बेंगलुरु में सर्वश्रेष्ठ यौन उत्पीड़न वकील

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बेंगलुरु, भारत

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हेमंत एंड एसोसिएट्स, 2002 में स्थापित, बैंगलोर, भारत में स्थित एक पूर्ण-सेवा कानून फर्म है। यह फर्म नागरिक कानून,...
Poovayya & Co.
बेंगलुरु, भारत

1996 में स्थापित
उनकी टीम में 60 लोग
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Poovayya & Co. एक भारतीय विधिक फर्म है जो कॉरपोरेट सलाहकार और विवाद समाधान कार्यों के मिश्रण में विशिष्ट रूप से मजबूत है,...
Agraa Legal
बेंगलुरु, भारत

2011 में स्थापित
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अग्रा लीगल एक बेंगलुरु और जयपुर आधारित लॉ फर्म है जो कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, डेवलपर्स और उच्च नेट वर्थ...
SARVE PERMITS AND LEGAL ADVISORY  PVT. LTD.
बेंगलुरु, भारत

2008 में स्थापित
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क्या आप कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जो आपको रातों को जगाती हैं? हमारे व्यापक लॉ फर्म की ओर देखें जो सभी...
INDUSLAW Bengaluru
बेंगलुरु, भारत

2000 में स्थापित
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हमारे बारे मेंINDUSLAW एक भारतीय लॉ फर्म है जो ग्राहकों को उनके लेनदेन संबंधी लक्ष्यों, व्यावसायिक रणनीतियों और...
Samvad Partners
बेंगलुरु, भारत

2013 में स्थापित
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Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
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1. बेंगलुरु, भारत में यौन उत्पीड़न कानून के बारे में: बेंगलुरु, भारत में यौन उत्पीड़न कानून का संक्षिप्त अवलोकन

बेंगलुरु में यौन उत्पीड़न कानून मुख्यतः POSH कानून, यानी Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention Prohibition and Redressal) Act 2013 से संचालित होता है। यह निजी और सरकारी कार्यस्थलों दोनों पर लागू है।

इस अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित कामकाजी माहौल देना है, तथा उत्पीड़न के मामलों में परिस्थितियों के अनुसार शिकायत व राहत प्रदान करना है।

“The Act provides for prevention, prohibition and redressal of sexual harassment of women at workplace.”

स्रोत: Ministry of Women and Child Development (WCD) - wcd.nic.in

“The guidelines under Vishaka, which guided prevention in absence of a specific law, laid the foundation for POSH Act implementation.”

स्रोत: Supreme Court guidelines विरासत - वैधानिक संदर्भ के लिए Vishaka निर्णय संदर्भ (1997) के बाद POSH अधिनियम बना।

बेंगलुरु में जिला स्तर पर Local Complaints Committee (LCC) और Workplace पर Internal Committee (IC) का गठन होता है। यह अनुपालन, शिकायत निवारण और सुरक्षा आदेश के लिए आवश्यक है।

सूत्र-उद्धृत नियम और स्थानीय कार्यान्वयन के लिए Karnataka POSH नियमों के साथ शहर-स्तर पर नियुक्त समितियाँ जिम्मेदार रहती हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: यौन उत्पीड़न कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

बेंगलुरु में आज की कार्यस्थलीय स्थितियों के अनुसार निम्न परिदृश्य सामान्य हैं, जिनमें कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है।

