हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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हरियाणा, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
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- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
पूरा उत्तर पढ़ें
हरियाणा, भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में
हरियाणा सहित भारत में दिवाला एवं ऋण कानून को एकीकृत करने के लिए दिवाला एवं ऋण संहिता 2016 बना है. यह कानून कॉरपोरेट संस्थाओं, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों की ऋण-सम्बन्धी समस्याओं को समयबद्ध तरीके से हल करने के उद्देश्य से बनाया गया है. राष्ट्रीय स्तर पर NCLT, NCLAT और अदालतें इन मामलों की सुनवाई और निष्पादन के लिए जिम्मेदार हैं.
Insolvency and Bankruptcy Code 2016 consolidates and amends the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.
The Code aims to promote entrepreneurship, availability of credit, and balance the interests of all stakeholders.
हरियाणा के क्षेत्रीय संदर्भ में NCLT चंड़ीगढ़ क्षेत्रीय बेंच के अंतर्गत उत्तर क्षेत्र के मामलों की सुनवाई होती है. डेरivative रूप से ऋण-सम्बन्धी मामले Debt Recovery Tribunal (DRT) और SARFAESI अधिनियम के तहत भी नियंत्रित होते हैं. यह राज्य में ऋण-सम्बन्धी विवादों के लिए एक समन्वित मार्ग प्रदान करता है.
संक्षेप में, हरियाणा निवासियों के लिए IBC, DRT और SARFAESI जैसे कानून समय-सीमा, प्रक्रियात्मक रूपरेखा और परिसंपत्ति मूल्यांकन के नियम स्पष्ट करते हैं. तात्कालिक परेशानी में कानूनी सलाह लेना लाभदायक रहता है. नीचे उद्धरण देखें ताकि पाठ समझने में मदद मिले.
ध्यान दें: इस क्षेत्र की प्रक्रियाएं समय-सीमा के साथ बदलती रहती हैं. आधिकारिक स्रोतों के साथ अद्यतन जानकारी लें.
आधिकारिक स्रोत:
- IBBI (Insolvency and Bankruptcy Board of India) - दिवाला एवं ऋण कोड के अनुपालन और निर्देश.
- National Company Law Tribunal - कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी प्रोसीजर के लिए प्राथमिक अदालत.
- NCLAT - अपीलीय न्यायाधिकरण.
आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
IBC एवं ऋण कानून जटिल हैं; इसलिए एक अनुभवी कानूनी सलाहकार की मदद आवश्यक रहती है. वे सही निर्णय लेने, दस्तावेज़ों के सत्यापन, और समय-सीमा के भीतर प्रक्रिया पूर्ण करने में मदद करते हैं. नीचे हरियाणा-आधारित परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें वकील की सलाह उपयोगी रहती है.
- हरियाणा-स्थित स्टार्टअप का ऋण डिफॉल्ट - गुरुग्राम या फरीदाबाद में स्थापित कंपनी बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ हो जाए. बैंक IBC के अंतर्गत insolvency आवेदन कर सकता है. वकील रिज़ॉल्यूशन प्लान या परिसमापन विकल्प समझाते हैं.
- व्यक्ति-गारंटर की स्थिति - अगर आप किसी बड़े ऋण के व्यक्तिगत गारंटर हैं और ऋणदाता भुगतान मांग रहा है. एक अधिवक्ता PIRP या SARFAESI के उपायों को स्पष्ट करेगा.
- कॉरपोरेट-इनसॉल्वेंसी के लिए रणनीति बनानी हो - हरियाणा-आधारित कंपनी IBC के तहत रिज़ॉल्यूशन प्लान, एनसीएलटी-आदेश, और IP के चयन में मदद चाहिए.
- ड्राइव-डाउन डिफॉल्ट से निपटने के लिए डिफॉल्टर-राज्य मार्ग - SARFAESI/DRT के अंतर्गत ऋण वसूली के मार्ग, वैकल्पिक योजनाओं के लिए कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक है.
- Cross-border ऋण के मामले - यदि विदेशी क्रेडिटर या अंतरराष्ट्रीय ऋणन देने वाले से विवाद है, तो क्षेत्रीय कानूनों के साथ अंतर्राष्ट्रीय पक्षों की भूमिका समझना जरूरी है.
- घरेलू ऋण-सम्बन्धी विवादों में त्वरित समाधान चाहते हों - हरियाणा-केसेस में Lok Adalat या नि:शुल्क वकील सहायता से पहले सामान फॉर्मेट समझना लाभदायक रहता है.
आप किस प्रकार के Legal विशेषज्ञ से मिलने जाएं, यह निर्णय लेने से पहले अपने केस प्रकार को स्पष्ट करें. नीचे कुछ आधिकारिक स्रोतों के उद्धरण देखें.
उद्धरण
“The Code aims to promote entrepreneurship, availability of credit, and balance the interests of all stakeholders.”
“IBC consolidates and amends the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”
स्थानीय कानून अवलोकन
हरियाणा-राज्य में दिवाला-ऋण से जुड़े प्रमुख कानून नीचे हैं, जो IBC के साथ मिलकर काम करते हैं. इन कानूनों से मामलों की रूपरेखा, जिम्मेदार संस्थाएं और कोर्ट-प्रक्रिया तय होती है.
- दिवाला एवं ऋण संहिता, 2016 (IBC 2016) - कॉरपोरेट, साझेदारी और व्यक्तियों के लिए समेकित insolvency-प्रक्रिया का आधार. NCLT/NCLAT के माध्यम से निर्णय होते हैं.
