हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ विवाह वकील
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भारत विवाह वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
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- क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
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1. हरियाणा, भारत में विवाह कानून के बारे में
हरियाणा में विवाह कानून केंद्रीय कानूनों के अनुसार नियंत्रित होता है। हिन्दू विवाह अधिनियम 1955, विशेष विवाह अधिनयम 1954 और Prohibition of Child Marriage Act 2006 लागू होते हैं। राज्य के जिलों में इन कानूनों के आधार पर विवाह सत्यापित होते हैं।
विवाह के पश्चात दायित्व, जिम्मेदारियाँ और तलाक के नियम भी इन अधिनियमों से निर्धारित होते हैं। हरियाणा निवासियों के लिए आवश्यक है कि वे सही दस्तावेजों के साथ कानूनी प्रक्रिया करें ताकि लाभ मिल सके।
Prohibition of Child Marriage Act 2006: An Act to provide for prohibition of child marriages and for matters connected therewith.
Special Marriage Act 1954: It provides for civil marriages for all persons irrespective of religion.
Hindu Marriage Act 1955: It provides for marriage among Hindus and related matrimonial relief.
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
मुख्य विचार हरियाणा में विवाह से जुड़ी समस्याओं में विशेषज्ञ सलाह जरूरी होती है। नीचे 4-6 वास्तविक परिदृश्यों से समझें कि किस प्रकार एक अनुभवी अधिवक्ता मदद कर सकता है।
रोहतक, गुरुग्राम या करनाल जैसे जिलों में interfaith विवाह के पंजीकरण और पारिवारिक दबाव से निपटने के लिए एक कानून सलाहकार की जरूरत पड़ती है।
Special Marriage Act के अंतर्गत प्रक्रिया और अभिलेखों की जाँच में वकील मार्गदर्शन देता है।
गृहनगर में 498A घरेलू हिंसा के दावों के साथ सुरक्षा और संरक्षण प्राप्त करने के लिए कानूनी सलाह आवश्यक है।
अधिवक्ता धाराओं के अनुरूप FIR, जमानत और मुकदमे की रणनीति तय कराता है।
किसी विवाह के टूटने पर maintenance, alimony और पक्षपत्नी के अधिकार स्पष्ट करने के लिए कोर्ट की सहायता चाहिए होती है।
Section 24 Hindu Marriage Act और CrPC 125 के अंतर्गत दावा कैसे किया जाए यह वकील बताता है।
बाल विवाह के मामले में PCMA के प्रावधान और कारण बताने के लिए कानूनी सलाह आवश्यक होती है।
कानूनी सुरक्षा एवं बचाव के कदम वे ही सुझाव देंगे।
Interstate या inter-religious शादी में नागरिकता, दौरा-स्थापना और पंजीकरण के सवाल हों तो एक अनुभवी कानूनी सलाहकार मदद करेगा।
विधिक प्रक्रियाओं के अनुसार उचित दस्तावेज और समन्वय चाहिए।
कभी-कभी विवाह पंजीकरण के लिए Haryana के कुछ जिलों में विशेष नियम लागू हो सकते हैं।
ऐसे मामलों में स्थानीय वकील सर्वोत्तम मार्गदर्शक होते हैं।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
हरियाणा में विवाह से जुड़ी मुख्य कानून 2-3 पन्नों में सरल रूप में नीचे दिए गए हैं।
- हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 - हिन्दू समुदाय के व्यक्तियों के विवाह, तलाक, रख-रखाव और conjugal rights से जुड़े नियम यह अधिनियम निर्धारित करता है।
- विशेष विवाह अधिनियम 1954 - विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच civil से विवाह के लिए सामान्य व्यवस्था देता है। Haryana में interfaith विवाहों के लिए इसका प्रमुख मार्ग है।
- बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 - बाल विवाह को रोकता है और 18 वर्ष से कम आयु के विवाहों को रोकने के उपाय बताता है। Haryana में भी इस कानून के प्रावधान प्रभावी हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाणा में विवाह कौन से कानून के अंतर्गत आता है?
आमतौर पर हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 औरpecial विवाह अधिनियम 1954 के अंतर्गत विवाह होते हैं। बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 भी लागू है।
विवाह पंजीकरण कैसे होता है?
