हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ सरकारी अनुबंध वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1- हरियाणा, भारत में सरकारी अनुबंध कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में सरकारी अनुबंध कानून भारतीय संविधान और केंद्रीय कानूनों के साथ संयुक्त रूप से लागू होता है। राज्य के भीतर PWD, HUDA, MCG आदि के टेंडर प्रक्रियाँ केंद्रीय अधिनियमों और हरियाणा वित्तीय नियमों से नियंत्रित होती हैं। ई-प्र procurement प्लेटफॉर्म GeM का उपयोग Haryana के कई विभागों द्वारा बढ़ रहा है।

“All agreements are contracts if they are made by the free consent of parties competent to contract, for a lawful consideration and with a lawful object, and are not hereby expressly declared to be void.”
Source: भारतीय संविदा अधिनियम 1872 (Section 10) - आधिकारिक पाठ

“Preference shall be given to goods and services made in India.”
Source: Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017

“Public procurement should be conducted through transparent, fair and non-discriminatory processes.”
Source: Make in India / DPIIT guidelines

इन स्रोतों के आधार पर हरियाणा में अनुबंध निष्पादन के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया अनिवार्य है। राज्य के नियमों में GeM और इ-प्र procurement की वृद्धि से समय की बचत और अनुचयित मानदंडों का पालन आसान हुआ है।

2- आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

हरियाणा के सरकारी अनुबंध मामलों में कानूनी सहायता आवश्यक हो सकती है ताकि आप सही मार्गदर्शन, तात्कालिक विवाद समाधान और वैधानिक सुरक्षा प्राप्त कर सकें। नीचे हरियाणा-विशिष्ट 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं।

  • उदाहरण 1: हरियाणा PWD द्वारा सड़क निर्माण टेंडर में बोली मूल्यांकन अस्पष्ट हो और आपत्ति उठाने पर विवाद हो सकता है। अधिवक्ता ऐसी बीड प्रक्रियाओं के नियमों की व्याख्या कर सकता है और वैध चैलेंज कर सकता है।
  • उदाहरण 2: हरियाणा नगर निगम की जल-संरचना परियोजनाओं के लिए टेंडर रद्द या संशोधित हो गया है; आपके पक्ष में वैधानिक आपत्तियाँ उठ सकती हैं और अदालत/अरबिट्रेशन में सहायता चाहिए।
  • उदाहरण 3: भुगतान विलंब, चालान के अनुसार देय भुगतान न होना; कॉन्ट्रैक्ट के भुगतान नियमों के अनुसार आपत्ति दायर करने के लिए वकील जरूरी हो सकता है।
  • उदाहरण 4: आखिरत में अनुबंध-विवाद के लिए arbitration या अदालत जाना पड़ता है; अनुबंध-क्लॉज़ की सही drafting और दावा-यथार्थता के लिए कानूनी सहायता आवश्यक रहती है।
  • उदाहरण 5: GeM/Make in India के पालन में तकनीकी और वित्तीय योग्यता के मुद्दे पर विवाद; वैध submissions और strict compliance के लिए कानूनी मार्गदर्शन अनिवार्य है।
  • उदाहरण 6: Pre-bid conference में गलत सूचना या bid submission के दौरान तकनीकी गड़बड़ी; उचित अपील/चैलेंज के लिए वकील की सलाह जरूरी है।

इन स्थितियों में एक अनुभवी सरकारी अनुबंध वकील आपकी सुरक्षा, तात्कालिक सलाह, और विवाद-समाधान के लिए बेहतर विकल्प दे सकता है।

3- स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा के सरकारी अनुबंधों को चलाने में नीचे दिए हुए प्रमुख कानून/नियम केंद्र-हिंड नीतियों के साथ काम करते हैं:

  • भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 - अनुबंध के गठन, वैधानिक क्षमता, मान-धन, और अनुबंध-उल्लंघन के नियम स्थापित करता है।
  • Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017 - केंद्र-स्तर पर सरकारी खरीदी में Make in India को प्राथमिकता देने का निर्देश देता है; हरियाणा विभाग इसे अपने टेंडरों में अपनाते हैं।
  • हरियाणा वित्तीय नियम (HFR) और संबंधित निर्देश - राज्य के वित्तीय नियंत्रण, भुगतान-नियम और अनुबंध-शर्तों को नियंत्रित करते हैं; हरियाणा के विभाग इन्हें फॉलो करते हैं।
  • Central Public Works Department (CPWD) General Conditions of Contract - निर्माण कार्यों के लिए मानक शर्तें; हरियाणा में भी कई विभाग CPWD GCOC को संदर्भित करते हैं।

4- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकारी अनुबंध क्या है?

