कोलकाता में सर्वश्रेष्ठ पिता के अधिकार वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड


2010 में स्थापित
English
पी. दासगुप्ता एंड एसोसिएट्स, कोलकाता में एक प्रमुख विधिक सलाहकार संस्था है, जो आपराधिक और नागरीय दोनों कानूनों...
Lahiri & Associates
कोलकाता, भारत

1998 में स्थापित
English
लाहिरी एंड एसोसिएट्स भारत में एक प्रमुख कानूनी फर्म के रूप में प्रतिष्ठित है, जो कई प्रमुख विधिक क्षेत्रों में...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
कोलकाता, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...

2015 में स्थापित
English
आर एंड एस कोलकाता लीगल सॉल्यूशन्स भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म के रूप में खड़ी है, जो सिविल, आपराधिक, पारिवारिक...
SRA LAW CHAMBERS
कोलकाता, भारत

2017 में स्थापित
English
2017 में सॉल्ट लेक सिटी, वेस्ट बंगाल में स्थापित, SRA LAW CHAMBERS तेजी से एक पूर्ण-सेवा, बहु-विषयक विधिक फर्म में विकसित हुआ है...
SRS Law Chambers - Legal Services in Kolkata
कोलकाता, भारत

2019 में स्थापित
English
एसआरएस लॉ चैंबर्स, 2019 में कोलकाता, भारत में स्थापित, तीन भागीदारों द्वारा स्थापित एक विशिष्ट लॉ फर्म है जिनके पास...
Ishan Ganguly
कोलकाता, भारत

2025 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
English
हमारी फर्म प्रभावशाली कानूनी अभ्यास के लिए समर्पित है, जिसमें पर्यावरण कानून और जलवायु वकालत पर विशेष ध्यान...
ANR & ASSOCIATES
कोलकाता, भारत

English
ANR & ASSOCIATES कोलकाता, भारत में स्थित एक सम्मानित विधिक फर्म है, जो वैवाहिक, नागरिक, आपराधिक, कॉर्पोरेट, संवैधानिक,...
LEXMOTION
कोलकाता, भारत

English
भारत स्थित एक प्रतिष्ठित विधि फर्म, LEXMOTION, दिवालियापन सेवाओं, नागrik कानून और जिला अटॉर्नी प्रतिनिधित्व सहित विभिन्न...
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पिता के अधिकार - कोलकाता, भारत के लिए कानूनी गाइड

1. कोलकाता, भारत में पिता के अधिकार कानून के बारे में: कोलकाता, भारत में पिता के अधिकार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

कोलकाता में पिता के अधिकार कानून मुख्यतः Guardians and Wards Act 1890 और Hindu Minority and Guardianship Act 1956 द्वारा संचालित है. ये कानून बच्चों के अभिभावकत्व, custody और maintenance जैसे अधिकार निर्धारित करते हैं. राज्य स्तर पर Family Courts बनाये गये हैं ताकि विवाद शीघ्र निपटें और बच्चों के हित की रक्षा हो.

उद्धरण

Guardians and Wards Act, 1890 - An Act to consolidate the law relating to guardianship of minors.
Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 - An Act to amend the law relating to the guardianship of minor children in matters of Hindu law.
The welfare of the child is of paramount importance in custody and guardianship matters.

इन प्रावधानों के अनुरूप कोलकाता की अदालतें पिताओं को परिवार न्यायालय के माध्यम से अधिकार देंगी. अदालतें बच्चों के हित को सर्वोच्च मानती हैं और निर्णय में माता-पिता दोनों की भागीदारी को महत्व देती हैं.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पिता के अधिकार कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची

  1. विवाह-विच्छेद के समय बच्चे की custody के लिए पिता बनाम मां के बीच विवाद हो। कोलकाता की अदालतों में यह सामान्य है। एक वकील आप की ओर से दाखिल याचिका तयार कर सकता है और पक्षकारों के बीच समझौता कराने में मदद कर सकता है.
  2. बच्चे के देखभाल, रहने स्थान और visitation schedule पर स्पष्ट आदेश चाहिए। कानूनी सलाहकार यह सुनिश्चित करते हैं कि आदेश व्यवहारिक और व्यवहार-योग्य हों.
  3. नियुक्त guardianship या प्राकृतिक guardianship पर प्रश्न उठते हैं। एक अनुभवी अधिवक्ता उपयुक्त guardianship संरचना तय करने में मार्गदर्शन देगा.
  4. अधिकार-हानि या धमकी की स्थिति में सुरक्षा उपायों की मांग करनी हो। ऐसे मामलों में वकील सुरक्षा-आर्डर और सुरक्षा योजना बनवाने में मदद करता है.
  5. जहाँ एक अभिभावक दूसरे शहर या देश में स्थानांतरण चाहता है। इन मामलों में कोर्ट का अनुमतियाँ जरूरी हो सकती हैं और कानूनी सलाह जरूरी है.
  6. मां या पिता के remarriage के बाद custody के कामों पर नया निर्णय चाहिए। एक वकीलन्त मामले की सचाई और तर्क प्रस्तुत करेगा.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: कोलकाता, भारत में पिता के अधिकार को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  1. Guardians and Wards Act, 1890 - यह एक केंद्रीय अधिनियम है जो मिनर के guardianship को संभालता है. इसका उद्देश्य minors की सुरक्षा और संरक्षा है.
  2. Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 - यह हिन्दू बच्चों के guardianship से जुड़े नियम निर्धारित करता है.
  3. Family Courts Act, 1984 - इस अधिनियम के अंतर्गत परिवार न्यायालय स्थापित हुए हैं ताकि विवाह-विच्छेद, custody, maintenance आदि के मामलों में त्वरित न्याय मिले.

