दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ प्रत्यर्पण वकील

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GNK Law Associates
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
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दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ वकीलजीएनके एडवोकेट एंड सॉलिसिटर, अपने विशिष्ट कानून क्षेत्रों के अभ्यासरत वकीलों और...
Chamber of Advocate Rohit Dandriyal
दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Hindi
रोहित दандрियाल दिल्ली, भारत के एक प्रमुख अधिवक्ता हैं। 2015 में स्थापित, रोहित दандрियाल का चेम्बर आपराधिक कानून...
Law Offices of Sameer & Associates
दिल्ली, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 12 लोग
Hindi
English
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Telugu
Marathi (Marāṭhī)
हैदराबाद और दिल्ली स्थित समीर हुसैन एंड एसोसिएट्स का कार्यालय फैमिली कोर्ट, सिविल कोर्ट, क्रिमिनल कोर्ट, फोरम,...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
Lead India Law Associates
दिल्ली, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
हमारे बारे मेंलीड इंडिया लॉ प्राइवेट लिमिटेड (लीड इंडिया) भारत में सबसे भरोसेमंद, प्रतिष्ठित व विकासशील लॉ फर्म...
Kochhar & Co.
दिल्ली, भारत

1994 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
ओवरव्यूकोचर एंड को. (“फर्म”) भारत के प्रमुख कॉर्पोरेट लॉ फर्मों में से एक है।नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, चेन्नई,...
Niyamam Law Offices

Niyamam Law Offices

15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2020 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
नियमम लॉ ऑफ़िसेज़, की स्थापना एडवोकेट अंकित कुमार और एडवोकेट अंकित भर्द्वाज द्वारा की गई, दिल्ली में आधारित एक...
Thukral Law Associates
दिल्ली, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
हम कौन हैंथुक्करल लॉ एसोसिएट्स एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है जो विशेष रूप से एनआरआई के लिए विभिन्न विधिक संबंधित...
Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
English
विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
जैसा कि देखा गया

1. Delhi, India में Extradition कानून के बारे में: [ Delhi, India में Extradition कानून का संक्षिप्त अवलोकन ]

Export-Import और अपराध-निवारण के क्षेत्र में extradition एक अंतरराष्ट्रीय संविदात्मक प्रक्रिया है। दिल्ली-आधारित निवासियों के लिए यह प्रक्रिया केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में है। विदेशी राज्य से प्रत्यर्पण के लिए कानूनी आधार Extradition Act, 1962 और द्विपक्षीय समझौतों पर निर्भर करते हैं।

“An Act to provide for extradition of fugitive criminals.” - इस पंछी-भाव का उद्देश्य extradition के द्वारा fugitives को न्याय के सामने लाना है।

“An Act to provide for extradition of fugitive criminals.”

Source: Extradition Act, 1962 - Preamble, IndiaCode

दिल्ली में extradition मामलों में केंद्रीय सरकार का निर्णय सर्वोच्च होता है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया उच्च न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ती है।

“Extradition requests are processed under the Extradition Act, 1962 and bilateral treaties.”

Source: Ministry of Home Affairs (MHA) - Extradition

दिल्ली निवासियों के लिए व्यावहारिक धारणा यह है कि extradition एक बहु-चरण प्रक्रिया है जिसमें विदेश से निर्जन जानकारी, अदालतों का परीक्षण और राजनयिक समन्वय शामिल होते हैं।

हाल के परिवर्तनों में भारत ने अधिक MLAT (Mutual Legal Assistance Treaties) सहयोग बढ़ाए हैं, ताकि अपराध-निवारण के लिए सूचना का आदान-प्रदान तेज हो सके।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [Extradition कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। Delhi, India से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

Extradition मामलों में कानूनी सलाहकार की भूमिका निर्णायक होती है। नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें Delhi-आवासीय व्यक्तियों को वकील की जरूरत पड़ सकती है।

  1. दिल्ली-आवासी आरोपी विदेश से प्रत्यर्पण के लिए formal request मिलने पर।
  2. Foreign country से extradition के दौरान असहमति प्रतिवादी के अधिकारों की रक्षा के लिए High Court में याचिका दायर करनी हो।
  3. IPC के अपराध extraditable हैं या नहीं, इस पर prima facie परीक्षण के दौरान दलील देना हो।
  4. Death penalty या अन्य कठोर सजा की संभावित स्थिति हो तो संवैधानिक-मानदंडों के अनुसार सुरक्षा-शर्तें मांगनी हों।
  5. Nirav Modi जैसे Delhi-आधारित कारोबारी के extradition केस में MEA, विदेशी दूतावास, और कोर्ट के बीच समन्वय चाहिए।
  6. ड्राफ्टिंग-एड्वे克सी के साथ ऐसे तर्क चाहिए जो “political offence” या अन्य non-extraditable grounds को चुनौती दें।

उल्लेखनीय real-world संदर्भ: Nirav Modi केस में भारत ने विदेश से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की और UK अदालतों में कार्रवाई चली। यह दिखाता है कि Delhi-आवासी व्यवसायी भी extradition के समय कानूनी सहायता पर निर्भर रहते हैं।

डील-डोकेमेंटेशन, गहन क्लिनिकल-डिपॉज़िशन और बहुपक्षीय समझौतों के कारण Delhi-स्थानीय वकील की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ Delhi, India में Extradition को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

  • Extradition Act, 1962 - extradition की मूल कानूनी ढांचा और प्रक्रिया निर्धारित करता है।
  • Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) - गिरफ्तारी, हिरासत, और न्यायिक समीक्षा से जुड़े प्रावधान प्रदान करता है।
  • Indian Penal Code (IPC) - extraditable offences की प्रकृति और दंड-सम्भावनाओं की आधार-जानकारी देता है; treaties के तहत extraditable offences की सूची जुड़ी होती है।

इनके अलावा Mutual Legal Assistance Treaties (MLATs) का महत्त्व है, जो foreign पूछताछ, अभिलेख-सबूत इकट्ठा करने आदि में सहयोग स्थापित करते हैं।

दिल्ली में extradition से जुड़े मामलों की सुनवाई मुख्यतः केंद्रीय सरकारी निर्णय और दिल्ली उच्च न्यायालय की वैधानिक समीक्षा के अधीन होती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े तैयार करें। प्रारूप:

प्रश्न?

