हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ ऋण व वसूली वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में ऋण व वसूली कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में ऋण वसूली के लिए RDDBFI Act, SARFAESI Act और Insolvency & Bankruptcy Code (IBC) प्रमुख कानून हैं. ये कानून बैंकों-फाइनेंशियल संस्थाओं के लिए त्वरित व निष्पक्ष वसूली के उपाय बताते हैं. पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय इस क्षेत्र के मामलों की प्रमुख न्यायिक निगरानी का केंद्र है.

सरकारी एजेंसियाँ और न्यायिक तंत्र creditors-borrowers के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं. सामान्यतः नोटिस, वैधानिक तर्क, और वैकल्पिक समाधान के विकल्प उपलब्ध रहते हैं. हरियाणा में फॉर्मल प्रक्रिया DRT-DRAT और उच्च न्यायालय के माध्यम से होती है.

“The Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 provides for the establishment of Debts Recovery Tribunals for the speedy recovery of debts due to banks and financial institutions.”

स्रोत: RDDBFI Act का सारांश सार्वजनिक विधानपटल-आधारित विवरण; देखें RBI/legislation साइटें.

“The Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 enables secured creditors to enforce security interests by taking possession of the secured assets and selling them to recover dues.”

स्रोत: SARFAESI Act के उद्देश्य का आधिकारिक वर्णन; देखेंindiacode/legislation साइट तथा RBI सामग्री.

“Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides a time-bound resolution process for insolvency of corporate persons and individuals.”

स्रोत: IBC का संक्षिप्त उद्देश्य; देखें NCLT/NCLAT तथा सरकार के आधिकारिक पन्ने.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • परिदृश्य 1 - हरियाणा में छोटे व्यवसाय पर secured loan default हो गया है. बैंक SARFAESI notice दे सकता है और संपत्ति पर कब्ज़ा या बिक्री की तैयारी कर सकता है. कानूनी सलाहकार से तुरंत सही जवाब और त्वरित वैधानिक विकल्प चाहिए.

  • परिदृश्य 2 - बैंक आपके विरुद्ध DRT-DRAT में देनदारी वसूली की याचिका दायर कर देता है. अधिवक्ता के साथ प्रक्रिया समझना और अपील/पुनर्विचार का अभ्यास आवश्यक होता है.

  • परिदृश्य 3 - उपभोक्ता ऋण पर बैंक के खिलाफ दुरुपयोग या मिस-सेलिंग का मामला बन रहा है. ग्राहक संरक्षण कानून के अंतर्गत शिकायत और न्यायिक मार्ग तय करना जरूरी है.

  • परिदृश्य 4 - MSME ऋण के लिए IBC के अंतर्गत CIRP शुरू हो सकता है. Haryana के व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस समय-सीमा में पुनर्गठन चाहते हैं.

  • परिदृश्य 5 - debt गारंटर पर बैंक की वसूली आ सकती है. हरियाणा निवासी गारंटर के अधिकार और जवाबदेही स्पष्ट करने हेतु कानूनी सलाह आवश्यक है.

  • परिदृश्य 6 - ऋण-सम्बन्धी मतभेद में foreclosure-लाभ और बिक्री-प्रक्रिया पर विवाद हो. वैधानिक नोटिस, वैकल्पिक निपटान व अदालत-याचिका के चयन में वकील मार्गदर्शन दें.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • RDDBFI Act, 1993 - बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के डूबे कर्ज की त्वरित वसूली हेतु DRTs की स्थापना करता है.
  • SARFAESI Act, 2002 - secured creditors को सुरक्षा संपत्ति के कब्जे-प्रबंधन व बिक्री के अधिकार देता है; अदालत के बिना कुछ कदम संभव होते हैं.
  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - कॉरपोरेट व व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए समयबद्ध पुनर्गठन प्रक्रिया प्रदान करता है; NCLT/NCLAT के माध्यम से निर्णय होते हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋण नोटिस मिलने के बाद मुझे क्या करना चाहिए?

सबसे पहले किसी अनुभवी अधिवक्ता से मिलकर स्थिति समझें. नोटिस की सभी तिथियाँ, धाराएँ और प्रक्रिया को सुरक्षित रखें. त्वरित जवाब देकर वैधानिक दायरे में रहना जरूरी है.

क्या मैं DRAT या DRT में अपील कर सकता हूँ?

हाँ, आपको शांतिपूर्ण व स्वच्छ अपील-मार्ग उपलब्ध हैं. कानून के अनुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करें और सक्षम अधिवक्ता से मार्गदर्शन लें.

IBC क्या है और मुझे कब इसका लाभ मिल सकता है?

IBC एक समयबद्ध प्रक्रिया है जो दिवालिया संस्थाओं को पुनर्गठित या बंद करने का मार्ग दिखाती है. यदि आपका मामला कॉर्पोरेट है, CIRP की राह खुलती है; अन्यथा व्यक्तिगत मामलों में संबन्धित प्रावधान लागू होते हैं.

