रांची में सर्वश्रेष्ठ आक्रमण और मारपीट वकील

अपनी ज़रूरतें हमारे साथ साझा करें, कानूनी फर्मों से संपर्क प्राप्त करें।

मुफ़्त। 2 मिनट लगते हैं।

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
रांची, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. रांची, भारत में आक्रमण और मारपीट कानून के बारे में: रांची, भारत में आक्रमण और मारपीट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

रांची में आक्रमण और मारपीट के मामलों को भारतीय दंड संहिता (IPC) के धारा 351, 352, 319-326 आदि के तहत समझा जाता है। ये धाराएं अपराध की प्रकृति और वहन की सजा तय करती हैं। साथ ही क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) के अनुसार FIR दर्ज करना, जाँच शुरू करना और मुकदमे की प्रक्रिया संचालित करना जरूरी होता है।

रांची जैसे शहरी क्षेत्र में पुलिस-इनक्वायरी, सुरक्षा उपाय और पुख्ता सबूतों की मांग सामान्य है। स्थानीय पुलिस स्टेशनों में अपराध-सम्बन्धी शिकायतें CrPC 154 के अंतर्गत दर्ज होती हैं और न्यायालय के समक्ष चालू होती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य - IPC के अनुसार आक्रमण और मारपीट की धाराओं में आरोपी की गिरफ्तारी, जमानत, और सजा का निर्धारण राज्य के न्यायिक तंत्र के अनुरूप होता है।

“Assault means an act which causes a person to apprehend imminent violence.”
“2013 के Criminal Law (Amendment) Act ने महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के प्रावधान मजबूत किए, जिसमें 354A-354D शामिल हैं।”

उद्धरण स्रोत: IPC के आधिकारिक पाठ के अनुसार धारा 351-352, धारा 319-326, CrPC की प्रक्रियाएं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: आक्रमण और मारपीट कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। रांची, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

परिदृश्य 1: आपके पड़ोस में किसी ने आपको अचानक धक्का दिया या हाथ-based threatening किया है, आपके डर और चोट की आशंका के साथ। ऐसे मामलों में एक adv法-परामर्शदाता की मदद से सही धाराओं का चयन जरूरी है।

परिदृश्य 2: घरेलू वातावरण में पति या परिवार के किसी सदस्य द्वारा मारपीट हुई है, और आप DV कानून के साथ IPC धारा 354A, 323 या 504 आदि के तहत सुरक्षा चाहती हैं। सही कदम और सुरक्षा उपाय जरूरी होते हैं।

परिदृश्य 3: कार्यस्थल पर सहकर्मी या बॉस द्वारा शारीरिक-यानी मारपीट या गाली-गलौच हुआ है। वैकल्पिक प्रमाणों के साथ मुकदमे के लिए वकील की सलाह अहम है।

परिदृश्य 4: सड़क-चक्रवात, पार्किंग याड़-फड़ में किसी ने आपकी गाड़ी-चालक या राहगीर के तौर पर मारपीट की है। पुलिस रिपोर्ट, CCTV और गवाहों के आधार पर धाराएं तय करनी होती हैं।

परिदृश्य 5: राह चलते किसी ने असुरक्षा का भय दिखाकर आप से छीना-झपटी की है या मोबाइल छीन लिया है। Criminal Intimidation (धारा 506) और धारा 341-348 का मिश्रण बन सकता है, इसके लिए वकील सहायता चाहिए।

परिदृश्य 6: माता-पिता या संरक्षक के खिलाफ 498A जैसी धाराओं के दुरुपयोग का डर है और आप उचित कानूनी सहायता चाहते हैं ताकि बहुविध धाराओं के साथ सही कदम उठाएं।

इन सभी परिस्थितियों में एक अनुभवी adv legal counsel, अधिवक्ता, या कानून सलाहकार का चयन आपके अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: रांची, भारत में आक्रमण और मारपीट को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

Indian Penal Code, 1860 (IPC) - आक्रमण, मारपीट, चोट और धमकी जैसी आपराधिक धाराओं के प्रावधान निर्धारित करता है; धारा 351, 352, 319-326, 354A-D इत्यादि प्रमुख धाराएं हैं।

Criminal Procedure Code, 1973 (CrPC) - FIR दर्ज करने, जाँच, गिरफ्तारी, जमानत, निपटान के प्रावधान देता है; Ranchi के जिला अदालतों में मुकदमा प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDVA) - महिला सुरक्षा - घरेलू हिंसा के प्रकारों के विरुद्ध तत्काल राहत, सुरक्षा आदेश, औरMaintenance के अधिकार देता है। यह IPC के साथ क्रियान्वयन में प्रयोग हो सकता है, खासकर धाराओं 354A-354D के संदर्भ में।

अन्य क्षेत्र-स्तरीय पहल के साथ Jharkhand Police Act, 2001 भी सुरक्षा-एजेंसियों के कार्य-प्रणालियों को निर्धारित करता है और पुलिस-प्रक्रिया में स्थानीय मानदंड लागू करता है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न?

आक्रमण और मारपीट से क्या मतलब है, और कैसे पहचाने जाते हैं?

प्रश्न?

मैं किस IPC धारा के तहत FIR दर्ज करवा सकता/सकती हूँ?

प्रश्न?

FIR दर्ज कराते समय मुझे किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?

प्रश्न?

मैं चाहूँ तो निजी शिकायत कर सकता/सकती हूँ या केवल पुलिस कैसे?

