दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ तलाक और अलगाव वकील
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भारत तलाक और अलगाव वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें तलाक और अलगाव के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- शादीशुदा जीवन का मुद्दा।
- डिवोर्स कैसे प्राप्त करें। इसके मानदंड क्या हैं?
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वकील का उत्तर MAH&CO. द्वारा
आपके प्रश्न के लिए धन्यवाद।तलाक, खुला, और वैवाहिक विवाद समाधान में दशकों के अभ्यास के साथ एक अनुभवी पारिवारिक वकील के रूप में, मैं आपको पाकिस्तान में तलाक प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। तलाक प्रक्रिया...
पूरा उत्तर पढ़ें - क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
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1. Delhi, India में तलाक और अलगाव कानून का संक्षिप्त अवलोकन
दिल्ली, भारत में तलाक और अलगाव के मामलों का प्रशासनिक नियंत्रण जिला न्यायालयों की फैमिली कोर्ट के अंतर्गत होता है। कानून धार्मिक आधार पर लागू कानूनों के अनुसार बदलता है। दिल्ली-निवासी सामान्यतः हिन्दू विवाह, मुस्लिम विवाह, ईसाई विवाह आदि के अनुसार न्याय पाते हैं।
दिल्ली में दो प्रमुख रास्ते होते हैं: धार्मिक कानून के तहत पद्दतियाँ और विशेष नागरिक विवाह कानूनों के तहत Civil Divorce। साथ ही DV एक्ट 2005 जैसी संरक्षक क़ानून से घरेलू हिंसा के मामलों में सुरक्षा मिलती है।
“An Act to amend and codify the law relating to marriage amongst Hindus.”
उच्च कानूनी ढांचे के साथ दिल्ली में फैमिली कोर्टें माँ- बाप के अधिकार, बच्चों के हित, संपत्ति के बंटवारे आदि पर निर्णय लेती हैं।
ये कानून दिल्ली हाई कोर्ट के दायरे में लागू होते हैं और दिल्ली की नगरपालिका-नगरीय स्थितियों के अनुसार लागू प्रथाओं में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है।
Official sources: Hindu Marriage Act, 1955; Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005. स्रोत पंक्तियाँ देखें: Hindu Marriage Act और Protection of Women from Domestic Violence Act.
“An Act to provide for more effective protection of the rights of women guaranteed under the Constitution and for matters connected therewith.”
सारांश: दिल्ली में तलाक-अपेक्षा करें तो नागरिक कानूनों, विशेष विवाह कानूनों और DV कानून के मिश्रित उपयोग से निर्णय होते हैं।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
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परस्पर समन्वय के बावजूद संपत्ति-निर्देशन में मतभेद Delhi-के दंपति अक्सर दिल्ली-आधार संपत्ति, किराया-सम्पत्ति के बंटवारे पर असहमति दिखाते हैं। वकील mediation-से पहले और कोर्ट-केस-फाइलिंग के समय सलाह दे सकते हैं।
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बच्चों की custody और visitation rights Delhi में बच्चों के हित प्राथमिकता होते हैं। संघर्ष की स्थिति में कानूनयुक्त निर्णय और कोर्ट-आर्डर जरूरी होते हैं।
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domestic violence के मामले DV Act के तहत संरक्षण, रोक-थाम निर्देश और सुरक्षा-ऑर्डर Delhi के भीतर दायर होते हैं। अनुभवी अधिवक्ता उचित राहत दिलाने में मदद करते हैं।
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inter-faith marriage या Special Marriage Act के अंतर्गत विवाह Delhi में inter-religious विवाह अधिकतम flexibility देता है, पर प्रक्रिया और दस्तावेज स्पष्ट रखने चाहिए।
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complex maintenance और alimony 125 CrPC, Section 24-25 HMA आदि के तहत Delhi Court maintenance-निर्णय दे सकती है; सही कानून चुनना आवश्यक है।
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आदि-धर्म के मामलों में वैधानिक पर्याप्तता मुस्लिम पंचनामा, Shariat Act आदि कानून Delhi में लागू होते हैं; सही कानून-फायदा पहचानना जरूरी है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
- Hindu Marriage Act, 1955 - हिन्दू, जैन, सिक्ख आदि के विवाह-विधेयक के लिए मुख्य कानून।
- Special Marriage Act, 1954 - inter-religious या धर्म-रहित नागरिक विवाह के लिए civil-मार्ग; Delhi में भी इन विवाहों के लिए अदालतों की देखरेख होती है।
- Indian Divorce Act, 1869 - ईसाई विवाहों के dissolution के लिए मानक कानून; Delhi-आवासियों पर भी लागू।
- Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 - घरेलू हिंसा से सुरक्षा, शिकायत-डिक्शन, और सुरक्षा-ऑर्डर देता है; Delhi-में महिलाओं के लिए प्रमुख सुरक्षा उपाय।
- Muslim Personal Law (Shariat) Application Act, 1937 - मुस्लिम विवाह-नियमन और तलाक के मामलों के लिए लागू; दिल्ली के मुस्लिम निवासियों पर प्रभावी अधिकार देता है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली में तलाक के लिए कौन सा अदालत क्षेत्र चुनना चाहिए?
