श्रीनगर में सर्वश्रेष्ठ विकलांगता वकील

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Legal Surface Law Firm

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श्रीनगर, भारत

2003 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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नागरिक कानून अभ्यासलीगल सरफेस - लॉ फर्मलीगल सरफेस - लॉ फर्म श्रीनगर कश्मीर में नागरिक कानून में विशेषज्ञता रखने...
IMR Law Offices
श्रीनगर, भारत

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IMR लॉ ऑफिसेज, जो श्रीनगर में मुख्यालय और दिल्ली व जम्मू में अतिरिक्त कार्यालयों के साथ कार्यरत हैं, भारत भर में...
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1. श्रीनगर, भारत में विकलांगता कानून के बारे में

श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर यूनिटेड टेरीटरी (UT) क्षेत्र में स्थित है। केंद्रीय कानून RPWD Act 2016 सभी राज्यों और UTs पर लागू होता है और विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

यह कानून शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य देखभाल, यात्रा, और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच जैसे बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित करता है। जम्मू और कश्मीर UT के लिए स्थानीय विकलांग कल्याण अधिकारी और जिला स्तर पर नियम लागू होते हैं।

“An Act to provide for the protection of rights and full participation of persons with disabilities in society.”

स्रोत: The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 - आधिकारिक पाठ https://legislative.gov.in/sites/default/files/A2016-65.pdf

“Education shall be provided to persons with disabilities in regular schools including inclusive education.”

स्रोत: RPWD Act 2016 - आधिकारिक पाठ https://legislative.gov.in/sites/default/files/A2016-65.pdf

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे श्रीनगर से जुड़े वास्तविक परिस्थितियों के उदाहरण हैं जिनमें कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है।

  1. श्रीनगर के सरकारी विद्यालय में विकलांग छात्र का सामान्य स्कूल में प्रवेश अस्वीकार किया गया हो। अभिभावक को उचित शिक्षा के अधिकार के लिए वकील की मदद चाहिए।
  2. सरकारी नौकरी के लिए आवेदन में विकलांगता के आधार पर भेदभाव हुआ हो। आरक्षण और भर्ती नियमों के अनुसार दावा दर्ज करना होगा।
  3. लोक परिवहन या सरकारी भवनों तक पहुँच में असुविधा हों और प्रशासनिक अनुरोध के बावजूद सुधार न हो रहा हो। बुनियादी उपलब्धता के लिए कानूनी मार्ग अपनाने होंगे।
  4. विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था या पुनर्मूल्यांकन चाहिए था, पर प्रमाणपत्र नहीं मिला या गलत वर्गीकरण हुआ हो। उसका पुनः परीक्षण कराना जरूरी है।
  5. कमान्ड व्यवस्था में विकलांग व्यक्ति के लिए आवश्यक सहायता, उपकरण या वित्तीय लाभ न मिल रहा हो, जैसे शिक्षा-योजना, उपकरण अनुदान, सामाजिक सुरक्षा पेंशन आदि के लिए कानूनी समर्थन चाहिए।

इन स्थितियों में एक अधिवक्ता, कानून सलाहकार या कानूनी विशेषज्ञ आपके दायरे को स्पष्ट कर सकता है, सही कदम बताता है और दस्तावेज तैयार करने में मदद करता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 - यह केंद्रीय कानून है जो विकलांग व्यक्तियों के लिए समान अवसर, अधिकार और पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करता है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 - समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार के साथ विकलांग व्यक्तियों के प्रति सुरक्षा का प्रावधान देता है।
  • RPWD नियम, 2017 - RPWD Act के अंतर्गत न्यायालयों और प्रशासन द्वारा लागू करने हेतु नियम और प्रक्रियाएं स्पष्ट करता है।

अतिरिक्त संदर्भ के लिए Sugamya Bharat Abhiyan का उद्देश्य भी सार्वजनिक सुविधाओं और परिवहन को विकलांगों के अनुकूल बनाना है।

“Accessible India Campaign aims to make public buildings accessible for persons with disabilities.”

स्रोत: Department of Empowerment of Persons with Disabilities - Sugamya Bharat Abhiyan https://disabilityaffairs.gov.in/content/sugamya-bharat-abhiyan

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकलांगता प्रमाणपत्र कितने वर्षों के लिए मान्य होता है?

मानक प्रमाणपत्र सामान्यतः घटक विकलांगता के अनुसार 5 वर्ष तक मान्य होता है। पेनल्टी या स्थिति में बदलाव होने पर नवीनीकरण आवश्यक है।

क्या विकलांग व्यक्तियों के लिए सरकारी नौकरी में आरक्षण लागू है?