प्रश्न?

गिरफ्तारी कैसे होती है और मुझे Bail कैसे मिलेगा?

प्रश्न?

कौनसी धारा दंडनीय सजा तय करती है और न्यायालय कब तक निर्णय ले सकता है?

प्रश्न?

DV या महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामले में क्या अलग प्रावधान लागू होते हैं?

प्रश्न?

अगर मैं समझौता कर लूं तो क्या केस वापस लिया जा सकता है?

प्रश्न?

रांची में सुरक्षा के लिए मुझे कौन से उपाय उठाने चाहिए?

प्रश्न?

क्या कोर्ट से समय-सीमा में राहतें मिल सकती हैं, जैसे अल्पकालिक रोक-थाम?

प्रश्न?

कानूनी सहायता या नि:शुल्क वकील कैसे मिल सकता है?

प्रश्न?

कौनसी आपात सहायता हेल्पलाइनें उपलब्ध हैं, विशेषकर रांची के लिए?

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - आधिकारिक साइट: nalsa.gov.in
  • Ranchi District Court eCourts Portal - कानूनी सहायता क्लीनिक और केस-फॉलो-अप के लिए: districts.ecourts.gov.in/ranchi
  • Jharkhand Police - महिला सुरक्षा और CAW-सम्पर्क के लिए जानकारी उपलब्ध: jhpolice.gov.in

6. अगले कदम

  1. घटना के तुरंत बाद प्रमाण जुटाएं - फोटो, वीडियो, चोट के क्लीनिकल दस्तावेज, गवाह विवरण आदि।
  2. 지역 पुलिस थाने में FIR दर्ज कराने के लिए CrPC 154 के अनुसार सूरत बनाएं और समय पर लिखित शिकायत दें।
  3. एक अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से संपर्क करें जो Ranchi की स्थानीय अदालतों के पक्ष-परिचय को समझे।
  4. कौनसी धाराएं लगेंगी, यह तय करने के लिए HoC-प्रकाशन, शिकायत और प्रमाणों की समीक्षा करें।
  5. यदि आप महिला सुरक्षा के संदर्भ में हैं, DV-प्रावधान और IPC धारा 354A-D पर सलाह लें।
  6. जमानत, अग्रिम जाँच और पर्सन-लॉ के बारे में वकील से स्पष्ट सलाह लें।
  7. आवश्यक हो तो NALSA या DLSA के नि:शुल्क कानूनी सहायता विकल्पों के लिए आवेदन करें।

नोट - रांची, झारखंड में अपराध-प्रक्रिया राज्य के कानून अधिकारियों के अधीन होती है। किसी भी कानूनी कदम से पहले स्थानीय वकील से परामर्श करें ताकि आपके तथ्य, धाराएं और सजा-प्रावधान सही रूप में लागू हों।

उद्धरण और आधिकारिक स्रोतें:

“Assault is an act which causes a person to apprehend imminent violence.” - IPC Section 351
“Criminal Law (Amendment) Act, 2013 introduced sections 354A-354D to address violence against women.”
“FIR should be registered promptly under CrPC 154, and subsequent investigation is guided by CrPC provisions.”

इन धाराओं और प्रक्रियाओं के वास्तविक पाठ के लिए आधिकारिक पाठ देखें:

IPC पाठ और धारा-वार विवरण के लिए आधिकारिक स्रोत: IPC 1860 - The Indian Penal Code

CrPC पाठ के लिए आधिकारिक स्रोत: CrPC 1973 - Code of Criminal Procedure

DV अधिनियम के लिए आधिकारिक संकल्प: Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005

Lawzana आपको योग्य कानूनी पेशेवरों की चयनित और पूर्व-जाँच की गई सूची के माध्यम से रांची में में सर्वश्रेष्ठ वकील और कानूनी फर्म खोजने में मदद करता है। हमारा प्लेटफ़ॉर्म अभ्यास क्षेत्रों, आक्रमण और मारपीट सहित, अनुभव और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर तुलना करने की अनुमति देने वाली रैंकिंग और वकीलों व कानूनी फर्मों की विस्तृत प्रोफ़ाइल प्रदान करता है।

प्रत्येक प्रोफ़ाइल में फर्म के अभ्यास क्षेत्रों, ग्राहक समीक्षाओं, टीम सदस्यों और भागीदारों, स्थापना वर्ष, बोली जाने वाली भाषाओं, कार्यालय स्थानों, संपर्क जानकारी, सोशल मीडिया उपस्थिति, और प्रकाशित लेखों या संसाधनों का विवरण शामिल है। हमारे प्लेटफ़ॉर्म पर अधिकांश फर्म अंग्रेजी बोलती हैं और स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों कानूनी मामलों में अनुभवी हैं।

रांची, भारत में में शीर्ष-रेटेड कानूनी फर्मों से उद्धरण प्राप्त करें — तेज़ी से, सुरक्षित रूप से, और बिना अनावश्यक परेशानी के।

अस्वीकरण:

इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

हम इस पृष्ठ की सामग्री के आधार पर की गई या न की गई कार्रवाइयों के लिए सभी दायित्व को अस्वीकार करते हैं। यदि आपको लगता है कि कोई जानकारी गलत या पुरानी है, तो कृपया contact us, और हम उसकी समीक्षा करेंगे और जहाँ उचित हो अपडेट करेंगे।