समस्तीपुर में सर्वश्रेष्ठ कॉपीराइट वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
समस्तीपुर, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. समस्तीपुर, भारत में कॉपीराइट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

समस्तीपुर, बिहार में कॉपीराइट कानून भारत के राष्ट्रीय कानून के अनुरूप लागू होता है. यह रचनाओं के निर्माताओं को लेखन, चित्रण, संगीत, फिल्म आदि पर सुरक्षा देता है. कानून के अनुसार रचना बनाने वाले को अपने कार्य पर स्वतंत्र अधिकार मिलते हैं.

कानून ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह लागू होता है, ताकि किताबों, वेबसाइटों, वीडियो, संगीत और कला की चोरी रोकी जा सके. समस्तीपुर के निवासी इन्हें पहचान कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. अधिकार खत्म नहीं होते जब तक उचित संरक्षण बना रहता है.

Copyright in India subsists for the life of the author plus sixty years after his death, in the case of literary, dramatic, musical and artistic works (Copyright Act, 1957 as amended).
Digital protection measures and offences related to circumvention of technological protection measures are addressed under the Copyright Act, 1957 as amended by the Copyright (Amendment) Act, 2012.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  1. आप के लेखक, गायक या कलाकार की कॉपीराइटयुक्त रचना बिना अनुमति प्रकाशित हो जाए. ऐसे मामले में स्थानीय प्रतिवादी और प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय मुश्किल हो सकता है. एक वकील कानूनी कदम और नोटिस सही तरह से जारी कर सकता है.

  2. आपकी रचना का बिल्कुल मिलता-जुलता नक़ल सामने आए. न्यायसंगत दायरे में यह दिखाने के लिए प्रमाण और तर्क चाहिए होते हैं. अधिवक्ता आपकी सहायता से केस के तथ्य स्पष्ट करेगा.

  3. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कथित उल्लंघन हो रहा हो, जैसे सोशल मीडिया या वेबसाइट पर अगर बिना अनुमति रचना शेयर हो रहा है. वकील डिजिटल-आईटी नियमों के अनुसार उचित कदम उठाने में मदद करेगा.

  4. आप चाहें कि आपकी रचना का पंजीकरण कराया जाए या किसी कॉपीराइट उल्लंघन परinjunction मिले. दस्तावेज़ीकरण और वरिष्ठ सलाह के साथ वकील बेहतर मार्गदर्शन दे सकता है.

  5. समस्तीपुर में लोकल प्रकाशकों, कलाकारों या स्टूडियो के साथ dispute सुलझाने के लिए एक सक्षम enforceable अनुबंध बनवाना हो. वकील विवाद-अनुदेश और अनुबंध ड्राफ्ट करने में मदद करेगा.

  6. यदि आप कॉपीराइट चोरी के मुकदमे में प्रतिवादी बन जाते हैं, तो अदालत-स्तरीय दलीलों के साथ उचित बचाव आवश्यक है. अनुभवी अधिवक्ता आपकी स्थिति का सही आकलन करेगा.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और इसके संशोधन-इन्हीं से समस्तीपुर सहित पूरे भारत में रचनाओं के अधिकार तय होते हैं. यह साहित्यिक, Dramatic, musical, artistic works आदि के लिए संरक्षण देता है. साथ ही डिजिटल-टेक्नोलॉजी से जुड़ी सुरक्षा और दंड के प्रावधान भी शामिल हैं.

कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012 ने डिजिटल-आईटी पर लगने वाले दायरे और तकनीकी संरक्षण उपायों के उल्लंघन पर सख्त प्रावधान बनाए. इससे ऑनलाइन उल्लंघनों के विरुद्ध कार्रवाई आसान हुई है. यह भी स्पष्ट करता है कि DRM को तोड़ना अपराध है.

सूचनात्मक प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ऑनलाइन सामग्री के उल्लंघन पर प्रशासनिक और दंडात्मक उपाय देता है. समस्तीपुर में भी ऑनलाइन कॉपीराइट उल्लंघन पर कानून के अनुसार कार्रवाई संभव है. इसके अंतर्गत हैकिंग, डाउनलोड-शेयरिंग जैसे अपराध शामिल हो सकते हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉपीराइट क्या है?

किसी रचना के निर्माता के अधिकार को कॉपीराइट कहते हैं. यह साहित्यिक, Dramatic, musical और artistic works, फिल्मों और रिकॉर्डिंग्स पर लागू होता है. संरक्षण रचना के बनाने के साथ शुरू होता है.

क्या मुझे अपने काम का पंजीकरण करवाने की जरूरत है?

आमतौर पर पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर यह प्रमाण देता है कि आप मालिक हैं. पंजीकरण से नक़ल के विरुद्ध दावा मजबूत होते हैं और अदालत में याचिका आसान बनती है.

पंजीकरण से क्या फायदे होते हैं?

पंजीकृत कॉपीराइट से आप नियंत्रण, प्रतिबंध और क्षतिपूर्ति के दावे मजबूत कर सकते हैं. यह चोरी होने पर दावा-प्रमाण बनाने में मदद करता है. बिहार के समस्तीपुर में स्थानीय अदालतों में अधिक स्पष्टता मिलती है.

