हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
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हरियाणा, भारत में प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा के उद्योगपतियों के लिए निर्यात नियंत्रण कानून एक आवश्यक अनुपालन मामला है. मुख्य फ्रेमवर्क Foreign Trade Development and Regulation Act 1992 के अंतर्गत आता है तथा DGFT द्वारा लाइसेंसिंग और नीति निर्धारण होता है. कई वस्तुएँ Dual use या सुरक्षा संवेदनशील हो सकती हैं जो निर्यात के लिए लाइसेंस आवश्यक बनाती हैं.

SCOMET सूची के अधीन आने वाली वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण रहता है. Arms Act 1959 तथा Arms Rules भी सुरक्षा के दायरे में आते हैं, जब हथियार या स corresponding सुरक्षा उपकरण निर्यात या हस्तांतरण से जुड़ा हो. सीमा शुल्क कानून और आयात-निर्यात प्रक्रियाओं के साथ यह क्षेत्र हरियाणा में व्यवसायिक संचालन को प्रभावित करता है.

सरकार के अनुसार निर्यात नियंत्रण कानून का उद्देश्य दोहरी प्रकृति वाले उत्पादों के हस्तांतरण को नियंत्रित करना है ताकि गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकी जा सकें. सरकार के प्रमुख अंग DGFT और CBIC इस क्षेत्र के लिए प्रमुख प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ संभालते हैं.

“Export licensing is mandatory for items listed under SCOMET and for certain dual use items as per the export policy.”

DGFT आधिकारिक उद्धरण

“The sanctions regime of India is implemented in line with UN Security Council resolutions and domestic law.”

MEA आधिकारिक उद्धरण

हरियाणा निवासियों के लिए यह आवश्यक है कि वे स्थानीय और राष्ट्रीय नियमों के साथ संयुक्त रूप से उद्योग-विशिष्ट अनुपालन की जाँच करें. गलत घोषणा, अवैध निर्यात या गलत end-use undertakings पर दण्ड और प्रतिबन्ध लग सकते हैं. सही लाइसेंसिंग से आप कानूनी जोखिम घटा सकते हैं और व्यापार सुगमता प्राप्त कर सकते हैं.

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे हरियाणा-आधारित व्यवसायी के लिए अनिवार्य परिदृश्य हैं जहाँ कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है. इन परिस्थितियों में अनुभवी advokat आपकी रक्षा और अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है.

  • हरियाणा के एक ड्यूल-यूज उत्पाद निर्माता को DGFT से लाइसेंस चाहिए या उसका लाइसेंस रिन्यू करवाना है.
  • SCOMET सूची के अंतर्गत आने वाले पदार्थों या तकनीकों के आयात-निर्यात के लिए EUO या End-Use Undertaking पर स्पष्टीकरण चाहिए.
  • किसी हितधारक ने गलत घोषणाओं की वजह से DGFT या CBIC से नोटिस प्राप्त किया हो.
  • एक स्टार्ट-अप जो हरियाणा के इनोवेशन पार्क में बने डिवाइस के लिए प्रतिबंधित घटकों का आयात करता हो.
  • एक हरियाणा-आधारित आयातक जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रूटिंग और end-use सत्यापन सुधारना चाहता हो.
  • कस्टम्स या DGFT द्वारा निर्णय-विवाद के समय यह जानना कि किस अधिकार-सम्मत अपील प्रक्रिया का पालन करना है.

इन परिदृश्यों में एक कानूनी सलाहकार के साथ पहले से योजना बनाकर अनुपालन योजना बनाना लाभदायक रहता है. नीचे कुछ प्रमुख उदाहरण हैं जिन्हें आप अपने कारण से मिलाकर समझ सकते हैं.

स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण को निम्न कानूनी ढाँचों के माध्यम से संचालित किया जाता है.

  • Foreign Trade Development and Regulation Act, 1992 (FTDR Act) - निर्यात-आयात नियंत्रण का मुख्य कानून. DGFT लाइसेंसिंग और नयी नीति जारी करता है.
  • Special Chemicals, Organisms, Materials, Equipment and Technologies (SCOMET) List - उच्च जोखिम वाले dual-use पदार्थों और तकनीकों पर नियंत्रण लागू होता है.
  • Arms Act, 1959 और उससे सम्बद्ध नियम - हथियार, हथियार भागों और सुरक्षा उपकरण के निर्यात-आदान पर कड़े नियम.
  • Customs Act, 1962 - आयात-निर्यात प्रक्रियाओं की निगरानी और दायित्वों को लागू करता है.

इन कानूनों के साथ Haryana में उद्योग-विशेष नियम भी लागू हो सकते हैं, जैसे कि MSMEs के लिए licensing, end-use verification और compliance audits. DGFT और CBIC के अनुसार लाइसेंसिंग और निरीक्षण प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है.

आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्यात नियंत्रण कानून क्या है?

यह कानून देश की सुरक्षा और विदेश नीति के अनुरुप विशेष वस्तुओं और तकनीक पर नियंत्रण रखता है. इसके अंतर्गत लाइसेंसिंग, आयात-निर्यात प्रतिबंध और नियम-उल्लंघन पर दण्ड शामिल हैं.

SCOMET सूची में क्या आता है?

SCOMET सूची में वे chemicals, organisms, materials, equipment और technologies आते हैं जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के उपयोग के लिए संवेदनशील हो सकते हैं. इन पर नियंत्रण DGFT के अंतर्गत है.

