मुंबई में सर्वश्रेष्ठ लेनदार वकील

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DHAVAL VUSSONJI & ASSOCIATES
मुंबई, भारत

2013 में स्थापित
English
2013 में स्थापित, धवल वुस्सोंजी एंड एसोसिएट्स एक गतिशील पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है जिसका मुख्यालय मुंबई, भारत में है,...
Quillon Partners
मुंबई, भारत

2020 में स्थापित
English
क्विलॉन पार्टनर्स एक प्रतिष्ठित भारतीय कानून फर्म है जिसे कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून में उत्कृष्टता के लिए...
Nava Legal

Nava Legal

15 minutes मुफ़्त परामर्श
मुंबई, भारत

2011 में स्थापित
उनकी टीम में 20 लोग
English
Hindi
Marathi (Marāṭhī)
Nava.Legal ने 2021 में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन अनुभव किया, जब यह एक एकल स्वामित्व वाली फर्म से साझेदारी फर्म में परिवर्तित...
INDIAN LEGAL
मुंबई, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
English
इंडियन लीगल हेल्प्स मुंबई आधारित एक कानून फर्म है, जिसकी आरंभिका त्रिपाठी एंड एसोसिएट्स द्वारा की गई थी।ILH विदेशी...
Vashi & Vashi Advocates and Solicitors
मुंबई, भारत

2017 में स्थापित
English
वाशी एंड वाशी एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स, जिसकी स्थापना 2017 में संस्थापक भागीदार विवेक वाशी द्वारा की गई थी, एक...

English
नवी मुंबई में ए.के. श्रीम हाउस ऑफ लॉयर्स एक प्रमुख कानूनी अभ्यास के रूप में विशिष्ट है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों...

2019 में स्थापित
English
वी ए लॉ ऑफ़िसेस नेरुल, भारत में एक प्रतिष्ठित कानूनी प्रैक्टिस है, जो नागरिक, आपराधिक, तलाक, संपत्ति, जीएसटी, अनुबंध...
PNK Legal
मुंबई, भारत

English
PNK लीगल, मुंबई, भारत में स्थित, अपने विविध ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कानूनी सेवाओं की एक व्यापक...
AJA Legal
मुंबई, भारत

2019 में स्थापित
English
नई दिल्ली में स्थित AJA लीगल एक पूर्ण-सेवा लॉ फर्म है जो विशिष्ट कौशल और अनुभव के संयोजन के माध्यम से व्यावहारिक और...
Solicis Lex
मुंबई, भारत

2013 में स्थापित
English
Solicis Lex एक तेजी से विस्तार कर रही भारतीय लॉ फर्म है, जो व्यक्तियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों...
जैसा कि देखा गया

1. मुंबई, भारत में लेनदार कानून के बारे में: मुंबई, भारत में लेनदार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

मुंबई में लेनदार कानून दायरे में बैंक-एनबीएफआई, निजी ऋण दायित्व और संपत्ति सम्हालने से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं. प्रमुख कानूनों के अंतर्गत ऋण चुकाने में देरी होने पर दायित्वों के निपटान के लिए संस्थाओं के लिए विशेष अदालतें और प्रक्रिया बनायी गयी हैं. कानूनी संरचना में RDDBFI अधिनियम, SARFAESI अधिनियम, IBC जैसी प्रमुख नीतियाँ शामिल हैं और इनमें मुंबई के डिविजनल कोर्ट, डेस Recovery Tribunal (DRT) आदि प्रभावी भूमिका निभाते हैं.

“Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the law relating to reorganisation and insolvency resolution of corporate persons, individuals and partnership firms.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - https://www.ibbi.gov.in/

“The Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 provides for securitisation and reconstruction of financial assets and enforcement of security interest.”