विस्तृत उत्तर।

]

Extradition क्या होता है?

Extradition एक विदेशी देश द्वारा भारत-स्थित व्यक्ति को न्याय के समक्ष प्रस्तुत कराने की प्रक्रिया है, जो द्विपक्षीय संधियों और Extradition Act, 1962 के अंतर्गत होती है।

क्या मैं स्वयं extradition से बच सकता हूँ?

हाँ, आप उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत सुरक्षा-याचिका दायर कर सकते हैं यदि आप Liberability, political offence, या कोई procedural violation का दावा कर रहे हैं।

क्या extradition के दौरान गिरफ्तारी के समय bail मिल सकता है?

हाँ, अदालत में दलील देकर bail या interim protection माँगी जा सकती है, विशेषकर अगर मामला non-extraditable grounds या procedural deficiencies पर आधारित हो।

कौन-से अपराध extraditable हैं?

अपराध extraditable माने जाते हैं जब वे अन्य देशों के साथ treaty में listed हों या Indian law के under punishable हों और कम-से-कम एक वर्ष की सजा हो।

Political offence का extradition पर प्रभाव क्या है?

आमतौर पर political offence extradition से अलग माना जाता है; Delhi के मामलों में भी ऐसे दावे अदालतों द्वारा जाँचते हैं ताकि राजनीतिक दुरुपयोग रोका जा सके।

दिल्ली में extradition के लिए कौन-से कदम अपेक्षित हैं?

केंद्रीय सरकार को request assess करनी होती है; फिर High Court में प्रोसिडिंग्स; अंततः Central Government surrender कर सकता है।

क्या मुझे MEA से सहायता मिलेगी?

हाँ, MEA foreign government के साथ वार्ता और extradition के formalities चलाने में मुख्य भूमिका निभाता है; Delhi-based lawyers MEA के निर्देशों के अनुसार सलाह देंगे।

क्या मैं अदालत के बाहर समझौते के पक्ष में निर्णय ले सकता हूँ?

कभी-कभी द्विपक्षीय समझौते के आधार पर कोई रैठी-समझौता संभव है, परन्तु इसका निर्णय अदालतों की निगरानी में होता है।

Extradition के बाद मैं क्या देखभाल कर सकता हूँ?

सुदृढ़ कानूनी प्रतिनिधित्व, कोर्ट के सुरक्षा-उद्देश्य, और वकील के साथ नियमित संवाद आवश्यक है; बारीकियों में bail, custody, और appeal शामिल हैं।

क्या extradition के बिना कोई विकल्प है?

परिवार और वकील मिलकर diplomatic- या treaty-based निवारण, या asylum/इमिग्रेशन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं, पर यह केस-विशिष्ट होता है।

दिल्ली निवासियों के लिए extradition से जुड़े प्रमुख जोखिम क्या हैं?

समय-सीमा, सामग्री-प्रमाण के सत्यापन, और अधिकार-रक्षा के लिए उचित दलीलों की कमी से न्यायिक परिणाम प्रभावित हो सकते हैं; मजबूत legal strategy जरूरी है।

क्या मैं Delhi High Court में सीधे अपील कर सकता हूँ?

निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में High Court के समकक्ष अधिकार-याचिका, habeas corpus और judicial-review शामिल हो सकते हैं; यह केस-परिस्थिति पर निर्भर होगा।

5. अतिरिक्त संसाधन: [Extradition से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं]

  • Ministry of External Affairs (MEA) - extradition-सम्बन्धी द्विपक्षीय समझौते और विदेश-नीतिगत मुद्दे संभालता है।
  • Ministry of Home Affairs (MHA) - केंद्रीय सरकार की सुरक्षा और प्रत्यर्पण-आदेशों से जुड़े प्रावधानों का समन्वय करता है।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय / Supreme Court -extradition-याचिका, हिरासत-चालान, और अधिकार-रक्षा जैसी कानूनी समीक्षा करता है।

6. अगले कदम: [Extradition वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने केस-घटक और स्थान (Delhi) स्पष्ट करें - कौन-से देश से extradition का मामला है।
  2. Delhi-आधारित अनुभवी वकीलों की सूची बनाएं-extradition, इंटरनेशनल-क्रिमिनल-लॉयर्स में specialization देखें।
  3. बार-एसेसमेंट और रेफरल्स लें - Bar Council of Delhi, Delhi High Court Lawyers Directory आदि से सुझाव लें।
  4. पहला मुफ्त-परामर्श लें ताकि केस-भय, फीस मॉडल और रणनीति समझ आए।
  5. रिलायंस-डॉक्यूमेंट्स इकट्ठे करें - foreign request, warrants, prior orders, और कोई भी आपत्तियाँ।
  6. पहला-ड्राफ्ट केस-स्टडी और दलीलें बनाई जाएँ - non-extraditable grounds, procedural-violations, human-rights concerns पर।
  7. फीस-रूमिंग और शेडयूल तय करें - વિગતો, retainers, और आगे के कदम स्पष्ट हों।

उद्धृत आधिकारिक स्रोतों के लिंक

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