कोलकाता में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील
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कोलकाता, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
- डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
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वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा
आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...
पूरा उत्तर पढ़ें - क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
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1. कोलकाता, भारत में तलाक और अलगाव के बारे में: कोलकाता, भारत में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन
कोलकाता में तलाक-आलगाव मामले भारतीय काननू ढांचे के अनुसार सुलझते हैं। अधिकांश मामले परिवार न्यायालय के आधीन आते हैं। प्रमुख कानून हैं हिंदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम और डॉमेस्टिक वॉयलेंस अधिनियम। इन नियमों के तहत धार्मिक वर्ग के अनुसार प्रक्रियाएं भिन्न होती हैं।
कोलकाता में तलाक की प्रक्रिया सामान्यतः फैमिली कोर्ट के द्वारा संचालित होती है। मुद्दे में पति-पत्नी के बीच करार, बच्चों के संरक्षण, और संपत्ति-भंग जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। अदालतें अनिवार्य तौर पर मौखिक-वीडियो सुनवाई, दस्तावेजी जाँच और सुनवाई-शेड्यूल पर निर्णय लेती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य- पश्चिम बंगाल में फैमिली कोर्ट के निर्माण से तलाक के मामलों की सुनवाई स्थानीय अदालत-स्तर पर तेज हो रही है।
“A petition under sub-section (1) of this section may be presented to the district court by both parties with their consent.”देखें हिंदू विवाह अधिनियम के संदर्भ में। स्रोत: IndiaCode
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: तलाक और अलगाव कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों के सूचीकरण
तलाक के मामलों में आप एक अनुभवी अधिवक्ता, कानूनी सलाहकार या वकील की सहायता लेते हैं ताकि सही अधिकार और दायित्व सुरक्षित रहें। नीचे कोलकाता-आधारित सामान्य परिदृश्य हैं जहाँ सलाह उपयोगी रहती है।
- क्रूरता या दुरुपयोग का मामला: अत्याचार, मानसिक दबाव या घरेलू हिंसा की स्थिति में सुरक्षा और संरक्षण के उपाय चाहिए।
- द्विवार्षिक या बहु-धार्मिक विवाह: Special Marriage Act के अंतर्गत विवाह होने पर कानून-निर्माण और पंजीकरण की स्पष्टता चाहिए।
- Mutual consent divorce: फॉर्म-फाइलिंग, कूलिंग-ऑफ पीरियड और अनुशंसित सुनवाई-तिथि सहित प्रक्रिया समझना आवश्यक है।
- संरक्षण-आधारित आदेश: बच्चों की सुरक्षा और अभिभावक-निर्वाह (maintenance) आदि के लिए सुरक्षा-आदेश आवश्यक हो सकते हैं।
- बच्चों के संरक्षण और विजिट-राइट्स: न्यायालय द्वारा बच्चों के हित के अनुसार निर्णय लेने होते हैं; अनुभवी वकील मदद करता है।
- आय-उत्पादन, रख-रखाव और संपत्ति बंटवारा: विभाजन के समय न्यायसंगत देय-हक और पत्नी/पति के अधिकार सुनिश्चित होते हैं।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: कोलकाता, भारत में तलाक और अलगाव को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून
नीचे भारत के प्रमुख कानून शामिल हैं, जो कोलकाता-निवासियों पर लागू होते हैं।
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955- हिंदू विवाहों के लिए तलाक, separation, maintenance आदि से जुड़े नियम देता है; mutual consent divorce के लिए धारा 13B विशेष महत्व रखती है।
- Special Marriage Act, 1954- विभिन्न धर्म के Personen के बीच विवाह और तलाक के लिए एकल-धर्म-निरपेक्ष कानून है; परिवार-कोर्ट के अंतर्गत दीर्घकालीन प्रक्रिया स्पष्ट है।
- Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005- घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा, आदेश, और संरक्षण-आरक्षण प्रदान करता है।
- Family Courts Act, 1984- परिवार से जुड़े विषयों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने का आधार; कोलकाता में भी इन कोर्टों का प्रभाव है।
“This Act provides for more effective protection of the rights of women.”स्रोत: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - IndiaCode
इन कानूनों के अलावा अदालतें गैर-धार्मिक मामलों में भी अलग-अलग प्रावधान लागू करती हैं। उदाहरण के लिए पारिवारिक विवादों की जानकारी और प्रक्रिया, पश्चिम बंगाल के भीतर परिवार न्यायालयों द्वारा संचालित होती है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: हिंदी में 10-12 प्रश्न-उत्तर
तलाक किन कानूनों के अंतर्गत आता है?
अधिकांश हिंदू विवाह तलाक HM Act 1955 के अंतर्गत आता है, जबकि inter-religious विवाह Specialized Act के अंतर्गत आते हैं।
Mutual consent divorce के लिए कितना समय लगता है?
आमतौर पर छह महीनों की cooling-off अवधि रहती है। कुछ स्थितियों में अदालत इस अवधि को कम कर सकती है।
तलाक के दौरान मुझे कौन-से दस्तावेज चाहिए होंगे?
