मुंबई में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. मुंबई, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन
मुंबई में दिवाला एवं ऋण कानून मुख्यतः Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के अधीन लागू होता है. यह निगमित देनदारियाँ, साझेदारी फर्में और व्यक्तियों के लिए समय-सीमित ऋण पुनर्गठन और दिवाला समाधान का एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है.
कॉरपोरेट दिवाला के लिए NCLT, मुंबई बेंच जिम्मेदार है, जबकि व्यक्तिगत देनदारी के मामलों में DRT मुंबई और IBBI का नियंत्रण रहता है. इसके अलावा बैंक ऋणों के मामलों में SARFAESI अधिनियम लागू होता है.
"An Act to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner."
स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के पREAM्बल पर आधारित आधिकारिक सार
"IBC aims to consolidate and amend laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner."
स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) द्वारा IBC के उद्देश्य पर विवरण
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
नीचे मुंबई-आधारित वास्तविक परिस्थितियाँ दी जा रही हैं जहाँ कानूनी सलाहकार की जरूरत सामने आ सकती है.
- Jet Airways (India) Limited के CIRP मामले में विशेषज्ञ मार्गदर्शन आवश्यक था; मुंबई-आधारित NCLT मुंबई ने CIRP स्वीकार किया था. उपयुक्त कानूनी सलाह से को-क्रेडिटर्स कमिशन ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की भूमिका स्पष्ट हो जाती है.
- DHFL मामले में CIRP के दौरान ऋणदाता पक्षों का सही नेतृत्व और समाधान योजना बनवाने के लिए वकील की जरूरत पड़ी. मुंबई के फाइनेंशियल क्रेडिटर्स गुट ने सलाहकार का सहारा लिया.
- Essar Steel के CIRP निर्णय और निष्पादन प्रक्रियाओं में स्थानीय न्यायिक प्रक्रियाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए advokats की भूमिका अहम रही.
- मुंबई के व्यक्तिगत borrowers को IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवाला या क्रेडिट-रिकवरी से जुड़ी जटिलताओं से निपटने के लिए कानूनी सलाह आवश्यक होती है.
- SARFAESI के तहत संपत्ति कुर्की, त्वरित पुनर्खरीद और बचाव के लिए बैंकों के साथ तिथि-निर्धारण से जुड़ी प्रक्रियाओं में वकील मदद कर सकता है.
- cross-border insolvency और विदेशी क्रेडिटर्स के मामलों में IBBI-IBC पथ-निर्देशन के अनुसार कानूनी सहायता जरूरी हो सकता है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉरपोरेट, पार्टनरशिप फर्म और Individuals के लिए समय-सीमित दिवाला समाधान का प्रमुख ढांचा.
- Recovery of Debts due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI Act) - Debt Recovery Tribunal (DRT) के माध्यम से बैंकों-फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनों द्वारा वसूली के मामले संचालित होते हैं.
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Securities Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) - संपत्तियों के सिक्के-धारण और सिक्योरिटी इंटरेस्ट के प्रवर्तनों के लिए लागू होता है.
मुंबई में इन कानूनों के तहत अदालतें और संस्थान सक्रिय रूप से क्रेडिटर्स के हक़ों की रक्षा और देनदारियों के समाधान के लिए काम करते हैं. IBC से संबंधित निर्णय NCLT, Mumbai Bench में और DRT Mumbai में होते हैं. IBBI इन सभी प्रक्रियाओं की निगरानी करता है और मानक निर्देश देता है.
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक एकीकृत कानून है जो दिवाला, पुनर्गठन और ऋण-समाधान को समय-बद्ध तरीके से संभालने के लिए बना है. यह corporate, partnership और individual सभी के लिए लागू है.
IBC और RDDBFI Act में अंतर क्या है?
IBC सामान्य दिवाला-ऋण कानून है. RDDBFI केवल बैंकों और वित्तीय संस्थानों के देय-दायित्व-संबंधी मामलों के लिए DRT के अधिकार देता है.
कौन लोग CIRP के लिए file कर सकता है?
