कोलकाता में सर्वश्रेष्ठ व्यावसायिक अचल संपत्ति वकील

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रियल एस्टेट वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Advocate Mita Banerjee
कोलकाता, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
यात्राअधिवक्ता मीता बनर्जी इस क्षेत्र में भावी इच्छुकों के लिए एक आदर्श हैं। वह कोलकाता में सबसे प्रिय और...
KHA ADVOCATES
कोलकाता, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
KhA एडवोकेट्सKhA एडवोकेट्स पश्चिम बंगाल में एक तेज़ी से बढ़ती लॉ फर्म के रूप में मान्यता प्राप्त है जो कई कॉरपोरेट्स,...
Sarkar Legal Services & Company. Advocates
कोलकाता, भारत

2011 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
सरकार लीगल सर्विसेज कोलकाता में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है जो भारतीय नागरिकों को कई कानूनी सेवाएं प्रदान करती है।...
AUGUSTUS LAW
कोलकाता, भारत

2011 में स्थापित
English
ऑगस्टस लॉ, जिसकी स्थापना 2011 में हुई थी, मुंबई और कोलकाता में कार्यालयों वाला एक गतिशील विधिक फर्म है, जो भारत के...
Advocate Ashis Kumar Chowdhury
कोलकाता, भारत

1999 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
वकील आशिष कुमार चौधरीवकील आशिष कुमार चौधरी सन् 1999 से कलकत्ता उच्च न्यायालय में अभ्यासरत वकील हैं एवं संचार और...
Law House
कोलकाता, भारत

1984 में स्थापित
English
लॉ हाउस, जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी, कोलकाता, भारत में स्थित एक प्रमाणित और बांडेड लॉ फर्म है जो कानूनी सेवाओं की...
Pratik Gayen Advocate
कोलकाता, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
के बारे मेंप्रतिक गन अधिवक्ता कोलकाता में नागरिक मामलों के लिए एक वकील/अधिवक्ता हैं जिनमें संपत्ति मामले,...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
कोलकाता, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
Hindi
English
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
Advocate Debasis Mitra
कोलकाता, भारत

2010 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
कोलकाता उच्च न्यायालयदेबासिस मित्रा कोलकाता के प्रख्यात वकीलों में से एक हैं, जिनके पास न्यायिक क्षेत्र में...
Kshetry and Associates
कोलकाता, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
हम हमेशा आपकी न्याय की जीत के लिए लड़ते हैं“केशेत्री एंड एसोसिएट्स” की स्थापना 5 जनवरी 2009 को श्री राजेश केशेत्री और...
जैसा कि देखा गया

1. कोलकाता, भारत में व्यावसायिक अचल संपत्ति कानून का संक्षिप्त अवलोकन

कोलकाता में व्यावसायिक अचल संपत्ति के नियम केंद्रीय कानूनों के साथ राज्य के प्रवर्तन और नियमों से संचालित होते हैं. इन कानूनों का उद्देश्य उचित खरीद-फरोख्त, स्पष्ट टाइटल और परियोजनाओं की समय पर पूर्णता सुनिश्चित करना है. क्लाइंट्स के लिए उचित due diligence तथा अनुबंधिक स्पष्टता अति आवश्यक है.

“The Real Estate Regulation and Development Act, 2016 aims to protect home buyers and promote the real estate sector by ensuring transparency, accountability and efficiency in real estate markets.”

RERA के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में WB RERA प्राधिकरण परियोजनाओं, एजेंटों और promoters की पंजीकरण सुरक्षा करता है. इससे Kolkata जैसे महानगरों की बाजार में पारदर्शिता बढ़ती है. उप-धारणा के तौर पर, title search, encumbrance certificate और उचित stamp duty आवश्यक और अनिवार्य हैं.

“The West Bengal Real Estate Regulatory Authority is responsible for registering projects and brokers and ensuring compliance within the state.”

उद्धरण स्रोत: Real Estate Regulation and Development Act, 2016 (RERA) - rera.gov.in; WB RERA - wb-rera.gov.in. Also, Registration Act एवं Stamp Duty से जुड़ी सामान्य आवश्यकताओं के लिएindiacode.nic.in/legislative.gov.in देखें.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

व्यावसायिक अचल संपत्ति से जुड़ी अधिकांश मुद्दों में एक अनुभवी advokat की सलाह आवश्यक होती है. नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जो कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हैं.

