नया दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील
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नया दिल्ली, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. नया दिल्ली, भारत में दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में दिवालियापन कानून का ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के अंतर्गत आता है. यह कॉरपोरेट, व्यक्तिगत और अन्य देनदारियों के लिए समय-सीमित समाधान प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है. दिल्ली में CIRP और परिसमापन के मामले National Company Law Tribunal, Delhi (NCLT दिल्ली बेंच) के माध्यम से आते हैं.
The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides for a time bound resolution of insolvency.
National Company Law Tribunal has exclusive jurisdiction to adjudicate corporate insolvency matters.
दिल्ली निवासियों के लिए यह प्रक्रिया कभी-कभी जटिल हो सकती है. ऐसे मामलों में एक अनुभवी वकील का मार्गदर्शन लाभदायक रहता है.
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
नीचे दिल्ली-आधारित परिस्थितियाँ दी गई हैं जिनमें कानूनी सलाहकार की आवश्यकता रहती है.
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दिल्ली-आधारित MSME ने बैंक ऋण चुकाने में चूक कर दिया है. CIRP के लिए दायित्वों की क्रमानुसार प्रस्तुतियाँ जरूरी होती हैं. एक अधिवक्ता दस्तावेज़ीकरण और अदालत-प्रस्तुति में सहायता करता है.
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दिल्ली-आधारित स्टार्टअप पर देनदारियाँ बढ़ गई हैं. ऋणदाता IBC के अंतर्गत CIRP शुरू कर सकता है. कानूनी सलाहकार क्रेडिटर्स-समझौते और पुनर्गठन योजना बनाने में साथ देता है.
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दिल्ली में किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए देनदारियां बढ़ गई हैं. CIRP या पुनर्गठन विकल्पों की योजना बनाने के लिए वकील चाहिए. वे कोर्ट-प्रक्रिया का समन्वय और बचाव-रणनीति बनाते हैं.
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दिल्ली निवासी के व्यक्तिगत ऋणों के लिए व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया की जरूरत उठ सकती है. अधिवक्ता नियमों को स्पष्ट बताते हैं और मोराटोरियम का प्रयोग समझाते हैं.
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दिल्ली में रियल एस्टेट डेवलपर दिवालिया हो रहा है. CIRP के अंतर्गत परिसंपतियों के विक्रय और क्रेडिटर-समझौते पर कानूनी निर्देश जरूरी होते हैं. वकील प्रक्रियाओं का नेतृत्व करता है.
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बैंकिंग और वित्त संस्थानों के साथ जटिल ऋण-सम्पन्न विवाद सामने आए हैं. RDDBFI या SARFAESI मार्ग से मुद्दा सुलझाने के लिए कानूनी सहायता आवश्यक होती है.
3. स्थानीय कानून अवलोकन
नया दिल्ली में दिवालियापन के लिए प्रमुख कानूनों के बारे में संक्षेप नीचे है.
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - केंद्रीय कानून है जो CIRP और परिसमापन की प्रक्रियाएँ निर्धारित करता है. दिल्ली में NCLT दिल्ली CIRP सुनवाई का प्रमुख मंच है.
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) - सुरक्षित ऋणों के त्वरित पुनर्गठन और संपत्ति जब्ती के लिए लागू किया जाता है. दिल्ली में बैंकों के अनुरोध पर DRT और अदालतों के माध्यम से क्रियान्वयन होता है.
- Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI) - बैंकों और वित्तीय संस्थानों के दायित्वों के लिए ऋण-उद्धार न्याय-प्रक्रिया देता है. DRT द्वारा मामलों की सुनवाई और प्रभावी निपटान संभव बनाता है.
इन कानूनों के साथ साथ Companies Act, 2013 का कुछ भाग परिसमापन-सम्बन्धी प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है. दिल्ली में अदालतें इन कानूनों के अंतर्गत कार्य करती हैं और NCLT, NCLAT द्वारा फैसले पारित होते हैं.
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक केंद्रीय कानून है जो insolvency और bankruptcy से जुड़ी प्रक्रियाओं को समय-सीमित बनाता है. इसका उद्देश्य देनदारों के लिए त्वरित समाधान या परिसमापन सुनिश्चित करना है.
दिल्ली में insolvency प्रॉसेस शुरू करने के लिए मुझे क्या-क्या चाहिए?
आपको कंपनी-के-केस में बोर्ड मीटिंग निर्णय, वित्तीय विवरण, ऋण-सीमा और क्रेडिटर सूची जैसे दस्तावेज चाहिए होंगे. साथ ही दिशा-निर्देश के अनुसार CIRP आवेदन दाखिल करना होता है.
Moratorium क्या है और यह कब लगता है?