किरायेदार, ऋण देने वाले (creditors) और कुछ अवसरों पर देनदार (debtors) CIRP या related proceedings दायर कर सकते हैं. विशिष्ट स्थिति के लिए वकील से परामर्श करें.
moratorium क्या है और कब प्रभावी होता है?
moratorium debtors पर वैधानिक रोक है. CIRP शुरू होते ही आम तौर पर moratorium प्रभावी हो सकता है ताकि creditors नई परिसमापन गतिविधि न कर सकें.
CoC क्या है और इसका क्या भूमिका है?
CoC (Committee of Creditors) ऋणदाताओं का समूह है जो किसी समाधान योजना को मंजूरी देता है. मुंबई स्थित कई मामलों में CoC निर्णय निर्णायक रहे हैं.
मैं कैसे IBC के अंतर्गत दायर कर सकता/ सकती हूँ?
पहला कदम debt-आधार लेने वाले creditors से संपर्क है. फिर insolvency professional के चयन के साथ प्रक्रिया शुरू होती है. समय-सीमा और दस्तावेज आवश्यक होते हैं.
क्या व्यक्तिगत दिवाला संभव है?
हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवाला/व्यक्तिगत दिवाला समाधान के उपाय प्रावधानित हैं. यह प्रक्रिया विशेष आय-स्तर के अनुसार लागू होती है.
CIRP कितने समय ले सकता है?
IBC के अनुसार सामान्यतः CIRP 180 दिनों के भीतर पूर्ण होता है. कुछ परिस्थितियों में समय-सीमा बढ़ सकती है.
डायरेक्ट ऋण कैसे आता है?
यदि भुगतान नहीं होता, ऋणदाता डिफॉल्ट पर DRT या NCLT के समक्ष रीकोवरी/समाधान के लिए कदम उठा सकता है. विशेषज्ञ सलाह आवश्यक है.
इन प्रक्रियाओं के दौरान संपत्ति कैसे सुरक्षित रहती है?
moratorium और प्रोसीजर-स्टेटस के कारण संपत्ति पर लायबिलिटी से सुरक्षा मिलती है. बैंक, प्रमोटर और क्रेडिटर्स मिलकर वैधानिक निर्णय लेते हैं.
क्या मुंबई में कानूनी सहायता मुफ्त मिल सकती है?
हाँ, महाराष्ट्र राज्य के कानूनी सहायता प्रोग्राम और बार काउंसिल द्वारा नि:शुल्क या कम-दर पर सलाह मिल सकती है. स्थानीय निवारण सेवाओं से संपर्क करें.
कौन से प्रमुख दस्तावेज़ चाहिए होते हैं?
आम तौर पर पहचान पत्र, पैंसिल-डॉक्यूमेंट, ऋण समझौते, बकाया देय-विवरण, सुरक्षा-स्त्रोत, कोर्ट-ऑर्डर आदि आवश्यक होते हैं. प्रक्रिया के अनुसार बदलाव हो सकते हैं.
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक साइट: https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - Mumbai Bench - आधिकारिक साइट: https://nclt.gov.in/
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - आधिकारिक साइट: https://nclat.nic.in/
6. अगले कदम
- अपने तात्कालिक debt-स्थिति का आकलन करें और स्पष्ट लक्ष्य तय करें.
- कौन से कानून लागू होते हैं, इसे समझने के लिए एक अनुभवी advokat से मिलें.
- IBC के अंतर्गत उपयुक्त प्रक्रिया चिह्नित करें (CIRP, PPIRP, personal insolvency आदि).
- उचित insolvency professional या law-firm से संपर्क करें; उनके अनुभव पूछें.
- दस्तावेज़ और प्रमाण-संरचना की एक सूची बनाएं और तैयार रखें.
- आरंभिक परामर्श में संभावित समाधान-रास्ते पर निर्णय लें.
- स्थिति के अनुसार DRT, NCLT या अन्य संस्थानों के लिये आवश्यक आवेदन-फॉर्म और फीस की जानकारी लें.
नोट: मुंबई निवासियों के लिए स्थानीय बार काउंसिल, MSLSA और सरकारी निवारण सेवाओं से जुड़ना लाभदायक रहता है. आधिकारिक स्रोतों के अनुसार IBC की time-bound प्रोसीजर और क्रेडिटर्स के अधिकार स्पष्ट हैं.
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