समस्तीपुर क्षेत्र में उल्लंघन की शिकायत कैसे दर्ज कराएं?

सर्वप्रथम स्थानीय पुलिस-थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती है. साथ ही कॉपीराइट कार्यालय के नोटिस और उचित कानूनी कदम उठाये जा सकते हैं. एक अनुभवी वकील आपकी टीम को मार्गदर्शित करेगा.

मेरी रचना सुरक्षित है, कैसे जाँचें?

अपनी रचना के भीतर-भीतर पहचान-चिह्न डालें, जैसे लेखक-नाम, तारीख, मूल प्रतिलिपि. ऑनलाइन में कॉपी-चेक के लिए विशेष प्लेटफॉर्म्स पर खोज कर लें. यदि ऐसी नकल मिलती है तो कानूनी सलाह लें.

क्या मैं अपने काम का डिज़ाइन या ग्राफ़िक भी पंजीकृत करवा सकता हूँ?

हाँ, ग्राफ़िक डिज़ाइन, फोटोग्राफी और अन्य कला-कार्य के लिए पंजीकरण संभव है. यह प्रमाण देता है कि आप मालिक हैं और दावा आसानी से किया जा सकता है.

क्या FAIR USE और FAIR DEALING की चीजें उत्तरदायी हैं?

भारतीय कानून में FAIR DEALING और FAIR USE के सिद्धांत हैं. उपयोग की मात्रा, उद्देश्य और नतीजा देखते हुए अनुमति मिल सकती है. कानूनी सलाह से स्पष्ट मार्गदर्शन लें.

ऑनलाइन उल्लंघन पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को शिकायत भेजकर अविलंब सामग्री हटवाने का अनुरोध करें. यदि आवश्यकता हो तो अवमान-याचिका के जरिए अदालत से अवरोधन के आदेश लिए जा सकते हैं.

कॉपीराइट की अवधि कब समाप्त होती है?

आमतौर पर लेखक की मृत्यु के बाद जीवन-काल के साथ 60 वर्ष की अवधि समाप्ती तक लागू रहती है. यह मानक साहित्यिक, कलात्मक रचनाओं पर लागू है.

अगर किसी अन्य देश में मेरी रचना का उल्लंघन हो रहा हो तो?

भारत के अधिकारों के अनुरूप आप भारतीय अदालत में कार्रवाई कर सकते हैं. विदेशी प्लेटफॉर्म के खिलाफ देश के कानून के अनुसार कदम उठाने की भी सुविधा है.

कौन-सी रोक-टोक अदालत से मिल सकती है?

कानूनी कार्रवाई से पहले निषेधाज्ञा (injunction) के लिए अदालत में आवेदन किया जा सकता है. यह तब प्रभावी होता है जब चोरी बड़े पैमाने पर हो रही हो.

क्या किसी मीटरिंग-शर्त के बिना उधार दे सकते हैं?

किसी अन्य व्यक्ति के काम का उपयोग करने से पहले उसकी अनुमति लेना जरूरी है. बिना अनुमति का उपयोग दंडनीय हो सकता है.

मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी रचना कॉपीराइट के अधीन है?

अगर आपकी रचना原创 है, जिसमें नया आलोचनात्मक या कलात्मक तत्व है, तो कॉपीराइट स्वतः लगता है. फिर भी पंजीकरण से अधिकार मजबूत होते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Copyright Office, Government of India - आधिकारिक पोर्टल और अधिकारों से जुड़ी सूचना: https://copyright.gov.in/
  • Indian Performing Right Society (IPRS) - प्रदर्शन-स्वामित्व के अधिकारों के लिए एक प्रमुख संस्था: https://www.iprs.org.in/
  • Phonographic Performance Limited (PPL) India - ध्वनि रिकॉर्डिंग के लिए लाइसेंसिंग और राजस्व-संबंधी सहायता: https://www.pplindia.com/

6. अगले कदम

  1. अपनी कॉपीराइट समस्या स्पष्ट करें-क्या चोरी हो रही है, किस प्रकार का रचना है, और कब से मामला है.
  2. अपने दस्तावेज़ एकत्र करें-मूल कॉपी, प्रकाशन प्रमाण, स्क्रीनशॉट, लिंक आदि.
  3. स्थानिक IP- lawyers या Bihar-Patna क्षेत्र के एड्वोकेट खोजें जो कॉपीराइट में अनुभवी हों.
  4. पहले परामर्श में अपनी हर जानकारी दें और प्रश्नों की सूची तैयार रखें.
  5. कानूनी विकल्पों पर निर्णय लें-नोटिस, विराम-आदेश, या मुकदमा जैसी रणनीति चुनें.
  6. फीस-निर्धारण, समयरेखा और अपेक्षित परिणाम के बारे में स्पष्ट समझ बनाएं.
  7. समस्तीपुर के स्थानीय अदालतों या उच्च न्यायालय से मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ें और जरूरत पड़ने पर स्थानीय मीडिया के साथ संचार करें.

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अस्वीकरण:

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