नया दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभूतियाँ वकील

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Siddharth Jain & Co
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
English
सिद्धार्थ जैन एंड को, भारत स्थित एक विशिष्ट विधिक फ़र्म, व्यापक अभ्यास क्षेत्रों में समग्र विधिक सेवाएँ प्रदान...
S&A Law Offices
नया दिल्ली, भारत

2002 में स्थापित
English
एस एंड ए लॉ ऑफिसेज भारत में एक पूर्ण-सेवा लॉ फर्म है, जो विविध अभ्यास क्षेत्रों और उद्योगों में व्यापक कानूनी...
Rewa Law Attorneys LLP
नया दिल्ली, भारत

2023 में स्थापित
English
REWA LAW ATTORNEYS LLP एक गतिशील कॉर्पोरेट लॉ फर्म है, जो नई दिल्ली, भारत में स्थित है और व्यापक कानूनी सेवाओं की पेशकश करती है।...
DB Law Offices
नया दिल्ली, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
English
Hindi
Bengali
डीबी लॉ ऑफिसेज़ (डीबीएलओ), एक नई दिल्ली स्थित वकीलों का कार्यालय, मुख्यतः एक उन्नत विधिक कक्ष, सिविल, वाणिज्यिक,...
Oberoi Law Chambers
नया दिल्ली, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. नया दिल्ली, भारत में प्रतिभूतियाँ कानून के बारे में: नया दिल्ली, भारत में प्रतिभूत्तियाँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में प्रतिभूत्ति बाजार का प्रमुख नियामक सिक्योरिटीज एण्ड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) है। वह निवेशकों की सुरक्षा, पारदर्शिता और बाज़ार की निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।

मुख्य कानूनों में Securities Contracts (Regulation) Act, 1956, SEBI Act, 1992 और Listing Obligations & Disclosure Requirements Regulations, 2015 शामिल हैं। इन कानूनों से कंपनियाँ, ब्रोकरेज और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच अनुशासन बना रहता है।

SEBI is the regulator for securities market in India.

Source: SEBI

The Act provides for regulation of the business of dealing in securities.

Source: India Code - SCRA 1956

To ensure timely and adequate disclosure of events or information by listed entities.

Source: SEBI LODR Regulations, 2015

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: प्रतिभूत्तियाँ कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। नया दिल्ली, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

  • दिल्ली-आधारित listed कंपनी के शेयरों में insider trading के आरोप लगते हैं; कानूनी तर्क और बचाव की जरूरत होती है।
  • SEBI द्वारा शो कॉज नोटिस या प्रयोजनात्मक कार्रवाई प्राप्त हो तो त्वरित कानूनी प्रतिक्रिया, जवाब और दलीलें जरूरी होती हैं।
  • IPO या FPO के दौरान ICDR, disclosure और allotment process से जुड़ी शिकायतें या क़ानूनी उल्लंघन सामने आएं।
  • मार्केट मैनिपुलेशन या सिक्योरिटीज फ्रॉड के आरोप Delhi-आधारित निवेशकों के against लगे हों।
  • कंपनी के वार्षिक रिपोर्ट, डिसक्लोज़र और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गड़बड़ियाँ दिखें तो लीगल सपोर्ट चाहिए।
  • क्रॉस-बॉर्डर निवेश, ADR/GDR आदि के अनुदेशन और अनुपालन से जुड़े मुद्दे उठें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: नया दिल्ली, भारत में प्रतिभूतियाँ को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  • Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 - प्रतिभूत्तियाँ के व्यापार और एक्सचेंजों के पंजीकरण आदि को नियंत्रित करता है।
  • SEBI Act, 1992 - SEBI की स्थापना और प्रतिभूत्ता बाज़ार के मामलों में केंद्रीय नियमन देता है।
  • SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 - सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा समय पर disclosure और listing से जुड़े नियम निर्धारित करते हैं।
  • SEBI (Issue of Capital and Disclosure Requirements) Regulations, 2018 - IPO, FPO और capital market disclosures के मानक तय करता है।
  • Depositories Act, 1996 - डिपॉज़िटरी और डिपॉज़िटरी रिस्पॉन्सिबिलिटी को नियंत्रित करता है।

नए दिल्ली निवासी के लिए उपयोगी कानूनी धारणा यह है कि ये सभी नियम राष्ट्रीय स्तर पर लागू होते हैं और दिल्ली कोर्ट/ SAT में मामलों की सुनवाई होती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतिभूतियाँ कानून क्या है?

