हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
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भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
तलाक और अलगाव परिवार
डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा

आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...

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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1. हरियाणा, भारत में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में तलाक और अलगाव के मामले आमतौर पर फैमिली कोर्ट में सुलझते हैं। यह क्षेत्रीय दायरे में न्यायिक प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाता है। कानून समुदाय के अनुसार अलग कानून लागू होते हैं, ताकि विवाह-विध्वंस के मामले उचित ढंग से निपटें।

फैमिली कोर्ट एक्ट 1984 के अंतर्गत हरियाणा में फैमिली कोर्ट स्थापित हैं ताकि तलाक, रख-रखाव, child custody आदि मामलों की तेज सुनवाई संभव हो।

The Family Courts Act 1984 aims to promote conciliation and speedy disposal of matrimonial and family disputes.

हरियाणा निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह यह है कि पहले एक अनुभवी अधिवक्ता से मिलें, दस्तावेज़ एकत्रित रखें और mediated समाधान पर विचार करें।

The Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 provides protective measures for women victims of violence and seeks to prevent further harm.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे हरियाणा सम्बन्धी 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें कानूनी सहायता अनिवार्य लाभ दे सकती है।

  • परिदृश्य 1 - घर के अंदर शारीरिक या मानसिक हिंसा की स्थिति में सुरक्षा आदेश या DV Act के अंतर्गत संरक्षण पाने हेतु वकील की जरूरत होती है।
  • परिदृश्य 2 - विवाहित जीवन में गंभीर cruelty या Desertion के आधार पर तलाक लाने का निर्णय लेने पर advicer की आवश्यकता रहती है।
  • परिदृश्य 3 - inter-faith विवाह के पंजीकरण और तलाक के लिए Special Marriage Act के अंतर्गत कानूनी कदम उठाने हों, Haryana मेंjurisdiction-specific सलाह जरूरी है।
  • परिदृश्य 4 - बच्चों की custody और maintenance जैसे मुद्दों पर अदालत-निर्णय चाहिए हो, खासकर Haryana के जिलाों में।
  • परिदृश्य 5 - एक से अधिक बार शादी होने या Muslim समुदाय के तलाक मामले में Dissolution of Muslim Marriages Act से जुड़े कदम लेने हों।
  • परिदृश्य 6 - तलाक के बाद जीवनयापन, maintenance, visitation rights आदि फैसलों में स्पष्टता की जरूरत हो।

इन सभी स्थितियों में एक अनुभवी अधिवक्ता या कानून सलाहकार की सलाह लेना सुरक्षित कदम है।HALSA जैसे कानूनी सेवाओं के द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध हो सकती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Hindu Marriage Act, 1955 - हिंदू विवाह से जुड़े तलाक व वैवाहिक विवादों के मुख्य कानून का आधार है।
  • Special Marriage Act, 1954 - inter-religious विवाह के लिए नागरिक विवाह कानून है और तलाक के प्रावधान इसमें भी आते हैं।
  • Dissolution of Muslim Marriages Act, 1939 - मुस्लिम समुदाय के तलाक के लिए विशिष्ट प्रावधान देता है।

इनके अलावा Family Courts Act 1984 का उद्देश्य हर जिले में परिवार अदालतों के माध्यम से विवाह-सम्बंधी disputes का निराकरण करना है।

The Special Marriage Act provides for civil marriages between two persons irrespective of religion.
The Hindu Marriage Act allows dissolution of marriage on grounds such as cruelty, desertion and other specified grounds.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलाक के लिए Haryana में कौन-से कानून लागू होते हैं?

मुख्य तौर पर Hindu Marriage Act, Special Marriage Act और Dissolution of Muslim Marriages Act लागू होते हैं। Christians के लिए Indian Divorce Act भी प्रासंगिक हो सकता है।

तलाक कब फाइल किया जा सकता है?

Fault-based तलाक के लिएGrounds आते हैं, जबकि Mutual Consent Divorce के लिए कम-से-कम एक साल के separation के बाद फाइल किया जाता है।

Mutual consent divorce Haryana में कैसे होता है?

दोनों पक्ष सहमति दिखाते हैं, separation period पूरा होता है, फिर अदालत द्वारा 6- महीनों के cooling period के बाद final decree दिया जा सकता है।

बच्चों की हिफाजत और custody कैसे तय होती है?