क्या सभी वस्तुओं के लिए लाइसेंस जरूरी है?

नहीं, सभी वस्तुओं के लिए लाइसेंस जरूरी नहीं. केवल उन वस्तुओं के लिए लाइसेंस चाहिए जो FTDR Policy के अनुसार सूचीबद्ध हैं या SCOMET के दायरे में आती हैं.

अगर लाइसेंस के बिना निर्यात हुआ तो क्या होगा?

अनियमित निर्यात पर दंड, सजा और दंडनीय वैधानिक कार्रवाइयाँ हो सकती हैं. लाइसेंसिंग प्रक्रिया में देरी भी व्यापार-समय की देरी कर देती है.

हरियाणा से लाइसेंस कैसे पूछा जाए?

DGFT की वेबसाइट पर ऑनलाइन licensing आवेदन किया जा सकता है. आवेदन में end-use undertakings और end-user details प्रदान करने होते हैं.

End-Use Undertaking क्या है?

End-Use Undertaking एक आयातक या निर्यातक द्वारा सुनिश्चित करता है कि वस्तु का उपयोग निर्दिष्ट end-use के लिए ही होगा और अन्यत्र नहीं जाएगी.

क्या गलत घोषणाओं पर कानूनी कार्रवाई होती है?

हाँ, गलत घोषणाओं, mis-declaration और mis-classification पर DGFT, CBIC और अन्य विभाग कार्रवाई कर सकते हैं.

हरियाणा के लिए कौन से अधिकार क्षेत्र लागू होते हैं?

राज्य स्तर पर नीतिगत निर्देशों के साथ केंद्र सरकार के FTDR Act, DGFT नियम और CBIC के निर्देश प्रभावी रहते हैं. राज्यों के निरीक्षण और जाँच में सहयोग जरूरी है.

कौन से दंड संभव हैं?

जुर्माने, लाइसेंस निष्कासन, लाइसेंसिंग प्रक्रिया रोकना, अवैध आयात-निर्यात पर जेल जैसी सज़ाएँ संभव हैं. स्थिति के अनुसार अदालत में मामला जाते हैं.

कैसे आप अनुपालन सुनिश्चित करें?

उचित लाइसेंसिंग के साथ end-use verification, आपूर्ति श्रृंखला निगरानी, रिकॉर्ड-keeping और नियमित आंतरिक ऑडिट से अनुपालन सुधारा जा सकता है.

आण्विक-उत्पादन (ड्यूल-यूज) वस्तुओं के लिए क्या करें?

SCOMET के अंतर्गत आने वाले पदार्थों के लिए विशेष लाइसेंस-प्रक्रिया और end-use सुरक्षा आवश्यक होती है. विशेषज्ञ सलाह से लाइसेंस प्रक्रिया आसान बनती है.

क्या हरियाणा के छोटे उद्योगों के लिए विशेष सहायता है?

हाँ, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार की कई योजनाओं के साथ लाइसेंसिंग, ट्रेनिंग और सहायता उपलब्ध हो सकती है. स्थानीय उद्योग संघों से भी मार्गदर्शन लें.

कानून में हाल के परिवर्तनों का प्रभाव क्या है?

हाल के वर्षों में DGFT ने ऑनलाइन लाइसेंसिंग, end-use सत्यापन और दंड की धाराओं में सुधार किये हैं. इससे अनुपालन प्रक्रिया तेज और स्पष्ट होती है.

अतिरिक्त संसाधन

नीचे हरियाणा-आधारित प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण से जुड़ी प्रमुख संस्थाओं के आधिकारिक संसाधन देखें.

  • Directorate General of Foreign Trade (DGFT) - निर्यात नीति, लाइसेंसिंग और SCOMET से जुड़ी जानकारी. https://dgft.gov.in
  • Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) - आयात-निर्यात कर-नियम, जाँच और दायरें. https://cbic.gov.in
  • Ministry of External Affairs (MEA) - प्रतिबंध एवं सैन्य-विदेशी मामलों के सम्वन्धित निर्देश. https://mea.gov.in

उद्धरण स्रोत:

“Export licensing is mandatory for items listed under SCOMET and for certain dual use items as per the export policy.”

DGFT आधिकारिक सार

“The sanctions regime of India is implemented in line with UN Security Council resolutions and domestic law.”

MEA आधिकारिक सार

अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय और उत्पादों की सूची बनाएं और पहचानें कि वे SCOMET में आते हैं या नहीं.
  2. DGFT वेबसाइट से आवश्यक licenses के लिए पात्रता और प्रक्रिया समझें.
  3. हरियाणा में स्थापित किसी अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से पहली बैठक निर्धारित करें.
  4. End-Use Undertaking के सही ढंग से कैसे प्रस्तुत करें, उसका खाका तैयार करें.
  5. Compliance audit के लिए आंतरिक चेकलिस्ट बनाएँ और नियमित रिकॉर्ड-कीपिंग शुरू करें.
  6. यदि नोटिस मिला हो तो उसके समय-सीमा और जवाबी दस्तावेज तैयार करने के लिए विशेषज्ञ से मदद लें.
  7. आवश्यक लाइसेंसिंग के अनुसार चरणबद्ध आवेदन करें और प्रगति की तारीख नोट रखें.

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