  • टाइटल जाँच और एन्कंबरेंस चेक - Salt Lake/Washeer बात के क्षेत्र में कार्यालय खरीद के दौरान टाइटल स्पष्ट न हो तो विक्रेता के दावों और रिकॉर्ड्स की जाँच आवश्यक है.
  • आवास-उद्योग के विज्ञापन और RERA अनुपालन - Kolkata के नए कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स में promoter ने सही पंजीकरण किया है या नहीं, यह सत्यापित करना जरूरी है.
  • LEASE होल्डिंग और किराये के कानूनी अधिकार - कार्यालय-भाडे पर लेने या देनदार के साथ lease deed बनाने के समय किरायेदार-प्रदाता के अधिकार स्पष्ट हों.
  • STAMP DUTY और REGISTRATION सम्बंधी क्लियरंस - बंगाल में बिक्री, लीज और स्पर्श-सम्बन्धी देय रेट्स बदलते रहते हैं; दस्तावेज वैध बनाने के लिए सही शुल्क अनिवार्य है.
  • कम्प्लायंस-चैक और ड्यू डिलिजेंस - परियोजना के प्रमोटर, power of attorney, और पंजीकरण से जुड़े सभी नियमों की जाँच आवश्यक है ताकि कानूनी जोखिम कम हों.
  • जॉइंट वेंचर या पार्टनरशिप डील - कोलकाता में पार्टनरशिप/जॉइंट वेंचर में संपत्ति के अधिकार और दायित्व स्पष्ट लिखना जरूरी है.

उचित उदाहरण के तौर पर, न्यू टाउन इलाके में एक कार्यालय स्पेस खरीदते समय promoter के पंजीकरण और project completion status का सत्यापन जरूरी होता है. एक अनुभवी advokat अग्रिम due diligence, दस्तावेजों का सत्यापन और अनुबंध draft करने में मदद करेगा.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

कोलकाता, पश्चिम बंगाल में व्यावसायिक अचल संपत्ति को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों में निम्न शामिल हैं. इनका प्रभाव विशेषकर title, transfer, registration और registry-आधारित लेन-देन पर होता है.

  • Transfer of Property Act, 1882 - संपत्ति के स्थानांतरण, बिक्री, बन्धक और lease आदि के नियम स्थापित करता है. यह सभी विरासत-स्वामित्व से जुड़ी कार्रवाइयों के लिए आधार बनता है.
  • Real Estate Regulation and Development Act, 2016 (RERA) - परियोजनाओं के पंजीकरण, प्रचार-प्रसार, बायर्स संरक्षण और प्रमोटर जवाबदेही के लिए राष्ट्रीय ढांचा देता है. WB RERA राज्य-स्तर पर इसे लागू करता है.
  • West Bengal Premises Tenancy Act, 1956 - कोलकाता में किराये के रिश्‍ते और tenancy अधिकारों को नियंत्रित करता है. व्यावसायिक premises पर भी यह कानून प्रभावी होता है.

गौर करें कि बंगाल में स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण से जुड़े नियम केंद्रीय कानूनों के साथ राज्य नियमों के अनुसार रहते हैं. आधिकारिक नोटिस और दरें समय-समय पर सरकार द्वारा संशोधित होती हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कोलकाता में commercial property खरीदते समय title search अनिवार्य है?

हाँ, title search तुरंत और पूर्ण due diligence का हिस्सा है. पूर्व स्वामित्व, बंधक, और घुमा-फिरा दावों की जाँच करें ताकि बाद में कानूनी विवाद से बचा जा सके.

RERA का KolkataProjects पर क्या प्रभाव है?

RERA promoter को project पंजीकरण और बायर्स के हितों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बनाता है. Kolkata में अनुभवी वकील परियोजना की पंजीकरण स्थिति और promoter compliance जाँच में मदद करेंगे.

क्या lease agreement को पंजीकृत करवाना अनिवार्य है?

किराये पर चलने वाले अनुबंधों की कुछ स्थितियों में Registration Act के अंतर्गत पंजीकरण आवश्यक हो सकता है. छोटे समय के lease पर सामान्यत: पंजीकरण आवश्यक नहीं होता, पर लंबे-term leases के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो सकता है.

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क कैसे निर्धारित होते हैं?

स्टाम्प ड्यूटी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर लगती है और प्रॉपर्टी वैल्यू के अनुसार बदलती है. पंजीकरण शुल्क आम तौर पर लगता है और इसे भी राज्य नियम निर्धारित करते हैं. सटीक दरें के लिए WB स्टेट गवर्नमेंट के नोटिस देखें.

एक commercial property में title defect दिखे तो क्या करें?