पहचान-प्रमाण, विवाह पंजीकरण, बच्चों के जन्म-प्रमाण, आय-सम्बन्धी दस्तावेज, संपत्ति-डाक्यूमेंट और तलाक-फार्म आदि आमतः चाहिए होते हैं।
यौनिक या घरेलू हिंसा के मामले में क्या कदम उठाऊँ?
PWDVA के अंतर्गत सुरक्षा-ऑर्डर बनवाने, आपातकालीन सुरक्षा और पुलिस-रिकॉर्डिंग संभव हैं।
बच्चों के लिए custody कैसे तय होता है?
अदालत बच्चों के हित को सर्वोपरि मानती है; माता-पिता के पितृत्व-रिश्ते, शिक्षा और सुरक्षा पर निर्णय लिया जाता है।
कौन-सा कानून custody पर अधिक अधिकार देता है?
कस्टडी निर्णय में HM Act, Special Marriage Act और PWDVA सहित सभी प्रासंगिक कानून देखते हैं; बच्चों के हित सब से ऊपर रहते हैं।
अगर साथी विदेश में है तो तलाक कैसे होगा?
Special Marriage Act या HM Act के तहत विदेशी निवास भी स्वीकार्य होते हैं; कानूनी नोटिस और सुनवाई स्थानीय फैमिली कोर्ट में होती है।
Maintenance या alimony कैसे तय होता है?
आय, बचत, बच्चों के खर्च और जीवन-स्तर के आधार पर अदालत maintenance-निर्णय करती है; पूर्व-वैवाहिक आय और ऋण भी गिनते हैं।
क्या तलाक के बाद संपत्ति हिस्सेदारी तय होती है?
हिंदू कानून में संपत्ति अधिकार-निर्धारण सामान्यतः तलाक के साथ司法निर्णय के आधार पर होता है; संयुक्त संपत्ति पर न्यायिक निर्णय लागू होता है।
क्या mediation या counseling संभव है?
हाँ, कई madiation centers और चयनित अदालतें समाधान हेतु प्रयास प्रोत्साहित करती हैं ताकि तलाक के बजाय समझौते पर पहुँचा जा सके।
क्या मैं अपने.family court में e-filing कर सकता हूँ?
हाँ, कई पश्चिम बंगाल फैमिली कोर्ट्स ने डिजिटल फाइलिंग और ऑनलाइन नोटिसिंग शुरू की है, जिससे प्रक्रिया सरल होती है।
कौन सा वकील choose करूँ जो Kolkata में तलाक मामलों में माहिर हो?
फैमिली-लॉ के विशेषज्ञ अधिवक्ता, कानून-परामर्शदाता और कानूनी सलाहकार से परामर्श लें; क्षेत्रीय अनुभव देखने के लिए स्थानीय क्लायंट-रेफर न्यूनतम रखें।
तलाक से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी?
अदालत बच्चों की शिक्षा-अवस्था, देखभाल-समर्थन और समय-समय पर विज़िट को देखते हुए निर्णय लेती है।
डि-फेसिंग या डिवोर्स के बाद क्या जीवन सामान्य हो सकता है?
सहायक कानूनी सहायता, परिवार-समर्थन समूह और आर्थिक योजना से जीवन सामान्य बन सकता है।
5. अतिरिक्त संसाधन: तलाक और अलगाव से संबंधित 3 विशिष्ट संगठन
- National Legal Services Authority (NALSA) - निष्क्रिय-legal aid और सुलह सेवाएं प्रदान करता है। https://nalsa.gov.in
- West Bengal State Legal Services Authority (WB SLSA) - पश्चिम बंगाल में कानूनी aid और मदद केंद्र। https://wblsa.gov.in
- National Commission for Women (NCW) - महिला सुरक्षा, डॉमेस्टिक वायलेंस मामलों में सहायता। https://ncw.nic.in
6. अगले कदम: तलाक और अलगाव वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपनी स्थिति स्पष्ट करें: धर्म, निवास, बच्चों की स्थिति आदि नोट करें।
- प्राथमिक दस्तावेज इकट्ठे करें: पहचान, विवाह-प्रमाण, बच्चे के जन्म-प्रमाण आदि।
- कानून-विज्ञान समझें: HM Act, Special Marriage Act, PWDVA आदि के नमूने terms जानें।
- कॉल-आउट लिस्ट बनाएं: कोलकाता में 3-5 फैमिली-लॉ एक्सपर्ट्स को चुनें।
- पहला परामर्श बुक करें: शुल्क, उपलब्धता, केस-स्ट्रेथजी स्पष्ट करें।
- फीस-विन्यास और खर्च का अनुमान लें: कोर्ट फीस, डॉक्यूमेंट-डिजिटलिंग आदि समझें।
- आखिर में निर्णय लें: कौन सा वकील आपकी स्थिति के लिए सबसे उचित है।
संदर्भ: आधिकारिक कानून-स्त्रोत
“A petition under sub-section (1) of this section may be presented to the district court by both parties with their consent.”
Source: हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 - IndiaCode
“This Act aims to provide for more effective protection of the rights of women.”
Source: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - IndiaCode
“An Act to provide for the establishment of Family Courts with the jurisdiction and power to deal with matters of matrimony, guardianship, maintenance, and related disputes.”
Source: Family Courts Act, 1984 - IndiaCode
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