दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ पशु और कुत्ते की चोट वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. Delhi, India में पशु और कुत्ते की चोट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दिल्ली में पशु और कुत्ते की चोट से जुड़ा मौजूदा कानून पशुओं के अधिकारों और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हैं. मुख्य कानून Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 सभी भारत में लागू है. साथ ही Stray Dogs (Protection and Welfare) Act, 2006 दिल्ली UT क्षेत्र सहित लागू प्रभाव डालता है.

उद्धरण: "The Stray Dogs (Protection and Welfare) Act, 2006 provides for humane management of stray dogs including vaccination and sterilization." official source

रेलवे, बाजार, मोहल्लों जैसी जगहों पर कुत्तों के bite मामलों में नागरिक सुरक्षा के साथ पशु कल्याण के नियम एक साथ चलते हैं. Delhi government और Municipal bodies के निर्देश इन घटनाओं में मौजूदा दायित्व तय करते हैं. स्थानीय अदालतों में पशु-चोट के मामलों की सुनवाई के लिए सामान्य कॉन्ट्रैक्ट-टॉर्ट कानून भी लागू होते हैं.

उद्धरण: "The Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 aims to prevent cruelty to animals and to provide for their welfare." official source

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे दिए विशेष परिस्थितियों में कानूनी सहायता लाभदायक हो सकती है. Delhi, India के निवासी इन स्थितियों में वकील से परामर्श लें:

  1. दिल्ली में आवारा कुत्ते के काटने के कारण चिकित्सा खर्च और Rabies टीकाकरण के मामलों में मुआवजे की जरूरत हो.
  2. किसी अन्य व्यक्ति/घरेलू पालतू द्वारा कुत्ते के काटने पर नागरिक दावा बनना हो या प्रतिरक्षा/अपवाद की स्थिति हो.
  3. बार बार एक ही कुत्ते के हमला हो, और स्थानीय प्रशासन ने नियंत्रण न किया हो.
  4. स्कूल/हाउसिंग सोसायटी परिसर के भीतर बच्चों पर हमला हो और सुरक्षा उपाय नहीं हो पा रहे हों.
  5. दिल्ली के ट्रैफिक-इलाके में कुत्ते के कारण वाहन दुर्घटना हो और बीमा दावे उठाने हों.
  6. कुत्ते के मालिक की जिम्मेदारी स्पष्ट न हो और मुआवजे की मांग Civil Court में करनी हो.

Delhi में वास्तविक स्थितियों पर विचार करें, जैसे मोहल्ले के निवासियों द्वारा बार बार आक्रमण की घटनाओं पर नगर निकाय से जवाब माँगना और कानूनी विकल्प पर सलाह लेना जरूरी होता है. एक अनुभवी advokat, कानूनी सलाहकार या वकील से मिलने से आप सही धाराओं, प्रारम्भिक दायित्वों और समय-सीमाओं को समझ सकेंगे.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

दिल्ली में आवारा कुत्तों के नियंत्रण और चोट के मामलों पर मुख्य कानून नीचे दिए गए हैं. इन कानूनों से कानूनी विकल्प और दायित्व स्पष्ट होते हैं.

  • Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 - सभी भारतवर्ष पर लागू यह अधिनियम पशुओं के प्रति क्रूर व्यवहार को रोकने और उनके कल्याण के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है. (आधिकारिक पृष्ठ: AWBI, indiacode.nic.in)
  • Stray Dogs (Protection and Welfare) Act, 2006 - आवारा कुत्तों के मानव-सम्बन्धी नियंत्रण, टीकाकरण और नसबंदी सहित उनके कल्याण के लिए उपाय निर्धारित करता है. (आधिकारिक पंरिचय: indiacode.nic.in)
  • Animal Birth Control (ABC) Programme और Delhi Municipal Corporation के मार्गदर्शक नियम - दिल्ली में ABC कार्यक्रम के तहत नसबंदी/टीकाकरण और स्ट्रीट डॉग के प्लान्ड सर्वेक्षण होते हैं; नगर निगम के निर्देशों के अनुरूप स्थानीय कार्यवाही होती है. (आधिकारिक सूचना: delhi.gov.in)
उद्धरण: "Stray Dogs Protection and Welfare Act 2006 provides humane management including vaccination and sterilization." official source
उद्धरण: "Delhi's ABC program focuses on sterilization and vaccination to curb stray dog population and reduce bite incidents." official source

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मैं डाकुओं के कुत्ते से चोट मिलते ही पुलिस को रिपोर्ट कर सकता हूँ?

हाँ, अगर चोट गंभीर हो या बार-बार हमला हो रहा हो, तो आप स्थानीय थाने में FIR दर्ज करा सकते हैं. कानून आपको प्रमाणिक डाक्यूमेंट्स और इलाज के प्रमाण दे कर दावा बनाने में मदद करते हैं.

कौन सा कानून कुत्ते के bite पर आपदा-हत्या तक जा सकता है?

PCA Act 1960 के तहत पशु-चोट के मामले में क्रूरता रोकथाम के प्रावधान लागू होते हैं. Stray Dogs Act 2006 भी आवारा कुत्तों के नियंत्रण और कल्याण पर जोर देता है. दुर्घटना-या हत्या के जोखिम पर IPC की धाराएं भी लागू हो सकती हैं.

क्या मैं अस्पताल के बिलों के लिए मुआवजा मांग सकता हूँ?