क्या बैंक मुझे गारंटर बनाकर वसूली कर सकता है?

जितना देय हो, गारंटर पर बैंक दावा कर सकता है. गारंटर की जिम्मेदारी कागज पर दर्ज ऋण-सम्बन्धी शर्तों पर निर्भर है. कानूनी सलाह आवश्यक है.

क्या नोटिस मिलने के बाद मैं बातचीत-समझौते से समाधान ढूंढ सकता हूँ?

हाँ. mediator या mediator-led negotiation से समाधान संभव है. कानूनी सलाहकार के साथ स्वरूप-योजना बनाएं, जिसमें EMI-लचीला भुगतान और सिक्योरिटी-रिडक्शन सहित विकल्प हों.

धनराशि-वसूली में अदालत कब तक निर्णय दे सकती है?

कानून के अनुसार प्रक्रिया समय-सीमाओं में पूरी करनी चाहिए. पूर्व-नोटिस, रिकॉर्ड्स, सुनवाई और निर्णय की कुल अवधि अदालत-निर्भर रहती है.

क्या मैं अपनी स्थिति के अनुसार रेट-रेड्यूशन मांग सकता हूँ?

हाँ, आप वैध नोटिस और उपयुक्त प्रकार के अनुरोध के साथ Parliament-प्रक्रिया में कमी-योजनाएं प्रस्तावित कर सकते हैं. अधिवक्ता यह निष्पादन में मदद करेगा.

क्या हरियाणा में प्रत्यक्ष संपत्ति-लोक-अधिष्ठान से सुरक्षा संभव है?

कभी-कभी सुरक्षा संपत्ति पर कब्जे की प्रक्रिया नियमों के अनुसार होती है. सभी कदमों में वैधानिक आदेशों की जरूरत होती है; legal counsel मार्गदर्शन दे सकता है.

क्या मैं अदालत से mediation या पक्ष-विकल्प चाह सकता हूँ?

हाँ, अदालत mediation के विकल्प देता है. पहले से व्यवस्था बनाकर विवाद-समाधान के लिए सहमति बन सकती है.

क्या देनदारी-स्थिति के बारे में जानकारी online मिल सकती है?

कुछ केस-स्टेटस ऑनलाइन उपलब्ध होते हैं. अधिकारियों, बैंकों और अदालत की साइटों पर स्थिति-नोटिस मिल सकते हैं. पूरी पुष्टि के लिए वकील से पक्का करें.

जीवन-योजना के साथ ऋण-समाधान कैसे शुरू करें?

सबसे पहले ऋण-स्थिति की पूर्ण सूची बनाएं. वैधानिक मार्ग, समय-सीमा और संभावित निपटान विकल्प के साथ planer बनाएं. एक अनुभवी advicer की मदद लें.

हां, Haryana निवासियों के लिए विशेष विकल्प होते हैं क्या?

हां. स्थानीय अदालतों के साथ साथ राष्ट्रीय कानूनों के साथ Haryana-specific reliefs और mediation-सम्पर्क उपलब्ध हो सकते हैं. जो immigrants, farmers, MSMEs के लिए उपयुक्त हो सकता है.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Reserve Bank of India (RBI) - debt recovery guidelines, SARFAESI के अनुपालन-नीतियाँ. रही स्पष्ट जानकारी.
  • National Company Law Tribunal (NCLT) और National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - IBC मामलों के लिए न्यायिक संस्थान. NCLT और NCLAT.
  • Punjab and Haryana High Court - हरियाणा-विशिष्ट मामलों की सुनवाई और प्री-कोर्ट समाधान. हाई कोर्ट.

6. अगले कदम

  1. अपने दस्तावेज एक जगह整理 करें; ऋण-डिटेल, नोटिस, EMI शीट आदि रखें.
  2. कौन सा कानून लागू है, यह पहचानें: RDDBFI, SARFAESI या IBC. एक वकील से कानूनी मूल्यांकन कराएं.
  3. सूचित प्रतिक्रिया समय सीमा के भीतर दें; उचित जवाब पहले से तैयार रखें.
  4. अपील या पुनर्विचार के विकल्प पर विचार करें; DRAT/DRT में आवश्यकता अनुसार कदम उठाएं.
  5. वकील के साथ रणनीति बनाएं: mediation, ऋण-व्यवस्थापन या ऋण-समझौता का रास्ता देखें.
  6. संपत्ति से संबंधित कदमों को वैधानिक क्रम में करें; कब्जे-प्रक्रिया को रोकने के उपाय पूछें.
  7. जब स्थितियाँ अनुकूल हों, mediation/समझौते के लिए प्रयास करें और रिकॉर्ड रखें.

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