यह सिक्योरिटीज मार्केट के नियमों का समूह है जो SEBI और अन्य केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत आता है। यह जारी, listing, disclosure और निवेशक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।

दिल्ली में कौन सा नियामक प्रमुख है?

राष्ट्रीय स्तर पर SEBI प्रतिभूत्ति बाज़ार का नियामक है, जबकि दिल्ली में केस hearings और appeals दिल्ली उच्च न्यायालय और SAT में होते हैं।

Insider trading क्या है और यह कैसे रोका जाता है?

Insider trading में unpublished price sensitive information के आधार पर ट्रेड करना शामिल है। SEBI PIT Regulations इसे रोकते हैं और सख्त दंड देते हैं।

यदि मुझे लगे कि मेरे broker ने नियम तोड़े हैं तो क्या करूँ?

सबसे पहले अपने broker से रिकॉर्ड्स लें, फिर SEBI के पास complaint या शिकायत दर्ज करें और यदि जरुरी हो तो exchange पर शिकायत करें।

Penalty क्या होती हैं और कब लग सकती है?

पेनalties कानूनों के अनुसार जुर्माने, ट्रेडिंग रोकने, disgorgement आदि हो सकते हैं। penalties की मात्रा केस-आधार पर निर्भर करती है।

IPO या FPO के दौरान किन नियमों का पालन जरूरी है?

ICDR Regulations और LODR के अनुसार disclosure, price range, allotment और investor safeguards अनिवार्य हैं।

क्या दिल्ली residents विदेशी निवेश भी कर सकते हैं?

हाँ, लेकिन Foreign Portfolio Investor (FPI) और ADR/GDR व्यवस्था के नियमों का पालन आवश्यक है; यह SEBI और RBI के दिशानिर्देशों से नियंत्रित होता है।

मैं एक निवेशक के रूप में किस प्रकार शिकायत दर्ज कर सकता हूँ?

SEBI की शिकायत पोर्टल, शेयर एक्सचेंज और आवश्यक दस्तावेज के साथ शिकायत दर्ज करें।

SAT क्या है और क्यों जरूरी है?

स Securities Appellate Tribunal (SAT) SEBI की आन्तरिक असहमति के मामले देखकर अंतिम अपील देता है।

कानूनी सलाह कब जरूरी है?

यदि मामला complex हो, show cause notice मिले या आप पर penalties लगे हों तो कानूनी सलाह आवश्यक रहती है।

कौन सा कानून आपके मामले के अनुसार लागू होगा?

सबसे पहले whether issue of capital, insider trading या listing से जुड़ा मामला है, उस पर SEBI Act, SCRA, PIT Regulations आदि लागू होते हैं।

दिल्ली निवासियों के लिए व्यवहारिक सुझाव?

निवेश से पहले सभी दस्तावेज़ पढ़ें, नियमों को समझें और अद्यतन नियमावली के अनुसार निर्णय लें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. SEBI - Securities and Exchange Board of India - आधिकारिक साइट: sebi.gov.in
  2. National Institute of Securities Markets (NISM) - प्रशिक्षण और विकसीत पाठ्यक्रम: nism.ac.in
  3. National Stock Exchange (NSE) - ट्रेडिंग और नियमों के विवरण: nseindia.com

6. अगले कदम: प्रतिभूत्तियाँ वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने मुद्दे की स्पष्ट परिभाषा करें कि insider trading, disclosure violation या कोई अन्य है।
  2. दिल्ली बार कॉन्‍सिल (Delhi Bar Council) में पंजीकृत एक्सपर्ट ट्रेडिंग लॉयर/अधिवक्ता खोजें।
  3. आयोजित लिस्टिंग-सम्बन्धी अनुभव, SEBI केस-आधार केस स्टडी और SAT/Delhi High Court केस रिकॉर्ड देखें।
  4. पहली консульта में शुल्क संरचना, अनुमानित समय-रेखा और अपेक्षित परिणाम पूछें।
  5. उचित उपागम के लिए.stub engagement letter और धन-सम्बन्धी शर्तें समझें।
  6. पूर्व क्लाइंट से संदर्भ मांगें और उनके केस-आउटकम पर विचार करें।
  7. निर्णय लेने से पहले सभी विकल्पों की तुलना कर एक नियुक्ति करें और लिखित रणनीति बने।

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