मोरा-टोरियम CIRP के दौरान प्रभावी होता है. इस दौरान देनदार के विरुद्ध नई देनदारियाँ बनाने या प्रवर्तन कार्रवाइयों से रोक लगती है.
CIRP और परिसमापन में क्या अंतर है?
CIRP में समाधान-पथ खोजा जाता है, जबकि परिसमापन में बकाया संपत्तियाँ बेची जाती हैं और जो लाभ मिलते हैं उसका वितरण Creditor Committee के अनुसार होता है.
क्या व्यक्तिगत दिवालियापन दिल्ली में संभव है?
हाँ, व्यक्तियों के लिए insolvency प्रावधान भी मौजूद हैं. व्यक्तिगत bankruptcy प्रक्रिया के तहत देनदारियाँ घटाने और पुनर्गठन के विकल्प मिलते हैं.
IBC के कितने दिन में निर्णय संभव होते हैं?
CIRP के लिए सामान्य समय-सीमा 180 दिन है. इसे 90 दिनों तक बढ़ाने की अनुमति CoC की मंजूरी से मिल सकती है; कुल मिलाकर 270 दिन तक संभव है.
क्या दिल्ली में क्रेडिटर प्रतिनिधि का योगदान जरूरी होता है?
हाँ. ऋणदाता समिति (Committee of Creditors) CIRP के प्रमुख निर्णयों में भाग लेती है. यह पुनर्गठन योजना और परिसंपत्ति बिक्री तय करती है.
क्या मैं खुद адвोजन को नहीं कर सकता?
IBC प्रक्रियाओं में अनुभव-समर्थ वकील की भूमिका बहुत बड़ी है. दाखिलियाँ, साक्ष्य और अदालत-उचित तर्क मजबूत बनाने के लिए अधिवक्ता जरूरी रहता है.
क्या दिल्ली में IBC के अलावा अन्य रास्ते उपलब्ध हैं?
हाँ. SARFAESI, RDDBFI जैसे कानून बैंकों के लिए वैकल्पिक रास्ते देते हैं. अदालतों में मुकदमें और क्रेडिटर-समझौते भी संभव हैं.
यह प्रक्रिया कितनी महंगी हो सकती है?
खर्च कार्रवाई-विभिन्न पर निर्भर है. मामले की जटिलता, पेशेवर समय और अदालत शुल्क पर मूल्य निर्धारण होता है.
क्या मैं cross-border insolvency से जुड़ी सहायता ले सकता हूँ?
क्रॉस-बॉर्डर Insolvency मामले में बहु-देशीय नियम शामिल हो सकते हैं. ऐसे मामलों के लिए विशिष्ट विशेषज्ञता चाहिए होती है.
कौन सा सबसे पहला कदम होना चाहिए?
सबसे पहले आपकी वित्तीय स्थिति का संक्षिप्त आकलन करें और एक अनुभवी वकील से प्रारम्भिक परामर्श लें. Delhi-आधारित कानून-फ्रेम में आपका सही मार्गदर्शन मिल जाएगा.
5. अतिरिक्त संसाधन
नीचे दिल्ली में दिवालियापन से जुड़े प्रमुख संसाधन और उनके आधिकारिक स्रोत दिए गए हैं.
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक साइट: https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT), Delhi Bench - आधिकारिक साइट: https://www.nclt.gov.in/
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - आधिकारिक साइट: https://nclat.nic.in/
“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides for a time bound resolution of insolvency.”
“NCLT has exclusive jurisdiction to adjudicate corporate insolvency matters.”
6. अगले कदम
- अपनी वित्तीय स्थिति का संक्षिप्त सारांश बनाएं; ऋण-सूची, आय-खर्च रिकॉर्ड इकट्ठा करें.
- IBC विशेषज्ञ वकील या कानूनी सलाहकार से दिल्ली में संपर्क करें और पहली संतुलित परामर्श शेड्यूल करें.
- कानून-सम्बन्धी आवश्यक दस्तावेजों को तैयार रखें; बोर्ड मीटिंग, ऋण पत्र, क्रेडिटर लिस्ट आदि जमा करें.
- दिल्ली-निष्ठ वकील से CIRP या insolvency-प्रक्रिया के संभावित रास्ते पर चर्चा करें.
- फीस संरचना, रेट-कार्ड और अनुमानित समयरेखा स्पष्ट समझ लें; सभी बातों का लिखित अनुबंध बनाएं.
- दिल्ली के NCLT/NCLAT और IBBI साइट्स पर प्रक्रियागत नियमों को पढ़ना शुरू करें.
- पहला कॉन्सल्टेशन लेने के बाद अगले कदम निर्धारित करें और आवश्यक दस्तावेजों को क्रमबद्ध करें.
नोट: यह मार्गदर्शिका सामान्य सूचना के लिए है. किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय विशेषज्ञ से व्यक्तिगत कानूनी सलाह अवश्य लें.
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