हाँ, RPWD Act 2016 के तहत विकलांग व्यक्तियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण और प्राथमिक अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

मुझे विकलांगता प्रमाणपत्र कैसे मिलेगा और किस अधिकारी से संपर्क करें?

सबसे पहले स्थानीय जिलास्तरीय विकलांग कल्याण अधिकारी या जिला अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करें। जरुरी दस्तावेज जैसे पहचान पत्र, चिकित्सा प्रमाण पत्र और विकलांगता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें।

श्रीनगर में सार्वजनिक भवन पहुँच योग्य कैसे बनते हैं?

RPWD नियम 2017 के अनुसार सार्वजनिक भवन और परिवहन में बाध्य-रहित पहुँच अनिवार्य है। यदि भवन असुविधाजनक है तो शिकायत दर्ज करके सुधार कराना संभव है।

मैं अपने परिवार के सदस्य के लिए वित्तीय सहायता कैसे प्राप्त कर सकता हूँ?

सरकारी योजना, पेंशन और उपकरण अनुदान के लिए जिला समाज कल्याण विभाग से सहायता माँगी जा सकती है। व्यक्तिगत दायरे के अनुसार पात्रता तय होती है।

कानूनी सहायता कब और कहाँ प्राप्त की जा सकती है?

स्थानीय बार काउंसिल द्वारा विकलांग मामलों के लिए सूचीबद्ध वकील उपलब्ध होते हैं। आप उनसे प्रारम्भिक परामर्श ले सकते हैं।

क्या शिक्षा के क्षेत्र में सहायता मिलती है?

हाँ, विकलांग विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षा विकल्प और regular स्कूल में समायोजन के प्रावधान RPWD Act में दिए गए हैं।

अगर मुझे स्थान-विशिष्ट एक्सेसिसेस में दिक्कत हो तो क्या करूँ?

स्थानीय जिला विकलांग कल्याण अधिकारी को लिखित शिकायत दें और यदि आवश्यक हो तो उच्च न्यायालय के समक्ष जनरल याचिका लगाएँ।

कौन से दस्तावेज रखना चाहिए जब आप वकील से मिलें?

पहचान प्रमाण, विकलांगता प्रमाण पत्र, मेडिकल रिकॉर्ड, शिक्षण प्रमाण पत्र और नौकरी के प्रमाण पत्र रखें ताकि वकील सही दस्तावेज़ी सहायता दे सकें।

क्या विकलांगता के लिए कुल 21 श्रेणी मान्य हैं?

हाँ, RPWD Act 2016 के अनुसार 21 विकलांगता की कैटेगरी मान्य हैं और हर एक के लिए अलग-ALP प्रावधान हैं।

क्या कानून में परिवर्तन होते रहते हैं?

हाँ, RPWD Act 2016 के अनुरूप नियम और सरकारी गाइडलाइंस समय-समय पर अपडेट होते रहते हैं। नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों की जाँच करें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • - मंत्रालया भारत सरकार; विकलांगों के अधिकारों के लिए केन्द्रित स्रोत; आधिकारिक साइट https://disabilityaffairs.gov.in
  • - NIEPID; प्रशिक्षण और सेवाएं प्रदान करता है; साइट https://niepid.nic.in
  • - NCPEDP; रोजगार और सशक्तिकरण के लिए नीति-निर्माण समर्थक संगठन; साइट https://www.ncpedp.org

6. अगला कदम

  1. अपनी स्थिति और उद्देश्य स्पष्ट करें कि किस क्षेत्र में कानूनी सहायता चाहिए, जैसे शिक्षा, रोजगार, या पहुँच।
  2. विकलांगता प्रमाणपत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज एकत्र कर लें ताकि वकील से मिलते समय सभी जानकारी हो।
  3. श्रीनगर के अनुभवी विकलांग कानून के वकीलों की सूची प्राप्त करें। बार काउंसिल ऑफ जम्मू और कश्मीर या स्थानीय अधिवक्ता संस्थाओं से संपर्क करें।
  4. स्थानीय विकलांग कल्याण कार्यालय, स्कूल प्रशासन और अस्पताल से रिकॉर्ड बनवाएं ताकि मामला मजबूत हो।
  5. कानूनी सलाह के लिए 2-3 वरिष्ठ अधिवक्ताओं से प्रारम्भिक परामर्श लें और फीस, शर्तें स्पष्ट करें।
  6. यदि संभव हो तो NGOs या सार्वजनिक संस्थानों से प्रमाण-पत्र और संदर्भ प्राप्त करें।
  7. समझौता संभव न हो तो अदालत में समुचित याचिका दायर करने हेतु कार्रवाई शुरू करें और अधिकारी-प्रक्रिया का पालन करें।

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