हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ बौद्धिक संपदा वकील
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भारत बौद्धिक संपदा वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
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- मैं निम्नलिखित बौद्धिक संपदा अनुबंध प्रस्तुत करता हूँ। यह एक सामान्य प्रारूप है और विशिष्ट परिस्थितियों के अनुसार परिष्कृत किया जाना चाहिए। --- **बौद्धिक संपदा अनुबंध** यह अनुबंध दिनांक __________ (दिनांक भरें) को निम्नलिखित पक्षों के बीच किया गया है: 1. **पक्ष एक:** [नाम], एक कानूनी व्यक्ति/व्यक्ति, जिसका पंजीकृत पता __________ है। 2. **पक्ष दो:** [नाम], एक कानूनी व्यक्ति/व्यक्ति, जिसका पंजीकृत पता __________ है। **भूमिका:** जहाँ पक्ष दो के पास विशिष्ट बौद्धिक संपदा (जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, व्यापार रहस्य, डिज़ाइन, सॉफ़्टवेयर, आदि) है, और पक्ष एक को इसका उपयोग, विकास या व्यावसायिकरण करने की आवश्यकता है, वह इस अनुबंध के माध्यम से इन अधिकारों की स्वीकृति और संरक्षण करने का इरादा रखते हैं। **अनुबंध की शर्तें:** 1. **परिभाषाएँ:** - “बौद्धिक संपदा” का अर्थ है वह ज्ञान-संपन्नता, रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ या तकनीकी नवाचार, जो पक्षों द्वारा इस अनुबंध के अंतर्गत निर्दिष्ट किये गए हैं। - “उपयोग अधिकार” का अर्थ है वह सीमित या अनन्य लाइसेंस, जो पक्ष एक को इस अनुबंध के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। 2. **स्वामित्व:** पक्ष दो बौद्धिक संपदा का एकमात्र एवं असाधारण स्वामी रहेगा। इस अनुबंध के अंतर्गत पक्ष दो द्वारा पक्ष एक को स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया जा रहा है, केवल उपयोग एवं उपयोग के अधिकार प्रदान किये जा रहे हैं। 3. **लाइसेंस का दायरा एवं अवधि:** - पक्ष दो पक्ष एक को [नॉन-एक्सक्लूसिव/एक्सक्लूसिव] लाइसेंस प्रदान करता है, जो निम्नलिखित क्षेत्रों/उद्देश्यों के लिए होगा: __________। - यह लाइसेंस अनुबंध कीप्रारंभ तिथि से __________ (अवधि) तक वैध रहेगा, जब तक इसे समाप्त न किया जाए। 4. **वित्तीय शर्तें:** पक्ष एक पक्ष दो को निम्नलिखित आय भुगतान करेगा: - प्रारंभिक भुगतान: ₹__________ - रॉयल्टी/फीस: __________%/राशि, जो __________ के आधार पर होगी। 5. **गोपनीयता:** पक्ष एक इस बौद्धिक संपदा से संबंधित किसी भी गोपनीय जानकारी को तीसरे पक्ष को प्रकट नहीं करेगा, सिवाय लिखित पूर्व सहमति के। 6. **प्रयुक्ति की सीमाएँ:** पक्ष एक को बौद्धिक संपदा का उपयोग अनुबंध में निर्दिष्ट उद्देश्यों तक ही सीमित रहेगा। किसी अन्य उपयोग हेतु पक्ष एक को पक्ष दो की लिखित अनुमोदन प्राप्त करनी होगी। 7. **बौद्धिक संपदा संरक्षण:** - पक्ष दो बौद्धिक संपदा का कानूनी रूप से संरक्षण सुनिश्चित करेगा। - पक्ष एक किसी भी उल्लंघन या दावे की जानकारी तुरंत पक्ष दो को देगा और आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। 8. **जिम्मेदारी और क्षतिपूर्ति:** पक्ष एक किसी भी दावे, हानि या शुल्क के लिए पक्ष दो को क्षतिपूर्ति देगा, यदि वह बौद्धिक संपदा के अनुचित उपयोग के कारण उत्पन्न हुआ हो। 9. **समाप्ति:** निम्न स्थितियों में यह अनुबंध समाप्त हो सकता है: - पक्ष द्वारा शर्तों का उल्लंघन होने पर, और 30 दिनों की लिखित सूचना के बाद यदि उल्लंघन दूर नहीं किया जाता। - आपसी सहमति द्वारा। समाप्ति के पश्चात पक्ष एक को बौद्धिक संपदा का उपयोग तुरंन्त बंद करना होगा और जितनी भी सामग्री हो उसे वापस करना होगा। 