - सूचीबद्ध कंपनियों के लिए disclosure, governance समितियाँ और transparency को अनिवार्य बनाते हैं।
  • CSR प्रावधान (Companies Act 2013 के अंतर्गत Section 135) - उच्च मानदंडों के अनुसार CSR योजना बनानी और 2 प्रतिशत औसत नेट प्रॉफिट खर्च करना बाध्यकारी हो सकता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉर्पोरेट गवर्नेंस क्या है?

यह निदेशकों के चयन, भूमिका, जिम्मेदारियों, और पारदर्शिता पर आधारित एक ढांचा है। यह बोर्ड-निर्णयों, जोखिम-प्रबंधन और शेयरधारक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

हरियाणा-स्थित एक कंपनी के लिए स्वतंत्र निदेशक कितने होने चाहिए?

संस्थागत प्रकार के अनुसार भिन्न होता है। सूचीबद्ध कंपनियों में आम तौर पर स्वतंत्र निदेशक की संख्या बोर्ड के एक-तिहाई के बराबर रहती है। अन्य पब्लिक कंपनियों में thresholds के अनुसार निर्धारित होते हैं।

Audit Committee कब अनिवार्य है?

सूचीबद्ध कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है। कुछ बिना-सूचीबद्ध कंपनियाँ भी thresholds पावर पर ऑडिट कमिटी बनाती हैं; यह Companies Act 2013 और क्लॉज़ 49/LODR के अनुसार निर्भर करता है।

CSR के लिए कौन-से मापदण्ड लागू होते हैं?

Companies Act 2013 के अनुसार यदि किसी कंपनी की net worth 500 करोड़ रुपये, turnover 1000 करोड़ रुपये या net profit 5 करोड़ रुपये से अधिक है, तो उसे CSR खर्च करना चाहिए और नीति बनानी चाहिए।

हरियाणा-स्थित एक KSINC कंपनी के लिए वार्षिक रिपोर्ट में क्या चाहिए?

Board Report, Corporate Governance Report, CSR disclosures, और वित्तीय विवरणों के साथ Particular disclosures देने होते हैं।

Board मीटिंग कितनी बार होनी चाहिए?

जहाँ तक Companies Act 2013 का तात्पर्य है, हर तिमाही में कम से कम एक बार board meetings आवश्यक है, और वर्ष में कुल चार मीटिंग का लक्ष्य होता है।

Independent director के लिए tenure क्या है?

Independent director की tenure सामान्यतः पांच साल तक की होती है, जिसे एक बार दो लगातार terms तक बढ़ाने की व्यवस्था हो सकती है।

कौन-से घटक SEBI LODR में अनिवार्य हैं?

A list of required committees, disclosures, और related party transactions की clear rules SEBI LODR में दिए हैं; यह मुख्यत: listed companies पर लागू होते हैं।

मेरी Haryana-based कंपनी के लिए कौन-से प्रमाणपत्र चाहिए?

ROC filings, annual returns, financial statements, और board resolutions के साथ जरूरी स्थिति में CSR, risk management disclosures आदि।

कॉन्ट्रैक्ट और समझौते में कॉर्पोरेट गवर्नेंस कैसे जोड़ा जा सकता है?

Shareholders Agreement, Joint Venture MOUs, और corporate governance clauses के साथ स्पष्ट governance framework बन सकता है।

विदेशी निवेशकों के लिए क्या नियम हैं?

FDI नियमों के साथ corporate governance norms लागू होते हैं; listed entities में LODR compliance और reporting आवश्यक है।

नियुक्त निदेशकों के आचरण के मुद्दे पर क्या किया जा सकता है?

विशिष्ट आचरण शिकायतों पर बोर्ड-नियम, conduct rules और यदि आवश्यक हो तो NCLT/NCLAT उपायों के विकल्प होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

कॉर्पोरेट शासन से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए नीचे 3 प्रमुख संगठनों की सदस्यता या संसाधन उपयोगी रहते हैं।

  • - निदेशक प्रशिक्षण और गवर्नेंस मार्गदर्शन के लिए एक मान्य संस्था। https://www.iodindia.com
  • - कंपनी सचिवों के लिए प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन और गवर्नेंस गाइडेंस। https://www.icsi.edu
  • - कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए नीति, स्टैण्डर्ड और उद्योग-गाइडेड रिसोर्सेज। https://www.cii.in

6. अगले कदम

  1. अपने उद्देश्य स्पष्ट करें - सूचीबद्ध, अनसूचीबद्ध, CSR-फोकस आदि।
  2. हरियाणा क्षेत्र के अनुभव वाले कानून-विश्वसनीय वकील/अधिवक्ता की सूची बनाएं।
  3. प्राथमिक फर्म/समूहों के साथ कॉनफरेंस-आधारित मुलाकात करें।
  4. पात्रता, अनुभव, केस-स्टडी और क्लाइंट-फीडबैक चेक करें।
  5. फ़ीस संरचना, engagement letter और सेवा-स्तर समझौता (SLA) पर बातचीत करें।
  6. कानूनी सलाहकार से कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्लान, पॉलिसी दस्तावेज़ और disclosures तैयार करवाएं।
  7. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध रिकॉर्ड-keeping, compliance कैलेंडर और रिमाइंडर सेट करें।

आधिकारिक स्रोत

उद्धरण - “The Act and rules provide a robust framework for corporate governance, requiring visibility and accountability in boards and committees.” The Companies Act, 2013 - Ministry of Corporate Affairs
उद्धरण - “Listed entities shall ensure compliance with corporate governance norms including formation of Audit Committee, Nomination and Remuneration Committee and Stakeholders Relationship Committee.” SEBI Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015

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