  • वह व्यक्ति 10+ कर्मचारियों वाली कंपनी में कार्यरत है और उसके सहकर्मी या वरिष्ठ द्वारा बार-बार घिनौनी टिप्पणियाँ या शारीरिक संपर्क हुआ है।
  • छात्र-शिक्षक या प्रशिक्षक के रूप में नौकरी पाने के बाद उसे अनुचित मांगें मिलीं और HR ने उचित कार्रवाई नहीं की।
  • 1-9 कर्मचारियों वाली छोटी इकाई में उत्पीड़न हुआ है और IC न बने होने के कारण शिकायत LCC के पास जाने से पहले मार्गदर्शन चाहिए।
  • डायरेक्ट ड्यूटी के बाहर गृह-कार्य में घरेलू कर्मचारी को यौन उत्पीड़न का अनुभव हुआ है, तो किस तरह शिकायत दर्ज करें, इसकी कानूनी मदद चाहिए।
  • ऑफिस के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लैंगिक टिप्पणी, फोटो-शेयरिंग या अनचाहे ईमेल/मैसेज आए हों और सबूत जुटाने में सहायता चाहिए।
  • बेंगलुरु के किसी होटल/रेस्टोरेंट/ई-कॉमर्स सेटअप में कार्यरत महिला कर्मचारी को बार-बार परेशान किया गया हो और संस्थान ने समाधान नहीं दिया हो।

इन परिस्थितियों में एक अनुभवी अधिवक्ता आपके अधिकारों की सुरक्षा, समय सीमा, और सही प्रक्रिया की योजना बनाकर मदद कर सकता है।

वकील आपको IC/LCC के माध्यम से शिकायत दायर करने, अंतरिम सुरक्षा आदेश लेने, साक्ष्यों के संरक्षण और अदालत-निर्णय के लिए आवश्यक कदम उठाने में मार्गदर्शन दे सकते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: बेंगलुरु, भारत में यौन उत्पीड़न को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

दो मुख्य कानून जो Bengaluru- Karnataka क्षेत्र में लागू होते हैं वे हैं:

  • Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention Prohibition and Redressal) Act, 2013 - यह कानून workplace-य उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और राहत देता है। सार्वजनिक-निजी संस्थानों, नवीन स्टार्टअप्स और घरेलू कर्मचारियों सहित सभी कार्यस्थलों पर यह लागू होता है।
  • Indian Penal Code भाग 354-सी/354-डी/509 आदि धाराएं - 354-A (यौन उत्पीड़न का प्रयास या दुरुपयोग), 354-D (स्टalking), 509 (महिला के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले शब्द-चाल-इशारें) जैसे प्रावधान लेकर अदालतें आपराधिक दायरे में कदम उठाती हैं।
  • Information Technology Act, 2000 - साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन अश्लील सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक संचार से जुड़े अपराधों पर नियंत्रण देता है; 66A को उच्चतम न्यायालय ने निरस्त कर दिया पर 67 आदि धाराओं के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों पर कार्य होते रहते हैं।

महत्वपूर्ण नोट- Bengaluru में POSH के नियमों के अनुसार IC/LCC की नियुक्ति और शिकायत प्रक्रिया जिला प्रशासन, डिपार्टमेंट ऑफ विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट (Karnataka) द्वारा समर्थित है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: प्रश्न-उत्तर

यौन उत्पीड़न कानून क्या है?

यह कानून workplace-य उत्पीड़न पर रोक लगाता है, शिकायत, प्रतीकात्मक सुरक्षा और राहत के उचित रास्ते देता है।

POSH Act कब से लागू होता है?

POSH Act 2013 को 2013 में अधिनियमित किया गया था और 2013 के बाद से Workplace पर लागू है।

कौन ICC बनाएगा? कब?

10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली संस्था में Internal Committee (IC) बनती है।

IC/IC के बिना शिकायत कहाँ दर्ज करूँ?

यदि IC नहीं बनती या संस्था 10 से कम कर्मचारियों की है, तो शिकायत Local Complaints Committee (LCC) के पास जाएगी, जो जिला स्तर पर स्थित है।

महिला कर्मचारी की शिकायत कितने समय में दर्ज करनी चाहिए?

अधिकतर मामलों में घटना के/date के एक वर्ष के भीतर शिकायत दायर करें, लीकेज-तिथि पर निर्भर हो सकता है।

क्या घरेलू कर्मचारी भी सुरक्षित हैं?