सबसे पहले title report के साथ defect को सूचीबद्ध करें और seller के साथ हल करने के लिए negotiate करें. अगर आवश्यक हो तो promotion-गणराज्य के WB-RERA के अंतर्गत शिकायत दर्ज कराएं.

क्या एक single window clearance मिलता है Kolkata में?

कई projects के लिए शहर-स्तर पर योजना-आवेदन और clearance हेतु अलग अलग प्राधिकरण होते हैं. कानूनी सलाहकार आपके लिए आवश्यक approvals की सूची बना कर दे सकता है.

कौन सा दस्तावेज एक commercial property के sale deed में चाहिए?

sale deed, title document, encumbrance certificate, previous ownership papers, NOC और हस्ताक्षर-अधिकरण (Power of Attorney) आदि आवश्यक होते हैं. दस्तावेजों की सही सूची lawyer के माध्यम से सत्यापित करें.

अगर प्रमोटर project पूर्ण नहीं कर पाता तो क्या होगा?

RERA के अंतर्गत promoter के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है. खरीदार को सुरक्षा मिलती है और project deficiency पर पुनर्निर्माण या मुआवजे की मांग करने का उचित उपाय मिल सकता है.

क्या commercial lease में rent escalation क्लॉज जरूरी है?

हाँ, lease agreement में rent escalation, tenure, renewal and termination clauses स्पष्ट हों. Kolkata के बाजार में यह प्रचलित है ताकि भविष्य के rent-जोखिम कम हों.

व्यावसायिक अचल संपत्ति पर कौन से टैक्स जुड़ते हैं?

स्टाम्प ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क, और property tax शामिल होते हैं. आयकर और अन्य स्थानीय शुल्क भी लग सकते हैं. विशेषज्ञ tax counsel से सलाह लें.

क्या lender की मंजूरी (lender's consent) जरूरी है?

यदि property पर mortgage या lien है, तो lender consent आवश्यक है ताकि नया खरीदार mortgage के दायित्वों को स्वीकार करे.

क्या Kolkata में बहु-स्टोर/कॉर्पोरेट ऑफिस बनवाने पर नियम बदलते हैं?

हां, zonal approvals, building by-laws और fire-safety norms लागू होते हैं. उचित NOC और occupancy certificate जैसे दस्तावेज जरूरी रहते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • WB Real Estate Regulatory Authority (WB RERA) - पश्चिम बंगाल में रेरा पंजीकरण और अनुपालन की जानकारी. wb-rera.gov.in
  • Kolkata Municipal Corporation (KMC) - संपत्ति कर, NOC और शहर-स्तरीय अनुमतियाँ. kmc.gov.in
  • CREDAI West Bengal - क्षेत्रीय डेवेलपर्स संघ की गतिविधियाँ और उद्योग मानक. credai-wb.org

6. अगले कदम

  1. अपने मामले की स्पष्ट ज़रूरत निर्धारित करें और एक preliminary due diligence चेकलिस्ट बनाएं.
  2. स्थानीय वकील/कानूनी सलाहकार से शिकायत-उच्चारण और कोर्ट-प्रवृत्ति का आकलन करवाएं.
  3. पूर्व-स्वामित्व, title, encumbrance certificate और promoter पंजीकरण की जाँच करवाएं.
  4. RERA पंजीकरण स्थिति और project status की पुष्टि करें; WB RERA से रिकॉर्ड देखें.
  5. LEASE या sale agreement draft के लिए एक अनुभवी advokat से अनुबंध-पूर्व draft करवाएं.
  6. स्टाम्प ड्यूटी, पंजीकरण और अन्य टैक्स लाइनों के लिए current दरें प्राप्त करें.
  7. कानूनी दस्तावेजों के ऑनलाइन/ऑफलाइन रिकॉर्ड्स सुरक्षित रखें और एक सुरक्षित फाइलिंग सिस्टम बनाएं.

उद्धरण संलग्न हैं ताकि आप स्थानीय नियमों के अनुसार सत्यापित कर सकें:

“The Real Estate Regulation and Development Act, 2016 aims to protect home buyers and promote the real estate sector by ensuring transparency, accountability and efficiency in real estate markets.” - rera.gov.in
“The West Bengal Real Estate Regulatory Authority is responsible for registering projects and brokers and ensuring compliance within the state.” - wb-rera.gov.in
“Section 17 of the Registration Act, 1908 requires the registration of certain documents including executed sale deeds and certain lease agreements.” - indiacode.nic.in

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