आमतौर पर पहले जन्म-घर से निकट फैमिली कोर्ट चुनी जाती है। यदि विवाह Delhi में हुआ है या पति-पत्नी दोनों दिल्ली में रहते हैं, तो Delhi के फैमिली कोर्ट में फाइल करना लाभदायक रहता है।
Mutual consent divorce में कितनी देर लगती है?
Mutual consent divorce में पहले-पहले पेनिशन दाखिल होता है, फिर छह महीनों का cooling-off period होता है। दिल्ली कोर्ट कभी-कभी स्थिति के अनुसार यह समय घटा देती है, पर सामान्यतः 9-12 महीने तक लग सकता है।
बच्चों की Custody किस आधार पर तय होती है?
दिल्ली में बच्चों के सर्वश्रेष्ठ हित को प्राथमिकता दी जाती है। माता-पिता की वित्तीय स्थिति, बच्चों की आयु और शिक्षा-स्थिति आदि विचार होते हैं।
Maintenance कैसे तय होता है?
HMA Section 24-25 या 125 CrPC के अनुसार maintenance का निर्णय होता है। दिल्ली में आय, खर्च और बच्चों के लाभ के आधार पर निर्धारित होता है।
Domestic violence के लिए क्या किया जा सकता है?
DV Act के अंतर्गत Protection Orders, Residence Orders और महिलाओ के लिए शीघ्र-रक्षा मिल सकती है। Delhi DCW या DLSA से guidance ली जा सकती है।
Special Marriage Act के तहत तलाक कैसे होता है?
Special Marriage Act में विवाह-रजिस्ट्रेशन के बाद तलाक के लिए अदालत के समक्ष petition दाखिल की जाती है। Delhi-आवासियों के लिए Civil Divorce की प्रक्रिया समान होती है।
मेरे धर्म के अनुसार कौन सा कानून लागू होगा?
यदि विवाह हिन्दू है तो Hindu Marriage Act लागू होगा; inter-religious विवाह Special Marriage Act से; मुसलिम विवाह Shariat Act के अधीन आ सकता है; ईसाई विवाह Indian Divorce Act से तय होगा।
क्या अदालत के रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होते हैं?
कुछ दिल्ली फैमिली कोर्ट रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक हो सकते हैं, किंतु सभी विवरण निजी होते हैं। बेहतर है कि वकील के साथ hearing dates और status पूछें।
न्यायिक सहायता कैसे मिलेगी?
अगर आप आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो Delhi State Legal Services Authority के माध्यम से फ्री लीगल एड मिल सकता है।
मैं कैसे तय करूँ कि किस कानून से divorce करना बेहतर है?
आपके धर्म, निवास स्थान, बच्चों की स्थिति और संपत्ति-स्थिति पर निर्भर है। पहले एक अनुभवी family-law advc से परामर्श लें।
क्या मैं Delhi से बाहर रहने वाले पार्टनर के खिलाफ भी अदालत में केस कर सकता हूँ?
हाँ, यदि विवाह-सम्बन्ध Delhi या दोनों पक्षों के domicile से जुड़ा है, तब Delhi Court jurisdiction मान्य हो सकता है। वकील से jurisdiction-specific सलाह लें।
Mutual consent के बिना divorce संभव है क्या?
हाँ, Grounds जैसे cruelty, desertion, adultery आदि के आधार पर contested divorce possible है। इसके लिए कोर्ट-न्याय-विवेक से गहन प्रमाण-पत्र चाहिए होते हैं।
कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?
पहचान प्रमाण, विवाह प्रमाण, बच्चों की birth certificates, संपत्ति-प्रमाण, आय-प्रमाण आदि दस्तावेज सामान्य रूप से मांगे जाते हैं।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Delhi Commission for Women (DCW) - घरेलू हिंसा और महिला अधिकारों पर मार्गदर्शन देता है।
- National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और मार्गदर्शन schemes दिखाता है।
- Delhi High Court - Legal Services - दिल्ली के फैमिली कोर्ट-लिंक और सम्बद्ध सेवाओं का केंद्र।
6. अगले कदम
- अपने मामले के प्रकार (Mutual consent, contested, inter-faith आदि) को स्पष्ट करें।
- तय करें कि किन कानूनों के अंतर्गत मामला चलेगा (HMA, SMA, IDA, या Shariat आदि).
- आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें: पहचान, विवाह प्रमाण, बच्चे के प्रमाण, आय-कर दस्तावेज आदि।
- Delhi में किसी अनुभवी फैमिली लॉर की खोज करें-local referrals, consultation-फीस आदि समझें।
- पहली बैठक में उद्देश्य, अपेक्षा और संभावित लागत पर स्पष्ट चर्चा कर लें।
- court-केस-फाइलिंग, mediation, और आवश्यक वैधानिक कदमों की स्पष्ट योजना बनाएं।
- डाक्यूमेंट्स और मौखिक तर्कों को organize रखें ताकि निर्वाचन-निर्णय सरल हो।
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