- SARFAESI अधिनियम, 2002 - बैंकों और वित्तीय संस्थाओं केsecured ऋणों की वसूली के लिए प्राथमिक कानून. DRT और कवरेज हरियाणा में लागू होते हैं.
- Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDB & FR Act) - ऋण-सम्बन्धी विवादों के लिए Debt Recovery Tribunals (DRT) का निर्माण और कार्य-प्रणाली निर्धारित करती है.
हरियाणा निवासियों के लिए यह ज़रूरी है कि वे NCLT/NCLAT के आदेश, DRT-DRT process और SARFAESI के तंत्र को समझें. साथ ही, क्षेत्रीय अदालतों में प्रस्तुतियों के समय-सीमा का पालन करें. नीचे आधिकारिक स्रोत देखें:
- IBBI - Insolvency and Bankruptcy Board of India
- NCLT - National Company Law Tribunal
- RBI - ऋण-प्रबंधन और सुरक्षा-हित
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC 2016 एकीकृत कानून है जो कॉरपोरेट, पार्टनरशिप फर्म और व्यक्तियों के insolvency-निपटान को नियंत्रित करता है. यह समय-सीमा पर आधारित समाधान, परिसमापन और मूल्य-वर्धन की तरफ अग्रसर है.
PIRP क्या है और कब लागू होता है?
Insolvency and Bankruptcy Code के तहत व्यक्तिगत Insolvency Resolution Process (PIRP) उपलब्ध है. यह व्यक्तिगत दिवालिया-सम्बन्धी मामलों के लिए है और समय-सीमा से पर आधारित है.
Moratorium क्या होता है?
Moratorium एक रोक है जो insolvent debtor के विरुद्ध नया वॉरंट नहीं लेने देता. यह प्रशासनिक प्रयोजन के लिए दिया जाता है ताकि परिसंपत्तियों का संरक्षण हो सके.
IBC प्रक्रिया कैसे शुरू होती है?
IBC में आवेदन मुख्य रूप से वित्तीय क्रेडिटर या ऑपरेशनल क्रेडिटर करते हैं. NCLT आवेदन स्वीकार कर लेता है और रिज़ॉल्यूशन प्रोसीजर शुरू होता है.
कौन फाइल कर सकता है?
कॉर्पोरेट डेब्टर के लिए वित्तीय क्रेडिटर और व्यक्तियों/साझेदारी के लिए PIRP-प्रक्रिया के लिए IP (Insolvency Professional) नियुक्त किया जाता है.
RBI और SARFAESI के बीच क्या अंतर है?
SARFAESI बैंकों को secured ऋणों की वसूली के लिए शक्तियाँ देता है. RBI监管 करती है, लेकिन DRAT/DRT के माध्यम से कोर्ट-प्रक्रिया भी चलता है.
हरियाणा में NCLT/NCLAT की भूमिका क्या है?
NCLT हरियाणा के मामले राज्य के बाहर की benches के साथ मिलकर सुनते हैं. NCLAT appellate-स्तर पर निर्णय देता है.
Insolvency Professional कौन बन सकता है?
IP के पास लाइसेंस होता है और वे IBBI के पैनल के सदस्य होते हैं. वे रिज़ॉल्यूशन प्रोसीजर का प्रबंधन करते हैं.
क्या insolvency के दौरान डिक्री-लॉ (Lok Adalat) काम करती है?
Lok Adalat वैकल्पिक विवाद समाधान का विकल्प दे सकता है, पर insolvency के लिए मुख्य प्रक्रिया IBC/DRT के अंतर्गत चलती है.
कौन सा खर्च अनुमानित होता है?
खर्च दस्तावेज़, IP फीस, अदालत शुल्क और प्रशासनिक लागतों पर निर्भर करते हैं. हर केस के लिए खर्च अलग होते हैं.
क्या हरियाणा में व्यक्तिगत दिवालियापन आसान है?
व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रियाएं कानून-मानक के अनुसार होती हैं. परन्तु यह प्रक्रिया आमतौर पर कॉरपोरेट insolvency से अधिक जटिल नहीं होती.
डिफॉल्ट के बाद सबसे पहले क्या करें?
कानूनी सलाह लेकर मौजूदा देयताओं का रिकॉर्ड बनाएं. क्रेडिटर्स के साथ संवाद और समाधान-योजना पर विचार करें.
अतिरिक्त संसाधन
- IBBI - Insolvency and Bankruptcy Board of India - https://www.ibbi.gov.in
- NCLT - National Company Law Tribunal - https://nclt.gov.in
- HSLSA - Haryana State Legal Services Authority - http://hslsa.gov.in
अगले कदम
- अपने मामले का प्रकार स्पष्ट करें: कॉरपोरेट, पार्टनरशिप या व्यक्तिगत?
- संबंधित दस्तावेज एकत्रित करें: ऋण-सम्बन्धी समझौते, नोटिस, बिल्डिंग-प्रमाणपत्र आदि.
- स्थानीय कानून-विशेषज्ञ के साथ पहले परामर्श तय करें.
- IBC, SARFAESI, RDDB & FR Act के प्रावधान समझें और मार्गदर्शन लें.
- हरियाणा-आधारित IP या अनुभवी advokat के चयन के लिए स्क्रीनिंग करें.
- परिचर्चा के लिए कॉल-अप/मिटिंग शेड्यूल करें और प्रश्न-पत्र तैयार रखें.
- फीस संरचना और सेवा-शर्तों पर स्पष्ट लिखित समझौता करें.
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