Source: Government of India summary on SARFAESI Act - https://www.rbi.org.in/

उच्च स्तर पर मुंबई में उपलब्ध अदालतें और तंत्र ऋण-उधारकर्ता के अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करते हैं. विशेष रूप से डैब्ट रिकवरी ट्रिब्यूنال (DRT) और डैब्ट रिकवरी एप्पलेट ट्रिबunal (DRAT) यह प्रक्रियाओं के लिए अहम हैं.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: लेनदार कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • नकद ऋण के SARFAESI नोटिस का उत्तर देना - मुंबई के बैंकों द्वारा भेजे गए नोटिस पर 60 दिनों के भीतर वैधानिक जवाब और विरोध-आवेदनों की तैयारी के लिए अधिवक्ता जरूरी होते हैं. इससे आप संपत्ति कब्जे और बिक्री से बचने के लिए सही कदम उठा सकते हैं.
  • DRT के समक्ष दावा दायर होना या विरोधी पक्ष के दावे का चुनौती देना - डेब्ट रीकवरी ट्रिबुनल में मामले की सुनवाई और तर्क-वितर्क के लिए अनुभवी वकील की जरूरत पड़ती है.
  • RDDBFI अधिनियम के अंतर्गत ऋण-वसूली के निर्णयों में अपील या पुनर्विचार - DRAT/DRT के फैसलों के विरुद्ध अपील में कानूनी मार्ग और रिकॉर्डिंग आवश्यक होती है.
  • IBC से जुड़ी insolvency या व्यक्तिगत गारंटर के रूप में प्रक्रिया - मुंबई में कंपनी insolvency या 개인 गारंटर की स्थिति में IBC प्रक्रियाएं चलती हैं; सही रणनीति के लिए अनुभवी वकील अनिवार्य है.
  • जमीन-सम्पत्ति से जुड़ी सिक्योरिटीज की सुरक्षा और कब्जे से बचना - प्रॉपर्टी पर बैंक द्वारा कब्ज़ा या बिक्री से निपटने हेतु SARFAESI-प्रक्रिया की समझ आवश्यक है.
  • NPA-समझौते और संरचना पुनर्गठन की बातचीत - ऋणधारक के रूप में बैंक के साथ पुनर्गठन/समझौते के लिए कानूनी सलाह लाभकारी हो सकती है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: मुंबई, भारत में लेनदार को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • RDDBFI Act 1993 - “Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993” ऋण-उधारकर्ताओं से बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को ऋण वसूली के लिए डेब्ट रिकवरी ट्रिब्युनल (DRT) बनाते हैं. मुंबई में DRT- Mumbai परिसर में मामले सुने जाते हैं.
  • SARFAESI Act 2002 - “The Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002” सिक्योरिटी इंटरेस्ट के संपत्ति-आधारित पुनर्गठन और अधिकार-उद्धार के औजार प्रदान करता है. नोटिस के बाद संपत्ति कब्जा और बिक्री तक की प्रक्रिया संभव है.
  • IBC 2016 (व्यक्तिगत गारंटर/कंपनी केस) - Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 अब Corporate, Individual और Partnership के insolvency-सम्बन्धित मामलों को एकीकृत करता है. मुंबई में IBC प्रक्रियाएं व्यवसाय-उधारदारों, गारंटीकर्ताओं और रिश्तेदारों के लिए लागू होती हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DRT और Civil Court में क्या अंतर है?

DRT खासतौर पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की ऋण वसूली के लिए स्थापित होता है और recovery timeline अधिक त्वरित हो सकता है. civil court सामान्य विवाद-निपटान के लिए होता है.

SARFAESI नोटिस मिलने पर क्या करें?

स्थिति की पुष्टि करें, वकील से तुरंत मिलें, और नोटिस की समय-सीमा के भीतर जवाब दाखिल करें. 60-90 दिनों का समय दिया जा सकता है, पर नियम नोटिस में साफ लिखा होता है.

क्या मैं बैंक के साथ ऋण पर समझौता कर सकता हूँ?

हाँ, अक्सर बैंक-विक्रय के बजाय पुनर्गठन, पुनर्भुगतान योजना या मौजूदा बकाया पर रियायत/समझौता किया जा सकता है. अदालत में आवेदन के साथ यह प्रक्रिया शुरू करना लाभदायक होता है.

क्या मैं अपने ऋण-सम्बन्धी फैसले के विरुद्ध अपील कर सकता हूँ?

हाँ, RDDBFI के अंतर्गत DRT के फैसलों के विरुद्ध DRAT में अपील संभव है. अपील भरने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन जरूरी है.

IBC क्या व्यक्तिगत गारंटरों पर भी लागू होता है?

IBC व्यक्तिगत गारंटरों के लिए भी लागू होता है, खासकर जब उसका ऋण-सम्बन्ध कंपनी से जुड़ा हो या गारंटर-संरक्षित हो. व्यक्तिगत आवेदन और प्रक्रिया IBBI-guided होती है.

