जम्मू में सर्वश्रेष्ठ नागरिक और मानव अधिकार वकील

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ADV HARPREET SINGH AND ASSOCIATES
जम्मू, भारत

2022 में स्थापित
उनकी टीम में 19 लोग
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अधिवक्ता हरप्रीत सिंह: जटिल कराधान और कॉर्पोरेट विधि में एक भरोसेमंद कानूनी रणनीतिकारविधिक जटिलताओं की निरंतर...
जैसा कि देखा गया

1. जम्मू, भारत में नागरिक और मानव अधिकार कानून का संक्षिप्त अवलोकन

जम्मू-कश्मीर के नागरिक और मानव अधिकार कानून भारतीय संविधान से प्रेरित हैं। मुख्य अधिकार संविधान के भाग तीन से आते हैं और प्रत्येक नागरिक के लिए समानता, स्वतंत्रता और गरिमा को संरक्षित करते हैं।

केंद्र-शासन का 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर के दर्जे में बदलाव हुआ है, जिससे क्षेत्रीय नियमों की भूमिका बदली है। फिर भी नागरिक अधिकारों की मूल संरचना संविधान के अन्नत नियमों पर टिके रहती है।

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.”
Constitution of India, Article 14
“No person shall be deprived of his life or personal liberty except according to procedure established by law.”
Constitution of India, Article 21
“All citizens shall have the right to freedom of speech and expression.”
Constitution of India, Article 19(1)(a)

उपर्युक्त अधिकार जम्मू-कश्मीर निवासियों के लिए भी मौलिक हैं, हालांकि क्षेत्र में सुरक्षा-सम्बन्धी कानूनों का व्यवहार अलग परिवेश में किया जाता है।

आधिकारिक स्रोत: संविधान के मूल पाठ के लिए देखें https://legislative.gov.in/constitution-of-india और RTI-सम्बन्धी जानकारी के लिए https://rti.gov.in/

अनुभवजन्य संकेत : जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा-नियम बाद में बदले, पर मानव अधिकारों की बुनियादी गहराई समान बनी रहती है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिये गये हैं जिनमें नागरिक और मानव अधिकार वकील मदद दे सकते हैं और जम्मू-कश्मीर से संबंधित वास्तविक घटनाओं के संदर्भ भी जोड़े गये हैं।

  • PSA (Public Safety Act) के तहत गिरफ्तारी-JK में PSA के अंतर्गत व्यक्ति को बिना ताबड़तोड़ जमानत के हिरासत में लिया जा सकता है; कानूनी सलाह से त्वरित अगली कार्रवाई तय होती है।
  • UAPA के तहत आरोप- आतंक-सम्बन्धी धाराओं के मामलों में अदालत में बचाव की रणनीति और तर्क स्थापित करना जरूरी होता है।
  • RTI से मिल रही जानकारी पर प्रतिनियुक्ति/इनकार- सूचनाओं के अधिकार के दायरे में बाधा आने पर वैध जवाब पाने में वकील की भूमिका अहम होती है।
  • महिला और घरेलू हिंसा के मामले- महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और न्याय पाने के लिए सही प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।
  • कैद-सीमा और पुलिस रिमांड मामलों में सुरक्षा अधिकार- हिरासत के दौरान वकील से मिलना, पलटवार और बयान का सही प्रावधान रखना जरूरी है।
  • स्वतंत्र सभा, संयोजन और अभिव्यक्ति पर सीमाएं- 144 धारा या अन्य प्रतिबंधों के संदर्भ में कानूनी सहायता से वैध विकल्प तय होते हैं।

इन परिस्थितियों में आप एक अनुभवी अधिवक्ता, कानूनी सलाहकार या वकील की सहायता लेकर अपने अधिकारों की सुरक्षा कर सकते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • संविधान के भाग तीन (Fundamental Rights) - जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में समान अधिकारों का आधार।
  • जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA), 1978 - हिरासत के विशेष प्रावधान; स्थानीय सुरक्षा-नीति के अनुरूप लागू होता है।
  • जम्मू-कश्मीर Right to Information Act, 2009 - नागरिकों को सार्वजनिक सूचनाओं के अधिकार के लिए प्रावधान देता है।
  • Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA), 1967 - आतंक-सम्बन्धी गतिविधियों पर रोक लगाती है; JK सहित भारत भर में लागू।

नोट: JK में 2019 के बाद प्रशासनिक स्थिति बदली है, फिर भी इन कानूनों के मूल अधिकार संरक्षित रहते हैं। official स्रोतों के लिए देखें Constitución: https://legislative.gov.in/constitution-of-india और RTI ऐक्ट: https://rti.gov.in

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागरिक और मानव अधिकार क्या हैं?

