मुंबई में सर्वश्रेष्ठ पिता के अधिकार वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Lawcrust Legal Consulting Services
मुंबई, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 70 लोग
English
LawCrust Global Consulting Ltd. is headquartered in Mumbai and operates as a global legal consulting and hybrid advisory firm. It began its journey in 2016 under a different name, was rebranded as LawCrust in 2018, and became a public limited company in 2023. The firm integrates legal consulting...
Legal Eagles Eye Law Firm
मुंबई, भारत

English
लीगल ईगल्स आई एक प्रतिष्ठित पूर्ण-सेवा कानूनी फर्म है, जो गुड़गांव, भारत में स्थित है और व्यापक कानूनी विशेषज्ञता...
Law Chambers
मुंबई, भारत

2002 में स्थापित
English
स्थापित 2002 में, लॉ चेम्बर मैंगलोर मैंगलोर क्षेत्र में एक प्रमुख कानूनी प्रैक्टिस रही है, जो विभिन्न क्षेत्रों में...
Pratibha Choudhari and Legal Associates
मुंबई, भारत

2020 में स्थापित
English
प्रतिभा चौधरी एंड लीगल असोसिएट्स (PCLA) भारत में एक पूर्ण-सेवा विधि फर्म है, जो विविध वैश्विक ग्राहक वर्ग को कानूनी,...
Ramkrishna Law Firm and Research Centre
मुंबई, भारत

उनकी टीम में 22 लोग
English
कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिकोडी में स्थित, रामकृष्ण लॉ फर्म और रिसर्च सेंटर एक गैर-पंजीकृत लॉ फर्म के रूप में...
Adv K M Santhoshkumar and Associates
मुंबई, भारत

1994 में स्थापित
English
एडवोकेट के एम संकेतॉसकुमार एंड असोसिएट्स, 1994 में स्थापित, कोट्टायम, केरल स्थित एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है। तीन दशकों...

2010 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
एस एस ग्लोबल लॉ फर्म, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में स्थित है, अपने ग्राहकों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने...
Sapna Seth Law Office
मुंबई, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 8 लोग
English
सपना सेठ लॉ ऑफिस भारत में एक प्रमुख विधिक अभ्यास के रूप में विशिष्टता रखता है, जो आपराधिक न्याय, पारिवारिक कानून,...
मुंबई, भारत

English
एडवोकेट कैसियन क्रास्टो एक गोवा स्थित फुल सर्विस लॉ फर्म है जिसका नेतृत्व एडवोकेट कैसियन क्रास्टो करते हैं। यह...
जैसा कि देखा गया

1. मुंबई, भारत में पिता के अधिकार कानून के बारे में: Mumbai, India में पिता के अधिकार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में पिता के अधिकार कानून के अंतर्गत पिता और माता दोनों ही प्राकृतिक संरक्षक माने जाते हैं।

यह संरक्षकत्व बच्चों की देखभाल, शिक्षा और सुरक्षा के अधिकार देता है।

पर अदालतें सामान्यतः बच्चे के हित को सर्वोपरि मानती हैं और निर्णय स्पष्ट करती हैं।

महाराष्ट्र में मुंबई जिले के लिए परिवार न्यायालय इस प्रकार के मामलों को त्वरित निपटाने के लिए स्थापित हैं।

इन अदालतों में कस्टडी, संरक्षकता और अभिभावकत्व से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई होती है।

“The natural guardians of a minor are the father and mother.”

स्रोत: Hindu Minority and Guardianship Act, 1956, Section 6

“The welfare of the child shall be the paramount consideration in all proceedings relating to custody, guardianship and maintenance.”

स्रोत: Guardians and Wards Act, 1890 (कानून के अनुरोधानुसार बाल के हित की प्राथमिकता)

हाल के वर्षों में मुंबई में अदालतें भी इस दिशा में स्पष्ट प्राथमिकताएं रखती हैं, ताकि पिता के अधिकारों के साथ-साथ बाल-हित सुनिश्चित हो सके।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पिता के अधिकार कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • पारिवारिक विभाजन के बाद बच्चों के साथ संयुक्त कस्टडी या एक्सेस के लिए मुंबई के फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल करनी हो।
  • जब माता-पिता अलग रहते हैं और एक पिता संरक्षकता या बालकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है।
  • यदि माता-पिता विदेश में रहते हों और संरक्षकता की अदालत से मंजूरी चाहिए हो।
  • यदि अदालत संरक्षकता, सुरक्षा-संबंधी आदेश या भरण-पोषण के मुद्दों पर निर्णय देनी हो
  • जन्म के बावजूद पिता पितृत्व स्थापित कर संरक्षकता या qon custody पाना चाहते हों।
  • स्टेप-चाइल्ड या अपतटीय child के साथ guardianship, maintenance, access के मामलों में कानूनी सहायता चाहिए।

उदा: मुंबई के फैमिली कोर्ट में एक पिता ने सात वर्ष के बेटे के लिए संयुक्त कस्टडी की याचिका दायर की। दूसरे मामले में पिता ने विदेश में रह रहे बच्चे के लिए संरक्षकता की मांग की।

