हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ यौन उत्पीड़न वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में यौन उत्पीड़न कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा सहित भारत के सभी राज्यों में यौन उत्पीड़न से सुरक्षा के लिए POSH कानून लागू है। POSH अधिनियम का उद्देश्य कर्मचारियों को सुरक्षित कार्यस्थल देना और उत्पीड़न के खिलाफ त्वरित निवारण सुनिश्चित करना है।

उद्धरण:

“An Act to provide for the protection of women from sexual harassment at the workplace and for the prevention, prohibition and redressal of such harassment.”
यह उपरेख POSH अधिनियम की मूल परिभाषा है और केंद्र सरकार के पन्नों पर मिलती है।

हरियाणा में यह कानून क्रियान्वित होता है और सभी नियोक्ताओं पर लागू होता है, चाहे वे सरकारी विभाग हों या निजी क्षेत्र के उद्यम। रोजगार स्थल पर अपराध-रहित वातावरण बनाना और शिकायतों का त्वरित निवारण मुख्य लक्ष्य है।

उद्धरण:

“This Act shall apply to every employer having ten or more employees.”
यह कथन POSH अधिनियम के आधार-प्रावधानों में आता है और आधिकारिक संहिताओं पर दर्शित है।

हरियाणा में ICC (Internal Complaints Committee) का गठन किसी भी संस्था के लिए अनिवार्य है जहां 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हों। ICC शिकायत पर शांती-पूर्वक और निष्पक्ष जाँच कर विवरण देता है और आवश्यक निवारण करता है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

यौन उत्पीड़न मामलों में कानूनी सलाहकार की भूमिका अहम है। नीचे हरियाणा से जुड़े 4-6 वास्तविक परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें वकील की सहायता जरूरी होती है।

  • गुरुग्राम की निजी कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी द्वारा यौन-हिंसा-याचना: शिकायत ICC तक पहुँचाने, रिकॉर्ड बनाने और विवेचना की रणनीति बनाने के लिए advsior की जरूरत होती है।
  • फरीदाबाद की फैक्ट्री में परिचारिका-स्तर की उत्पीड़न: संस्थागत पॉलिसी के अनुरूप शिकायत-प्रभावी प्रक्रिया और कानूनी विकल्प स्पष्ट करवाने हेतु lawyer जरूरी है।
  • रोहतक के कॉलेज/शैक्षिक संस्थान में शिक्षक की यौन-उत्तेजक टिप्पणी: शिक्षा संस्थान में उत्पीड़न से निपटने के लिए ICC के साथ आंतरिक नीतियाँ और त्वरित निपटान करना होता है।
  • हरियाणा के एक अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के साथ अनचाहे स्पर्श/भाषिक उत्पीड़न: मौखिक और लिखित शिकायत के साथ-साथ IPC के प्रावधानों से जुड़ी सुरक्षा की सलाह आवश्यक होती है।
  • ऑनलाइन/मित्रवत संदेशों के माध्यम से उत्पीड़न: डिजिटल प्रमाण और संचार रिकॉर्ड इकट्ठे करना, कानूनी कदम तय करना वकील की सहायता से संभव बनता है।
  • शिकायत के बाद प्रतिशोध/जालिम कार्रवाई: कानूनी रास्तों में सुरक्षा-उपाय और पुनर्वास के लिए वकील की मार्गदर्शक भूमिका ज़रूरी हो जाती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में यौन उत्पीड़न से जुड़ी प्रमुख कानून-धाराएं:

  • POSH Act, 2013 (Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013) - केन्द्र सरकार का कानून जो कार्यस्थल पर महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न रोकने, रोकथाम करने और/redressal के प्रावधान देता है। Haryana में सभी नियोक्ताओं पर यह लागू होता है।
  • IPC के प्रावधान (भारतीय दंड संहिता) - हरियाणा में यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराध IPC की धाराओं से दंडनीय माने जाते हैं, जैसे:
    • धारा 354A - यौन उत्पीड़न (harassment with intent to disrobe, आदि)
    • धारा 354D - stalking (सूचना के साथ पीछा करना)
    • धारा 509 - महिला की शील-तिष्ठा का अपमान
    ये प्रावधान अपराध के रूप में दायर किये जा सकते हैं, साथ में वैकल्पिक शिकायत ICC के माध्यम से भी हो सकती है।
  • हरियाणा Shops and Establishments Act - हरियाणा में दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए नियम तय करता है; कार्यस्थल सुरक्षा और कर्मचारी सम्मान से जुड़े प्रावधान अपनाने की प्रेरणा देता है। POSH के साथ मिलकर कार्यस्थल पर सुरक्षा बढ़ाते हैं।

उच्चतम न्यायालय तथा राज्य-स्तर पर कुछ निर्देशों के अनुसार शिकायत के लिए प्रक्रियात्मक मार्गदर्शिका उपलब्ध है। POSH के तहत ICC की नियुक्ति और शिकायत-निपटान के प्रावधान हरिद्वार नहीं, बल्कि हर जिले में उपलब्ध रहते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यौन उत्पीड़न क्या है?

यौन उत्पीड़न में ऐसे अनवांछित व्यवहार शामिल हैं जो महिलाओं के सम्मान को भंग करते हों। यह शारीरिक स्पर्श, यौन अनुरोध, यौन रंगीन टिप्पणी, अश्लील गोपिकाओं का प्रदर्शन या अन्यकिसी तरह का यौन-स्वरूप व्यवहार हो सकता है।

POSH Act किसके लिए है?

POSH Act केवल महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए है। पुरुष शिकायत भी कर सकते हैं, पर कानून मुख्यतः महिला कर्मचारियों के लिए है; वैकल्पिक तौर पर IPC या अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई संभव है।

कौन शिकायत दर्ज कर सकता है?

