बेंगलुरु में सर्वश्रेष्ठ वसीयत और वसीयतपत्र वकील
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भारत वसीयत और वसीयतपत्र वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 1 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें वसीयत और वसीयतपत्र के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- संपत्ति का विभाजन
- कक्षा 2 के वारिस (पिता) को प्रॉपर्टी की बिक्री अनुबंध में परिवार के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है क्योंकि पहले पंजीकरण के समय वह उपस्थित नहीं थे। विभाजन के दौरान, क्या वह कक्षा 1 - पत्नी (स्वर्गीय), 3 पुत्रों के संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति में अपना...
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वकील का उत्तर Remedium Reel Attorneys द्वारा
यदि वसीयत नहीं है, तो उत्तराधिकारी को ट्रांसप्रोवे रजिस्ट्री में प्रशासन पत्र प्राप्त करने के लिए 2 या 3 व्यक्तियों को नियुक्त करना होता है जो उन्हें अन्य उत्तराधिकारियों की इच्छाओं के अनुरूप संपत्ति का प्रशासन करने का अधिकार देता...
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1. बेंगलुरु, भारत में वसीयत और वसीयतपत्र कानून का संक्षिप्त अवलोकन
बेंगलुरु में वसीयत और वसीयतपत्र कानून भारत के समग्र अधिनियमन के अनुसार संचालित होता है। इस क्षेत्र में वसीयत बनाना और उसे प्रमाणित करवाना दो प्रमुख कदम हैं। बिना वसीयत के संपत्ति का विभाजन intestate succession के नियमों से होता है।
“This Act may be called The Indian Succession Act, 1925.”
वसीयत लिखित होनी चाहिए और टेस्टेंटर की स्व-हस्ताक्षरित स्वीकृति, साथ में कम-से-कम दो गवाहों की उपस्थिति आवश्यक होती है। महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी ये मूल सिद्धांत समान रहते हैं।
पंजीकरण एक वैकल्पिक विकल्प है। पंजीकरण से वसीयत को सुरक्षा और साक्ष्य की मजबूती मिलती है, पर यह अनिवार्य नहीं है।
“Registration of documents may be made under the Registration Act, 1908.”
कर्नाटक राज्य में वसीयत कानून के अंतर्गत चलते कुछ नियमों और शुल्कों के लिए कर्नाटक स्टाम्प एक्ट तथा Registration Act लागू होते हैं।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
यदि आपके पास Bengaluru, Karnataka में संपत्ति है या आप वसीयत बनाना चाहते हैं, तो वकील की सहायता आवश्यक हो सकती है। नीचे छोटे-छोटे 4-6 वास्तविक परिदृश्य दिए गए हैं।
- अपने Bengaluru स्थित घर और बैंक-आसन्न संपत्ति के लिए एक स्पष्ट निर्देश सहित वसीयत बनवानी हो।
- हिंदू-धर्म के अनुसार वसीयत बनाते समय बच्चों के अधिकार और उत्तराधिकार स्पष्ट करन हो।
- विदेशी संपत्ति या NRIs के लिए प्रॉबेट-प्रक्रिया और एक्सेक्यूटर नियुक्त करना हो।
- सम्पत्ति में संयुक्त परिवार या HUF-स्टेट शामिल हो और विभाजन की जटिलताएं हों।
- वसीयत को चुनौती दिए जाने की संभावना हो और वैध गारंटियों की जरूरत हो।
- नाबालिग लाभार्थी के लिए संरक्षक और गार्दियन नियुक्त करना हो।
इन सभी स्थितियों में Bengaluru के स्थानीय कानून, संपत्ति के प्रकार और परिवार-स्थिति के अनुसार कानूनी सलाह महत्वपूर्ण है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
- The Indian Succession Act, 1925 - भारत-स्तर पर testamentary succession के नियम देता है। Bengaluru और Karnataka में इसे सामान्य रूप से लागू किया जाता है।
- Hindu Succession Act, 1956 - हिंदू समाज के उत्तराधिकार के नियम निर्धारित करता है; पुत्री-भाई-बहनों के अधिकार आदि यहाँ स्पष्ट होते हैं।
- The Registration Act, 1908 - वसीयत सहित कुछ दस्तावेजों का पंजीकरण संभव बनाता है; पंजीकरण अनिवार्य नहीं है पर सुरक्षा बढ़ाता है।
इसके अतिरिक्त The Karnataka Stamp Act, 1957 के अंतर्गत वसीयत पर स्टाम्प ड्यूटी लागू होती है; सही स्टाम्प मूल्य सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वसीयत क्या है?