बच्चे के हित में custody तय होती है; संयुक्त या एक पक्ष के उत्तरदायित्व में निर्णय कोर्ट के मार्गदर्शन से होता है।

Maintenance किसके द्वारा देता है और कितना?

Maintenance spouse के लिए HM Act के अनुसार निर्धारित हो सकता है; बालकों के लिए maintenance child’s welfare के अनुसार court तय करती है।

DV Act के तहत क्या सुरक्षा मिलती है?

DV Act के अंतर्गत protective orders, residence orders और incident reporting आदि की व्यवस्था होती है।

हरियाणा में तलाक के लिए कौन-सी कोर्ट सुनवाई करती है?

तलाक के मामले आम तौर पर जिला स्तर की फैमिली कोर्ट में सुनवाई होते हैं। कुछ मामलों में सत्र/डिविजनल कोर्ट भी देखती है।

क्या mediation courts में समाधान संभव है?

हां, कई मामलों में mediation या counseling से precursor settlement संभव हो सकता है और कोर्ट को time बचता है।

कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?

जандाज, आवेदन पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, बच्चों के प्रमाण पत्र, आय-व्यय आदि दस्तावेज जरूरी रहते हैं।

क्या मुस्लिम तलाक के लिए Shariat law लागू होते हैं?

हाँ, Dissolution of Muslim Marriages Act 1939 के अधीन शक्ति से तलाक संभव है, पर Haryana के स्थानीय अदालत अधिकार क्षेत्र से जुड़ी nuances देखें।

क्या सरकार मुफ्त कानूनी सहायता दे सकती है?

हाँ, HALSA और NALSA के माध्यम से निर्धारित शर्तों पर मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है।

Divorce proceedings कितने समय ले सकते हैं?

Fault-based divorce के कारण 1-3 वर्ष तक की प्रक्रिया लग सकती है; Mutual Consent Divorce कम समय में संभव है पर cooling period लागू रहता है।

क्या तलाक के बाद संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है?

संपत्ति बंटवारे के लिए अदालत से alimony, maintenance और property settlements संबंधित आदेश दे सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - वैधानिक सहायता और मार्गदर्शन के लिए
  • National Commission for Women (NCW) - महिला सुरक्षा व अधिकारों के लिए
  • हरियाणा राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (HALSA) - Haryana में मुफ्त व सुलभ कानूनी सहायता के लिए

6. अगले कदम

  1. अपने मामले का उद्देश्य स्पष्ट करें और प्रश्न सूची बनाएं
  2. डॉक्यूमेंट्स एकत्र करें जैसे विवाह प्रमाण पत्र, आय-व्यय, बच्चे का प्रमाण पत्र
  3. हरियाणा के क्षेत्र में अनुभवी advicors खोजें; पहले परामर्श लें
  4. HALSA या स्थानीय महिला-helpline से मुफ्त कानूनी सहायता की जाँच करें
  5. कानूनी योजना बनाएं और mediation/conciliation विकल्प पर विचार करें
  6. फॉर्म, फीस और Hearing dates का calendar बनाएं और अनुसरण करें
  7. कानूनी प्रतिनिधि के साथ सभी निर्णयों पर स्पष्ट लिखित समझौता रखें

आधिकारिक कानून स्रोत (उद्धरण):

The Family Courts Act 1984 aims to promote conciliation and speedy disposal of matrimonial and family disputes. (Official text reference: https://legislative.gov.in/act-family-courts-act-1984)
The Special Marriage Act provides for civil marriages between two persons irrespective of religion. (Official text reference: https://legislative.gov.in/acts-in-force/special-marriage-act-1954)
The Hindu Marriage Act allows dissolution of marriage on grounds such as cruelty, desertion and other specified grounds. (Official text reference: https://legislative.gov.in/acts-in-force/hindu-marriage-act-1955)
The Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 provides protective measures for women victims of violence. (Official text reference: https://legislative.gov.in/acts-in-force/protection-women-domestic-violence-act-2005)
The Dissolution of Muslim Marriages Act 1939 provides for divorce within the Muslim community. (Official text reference: https://legislative.gov.in/acts-in-force/dissolution-muslim-marriages-act-1939)

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