शिकायत कर्मचारी स्वयं या उसकी संरक्षित परिजन ICC के पास कर सकते हैं। शिकायत करने के लिए किसी भी प्रकार की पहचान सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि डर-से-इन-रिपोर्ट न हो।

कहाँ शिकायत दर्ज की जा सकती है?

शिकायत(workplace ICC) के पास या स्थानीय पुलिस के पास दर्ज करवाई जा सकती है। POSH के तहत ICC की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि वे शिकायत की जाँच और समाधान करें।

शिकायत की समय-सीमा क्या है?

कथित घटना के तिथि से तीन महीनों के भीतर शिकायत करनी चाहिए; कुछ परिस्थितियों में ICC द्वारा समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय किया जा सकता है।

ICC कैसे बनता है?

Employer को ICC बनानी होती है जिसमें कम से कम चार सदस्य हों, जिनमें से महिलाओं की उपस्थिति अनिवार्य हो। कुछ बाहरी सदस्य NGO/कानून-समझ रखने वाले व्यक्ति होते हैं।

क्या शिकायत गुप्त रहती है?

ICC शिकायत की गोपनीयता बनाए रखती है और शिकायतकर्ता की पहचान छिपाने के निर्देश देती है, ताकि प्रतिशोध से बचाव हो सके।

कौन-कौन सी राहत मिल सकती है?

आंतरिक तंत्र के तहत अनुशासनिक कार्रवाई, स्थानांतरण, प्रशिक्षण, policy display और compensation जैसी राहतें संभव हैं।

क्या शिकायत के बाद प्रतिशोध हो सकता है?

नहीं; POSH Act संरक्षित करता है कि शिकायतकर्ता के विरुद्ध reprisal न हो। यदि ऐसा हो, तो ICC या उच्च अधिकारी से तुरंत शिकायत करें।

किस प्रकार के सबूत चाहिए होते हैं?

स्टेटमेंट्स, ईमेल, संदेश, चैट, डाक-लिफाफे, वीडियों रिकॉर्ड आदि सबूत के रूप में मान्य होते हैं जिन्हें ICC के समक्ष रखा जा सकता है।

क्या शिकायत के बाद कोर्ट में मामला दर्ज किया जा सकता है?

हाँ; यदि शिकायत के निपटान से संतुष्टि नहीं मिलती है, तो धारा 354A-354D जैसे IPC प्रावधानों के अंतर्गत criminal केस भी दर्ज किया जा सकता है।

क्या छोटा संस्थान POSH के दायरे में आते हैं?

POSH Act लागू तब होता है जब संस्थान में कम-से-कम दस कर्मचारी हों। छोटे संस्थान अपने कर्मचारियों के लिए आंतरिक नीतियाँ बनाएं तो बेहतर है।

क्या शिकायत करते समय दस्तावेज़ रखना ज़रूरी है?

हाँ; घटना की तारीख, समय, स्थान, घटना का विवरण, गवाह तथा उपलब्ध सबूत रिकॉर्ड करें और ICC को दे दें।

क्या Harassment के समय कानूनी सहायता लेना चाहिए?

बिल्कुल; एक कानूनी सलाहकार से मिलकर आपकी अधिकार-सीमा, उपाय और NCR/ICC के विकल्प स्पष्ट रखें।

महिला अधिकारी या वक़ील कैसे मदद कर सकते हैं?

वकील ICC के सामने उचित प्रश्नावली बनवाने, रिकॉर्डिंग और सबूत-संग्रह में मदद करेगा, साथ ही उचित राहत-निवारण की योजना देगा।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Women (NCW) - राष्ट्रीय स्तर पर महिला अधिकारों की निगरानी और सहायता: https://ncw.nic.in
  • Ministry of Women and Child Development (WCD) - POSH Act संबंधी आधिकारिक पन्ने और मार्गदर्शन: https://wcd.nic.in
  • UN Women India - महिला सुरक्षा और उत्पीड़न के खिलाफ पहल एवं सूचना: https://in.unwomen.org

6. अगले कदम

  1. स्थिति का सत्यापित वर्णन अपने शब्दों में लिखें-कब, कहाँ, किसने क्या किया, किनके सामने।
  2. अपने संगठन के ICC सदस्य या स्थानीय HR से पहले बातचीत करें और शिकायत दर्ज करने की तैयारियाँ करें।
  3. सबूत संकलन करें-मैसेज, ईमेल, तस्वीर, वीडियो, गवाहों के बयान।
  4. एक कानूनी सलाहकार से मिलकर अधिकार, समय-सीमा और विकल्प समझें।
  5. ICC के साथ शिकायत दर्ज करवाते समय गोपनीयता के उपाय सुनिश्चित करें।
  6. यदि संतुष्टि नहीं मिलती, IPC के प्रावधानों के तहत Criminal case के विकल्प पर विचार करें।
  7. स्थानीय HR और कानूनी सहायता के साथ एक स्पष्ट कार्ययोजना बनाएं।

नोट: यह मार्गदर्शिका हरियाणा, भारत के दायरे में सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी स्थिति में एक स्थानीय वकील से प्रत्यक्ष सलाह लेने की अनुशंसा की जाती है। उद्धरण और कानून के विशिष्ट दायरे के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।

आधिकारिक स्रोत उद्धरणों के लिए देखें:

“An Act to provide for the protection of women from sexual harassment at the workplace and for the prevention, prohibition and redressal of such harassment.”

POSH Act, 2013 के पेज और पब्लिक डोमेन पर इसकी संहिता के लिंक पर अधिक जानकारी मिलती है।

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