जिले के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन देकर पंजीकरण किया जाता है। आवश्यक दस्तावेज में पहचान पत्र, आयु प्रमाण, विवाह के प्रमाण पत्र आदि होते हैं।
क्या पंजीकरण अनिवार्य है?
हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण सामान्यतः अनिवार्य नहीं है; कुछ जिलों में वैकल्पिक पंजीकरण संभव है।
यदि घरेलू हिंसा हो तो क्या करें?
डोमेस्टिक वैलेंस एक्ट 2005 के तहत शिकायत दर्ज कराएं, 181 या 112 कॉल करें, और सुरक्षा आदेश प्राप्त करें।
अगर पति या पत्नी विदेश चले जाए तो मेरे अधिकार क्या हैं?
Maintenance और matrimonial relief कानूनों के अनुसार आप अदालत से संरक्षण, वित्तीय सहायता और देखभाल का अनुरोध कर सकते हैं।
क्या तलाक के लिए शिकायत करना संभव है?
हाँ तलाक संभव है। यह विवाहित जीवन के अंत का कानूनी कदम है और प्रतिपक्ष के साथ समझौते या निर्णायक निर्णय से हो सकता है।
क्या inter-religious विवाह में कानूनी सहयोग मिलता है?
Special Marriage Act के माध्यम से civil विवाह होता है और धार्मिक बाधाओं से मुक्त होता है।
कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं?
पहचान पत्र, आयु प्रमाण, जन्म प्रमाण, निवास प्रमाण, विवाह के प्रमाण पत्र, पासपोर्ट आकार की फोटो आदि जरूरी होते हैं।
क्या दायित्व और दाम्पत्य अधिकार समान रहते हैं?
हाँ, दोनों पक्षों के लिए समान दायित्व और अधिकार सुनिश्चित होते हैं, पर मामले अनुसार अदालत के आदेश बदल सकते हैं।
डायग्नोस्टिक और बच्चों से जुड़े मामले में क्या कदम उठें?
Child Marriage Act के अनुसार आयु संबंधी प्रमाण और सहायता संरचना मिलती है। कानून अनुसार आवश्यक मदद लें।
क्या तलाक के बाद maintenance मिलेगा?
हां maintenance प्राप्त किया जा सकता है। कानून अनुसार आय और आवश्यकताओं के आधार पर अदालत निर्णय देता है।
क्या हरियाणा में संपत्ति और बच्चों का मुद्दा अलग से तय होता है?
हाँ बच्चों की भलाई, संरक्षण और संपत्ति के बंटवारे के मामले अदालत के निर्देश से निर्णय होते हैं।
नई शादी के लिए किस कानून का पालन चाहिए?
नई शादी के लिए भी कानून का पालन आवश्यक है। Special Marriage Act या हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार पुनः विवाह संभव है।
5. अतिरिक्त संसाधन
विवाह से जुड़ी सहायता के लिए नीचे दिए गए संगठन उपयोगी हैं।
- HALSA - हरियाणा राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरण. स्थानीय फ्री कानूनी सहायता प्रदान करता है. लिंक: https://haryanalegalservices.gov.in/
- National Legal Services Authority - NALSA केन्द्र स्तर पर मुफ्त कानूनी सहायता के लिए जिम्मेदार है. लिंक: https://nalsa.gov.in/
- National Commission for Women - महिलाओं के अधिकारों के लिए मार्गदर्शन और शिकायत साधन. लिंक: https://ncw.nic.in/
6. अगले कदम
- आपकी स्थिति को समझने हेतु स्थानीय विवाह वकालत से मिलें।
- संभावित प्रकार का कानून निर्णय करें जैसे हिन्दू विवाह अधिनियम या Special Marriage Act।
- ज़रूरी दस्तावेज तैयार रखें ताकि पहली मुलाकात में स्पष्टता हो।
- स्थानीय अदालत और कार्यालयों से मिलने के लिए एक समय-सारिणी बनाएं।
- कानूनी सलाहकार, अधिवक्ता या कानूनी सलाहदाता से न्यायोचित शुल्क पर समझौता करें।
- मामले के प्रकार के अनुसार रणनीति तय करें और अनुमानित समयरेखा पूछें।
- यदि आवश्यक हो तो HALSA या NALSA की मुफ्त सेवा के लिए आवेदन करें।
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