10. **कानूनी अधिकार:** यह अनुबंध [स्थान] के कानूनों के अधीन होगा। किसी भी विवाद को पहले आपसी समाधान के माध्यम से हल करने का प्रयास किया जाएगा, और यदि असफल, तो [स्थान] की न्यायालयों में मुक़दमा किया जा सकता है। 11. **संपूर्ण समझौता:** यह दस्तावेज पक्षों के बीच पूरा समझौता है और इससे पूर्व के किसी भी मौखिक या लिखित समझौते को प्रतिस्थापित करता है। **हस्ताक्षर:** पक्ष एक: ________________________ नाम: _________________________ तारीख: _______________________ पक्ष दो: ________________________ नाम: _________________________ तारीख: _______________________ --- कृपया इस प्रारूप को आपकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार परिष्कृत करने हेतु अनुभवी विधिक सलाहकार से परामर्श करें।
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वकील का उत्तर Shenzhen Yizhou Intellectual Property Operation Co., Ltd. द्वारा
प्रिय,आपको विकास जारी रखने से पहले निश्चित रूप से एक लिखित अनुबंध होना चाहिए - यह आपके और आपके ग्राहक दोनों की रक्षा करता है और कोड की स्वामित्वता, भुगतान की शर्तें, वितरण अनुसूची और गोपनीयता को स्पष्ट रूप से...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. हरियाणा, भारत में बौद्धिक संपदा कानून के बारे में
हरियाणा में बौद्धिक संपदा कानून भारत के राष्ट्रीय ढांचे के अनुसार लागू होते हैं. पंजीकरण, संरक्षण और रक्षा की प्रक्रियाएं IP इंडिया पोर्टल के माध्यम से संचालित होती हैं. केंद्र सरकार के कानून हरियाणा में भी समान रूप से लागू होते हैं.
“A trademark is a sign capable of distinguishing the goods or services of one enterprise from those of others.”
ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट और डिज़ाइनों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कानून उपलब्ध हैं. हरियाणा के उद्योगिक गतिविधियों में ब्रांड निर्माण, इनोवेशन और डिज़ाइन संरक्षा के मामलों की सुनवाई पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत होती है. क्षेत्रीय न्यायालयों एवं जिला अदालतों में वास्तविक मामलों की सुनवाई होती है.
“Copyright subsists in original literary, dramatic, musical and artistic works. Registration of copyright is not mandatory.”
इन अधिकारों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है पर पंजीकरण से रक्षा सुदृढ़ होती है और वैधानिक प्रमाण भी मिलता है. डिज़ाइन, ट्रेडमार्क और पेटेंट के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है. इनमें से हर एक अधिकार हरियाणा निवासियों के लिए भी समान रूप से उपलब्ध है.
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
हरियाणा में बौद्धिक संपदा के मामले जटिल कानूनी चरणों के साथ आते हैं. विविध अधिकारों में सही अधिकार-आधार पहचानना जरूरी होता है. नीचे Haryana से जुड़े वास्तविक परिदृश्य दिए जा रहे हैं.
- गुरुग्राम के एक फैशन ब्रांड ने पंजीकृत ट्रेडमार्क के समान दिखने वाला लोगो जकड़ लिया. वैध अधिकार सुरक्षित करने के लिए अधिकारिक वकील की मदद जरूरी है.
- फरीदाबाद की एक इंजीनियरिंग कंपनी ने पेटेंट के लिए आवेदन किया, पर प्रतिद्वंद्वी ने समान तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया. अधिकार से मुकदमा और समन्वय की ज़रूरत पड़ती है.
- रोहतक के डिजिटल स्टूडियो ने अपने कॉपीराइटेड वीडियो कंटेंट की सुरक्षा चाही. अनुचित उपयोग के विरुद्ध कानूनी कदम उठाने के लिए वकील जरूरी हो सकता है.