क्या Mumbai High Court भी debt recovery से जुड़ी मामलों में दखल देता है?

हाँ, उच्च न्यायालयों में संशयजनक आदेशों, सुरक्षा-आदेशों और अपीलों के निवारण हेतु दखल होता है. Mumbai High Court के फैसलों का appellate/interpretive role अहम है.

कौन से साक्ष्य उपयुक्त माने जाते हैं?

बैंक नोटिस, ऋण समझौते की शर्तें, चुकौती अभिलेख, अनुरोध-रेकार्ड, सत्यापन-खत और रिकॉर्डेड ऑडिट-जलवे जैसे दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं.

क्या संपत्ति कब्जे के समय किरायेदारों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं?

क़ायदे से कब्जे के दौरान किरायेदारों के अधिकार अलग से संरक्षित हो सकते हैं, पर कानून-परिश्रम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए. वकील से सटीक स्थिति पर मार्गदर्शन लें.

DRT के निर्णय कितने समय में होते हैं?

औपचारिक मामलों में समय-सीमा केस-बेस होती है, पर सामान्यतः 12-24 महीने तक सुनवाई और निर्णय हो सकता है. स्थानीय अदालतों के अनुसार अंतर हो सकता है.

क्या आदालती प्रक्रिया में कोई त्वरण-आदेश जारी हो सकता है?

हाँ, कुछ स्थितियों में expedited hearing या interim orders संभव हैं; लॉयर के उचित तर्क से यह संभव बन सकता है.

स्थानीय अदालतों में Mumbai-विशिष्ट प्रक्रिया क्या है?

Mumbai में DRT और DRAT के साथ Mumbai High Court के समन्वय में मामले चलते हैं. क्षेत्रीकरण के कारण शहर के भीतर त्वरित अदालत-समन्वय संभव है.

कौन सी प्रमुख गलत-फहमियाँ हैं?

नहीं, बैंक तुरंत संपत्ति कब्जा नहीं कर सकता; SARFAESI के अनुसार समय-सीमा और पूर्व-गंभीर चेतावनी आवश्यक है. कोर्ट-आदेश के बिना बिक्री स्थगित हो सकती है.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Debt Recovery Tribunal, Mumbai - ऋण-उद्धार से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया का केंद्र. अधिक जानकारी के लिए RBI और राजस्व-घटक साइट देखें.
  • Debt Recovery Appellate Tribunal (DRAT), Mumbai - DRT के फैसलों के विरुद्ध अपील का मंच. आधिकारिक सूचना उपलब्ध है.
  • Reserve Bank of India (RBI) Mumbai Office - ऋण-सम्बन्धी गाइडलाइंस, नीतियाँ और ऋण-वसूली से जुड़े निर्देश. https://www.rbi.org.in/

6. अगले कदम: लेनदार वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपना केस-प्रकार स्पष्ट करें (SARFAESI, DRT/DRAT, IBC आदि).
  2. मुंबई क्षेत्र में debt recovery विशेषज्ञता वाले वकीलों की सूची बनाएं.
  3. इनके पूर्व केस-रिकॉर्ड और कोर्ट-फी-स्टडी की समीक्षा करें.
  4. पहला परामर्श (Free consultation) में अपने केस का सार और रणनीति पूछें.
  5. फीस संरचना, घंटा-भत्ता और वैधानिक लागत पर स्पष्ट समझौता करें.
  6. DRT/DRAT के लिए आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड्स तैयार रखें.
  7. चरणबद्ध योजना के साथ स्थानीय Mumbai High Court और DRT-DRAT के नियमों के अनुरूप कदम उठाएं.

उद्धरण और आधिकारिक स्रोत

“Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the law relating to reorganisation and insolvency resolution of corporate persons, individuals and partnership firms.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - https://www.ibbi.gov.in/

“The Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 provides for securitisation and reconstruction of financial assets and enforcement of security interest.”

Source: RBI की सूची और SARFAESI के संदर्भ में जानकारी - https://www.rbi.org.in/

नोट: उपरोक्त सामग्री मुंबई, भारत के कानूनी पर्यावरण के अनुरूप है. नवीनतम परिवर्तन और केस-निर्णय समय-समय पर बदल सकते हैं; स्थानीय अधिवक्ता परामर्श के बाद ही आगे की कार्रवाइयाँ करें.

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