हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण कानून और अनुपालन वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में पर्यावरण कानून और अनुपालन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में पर्यावरण कानून औद्योगिक गतिविधियों, जल-आय, वायु-प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन पर कड़ा नियंत्रण लगाते हैं।

मुख्य कानून केंद्रीय स्तर पर लागू होते हैं, जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, जल प्रदूषण अधिनियम 1974 और वायु प्रदूषण अधिनियम 1981।

हरियाणा राज्य में इन कानूनों को वास्तविक रूप से लागू करने के लिए हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) सक्रिय है।

“An Act to provide for the protection and improvement of environment and for matters connected therewith.”

Source: Environment Protection Act, 1986 - पREAMBLE. https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1986-52_0.pdf

“The National Green Tribunal Act 2010 provides for the establishment of a specialized judicial body for the speedy disposal of cases relating to environmental protection and conservation.”

Source: National Green Tribunal Act, 2010 - पREAMBLE. https://legislative.gov.in/sites/default/files/A-68-2010-Act-01.pdf

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

हरियाणा के उद्योग एवं निर्माण क्षेत्र में कानूनी जोखिम बनते हैं।

  • Consent to Establish या Consent to Operate के लिये HSPCB से लाइसेंस और अनुपालन मार्गदर्शन चाहिये।
  • जल या वायु प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर नोटिस प्राप्त होने पर जवाबी तर्क और दलील बनवानी हो सकती है।
  • स्थानीय इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) और परियोजना प्रमाणीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं में सलाह चाहिए।
  • ई-स्वार्थ (EPR) और प्लास्टिक/हazardous waste प्रबंधन जैसे नियमों का पालन सुनिश्चित करना हो सकता है।
  • NGT, CPCB या HSPCB के विरुद्ध अपील/प्रतिवेदन या विवाद निपटारे की जरूरत आ सकती है।
  • हरियाणा में विशेष परियोजनाओं के लिये स्थानीय नियम और ज़ोनिंग नियमों की जाँच आवश्यक है।

व्यावहारिक उदाहरण: सोनीपत के एक उद्योग ने संविदान से बाहर इफ्लुएंट छोड़ना शुरू किया था; हिंदी-शहर के पन्ना जिले में प्लास्टिक इकाई ने प्लास्टिक पैकेजिंग नियमों का उल्लंघन किया। ऐसे मामलों में अनुभवी advicer से भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में पर्यावरण अनुपालन को नियंत्रित करने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख कानून प्रासंगिक हैं:

  • जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 - जल संसाधनों की सुरक्षा और दुष्प्रभावी जल निकासी पर नियंत्रण।
  • वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 - उद्योगों से निकलने वाले वायु प्रदूषण के मानक और निर्गम आवश्यकताएं।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 - पर्यावरण संरक्षण के लिये राष्ट्रीय ढांचा और नियमावली।

इन केंद्रीय कानूनों के साथ हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) संसाधनों तथा स्थानीय अनुपालन चाहिए।

महत्वपूर्ण नोट : हरियाणा में HSPCB के निर्देश, लाइसेंसिंग, नोटिसों और फाइनिंग के व्यवहार राज्य स्तर पर प्रभावी होते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मुझे हरियाणा में किसी औद्योगिक इकाई के लिये Environmental Clearance चाहिए?

हाँ, बड़े निर्माण-परियोजनाओं के लिये EIA-स्तर के अनुसार पर्यावरण क्लियरेंस आवश्यक हो सकता है। अधिक जानकारी के लिये MoEFCC के निर्देश देखें और HSPCB से संपर्क करें।

फैक्टरी के लिये Consent to Establish कैसे प्राप्त करें?

सबसे पहले क्षेत्रीय HSPCB कार्यालय से आवश्यकता-आधारित आवेदन दें। दस्तावेजों में विवरण, जल-आय-उत्पादन और दायित्व शामिल हों।

Consent to Operate किसके लिये आवश्यक है?

क्योंकि निर्माण शुरू होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण मानक लागू होते हैं, संचालन शुरू करने से पहले CtoO लेना अनिवार्य है।

हरियाणा में प्रदूषण से जुड़ी शिकायत कैसे दर्ज करें?

आप HSPCB के ऑनलाइन पोर्टल या स्थानीय कार्यालय के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। आवश्यक विवरण जैसे इकाई का नाम, पता, शिकायत का प्रकार दें।

EIA कब जरूरी है और कब नहीं?

निर्माण-परियोजनाओं के आकार, प्रकार और संभावित प्रभाव के आधार पर EIA आवश्यक हो सकता है। बड़े उद्योग, सड़कों, ऊर्जा परियोजनाओं पर विचार किया जाता है।

हरियाणा में प्लास्टिक और ई-वेस्ट से जुड़े नियम कितने सख्त हैं?

प्लास्टिक-निपटान और ई-वेस्ट प्रबंधन के नियम केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत Haryana में भी कड़ाई से लागू होते हैं।

NGT कैसे मदद करता है?

NGT पर्यावरण-जनित विवादों के न्यायिक निपटारे के लिये त्वरित मंच है और Haryana के मामले भी वहां उठाए जा सकते हैं।

स्थानीय निवासियों के लिये क्या-क्या खतरे हैं?

दूर-दराज के अपशिष्ट जल-निकासी से पानी की गुणवत्ता गिर सकती है और वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। उचित निगरानी से सुरक्षा मिलती है।

EPR क्या है?

Extended Producer Responsibility के तहत उत्पादकों को अपने उत्पाद के अंत-जीवन के लिये जिम्मेदारी उठानी होती है, खासकर प्लास्टिक, बैटरी और ई-वेस्ट में।

किस प्रकार के अपशिष्ट पर नियम लागू होते हैं?

Hazardous waste, biomedical waste, electronic waste, और प्लास्टिक साइट-विशिष्ट नियमों के अनुसार संभालना होता है।

क्या हरियाणा में जल-निकासी शुल्क देना पड़ता है?

हाँ, कई औद्योगिक इकाइयों के जल-निकासी पर शुल्क और मानक निर्धारित हैं, जिन्हें HSPCB के अंतर्गत पालन करना ہوتا है।

कौन सा दस्तावेज़ अनिवार्य है?

आवेदन-पत्र, परियोजना विवरण, प्रदूषण नियंत्रण योजना, वार्षिक रिपोर्ट और लाइसेंस दस्तावेज अनिवार्य हो सकते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) - हरियाणा में पर्यावरण अनुपालन की मुख्य एजेंसी। https://hspcb.gov.in
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) - केंद्रीय मानक और निगरानी संस्था। http://cpcb.nic.in
  • भारत सरकार, पर्यावरण, वनों, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) - नीति, नियम और पर्यावरण कार्यक्रमों की धुरी। https://moef.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने प्रोजेक्ट का प्रकार, मात्रा और स्थान स्पष्ट करें।
  2. HSPCB की वेबसाइट से आवश्यक लाइसेंस-प्रक्रिया की चेकलिस्ट लें।
  3. कायदे अनुसार documents एकत्र करें जैसे परियोजना विवरण, जल-आय-उत्पादन आदि।
  4. उचित वकील, कानून-सीधे और स्थानीय अनुभव वाले एड्वाइजर से संपर्क करें।
  5. Local bar association या Haryana Law University से सुझाव लें और परामर्श शेड्यूल करें।
  6. आवेदन और दलीलों की ड्राफ्टिंग में विशेषज्ञता से सुझाव लें।
  7. फॉलो-अप और अनुपालन-योजना को implement करें, समय-सीमा के भीतर रिपोर्टिंग करें।

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