नोट: पश्चिम बंगाल में परिवार न्यायालयों की स्थानीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है. अधिकृत जानकारी के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर के दस्ता से जानकारी लें.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिता को custody मिलने के कई कारण क्या होते हैं?

अदालत बच्चे के लाभ और समकक्ष सुरक्षा को देखती है. पिता के वैधानिक अधिकार, स्थिर रहने की व्यवस्था और बच्चों के शिक्षा के संबंध में ठोस योजना अहम होती है.

क्या custody के लिए बहुविदीय गवाहियां चाहिए होती हैं?

हाँ, अदालत बच्चे के best interest को ध्यान में रखती है. स्कूल रिकॉर्ड, चिकित्सा और व्यवहारिक विवरण महत्वपूर्ण सबूत होते हैं.

क्या संयुक्त अभिभावकत्व (joint custody) संभव है?

संयुक्त अभिभावकत्व संभव है पर यह अनुशासन और स्थिरता की स्थिति पर निर्भर है. कई मामलों में अदालत माता-पिता के बीच collaboration चाहती है.

Relocation के समय क्या नियम हैं?

किसी दूसरे शहर या देश में स्थायी மாற்ற के लिए अदालत की अनुमति आवश्यक हो सकती है. कानूनी सलाहकार सामाजिक भावनाओं के साथ मामला बनता है.

Maintenance कैसे निर्धारित होता है?

चाइल्ड के maintenance के लिए CrPC 125 या परिवार अदालत के निर्णय लागू होते हैं. आय, खर्च और बच्चे की आवश्यकताओं पर निर्णय होता है.

क्या NOC पाने की ज़रूरत होती है?

कई मामलों में guardianship के लिए court NOC या court order मांगती है. यह custody और school enrollment पर प्रभाव डालता है.

क्या custody order पर modification संभव है?

हाँ, परिस्थिति बदलने पर court में modification की याचिका दायर की जा सकती है. उचित प्रमाण और बच्चों की वर्तमान जरूरतें महत्त्वपूर्ण होंगी.

क्या अदालत के आदेश तुरंत लागू होते हैं?

हाँ, custody और visitation orders को तुरंत लागू कराया जा सकता है. अदालत सुरक्षा उपाय भी निर्धारित कर सकती है.

कहाँ YOC पर dispute है तो क्या करें?

सबसे पहले कानूनी सलाहकार से मिलें. kemudian Family Court में उचित याचिका दायर करें और mediation का प्रयास करें.

क्या custody petitioner को legal aid मिल सकता है?

हाँ, यदि आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो NALSA और WB SLSA जैसी सेवाओं से सहायता मिल सकती है. ये सेवाएं मुफ्त कानून सलाह देती हैं.

कौन सा документ जरूरी होता है?

Identification proof, birth certificate, school records, medical records, income proof और_prev_prescriptions आदि महत्वपूर्ण हैं. इन्हें व्यवस्थित रखें.

क्या माता-पिता दोनों के पास समान अधिकार होते हैं?

कानून में guardianship के महत्वाकांक्षा समान है. अदालत बच्चे के लाभ और सुरक्षा को प्राथमिक मानती है.

क्या custody की मांग Divorce के साथ जुड़ी रहती है?

कई मामलों में custody Divorce के बाद भी दायर होती है. अदालत तलाक के दायरे में बच्चे के हित को देखती है.

अधिकारों के लिए कौन सा जिम्मेदार प्रतिनिधि चाहिए?

अधिवक्ता के साथ एक कुशल कानूनी सलाहकार आपकी स्थिति का न्यायसंगत प्रस्तुतीकरण कर सकता है और अदालत के सवालों के उत्तर दे सकता है.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in
  • West Bengal State Legal Services Authority - https://wblsa.gov.in
  • CRY - Child Rights and You - https://www.cry.org

6. अगले कदम

  1. अपने बच्चे की स्थिति के सभी आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करें.
  2. कोलकाता के अनुभवी फैमिली लॉ के अधिवक्ता से initial consultation लें.
  3. अपने क्षेत्र के Family Court के अधिकार क्षेत्र की पुष्टि करें.
  4. custody, access और maintenance की एक preliminary योजना बनाएं.
  5. कानूनी याचिका दायर करें और आवश्यक नोटिस जारी करवाएं.
  6. mediation या Lok Adalat के लिए तैयार रहें ताकि समझौता संभव हो.
  7. आदेश मिलने पर पालन करें और अगर बदलाव चाहिए तो formal modification याचिका दायर करें.

सूत्र और उद्धरण के लिए आधिकारिक स्रोत देखें: Guardians and Wards Act, 1890; Hindu Minority and Guardianship Act, 1956; Family Courts Act, 1984. इन कानूनों के पाठ आप indiaincode.nic.in तथा न्यायालयीय साइटों पर देख सकते हैं. कोर्ट के निर्णय सामान्यतः Best interest of the child के सिद्धांत पर आधारित होते हैं. डॉक्यूमेंटेशन और प्रमाणिक साक्ष्यों के साथ पेशेवर कानूनी सलाह लिया जाना चाहिए.

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