नागरिक और मानव अधिकार वे अधिकार हैं जो हर व्यक्ति को जन्म से मिलते हैं। ये स्वतंत्रता, सुरक्षा और गरिमा से जुड़े हैं।

जम्मू-कश्मीर में अधिकार किस प्रकार सुरक्षित रहते हैं?

मूल अधिकार भारतीय संविधान के भाग तीन से आते हैं; PSA और UAPA जैसे कानूनों के सीमाओं के भीतर भी उचित प्रक्रिया और कानूनी सहायता मिलनी चाहिए।

अगर PSA के तहत गिरफ्तार किया जाए तो मुझे क्या अधिकार हैं?

हिरासत के बाद भी आपके पास वकीل से मिलने, कानूनी प्रक्रिया की जानकारी मांगने और तात्कालिक उपचार/रिकॉर्ड्स का अधिकार है।

RTI के माध्यम से जानकारी कैसे माँगी जाती है?

RTI से आप सार्वजनिक अधिकारियों से सूचना मांग सकते हैं; जवाब समय-सीमा के भीतर देना अनिवार्य है।

JK में अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता पर सीमाओं के बारे में सच क्या है?

कानून-निर्भर सीमाएं मौजूद हैं; शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति के लिए उचित अनुमति और सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

कानून-ए-तन्वी (PSA) पर क्या चल रहा है?

PSA एक विशिष्ट हिरासत अधिकार है; प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्य होता है।

मैं कैसे एक मानव अधिकार वकील ढूंढ सकता हूँ?

स्थानीय बार एसोसिएशन, राज्य कानूनी सेवायें, और भरोसेमंद मानव अधिकार संस्थाओं से संपर्क करें।

किस प्रकार की कानूनी सहायता मुफ्त में मिल सकती है?

कानूनन निःशुल्क/कम शुल्क कानूनी सहायता राज्य-स्तर पर उपलब्ध हो सकती है, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के लिए।

कौन से आरोप के खिलाफ किन अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है?

उदा: गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के कारण, पूछताछ, रिमांड, और जमानत से जुड़ी प्रक्रियाएं।

मैं NHRC या SHRC में शिकायत कैसे दर्ज कर सकता/सकती हूँ?

NHRC और SHRC में ऑनलाइन या दफ्तर के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है; विवरण आधिकारिक साइट पर उपलब्ध है।

यदि मुझे हिरासत में रखा गया हो, मुझे किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी?

पहचान पत्र, केस/ FIR की कॉपी, वकील से मिलने की तारीखें, और हिरासत-पूर्व/हिरासत-सम्बन्धी नोटिस प्राप्त करना चाहिए।

JK में विवाह, संपत्ति या शिक्षा के अधिकार कैसे सुरक्षित रहते हैं?

ये अधिकार भारतीय संविधान और JK RTI से सम्बन्धित प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं; कानूनी सलाह से सीमाओं एवं अपील प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जा सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Human Rights Commission (NHRC) - भारत के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की आधिकारिक साइट: nhrc.nic.in
  • People's Union for Civil Liberties (PUCL) - नागरिक अधिकार कार्यकर्ता संगठन: pucl.org
  • Amnesty International India - मानवीय अधिकार से जुड़ी जागरूकता और कार्रवाई: amnesty.org.in

6. अगले कदम

  1. घटना/घटित अधिकार-उल्लंघन का संक्षिप्त रिकॉर्ड बनाएं और Relevant दस्तावेज इकट्ठा करें।
  2. नजदीकी जिला बार एसोसिएशन या हाई-कोर्ट के अधिवक्ता संपर्क से मिलें।
  3. अगर संभव हो तो राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण से मुफ्त या कम शुल्क कानूनी सहायता के लिए आवेदन करें।
  4. कानूनी सलाह के लिए एक अनुभवी नागरिक अधिकार वकील चुनें और प्रारम्भिक परामर्श लें।
  5. NHRC/SHRC या अन्य मानवीय अधिकार संगठनों को सूचित करें और आवश्यक सहायता माँगें।
  6. जमानत, रिमांड और पूछताछ की प्रक्रिया के हर चरण में वकील के साथ बनें रहें।
  7. समय-सीमा और अधिकारों के संरक्षण के लिए हर कदम का रिकॉर्ड रखें और सुरक्षित रखें।

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