वसीयत एक ऐसी लिखित अभिगुणा है जिसमें व्यक्ति अपनी मृत्यु के पश्चात अपने संपत्ति का वितरण बताता है। यह Indian Succession Act, 1925 के अंतर्गत मान्य है।
कौन सा दस्तावेज चाहिए होता है एक वैध वसीयत के लिए?
वसीयत लिखित हो, testator द्वारा हस्ताक्षरित हो और कम से कम दो गवाहों द्वारा हस्ताक्षरित तथा उपलब्ध होना चाहिए।
क्या वसीयत पंजीकृत करानी आवश्यक है?
पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर पंजीकृत वसीयत अधिक प्रमाणित और विवाद विमुक्त हो सकती है।
बेंगलुरु में एक्सेक्यूटर कैसे नियुक्त करें?
वसीयत में एक्सेक्यूटर का नाम और उनका पद स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। जीवन-काल में सहमति मिल जाना चाहिए, और विकल्पों पर विचार करें।
प्रॉबेट क्या होता है और कहाँ फाइल करें?
प्रॉबेट अदालत द्वारा वसीयत की वैधता की पुष्टि है। Bengaluru के स्थानीयDistrict Court में आवेदन करें, जो संपत्ति के प्रकार पर निर्भर है।
अगर किसी ने वसीयत को चैलेंज किया तो क्या करना चाहिए?
कानूनी सलाह लें और उचित प्रमाण प्रस्तुत करें। चुनौती अक्सर testamentary capacity, undue influence, fraud आदि पर आधारित होती है।
नाबालिग लाभार्थी के लिए संरक्षक कैसे चुनें?
वसीयत में संरक्षक नियुक्त करें और अदालत से कानूनी अनुमोदन लें ताकि नाबालिग की देखरेख सही तरीके से हो सके।
क्या हिंदू महिलाओं के अधिकार बदले हैं?
2005 के Hindu Succession Act के संशोधन से बेटियों को भी बराबर उत्तराधिकार मिला है, पर स्थिति संपत्ति-प्रकार पर निर्भर हो सकती है।
कौन से दस्तावेज अगला कदम में चाहिए होंगे?
पहचान प्रमाण, पते का प्रमाण, संपत्ति के दस्तावेज और दो गवाहों के सत्यापन आवश्यक होते हैं।
विदेशी संपत्ति वाले व्यक्तियों के लिए क्या आवश्यक है?
विदेशी वसुली संपत्ति के मामले में प्रॉबेट और ट्रांस-नेशनल नियमों का पालन जरूरी होता है; एक अनुभवी advicae की जरूरत रहती है।
क्या वसीयत में ट्रस्ट भी बनाया जा सकता है?
हाँ, आप ट्रस्ट के माध्यम से संपत्ति का प्रबंधन कर सकते हैं; यह कर-उपयोगी और नियंत्रण-योग्य संरचना दे सकता है।
क्या टैक्स implications होती हैं?
उत्तराधिकार आयकर या संपत्ति-कर से प्रभावित हो सकता है; कर-सामर्थ्य और सेवित-आयुक्त नियमों को ध्यान में रखें।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Karnataka State Legal Services Authority (KSLSA) - कानूनी सहायता और वकालत सेवाओं के लिए मुख्य राज्य निकाय। साइट: https://kslsa.kar.nic.in
- Bar Council of Karnataka - बार काउंसिल द्वारा पंजीकृत वकीलों की सूची और सेवाओं के निर्देश। साइट: http://www.barcouncilofkarnataka.org
- National Legal Services Authority (NALSA) - राष्ट्रीय स्तर पर मुफ्त कानूनी सहायता और guidelines. साइट: https://nalsa.gov.in
6. अगले कदम
- अपने परिवार, संपत्ति और ऋणों की एक सूची बनाएं।
- कौन सा वसीयत प्रकार उपयुक्त है, यह तय करें (स्थानीय कानून के अनुसार, होंगे)।
- एक अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से मुंबई-या Bengaluru क्षेत्र के लिए मिलें नहीं, बल्कि Bengaluru में मिलें।
- वसीयत का ड्राफ्ट बनवाएं जिसमें Executor, Beneficiaries और Guardians का स्पष्ट उल्लेख हो।
- हस्ताक्षर, दो गवाहों के साथ साक्ष्य और आवश्यक हो तो पंजीकरण पर विचार करें।
- संपत्ति दस्तावेज और पंजीकरण के प्रमाण सुरक्षित स्थान पर रखें, और परिवार के सदस्य को सूचित करें।
- प्रॉबेट प्रक्रिया के लिए lokal कोर्ट में आवश्यक कदमों की योजना बनाएं और समय-सीमा का ध्यान रखें।
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