- गुरुग्राम में डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के बावजूद कोई प्रतिद्वंद्वी उसके डिज़ाइन को नकल कर पब्लिक-रन स्टोर में बेच दे; डिज़ाइन अधिकार के संरक्षण के लिए कानूनी सलाह चाहिए.
- फरीदाबाद के कृषि उपकरण निर्माता ने GI या ट्रेडमार्क के दायरे में दखल देखा; स्थानीय कानून-प्राधिकरण से मार्गदर्शन के लिए IP वकील की जरूरत पड़ी.
- हरियाणा के स्टार्टअप्स में ब्रांड सुरक्षा, कॉपीराइट-इन-डिजिटल-कंटेंट, और अनुचित प्रतियोगिता के मामलों में समय-सीमा और प्रक्रिया की स्पष्टता आवश्यक होती है.
3. स्थानीय कानून अवलोकन
हरियाणा में बौद्धिक संपदा को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं. ये कानून राष्ट्रीय स्तर पर लागू होते हैं और Haryana के में भी समान रूप से प्रभावी हैं.
ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 और ट्रेडमार्क नियम द्वितीयक/तृतीयक पंजीकरण और उल्लंघन पर उपाय निर्धारित करते हैं. “A trademark is a sign capable of distinguishing the goods or services of one enterprise from those of others.” - IP इंडिया
पेटेंट अधिनियम 1970 आविष्कारों के लिए अनुदान-योग्य अधिकार देता है. पेटेंट अवधि सामान्यतः 20 वर्ष होती है. “A patent provides exclusive rights to the inventor for the invention for a limited period.” - IP इंडिया
कॉपीराइट अधिनियम 1957 मूल रचनाओं पर सुरक्षा प्रदान करता है. कॉपीराइट पंजीकरण अनिवार्य नहीं है; पर पंजीकरण से संरक्षण मजबूत होता है. “Copyright subsists in original literary, dramatic, musical and artistic works. Registration of copyright is not mandatory.” - Copyright Office
डिज़ाइन अधिनियम 2000 वस्तुओं के आवरण-रूप, आकार और ओमन-डिज़ाइन की रक्षा करता है. डिज़ाइन पंजीकरण से उत्पाद के दृश्य-आकर्षण पर अधिकार सुरक्षित रहते हैं.
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IP क्या है और हरियाणा में यह क्यों मायने रखता है?
BIJ IP यानि बौद्धिक संपदा वह मनुष्यों की रचनात्मकता से जुड़ी सम्पत्ति है. यह ब्रांड, इनोवेशन और क्रिएटिव कंटेंट की सुरक्षा देता है. Haryana के कारोबारी मैदान में प्रतिस्पर्धा और मूल्य-वर्धन के लिए IP जरूरी है.
हरियाणा में ट्रेडमार्क कैसे पंजीकृत करें?
IP इंडिया पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन दें. चयनित वर्ग, सामान या सेवाएं और लोगो/रिलेटेड चिन्ह दें. आवेदन पर शुल्क जमा करें और ट्रैकिंग करें. किसी भी दावे-उद्धार के लिए अविलंब सलाह लें.
क्या मुझे कॉपीराइट के लिए पंजीकरण करना चाहिए?
पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर यह प्रमाण देता है कि आपका काम आपका है. विशिष्ट मामलों में सुरक्षा और दावा-प्रमाण बेहतर होता है. विशेषकर डिजिटल प्लॅटफॉर्म्स पर ध्यान दें.
पेटेंट के लिए आवेदन कैसे करें और कितनी देर लगती है?
पेटेंट आवेदन ऑनलाइन दाखिल करें. जानबूझकर पूर्व-घोषणा विरुद्ध प्रतिरोधी जाँच करवाएं. आम तौर पर आवेदन के बाद आवेदन-स्वीकृति में कुछ वर्षों का समय लग सकता है; अनावश्यक देरी से बचें.
डिज़ाइन पंजीकरण क्यों और कैसे करवाएं?
डिज़ाइन यूनिक-आइडिएशन पर सुरक्षा देता है. आवेदन प्रक्रिया IP इंडिया पोर्टल से पूरी होती है; 3-4 महीनों के भीतर प्रदर्शन मिलता है.
हरियाणा में कॉपीराइट उल्लंघन क्यों होता है और आप क्या कर सकते हैं?
