हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ नौकरी में भेदभाव वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में नौकरी में भेदभाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में नौकरी में भेदभाव को रोकना मुख्य रूप से केंद्रीय कानूनों के दायरे में आता है और इन कानूनों का पालन राज्य प्रशासन के द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।

केंद्रीय नियमों के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए समान वेतन, यौन उत्पीड़न रोकथाम और विकलांगता के प्रत्येक अधिकार दायरे में आते हैं।

Equality before the law and equal protection of laws within the territory of India

Source: Constitution of India, Article 14 - india gov in

महत्वपूर्ण तथ्य: अनुच्छेद 16 रोजगार के अवसर में समानता देता है, चाहे व्यक्ति किसी भी जाति, लिंग या धर्म का हो।

There shall be equality of opportunity for all citizens in matters relating to employment.

Source: Constitution of India, Article 16 - india gov in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे हरियाणा-सम्बन्धी वास्तविक-रूढ़ परिदृश्य हैं जहां कानूनी सलाहकार की मदद लाभदायक हो सकती है।

  • भर्ती के दौरान लिंग, धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव हुआ हो और आप उचित नियोक्ता नीति मांगना चाहते हों।
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप हों और ICC या स्थानीय अदालत में शिकायत दर्ज करानी हो।
  • गर्भावस्था, विकलांगता या आयु के आधार पर वेतन भेदभाव सामने आए हो और वेतन बैंकिंग/वेतन रिकॉर्ड चाहिए हों।
  • कार्य तमाम शर्तों के साथ अनुबंध-आधारित रोजगार में बदलाव या समाप्ति का मामला हो।
  • हरियाणा में महिलाओं के लिए सुरक्षा-नीतियों के उल्लंघन के मामले में औपचारिक शिकायत तैयार करनी हो।
  • कॉन्ट्रैक्टर्स, सहभागी इकाइयों या MSME में भेदभाव से जुड़ा मामला हो जिसे अदालत/लोकल लेबर कोर्ट में उठाना हो।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में यह केंद्रीय कानून लागू रहते हैं और राज्य स्तर पर इनके अनुपालन के लिए प्रशासनिक ढांचा सक्रिय है।

  • The Equal Remuneration Act, 1976 - पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन पाने का अधिकार देता है।
  • The Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013 - कार्यस्थल पर महिला के विरुद्ध यौन उत्पीड़न पर रोक, रोकथाम और redressal के लिए ICC का गठन आवश्यक है।
  • The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 - विकलांग व्यक्तियों के लिए समान अवसर और संरक्षित अधिकार सुनिश्चित करता है।

इनके अतिरिक्त हरियाणा में राज्य स्तर पर labour विभाग द्वारा anti-discrimination नीतियाँ और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नौकरी में भेदभाव क्या है?

भेदभाव वह है जिसमें व्यक्ति को जन्म, लिंग, धर्म, जाति, उम्र, विकलांगता या गर्भावस्था के आधार पर नुकसान पहुँचाया जाए या अवसर रोके जाएं।

मैं किन मामलों में शिकायत दर्ज कर सकता/सकती हूँ?

वेतन भेदभाव, यौन उत्पीड़न, नौकरी पर असमान व्यवहार, भर्ती में पूर्वाग्रह, या विकलांगता के आधार पर भेदभाव शामिल हो सकते हैं।

ICC क्या है और मुझे कैसे मदद मिल सकती है?

Internal Complaints Committee (ICC) यौन उत्पीड़न के मामलों के लिए स्थानीय स्तर पर शिकायतों के निपटान के लिए बनता है।

कौन शिकायत दायर कर सकता है?

कर्मचारी, पूर्व कर्मचारी या काम पर निकाले गए व्यक्ति शिकायत कर सकता है; नियोक्ता पर भी दायित्व बनते हैं।

कानूनी सहायता के लिए मुझे क्या दस्तावेज चाहिए होंगे?

चालान/शिकायत, कर्मचारी पहचान पन्ना, वेतन रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्र, प्रतिनिधि के साथ सत्यापित बयान चाहिए हो सकते हैं।

हरियाणा में मैं कैसे शिकायत दर्ज कराऊँ?

सबसे पहले यदि संभव हो तो कंपनी की ICC से बात करें, फिर जिला अदालत या लेबर कोर्ट में उचित फॉर्म और अधिवक्ता के साथ दायर करें।

क्या मैं शिकायत दायर करने के लिए समय-सीमा में सीमित हूँ?

कानूनिक समय-सीमा हालात के अनुसार भिन्न हो सकती है; यौन उत्पीड़न मामलों में ICC के भीतर समय-सीमा सामान्यतः लंबी रखी जाती है।

क्या साक्ष्य रखना जरूरी है?

हाँ, ईमेल, संदेश, रिकॉर्डेड डेटा, सहकर्मी के बयान आदि सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखना फायदेमंद होता है।

यदि मेरा नियोक्ता गलत रिपोर्ट देता है तो क्या करें?

कानूनी सलाहार्थ आपके वकील से निर्देश लेकर आगे की कार्रवाई करें; अदालत में वैधानिक उपचार उपलब्ध हैं।

क्या निजी क्षेत्र के संस्थान भी दायित्व में आते हैं?

हाँ, निजी क्षेत्र के संस्थान भी समान नियमों के अंतर्गत आते हैं और ICC/घटना के अनुसार जवाबदेह होते हैं।

क्या भेदभाव के मामलों में मुआवजा संभव है?

हाँ, मामलों में उचित मुआवजे, वेतन-वृद्धि, रोज़गार सुरक्षा और पुनर्स्थापन के उपाय संभव हैं।

कौन सा कानून सबसे पहले लागू होगा?

कर्मचारी के विरुद्ध भेदभाव का प्रकार अनुसार कानून चुनते हैं; सामान्यतः Equal Remuneration Act और POSH Act प्रमुख हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. National Commission for Women (NCW) - https://ncw.nic.in
  2. National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in
  3. Ministry of Women and Child Development (WCD) - https://wcd.nic.in

6. अगले कदम

  1. घटना की तुरंत रिकॉर्डिंग और सबूत एकत्र करें।
  2. कर्मचारी संबंधित नीतियाँ और ICC/Redressal प्रक्रियाओं को समझें।
  3. अपने क्षेत्र के अनुभवी advokat या legal consultant चयन करें।
  4. दावा-फॉर्म और शिकायत फाइलिंग के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट तैयार करें।
  5. कानूनी सलाह लेकर उचित फॉर्म और समन जमानत के साथ दाखिल करें।
  6. ICC में शिकायत का सकारात्मक और समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करें।
  7. अगर ICC संतोषजनक न हो, तो अदालत में केस ट्रिगर करें और 专े-अपील पर विचार करें।

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