हाँ, POSH Act के दायरे में घरेलू कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था है, बशर्ते मामला Workplace से संबंधित हो।

कौनसे प्रकार के दावे POSH में आते हैं?

अनवांटेड शारीरिक स्पर्श, अपमानजनक टिप्पणियाँ, यौन-उत्पीड़न के लिए दुरुपयोग, ऑनलाइन उत्पीड़न आदि शामिल हैं।

अगर HR बदस्तूर न सोचे तो क्या करूँ?

IC/LCC के अलावा अदालत में शिकायत कर सकते हैं; वैकल्पिक रूप से विभागीय निगरानी के लिए NCW/NALSA से सहायता लें।

क्या डीजीटल या ऑनलाइन उत्पीड़न POSH के दायरे में आता है?

हाँ, डिजिटल उत्पीड़न भी रोजगार-स्थिति पर निर्भर करता है; ऑनलाइन संदेश, फोटो या पोस्टिंग भी शिकायत का आधार बनते हैं।

अगर आरोपी वरिष्ठ हो तो क्या?

IC/LCC के पास शिकायत आगे बढ़ती है; विकलांग, अनुचित दबाव से सुरक्षा और सहायता दी जाती है।

कौन-कौन से सबूत उचित माने जाते हैं?

ईमेल, मेसेज, कॉल रिकॉर्ड, फोटो-वीडियो, मौखिक गवाही और सहकर्मियों के बयान सबूत के रूप में मान्य होते हैं।

क्या अदालत में एफआईआर भी दर्ज हो सकती है?

हाँ; कानून के अनुसार आप पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवा सकते हैं, और साथ ही न्यायिक उपाय भी ले सकते हैं।

कौनसी सरकारी संस्थाएं मदद कर सकती हैं?

WCD विभाग, NCW और NALSA जैसी संस्थाएं कानूनी सहायता और मार्गदर्शन दे सकती हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन: यौन उत्पीड़न से संबंधित विशिष्ट संगठन

  • National Commission for Women (NCW) - राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के अधिकारों के लिए मार्गदर्शन और सहायता। लिंक: ncw.nic.in
  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और चिकित्सा-न्याय सहायता के संसाधन। लिंक: nalsa.gov.in
  • Centre for Social Research (CSR India) - यौन उत्पीड़न, लैंगिक समानता और कार्यस्थल नीति पर अनुसंधान व सहायता। लिंक: csrindia.org

अन्य उपयोगी संसाधन:

“The Act provides for prevention, prohibition and redressal of sexual harassment of women at workplace.”

स्रोत: WCD.gov.in

6. अगले कदम: यौन उत्पीड़न वकील खोजने के पांच-से-सात चरण

  1. अपने केस के प्रकार को स्पष्ट करें-IC के साथ संस्था या LCC के माध्यम से शिकायत चाहिए।
  2. बेंगलuru में employment-law, POSH और IPC के विशेषज्ञ वकीलों की सूची बनाएं।
  3. बार काउंसिल ऑफ़ कर्नाटक के सदस्य वकीलों की पुष्टि करें और पहले-परामर्श की योजना बनाएं।
  4. पूर्व केसों के परिणाम, फीस-निर्धारण, और उपलब्धता पक्का करें; क्लाइंट-फ्रेंडली अनुभवी सलाहकार चुनें।
  5. पहला परामर्श लेते समय केस-डायरेक्टिव पेपर और साक्ष्यों की सूची दें।
  6. IC/LCC के समय-सीमा, अंतरिम सुरक्षा आदेश और संरक्षण के विकल्प पर चर्चा करें।
  7. गोपनियता और सूचना-सुरक्षा के बारे में स्पष्ट समझौता करें; अदालत में प्रतिनिधित्व के नियम जानें।

नोट: Bengaluru Urban जिले के LCC/IC के निर्णय स्थानीय अधिकारी और डिपार्टमेंट ऑफ विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट के नियम से संचालित होते हैं।

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