हाँ, इलाज के खर्च, Rabies वैक्सीन और अन्य चिकित्सा खर्चों के लिए Civil Court में दावा किया जा सकता है. स्थान-विशिष्ट नियमों के अनुसार सरकारी सहायता भी मिल सकती है.

क्या मुझ पर कुत्ते के मालिक की जिम्मेदारी बनती है?

यदि कुत्ता मालिक के नियंत्रण से बाहर होकर हमला करता है तो मालिक की दायित्व बनती है. क्षतिपूर्ति के लिए Civil Court में दावा किया जा सकता है, और यदि घटना आवारा कुत्तों के कारण है तो नगरपालिका जिम्मेदार हो सकती है.

दिल्ली के किस विभाग या निगम से संपर्क करूँ?

दिल्ली urban area में ABC कार्यक्रम और आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए Ottawa में Municipal Corporations से संपर्क करें. Delhi Government के official portals पर संपर्क विवरण मिलते हैं.

कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?

चिकित्सा प्रमाण-पत्र, अस्पताल बिल, टीकाकरण/रैबीज वैक्सिनेशन का रिकॉर्ड, चोट की तस्वीरें, घटना का समय-तिथि, स्थान और गवाहों के विवरण रखें.

यदि मैं घायल हूँ और मैं काम पर नहीं जा पा रहा हूँ तो?

कानूनी सलाह लें: आप वेतन या नुकसान-भरपाई के दावे Civil Court में कर सकते हैं. व्यावहारिक कदमों में चिकित्सा प्रमाण-पत्र और आय-नुकसान का लेखा-जोखा शामिल करें.

घरेलू कुत्ता से खतरा हो तो?

यदि यह आपका पड़ोसी का पालतू है, तो आप उसे घरेलू-सम्बन्धी कानूनों के अनुसार नोटिस दे सकते हैं और यदि नहीं सुधरे तो स्थानीय अदालत में शिकायत कर सकते हैं.

आवारा कुत्तों से होने वाले डाटा को कैसे नियंत्रित करें?

ABC कार्यक्रम के तहत स्थानीय प्रशासन नसबंदी-टीकाकरण और जन्म नियंत्रण पर काम करता है. समुदाय के सहयोग से सुरक्षित वातावरण बनता है.

कानूनी प्रक्रिया कितनी देर तक चलती है?

यह स्थिति, दावे की प्रकृति, और अदालत-कार्यसूची पर निर्भर करता है. सामान्य तौर पर साक्ष्यों के संकलन से लेकर निर्णय तक कुछ माह से वर्ष भी लग सकते हैं.

क्या मैं किसी वकील की फीस पर पहले से तय कर सकता हूँ?

हाँ, पहले मीटिंग के समय फीस-स्टैक्चर स्पष्ट करें. Delhi में कई एड्वोकेट प्रैक्टिसिंग-फ़ीस विविध रूप से लेते हैं, कुछ अग्रिम-घंटा-शुल्क भी लेते हैं.

क्या सरकारी सहायता मिल सकती है?

कुछ मामलों में अस्पताल-खर्च या वैक्सीन-खर्च के लिए सरकारी सहायता मिल सकती है. स्थानीय सरकारी पोर्टल से पात्रता और प्रक्रिया की जाँच करें.

5. अतिरिक्त संसाधन

नीचे Delhi क्षेत्र में पशु-चोट के मामलों में सहायता देने वाले प्रमुख संगठनों की सूची है:

  • Delhi Society for the Prevention of Cruelty to Animals (DSPCA) - दिल्ली में प्रमुख पशु कल्याण संगठन; कुत्तों के लिए वैक्सीनिंग- sterilization और oml-उपचार सेवाएँ देता है.
  • Friendicoes SECA - दिल्ली-एनसीआर में एक पुरानी और स्थापित संस्था; पशु अस्पताल और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध.
  • People for Animals (PFA) - Delhi Unit - नागरिकों की सहायता, चोट-केसिंग और कानून-सहायता के लिए स्थानीय इकाइयाँ संचालित करता है.

6. अगले कदम

  1. घटना के तुरंत बाद सुरक्षा सुनिश्चित करें और प्राथमिक चिकित्सा लें.
  2. चोट, टीकाकरण और इलाज के सभी प्रमाण-पत्र इकट्ठा रखें.
  3. नजदीकी Dog Bite या Animal Welfare से जुड़े अनुभवी वकील से मिलेंऔर केस-फोलियो साझा करें.
  4. स्थानीय थाने में घटना की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं अगर आवश्यक हो.
  5. कानूनी विकल्प, दायित्व और संभावित मुआवजे की समझ के लिए सही दस्तावेज़ तैयार करें.
  6. कानूनी समयरेखा और फीस के बारे में स्पष्ट समझ बनाएं.
  7. Delhi-based वकील का चयन करके अदालत-पूर्व परामर्श दें और केस-योजना बनाएं.

आधिकारिक स्रोत संदर्भ:

“Stray Dogs Protection and Welfare Act 2006 provides humane management including vaccination and sterilization.” India Code
“The Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 aims to prevent cruelty to animals and to provide for their welfare.” Animal Welfare Board of India
“Delhi's Animal Birth Control program focuses on sterilization and vaccination to curb stray dog population and reduce bite incidents.” Delhi Government

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