इन मामलों में एक सक्षम advodate, legal advisor या वकील केस स्टडी, दस्तावेज़ संग्रह और अदालत-समर्थन प्रस्तुत करने में मदद करते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: Mumbai, India में पिता के अधिकार को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ठ कानून

  1. हिंदू अल्प-उपन्यास और संरक्षकता अधिनियम, 1956 - यह कानून प्राकृतिक संरक्षकता के आधार पर पिता और माता को संरक्षक मानता है।
  2. गार्डियंस एंड वॉर्ड्स अधिनियम, 1890 - अदालत द्वारा संरक्षक नियुक्ति, संरक्षकता और बाल-हित के अनुरोधों पर निर्णय के लिए आधिकारिक ढांचा देता है।
  3. फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 - मुंबई में फैमिली कोर्ट्स के गठन का अभिप्रेत कार्य, ताकि पारिवारिक मामलों की त्वरित सुनवाई हो सके।
“The natural guardians of a minor are the father and mother.”

स्रोत: Hindu Minority and Guardianship Act, 1956, Section 6

“The welfare of the child shall be the paramount consideration in all proceedings relating to custody, guardianship and maintenance.”

स्रोत: Guardians and Wards Act, 1890

इन कानूनों के अनुसार Mumbai निवासी अपने अधिकारों के लिए उचित न्याय-याचिका दायर कर सकते हैं और अदालत बाल-हित को प्राथमिकता देती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिता प्राकृतिक संरक्षक कब बनते हैं?

कानून के अनुसारreamble पिता और माता दोनों प्राकृतिक संरक्षक हैं। यह स्थिति मान्य बच्चे के वैध होने पर भी लागू होती है।

क्या पिता के पास माँ के बराबर संरक्षक अधिकार होते हैं?

हाँ, पिता और माँ दोनों को संरक्षक माना गया है; निर्णय बाल-हित के अनुसार होते हैं।

क्या अदालतें संयुक्त कस्टडी दे सकती हैं?

हाँ, मुंबई के फैमिली कोर्ट संयुक्त कस्टडी के उपाय कर सकती है, यदि बाल-हित ऐसा दिखाता है।

Guardianship कब अदालत से मिली जा सकती है?

जब माता-पिता संरक्षकता के लिए सहमत न हों, तब अदालत guardianship नियुक्त कर सकती है।

क्या पितृत्व साबित करने के लिए दस्तावेज़ आवश्यक होंगे?

हाँ, पहचान प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र, पिता की आय प्रमाण आदि जरूरी हो सकते हैं।

कस्टडी केस में बाल-हित कैसे स्थापित होता है?

बाल-हित की परख में शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, दैनिक देखभाल आदि फैक्टर शामिल होते हैं।

क्या पिता को भरण-पोषण मिलता है?

हाँ, बाल-धारण के साथ भरण-पोषण संबंधी आदेश संभव होते हैं, विशेषकर Guardianship के साथ।

अगर बच्चा भारत के बाहर रहता हो तो क्या?

ऐसी स्थिति में अदालतें अस्थायी या स्थायी कस्टडी आदेश दे सकती हैं, बाल-हित के अनुसार।

क्या वकील मुंबई फैमिली कोर्ट में विशेषज्ञता रखता है?

हाँ, परिवार कानून, संरक्षकता और custody मामलों में विशेषज्ञ वकील की सिफारिश उचित होती है।

क्या पितृत्व के अधिकार केवल गम्भीर मामलों में होते हैं?

नहीं, छोटे-छोटे custody, access, visitation आदि मामलों में भी पिता के अधिकार लागू होते हैं।

कस्टडी के लिए किस समय कदम उठाने चाहिए?

ज्यादा देर मत करें; जैसे ही विवाद हो, कानूनी सलाह लेकर दस्तावेजीकरण शुरू करें।

क्या पिता को बाल-हित के सन्देह पर कुछ संशोधन मिल सकता है?

हां, अदालत बाल-हित के आधार पर आदेश संशोधन कर सकती है, यदि परिस्थितियाँ बदलें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - आधिकारिक साइट: nalsa.gov.in
  • Bombay High Court - Legal Aid / Family Court जानकारी - bombayhighcourt.nic.in
  • National Portal of India - Legal aid और परिवारिक कानून मार्गदर्शक - india.gov.in

6. अगले कदम: पिता के अधिकार वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें: custody, guardianship, access, maintenance आदि किस प्रकार के विवाद हैं उन्हें लिखें।
  2. कागजात इकट्ठा करें: जन्म प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, मौजूदा कोर्ट आदेश, आय प्रमाण आदि।
  3. तैयार करें एक संक्षिप्त विवरण: केस के तथ्य,desired outcome और बाल-हित का आधार।
  4. बॉरो-लिस्टिंग करें: परिवार कानून के अनुभवी advodates, Advocates और legal advisors के नाम और क्लाइंट रिव्यू देखें।
  5. बार काउंसिल से सिफारिशें लें: महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल की निर्देशिका से विशेषज्ञ खोजें।
  6. NALSA या स्थानीय Legal Aid उपलब्धता चेक करें: मुफ्त कानूनी सहायता विकल्पों का लाभ लें।
  7. पहला निदान और फर्स्ट-कॉल शेड्यूल करें: पहले साक्षात्कार में दृष्टिकोण और फीस संरचना स्पष्ट करें।

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