सरकारी अनुबंध वे समझौतें हैं जिनमें सरकार एक पक्ष के रूप में भाग लेती है और दूसरा पक्ष ठेकेदार/सप्लायर होता है।

हरियाणा में सरकार के अनुबंध किन कानूनों से नियंत्रित होते हैं?

मुख्य कानून Indian Contract Act, Make in India Order, Haryana Financial Rules और CPWD सामान्य अनुबंध शर्तें हैं।

टेंडर में भाग लेने के लिए किन-किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?

आमतौर पर कंपनी प्रमाणपत्र, पैन, GST, टर्नओवर, अनुभव, बैंक गारंटी आदि चाहिए होते हैं।

अगर टेंडर डाक्यूमेंट्स अस्पष्ट हों तो क्या करें?

कानूनी सलाहकार से क्लियर-अपली और रद्द-या संशोधन/समझौते के विकल्पों पर मार्गदर्शन लें।

Bid security क्या है और कब जमा करनी चाहिए?

Bid security एक भुगतानित सुरक्षा राशि है जो बोली छोड़ने पर या अनुचित बोली पर वसूल की जाती है; tender दस्तावेज़ में निर्दिष्ट की जाती है।

यदि मेरी बोली को गलत मूल्यांकन किया गया हो तो क्या करूं?

रिव्यू/एग्रीमेंट-चैलेंज/अपील के रास्ते खुले रहते हैं; वकील द्वारा उचित तर्क के साथ दायर किया जा सकता है।

क्या अनुबंध-समाप्ति के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं?

हाँ; अनुबंध-भंग, देनदारी और क्षतिपूर्ति के दावे के लिए कानूनी मार्ग अपनाए जा सकते हैं।

आर्बिट्रेशन बनाम अदालत - कौन सा विकल्प बेहतर है?

आर्बिट्रेशन अक्सर तेजी और गुप्त रहने के फायदे देता है; स्थानीय कानून के अनुसार चयन करें।

क्या Make in India के अनुसार प्राथमिकता लागू होती है?

हाँ; केंद्र-स्तर पर Make in India नीति लागू है और राज्य-स्तर पर भी अपनाई जाती है; डील-आउटपुट पर असर पड़ सकता है।

GeM पर खरीद-फरोख्त कैसे होती है?

GeM एक राष्ट्रीय ऑनलाइन मंच है जो सरकारी खरीदी को पारदर्शी बनाता है; खरीदी के नियम GeM वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

टेंडर शिकायत समय-सीमा कितनी होती है?

यह हर tender दस्तावेज़ में अलग होती है; सामान्यतः बोली-समाप्ति के बाद 7-30 दिनों के भीतर होती है।

कानूनी सहायता कब लें?

जैसे ही कोई स्पष्टीकरण, अवमानना या अन्य द्वंद्व दिखे, तुरंत अनुभवी advokat से मिलें।

5- अतिरिक्त संसाधन

  • GeM (Government e-Marketplace) - https://gem.gov.in
  • CPWD (Central Public Works Department) - https://cpwd.gov.in
  • Central Vigilance Commission (CVC) - https://cvc.gov.in

6- अगले कदम

  1. लक्षित टेंडर/अनुदेश पोर्टल पहचानें - GeM या राज्य पोर्टल देखें।
  2. टेंडर दस्तावेज़ डाउनलोड करें और समय-सारणी समझें।
  3. योग्यता, लाभ-हक और भुगतान शर्तें स्पष्ट करें और रिकॉर्ड बनाएं।
  4. एक अनुभवी सरकारी अनुबंध वकील से प्रारम्भिक कंसल्टेशन लें।
  5. दस्तावेज़ पूर्ण करें, पात्रता अनुरोध और सुरक्षा जमा सही तरीके से जमा करें।
  6. आवेदन-विवाद या आपत्ति की प्रक्रिया में समय-सीमा का पालन करें।
  7. यदि आवश्यक हो तो निष्पादन के लिए arbitration/ अदालत-समाधान की योजना बनाएं।

नोट: यह मार्गदर्शिका सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वास्तविक अनुबंध से पहले हरियाणा के स्थानीय नियमों औरTender दस्तावेज़ की विशिष्ट शर्तें देखें और एक अनुभवी कानून-व्यवसायिक सलाहकार से मिलें।

संबंधित आधिकारिक स्रोत

भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 - आधिकारिक पाठ और अधिनियम से जुड़ी जानकारी देखें: legislative.gov.in

Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017 - आधिकारिक सूचना और मार्गदर्शन: dipp.gov.in

GeM - National Public Procurement Portal: gem.gov.in

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