कंटेंट चोराई, वेब-डुप्लिकेट और डाटा-चोरी प्रमुख कारण हैं. आप नेतिक-नुकसान के लिए injunction और damages जैसी कदम उठा सकते हैं. स्थानीय एडवोकेट से त्वरित सलाह लें.
कौन सा अधिकार पहले या कब पंजीकृत करें?
व्यापार-निर्भर निर्णय लें. ब्रांड पहचान पहले मजबूत करें. फिर पेटेंट या डिज़ाइन सुरक्षा पर विचार करें. कॉपीराइट अपने आप सुरक्षित हो सकता है, पर पंजीकरण लाभ देता है.
IP अधिकार-उल्लंघन की शिकायत कहाँ दर्ज कराएं?
सबसे पहले IP इंडिया के माध्यम से आपराधिक/नागरिक अधिकार-सम्बन्धी शिकायत दर्ज कराएं. आवश्यक हो तो स्थानीय अदालत में injunction भी लागू करा सकते हैं.
हरियाणा में मुकदमे की प्रक्रिया कैसी है?
IP मामले आम तौर पर हाई कोर्ट के फैसले में या जिला कोर्ट में जाते हैं. प्रक्रिया में पंजीकरण, साक्ष्य, सादे बहस और निर्णय शामिल होते हैं.
कानूनी सहायता किस प्रकार मिलती है?
आप किसी प्रशिक्षित वकील, कानून-परामर्शदाता या adv. से संपर्क करें. Haryana में IP विशेषज्ञ वे कानून-कार्य में दक्ष होते हैं.
IP नीति 2016 का Haryana पर प्रभाव क्या है?
राष्ट्रीय IPR नीति Haryana में ज्ञान जागरूकता बढ़ाती है, संस्थागत सुविधाओं को मजबूत करती है. यह पंजीकरण और सुरक्षा के मानक उच्चाती है.
IP पंजीकरण की लागत कितनी होती है?
हैरियाणा में लागत वर्ग, वस्तु और प्रक्रिया पर निर्भर करती है. ऑनलाइन दाखिले पर सरकारी शुल्क अलग होते हैं और कुछ सेवाओं के लिए फाॅरमेशन-शुल्क भी लगते हैं.
क्या ऑनलाइन आवेदन और प्रक्रियाएं सुरक्षित हैं?
हाँ. सरकारी पोर्टल IP इंडिया पर सभी आवेदन ऑनलाइन होते हैं और सुरक्षा मानक लागू रहते हैं. फॉर्म-फीडबैक और स्टेटस चेक नियमित रूप से उपलब्ध हैं.
5. अतिरिक्त संसाधन
नीचे हरियाणा निवासियों के लिए 3 मुख्य संगठन हैं जो बौद्धिक संपदा से संबंधित सहायता प्रदान करते हैं.
- Office of the Controller General of Patents, Designs and Trade Marks (CGPDTM) - IP India: https://ipindia.gov.in
- WIPO India (World Intellectual Property Organization in India): https://www.wipo.int/portal/en/index.html
- Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) - National IPR Policy: https://dpiit.gov.in
“The National Intellectual Property Rights Policy aims to create a robust and balanced IP ecosystem in the country.”
इन संस्थाओं के माध्यम से आप पंजीकरण के लिये मार्गदर्शन, लागत-विवरण और कानूनी सलाह पा सकते हैं. Haryana के आवेदनकों के लिए इन साइटों पर केस-हेल्पलाइन और राज्य-विशिष्ट मदद भी मिलती है.
6. अगले कदम
- अपने IP का प्रकार स्पष्ट करें - ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट या डिज़ाइन.
- हरियाणा के आधार पर उपयुक्त अधिकार का चयन करें और डेटा-संग्रह करें.
- IP इंडिया पोर्टल पर एक preliminary search करें ताकि अद्वितीयता जानी जा सके.
- हरियाणा के अनुभवी IP वकील या कानूनी सलाहकार से प्रारम्भिक बैठक शेड्यूल करें.
- यदि आवश्यक हो तो स्थानीय अदालतों के पाठ-निर्णय और Pendency आंकड़े समझें.
- पंजीकरण-योजना, लागत और समय-रेखा पर स्पष्ट engagement-terms बनाएं.
- फॉर्म-फाइलिंग से पहले सभी दस्तावेजों की समीक्षा कर लें और आवश्यक प्रमाण-पत्र जुटाएं.
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